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सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) सर्विक्स (Cervix) में शुरू होने वाला कैंसर है। सर्विक्स योनि से गर्भाशय की ओर एक संकीर्ण खुलाव है। यह दुनियाभर की महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम प्रकार का कैंसर है लेकिन क्योंकि यह समय के साथ विकसित होता है, इसका निवारण किया जा सकता है। 

यह मध्य जीवन में अधिक होता है। आधी महिलाएं, जिनमें इस कैंसर का निदान किया गया है, 35 से 55 वर्ष की आयुवर्ग से हैं। भारतीय महिलाओं में (15 से 44 वर्ष की) कैंसर से होने वाली मृत्यु में सर्वाइकल कैंसर दूसरा कारण रहा है। दुर्भाग्य से, भारत जैसे विकासशील देशों में जागरूकता न होने कारण अधिकतर महिलाओं में यह कैंसर अग्रिम चरणों में ही सामने आता है। हालांकि इंस्पेक्शन स्क्रीनिंग्स (Visual Inspection Screening), जो प्राथमिक स्वास्थ्य कर्मचारी भी कर सकते हैं, के आगमन से सर्वाइकल कैंसर के मामले कम दर्ज किये जा रहे हैं।

  1. सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर के प्रकार - Types of Cervical Cancer in Hindi
  2. गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर के चरण - Stages of Cervical Cancer in Hindi
  3. सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर के लक्षण - Cervical Cancer Symptoms in Hindi
  4. गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर के कारण - Cervical Cancer Causes in Hindi
  5. सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर से बचाव - Prevention of Cervical Cancer in Hindi
  6. सर्वाइकल कैंसर का परीक्षण - Diagnosis of Cervical Cancer in Hindi
  7. गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का इलाज - Cervical Cancer Treatment in Hindi
  8. सर्वाइकल कैंसर की जटिलताएं - Cervical Cancer Complications in Hindi
  9. गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर में परहेज़ - What to avoid during Cervical Cancer in Hindi?
  10. सर्वाइकल कैंसर में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Cervical Cancer in Hindi?
  11. सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर की दवा - Medicines for Cervical Cancer in Hindi
  12. सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर के डॉक्टर

सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर के प्रकार - Types of Cervical Cancer in Hindi

कैंसर के प्रकार की जानकारी द्वारा डॉक्टर को यह तय करने में मदद करता है कि कैंसर के उपचार में किस तकनीक या पद्धति का प्रयोग किया जाना है। सर्वाइकल कैंसर के दो मुख्य प्रकार हैं :

  1. स्क्वॉमस कोशिकाओं का कैंसर (Squamous Cell Cancer)
  2. ग्रंथिकर्कटता या अडिनोकार्सिनोमा (Adenocarcinoma)

इनका नाम कैंसरग्रस्त होने वाली कोशिकाओं के ऊपर रखा गया है।

स्क्वॉमस कोशिकाओं का कैंसर (Squamous Cell Cancer)

सामान्य एक्टोसर्विक्स (Ectocervix - गर्भाशय का वह भाग जो योनि की ओर जाता है) स्क्वॉमस कोशिकाओं (Squamous Cells) नामक फ्लैट और पतली कोशिकाओं से कवर होता है। सर्वाइकल कैंसर में 70 से 80 प्रतिशत स्क्वॉमस कोशिका कैंसर होता है।

ग्रंथिकर्कटता या अडिनोकार्सिनोमा (Adenocarcinoma)

अडिनोकार्सिनोमा वह कैंसर है जो श्लेम (Mucus) उत्पादित करने वाली ग्रंथि कोशिकाओं में शुरू होता है। सर्विक्स में ग्रंथिल कोशिकाएं होती हैं जो सर्विक्स से गर्भ तक जाती हैं (एंडोसर्विक्स, Endocervix या सर्वाइकल कनाल, Cervical Canal)।
यह स्क्वॉमस कोशिकाओं के कैंसर से कम आम है लेकिन पिछले कुछ सालों में ज़्यादा आम हो गया है। सर्वाइकल कैंसरों में 10% से ज़्यादा इस प्रकार के अंतर्गत आते हैं। 

