myUpchar प्लस+ सदस्य बनें और करें पूरे परिवार के स्वास्थ्य खर्च पर भारी बचत,केवल Rs 99 में -

फिट रहने, रिकवर होने या अपना स्वास्थ्य नियंत्रित रखते समय क्षतिग्रस्त होना एक बहुत बड़ी बाधा बन सकती है। दर्द और बेचैनी के कारण अपने रोजाना के कार्यों में रुकावट आने की वजह से परेशानी होती है। खासतौर से उस समय जब आपको अच्छे परिणाम नजर आ रहे हों।

किसी भी मांसपेशी या शरीर के अंग के अत्यधिक इस्तेमाल से क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी रहती है। इसमें शिन स्प्लिंट्स भी शामिल है। हालांकि, इस प्रकार की चोट के कारण बेहद कम होते हैं। समय के साथ ठीक होने वाली यह चोट अगर सही तरीके से न परखी जाए तो कई बार गंभीर स्थिति का भी रूप ले लेती है।

स्ट्रेस फैक्चर (अत्यधिक इस्तेमाल के कारण हड्डी का टूटना), टेंडिनाइटिस और कम्पार्ट्मेन्ट सिंड्रोम (मांसपेशियों में बढ़ते प्रेशर के कारण पैरों में रक्त प्रवाह कम होना) जैसी स्थितियां उन लोगों में संभाव्य जोखिम हैं, जिन लोगों को शिन स्प्लिंट्स जैसी समस्या पहले भी हो चुकी है।

  1. शिन स्प्लिंट्स के प्रकार - Types of Shin Splints in Hindi
  2. शिन स्प्लिंट्स के लक्षण - Shin Splints Symptoms in Hindi
  3. शिन स्प्लिंट्स के कारण - Shin Splints Causes in Hindi
  4. शिन स्प्लिंट्स से बचाव - Prevention of Shin Splints in Hindi
  5. शिन स्प्लिंट्स का परीक्षण - Diagnosis of Shin Splints in Hindi
  6. शिन स्प्लिंट्स का इलाज - Shin Splints Treatment in Hindi
  7. शिन स्प्लिंट्स के डॉक्टर

शिन स्प्लिंट्स के प्रकार - Types of Shin Splints in Hindi

शिन स्प्लिंट्स के प्रकार

शिन बोन (पिंडली की हड्डी) के साथ कई ऊतकों और मांसपेशियों के जुड़ने पर पैर के निचले हिस्से का ढांचा तैयार होता है और शिन स्प्लिंट्स शब्द को शिन के अलग-अलग हिस्सों के लिए एक समूह के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

  • एंटीरियर टीबीयल स्ट्रेस सिंड्रोम -
    शिन का नीचे का हिस्सा जो कि टांग के बाहर की तरफ होता है वह पैर को उठानेऔर रखने का कार्य करता है या जब आप पैर को टखने से घूमाते हैं।
     
  • पोस्टीरियर टिबियल स्ट्रेस सिंड्रोम -
    यह आपकी टांग के सामने का निचला भाग होता है, जिसे आप पंजे को नीचे रखे हुए पैर को ऊपर उठाते समय महसूस कर सकते हैं। व्यक्ति के वजन का प्रभाव टांग के इस भाग पर सबसे अधिक पड़ता है, जिसके कारण यह चोट के प्रति अतिसंवेदनशील होता है।

टांग के निचले हिस्से या शिन बोन के स्ट्रेस फ्रैक्चर को भी शिन स्प्लिंट्स नाम से पहचाना जाता है। इस भाग के ठीक होने में लंबा समय लगता है।

शिन स्प्लिंट्स के लक्षण - Shin Splints