अडिनोस्क्वॉमस कार्सिनोमा (Adenosquamous Carcinoma)

अडिनोस्क्वॉमस कार्सिनोमा वो ट्यूमर हैं जिनमें दोनों स्क्वॉमस और ग्रंथिल कैंसर कोशिकाएं होती हैं। यह एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है। लगभग 4% सर्वाइकल कैंसर इस प्रकार के होते हैं। 

छोटी कोशिकाओं का कैंसर (Small Cell Cancer)

सर्वाइकल कैंसर का यह प्रकार दुर्लभ है। सर्वाइकल कैंसर के 3% से भी कम मामलों में यह कैंसर का निदान होता है। इस प्रकार का कैंसर जल्दी बढ़ता है। 

गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर के चरण - Stages of Cervical Cancer in Hindi

सारे टेस्ट्स हो जाने के बाद और उनके परिणाम आ जाने के बाद, यह बताया जा सकता है कि कैंसर किस स्टेज पर है। स्टेजिंग से यह पता चलता है कि कैंसर कितना फैला है। स्टेजिंग निम्न रूप में की जाती है:

स्टेज 0 (Stage 0) - सर्विक्स में कोई कैंसरग्रस्त कोशिकाएं नहीं हैं लेकिन कुछ जैविक परिवर्तन हैं जिनसे भविष्य में कैंसर होने की सम्भावना होती है। इसे कार्सिनोमा इन सीटू (Carcinoma In Situ) या सर्वाइकल इंट्राएपिथेलियल नियोप्लाजिया (Cervical Intraepithelial Neoplasia) कहते हैं। 

स्टेज 1 (Stage 1) - कैंसर सर्विक्स में ही होता है। 

स्टेज 2 (Stage 2) - कैंसर सर्विक्स के आसपास के ऊतकों तक फ़ैल जाता है लेकिन श्रोणि की लाइनिंग (परत) या योनि के निचले भाग तक नहीं पहुंचा होता। 

स्टेज 3 (Stage 3) - कैंसर योनि के निचले हिस्से और/या श्रोणिक लाइनिंग तक पहुँच चुका होता है।

स्टेज 4 (Stage 4) - कैंसर आँतों, मूत्राशय या अन्य अंगों, जैसे फेफड़ों तक फ़ैल जाता है। 

सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर के लक्षण - Cervical Cancer Symptoms in Hindi

कैंसर से पहले कोशिकाओं में होने वाले बदलावों और सर्विक्स के शुरूआती कैंसर आम तौर पर कोई लक्षण नहीं दिखाते। इस वजह से पैप स्मीयर (Pap Smear) और HPV टेस्ट की नियमित स्क्रीनिंग करवाते रहने से कोशिकाओं में बदलाव का पता लगाया जा सकेगा और कैंसर को बनने या बढ़ने से भी रोका जा सकता है।

बीमारी के अग्रिम चरण में होने वाले संभावित लक्षण हैं - असामान्य या अनियमित योनिक रक्तस्त्राव, संभोग के वक़्त दर्द, या योनिक स्त्राव। निम्न में से कोई भी परेशानी होने पर चिकित्सक से परामर्श करें:

  1. असामन्य रक्तस्त्राव, जैसे नियमित मासिक धर्म चक्र के बीच, यौन संभोग के दौरान, पेल्विक एग्ज़ाम (Pelvic Exam) के बाद, या मेनोपॉज़ के बाद रक्तस्त्राव। 
  2. श्रोणिक दर्द जो मासिक धर्म चक्र से सम्बंधित नहीं है। 
  3. भारी और असामान्य स्त्राव जो तरल, गाढ़ा और बदबूदार हो सकता है। 
  4. मूत्रत्याग करने में दर्द।

यह लक्षण किसी और स्वास्थ्य समस्या के कारण भी हो सकती हैं। कोई भी लक्षण दिखने पर डॉक्टर से अवश्य सलाह करें।

गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर के कारण - Cervical Cancer Causes in Hindi

कैंसर असामान्य कोशिकाओं के अनियंत्रित विभाजन और विकास के कारन होता है। असामान्य कोशिकाओं की दो परेशानियां होती हैं:

  1. ये मरते नहीं
  2. ये विभाजित होते रहते हैं

ये असामन्य कोशिकाएं इस वजह से एकत्रित होकर ट्यूमर बन जाती हैं। सर्वाइकल कैंसर सर्विक्स में असामन्य कोशिकाओं के बन जाने से होता है। 
हालांकि, निम्न लिखित कुछ कारक हैं जो सर्वाइकल कैंसर होने का जोखिम बढ़ाते हैं:

  1. ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (Human Papilloma Virus, HPV) - यह एक यौन संचारित वायरस है। इसके कई प्रकार होते हैं जिनमें से कम से कम 13 सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकते हैं।
  2. असुरक्षित यौन सम्बन्ध: सर्वाइकल कैंसर का कारण बनने वाले HPV के प्रकार लगभग हर बार संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन सम्बन्ध बनाने से फैलते हैं। जो महिलाएं एक से अधिक साथियों के साथ यौन संबंध बना चुकी हैं या जो कम उम्र में यौन सम्बन्ध बना चुकी होती हैं, उनमें इस कैंसर के होने का जोखिम ज़्यादा होता है। 
  3. धूम्रपान: धूम्रपान कई कैंसर के जोखिम को बढ़ता है। (जानिए - धूम्रपान छोड़ने के घरेलु उपचार)
  4. कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली: कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकती है।
  5. दीर्घकालिक मानसिक तनाव: जो महिलाएं लम्बे समय तक तनाव के उच्च दर का अनुभव करतीं हैं उनमें HPV से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। 
  6. बहुत छोटी उम्र में गर्भधारण करना: जो महिलाएं 17 वर्ष की उम्र से पहले गर्भधारण कर लेती हैं उनमें सर्वाइकल कैंसर के बनने का जोखिम ज़्यादा होता है (उन महिलाओं की तुलना में जो 25 वर्ष के बाद पहली बार गर्भधारण करती हैं)।
  7. बार बार गर्भधारण करने से: जो महिलाएं तीन से ज़्यादा बच्चों को जन्म दे चुकी हैं उनमें इस बीमारी के होने का जोखिम ज़्यादा होता है। 
  8. गर्भनिरोधक गोलियां: ज़्यादा समय तक गर्भनिरोधक दवाओं का प्रयोग भी कैंसर के जोखिम को बढ़ता है। 
  9. अन्य यौन संचारित बीमारियां (Other Sexually Transmitted Diseases): जो महिलाएं क्लैमाइडिया (Chlamydia), सूजाक (Gonorrhea) या उपदंश (Syphilis) से संक्रमित हो चुकी हैं उनमें सर्वाइकल कैंसर का जोखिम अधिक होता है। 
  10. सामाजिक-आर्थिक स्थिति (Socio-Economic Status): कई देशों में हुए अध्ययनों में पाया गया है कि जो महिलाएं वंचित इलाकों में रहती हैं उनमें सर्वाइकल कैंसर होने का जोखिम ज़्यादा होता है।  

सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर से बचाव - Prevention of Cervical Cancer in Hindi

सर्विकल कैंसर होने के जोखिम को निम्न बातों का ध्यान रखकर कम किया जा सकता है:

सुरक्षित यौन सम्बन्ध बनायें

सर्वाइकल कैंसर के अधिकतर मामले ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (Human Papilloma Virus, HPV) से जुड़े संक्रमण से सम्बंधित होते हैं। HPV असुरक्षित यौन संबंध से फैलता है इसलिए कॉन्डोम का प्रयोग करने से इस संक्रमण के होने का जोखिम कम किया जा सकता है। हालांकि यह वायरस सिर्फ योनिक संभोग से ही नहीं फैलता - यह अन्य प्रकार के यौन संपर्क जैसे गुप्तांग के त्वचा से संपर्क या सेक्स टॉयज़ के प्रयोग से भी हो सकता है। (और पढ़ें - sex karne ke tarike)
आप जितनी कम उम्र में नियमित रूप से यौन सम्बन्ध बनाने शुरू कर देते हैं, आपमें इस कैंसर के होने का जोखिम उतना ही ज़्यादा होता है। साथ ही, महिलाएं जिन्होंने एक से ज़्यादा पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाये हैं, उनमें इस बीमारी के होने का जोखिम ज़्यादा होता है।

सर्वाइकल स्क्रीनिंग (Cervical Screening)

नियमित सर्वाइकल स्क्रीनिंग करवाने से कैंसर के लक्षणों का शुरूआती स्टेज में ही पता लगा लिया जाता है और इससे स्थिति को समय रहते सँभालने में आसानी होती है। स्क्रीनिंग में कैंसर का पता नहीं लगाया जाता बल्कि सर्विक्स की कोशिकाओं में बदलावों का पता लगाया जा सकता है। 

ह्यूमन पेपिलोमा वायरस वैक्सीन (Human Papilloma Virus Vaccine)

सर्वाइकल कैंसर और कुछ प्रकार के HPV के बीच संपर्क बहुत ही स्पष्ट है। महिलाएं HPV वैक्सीन करवाकर सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को बहुत हद तक कम कर सकती हैं।

धूम्रपान न करें

धूम्रपान का सेवन सर्वाइकल कैंसर के जोखिम जो बढ़ा देता है इसलिए जितना हो सके धूम्रपान करने से बचें।

(जानिए - सिगरेट पीना नहीं छोड़ेंगे तो होंगे ये नुक्सान)

सर्वाइकल कैंसर का परीक्षण - Diagnosis of Cervical Cancer in Hindi

कैंसर का निदान जितने शुरूआती दौर में हो, सफल उपचार की संभावनाएं उतनी ही बढ़ जाती हैं। नियमित सर्वाइकल स्क्रीनिंग से हज़ारों जानें बचायी जा सकती हैं। 

HPV DNA टेस्टिंग (HPV DNA Testing)

इस टेस्ट में ये जांच की जाती है कि मरीज़ किसी प्रकार के HPV से संक्रमित तो नहीं है जिससे सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा रहता है। इसमें सर्विक्स की कोशिकाओं को एकत्रित करके प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाता है। 

अगर कोई महिला सर्वाइकल कैंसर क्ले लक्षणों का अनुभव करती है या अगर पैप टेस्ट (Pap Test) में असामान्य कोशिकाएं दिखती हैं, तो निम्नलिखित अतिरिक्त टेस्ट करवाने पड़ सकते हैं:

बायोप्सी (Biopsy) - ऊतक का एक छोटा भाग एनेस्थीसिया के अंतर्गत लिया जाता है।

कॉल्पोस्कोपी (Colposcopy) - योनि को खुला रखने के लिए स्पेक्युलुम (Speculum) का प्रयोग किया जाता है जिससे कॉल्पोस्कोप (Colposcope) द्वारा सर्विक्स को देखा जा सके।

कोन बायोप्सी (Cone Biopsy): जांच के लिए सर्विक्स के असामान्य ऊतक का एक छोटा शंकु के आकार का भाग निकाला जाता है। 

LLETZ: डायाथर्मी (Diathermy) का प्रयोग करके असामान्य ऊतक को निकाला जाता है जिसकी प्रयोगशाला में जांच की जाती है। 

रक्त परीक्षण: रक्त कोशिकाओं की गणना करने और लिवर या गुर्दे की जांच करने के लिए रक्त परीक्षण किये जाते हैं। 
एनेस्थीसिया के अंतर्गत जांच: इससे डॉक्टर को योनि और सर्विक्स की और अच्छे से जांच करने में सहायता होगी। 

सीटी स्कैन (CT Scan): इससे सर्विक्स और पेट का एक विस्तृत चित्र प्रदर्शित किया जाता है। 

एमआरआई (MRI): इससे नरम ऊतकों को अन्य इमेजिंग तकनीकों की तुलना में बेहतर चित्र मिलते हैं। 

श्रोणिक अल्ट्रासाउंड (Pelvic Ultrasound): इसमें धवनि तरंगों का प्रयोग करके मॉनिटर पर लक्षित भाग को देखा जाता है। 

गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का इलाज - Cervical Cancer Treatment in Hindi

इस कैंसर का उपचार किसी एक पद्धति का प्रयोग करके भी किया जा सकता है और कई पद्धतियों के संयोजन से भी, जैसे:

सर्जरी: कैंसर हटाने के लिए सर्जरी की जा सकती है। सर्जरी का प्रकार इस पर निर्भर करता है कि सर्वाइकल कैंसर कहाँ पर है और कितना फैला है, और आप सर्जरी के बाद गर्भधारण करना चाहतीं हैं या नहीं। 

विकिरण चिकित्सा (Radiation Therapy): इस प्रक्रिया में कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने हेतु योनिक गुहा में हाई-डोज़ एक्स-रे या इम्प्लांट्स (High-Dose X-Rays or Implants) का प्रयोग किया जाता है। यह कैंसर के कुछ स्टेजेस में प्रयोग किया जाता है। इस तकनीक का प्रयोग अक्सर अन्य उपचार तकनीकों के साथ संयोजन में किया जाता है।

कीमोरडिएशन (Chemoradiation): यह कीमोथेरेपी और विकिरण का संयोजन है। 

 कीमोथेरेपी (Chemotherapy): इसमें दवाओं का प्रयोग करके कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। इसका प्रयोग अग्रिम चरण के कैंसर के उपचार में किया जाता है।

सर्वाइकल कैंसर की जटिलताएं - Cervical Cancer Complications in Hindi

समयपूर्व मेनोपॉज़ (Early Menopause)
अगर उपचार के दौरान सर्जरी द्वारा अंडाशय हटा दिए जाते हैं या रेडियोथेरेपी से उपचार के दौरान अंडाशय क्षतिग्रस्त हो गए हैं, तो इससे समय से पहले मीनोपॉज हो सकता है। (जानिए - मेनोपॉज़ के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी

योनि का संकीर्ण होना (Narrowing of the Vagina)
रेडियोथेरेपी की वजह से अक्सर योनि संकीर्ण हो जाती है जिसके कारण सम्भोग में दर्द और परेशानी हो सकती है। इसे योनि पर हॉर्मोनल क्रीम लगाकर ठीक किया जा सकता जिससे योनि में नमी बढ़ती है और संभोग आसानी से हो जाता है। इसको ठीक करने के लिए योनिक डाइलेटर (Vaginal Dilator) का भी प्रयोग किया जा सकता है।

लिम्फोयेडेमा (Lymphoedema)
अगर श्रोणि के लिम्फ नोड्स हटाए गए हैं तो इससे लिम्फैटिक प्रणाली की सामान्य कार्यवाही बाधित होती है। इससे ऊतकों में द्रव का निर्माण हो सकता है, जिस प्रक्रिया को लिम्फोयेडेमा कहते हैं। इससे शरीर के कुछ अंगों में सूजन हो सकती है, आम तौर पर पैरों में।

भावनात्मक प्रभाव (Emotional Impact)
किसी भी कैंसर के साथ जीवन बहुत कष्टदायी हो सकता है। इससे मरीज़ पर भावनात्मक प्रभाव भी पड़ते हैं। यह अवसाद का रूप भी ले सकता है। ऐसे समय में ज़रूरी है कि कोई भी परेशानी अपने करीबियों और दोस्तों से बाँट कर मन हल्का करें।

दर्द (Pain)

अगर कैंसर नसों, हड्डियों या मांसपेशियों तक पहुँच जाए तो इससे गंभीर दर्द हो सकता है। दर्द निवारक दवाएं इसमें सहायक सिद्ध हो सकती हैं।

गुर्दे की विफलता (Kidney Failure)
सर्वाइकल कैंसर के कुछ मामलों में, कैंसरग्रस्त ट्यूमर मूत्रनली से सट सकता है जिससे गुर्दे से मूत्र का प्रवाह बाधित हो जाता है। इससे मूत्र गुर्दे के अंदर एकत्रित होता जाता है जिससे गुर्दे सूज सकते हैं। इससे अगर गुर्दे की कार्यवाही प्रभावित होने लगे तो यह गुर्दे की विफलता का कारण बन सकता है।

रक्त के थक्के (Blood Clots)
कैंसर के अन्य प्रकारों की तरह इसमें भी रक्त के थक्कों का गठन होने की संभावना रहती है। सर्जरी या कीमोथेरपी के बाद भी आराम करते रहने से थक्कों का गठन हो सकता है।

रक्तस्त्राव (Bleeding)
अगर कैंसर योनि, आंत या मूत्राशय तक फ़ैल जाये तो यह बहुत क्षति पहुंचा सकता है जिससे रक्तस्त्राव हो सकता है। रक्तस्त्राव योनि या मलाशय से हो सकते है या मूत्र्याग में रक्त पारित हो सकता है। 

गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर में परहेज़ - What to avoid during Cervical Cancer in Hindi?

क्या न खाएं

पशुओं से मिलने वाले खाद्य पदार्थ जिनसे सूजन हो सकती है:

  1. रेड मीट (Red Meat)
  2. डेरी उत्पाद (Dairy Products)

रिफाइंड शर्करा और हाइली-प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates)

  1. प्रोसेस्ड अनाज (Processed Grains)
  2. पैकेज्ड उत्पाद (Packaged Products)
  3. प्रक्षालित आटा (Bleached Flour)

ध्यान देने योग्य अन्य बातें

  1. धूम्रपान का सेवन न करें। (जानिए - धूम्रपान छोड़ने के सरल तरीके)
  2. यौन सम्बन्ध बनाते समय कॉन्डोम (Condom) का प्रयोग करें। 
  3. निर्धारित दवाओं का सेवन नियमित रूप से करें। 
  4. डॉक्टर द्वारा बताई गयी हर सलाह का पालन करें। 
  5. डॉक्टर द्वारा निर्धारित समय पर चेक-अप अवश्य करवाएं।

सर्वाइकल कैंसर में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Cervical Cancer in Hindi?

पत्तेदार सब्ज़ियां जैसे:

  1. ब्रोकली 
  2. फूल गोभी
  3. पत्ता गोभी

एंटीऑक्सीडेंट युक्त फल और चाय जैसे:

  1. जामुन
  2. रास्पबेरी
  3. पपीता
  4. ग्रीन टी

ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थ:

  1. मैकेरल (छोटी समुद्री मछली)
  2. सैल्मन
  3. कॉड मछली
  4. अखरोट
  5. चिया बीज (Chia Seeds)
Dr. Susovan Banerjee

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सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर की दवा - Medicines for Cervical Cancer in Hindi

सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
HycamtinHycamtin 1 Mg Tablet6000
TopocanTopocan 2.5 Mg Injection4000
TopotecTopotec 2.5 Mg Injection3955
CantopCantop 2.5 Mg Injection3544
Ifomid MIfomid M 1G Injection336
Ipamide With MesnaIpamide With Mesna Injection341
Ifex MIfex M Injection310
Ifoxan + MesnaIfoxan + Mesna 100 Mg/1000 Mg Injection423
CelplatCelplat 10 Mg Injection53
CisplatCisplat 10 Mg Injection53
CisteenCisteen 10 Mg Injection50
CizcanCizcan 10 Mg Injection61
CytoplatinCytoplatin 10 Mg Injection82
KemoplatKemoplat 10 Mg Injection60
PlatikemPlatikem 10 Mg Injection149
Platikem NovoPlatikem Novo 100 Mg Injection708
Platin (Cadila)Platin 10 Mg Injection62
PlatinexPlatinex 10 Mg Injection51
CisglanCisglan 50 Mg Infusion361
CisplatinCisplatin 50 Mg Injection304

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References

  1. Saurabh Bobdey et al. Burden of cervical cancer and role of screening in India. Indian J Med Paediatr Oncol. 2016 Oct-Dec; 37(4): 278–285. PMID: 28144096
  2. World Health Organization [Internet]. Geneva (SUI): World Health Organization; Cervical cancer
  3. National Cervical Cancer Coalition. Cervical Cancer Overview. America; [Internet]
  4. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Cervical Cancer
  5. The American Association for Cancer Research. Cervical Cancer. Philadelphia; [Internet]
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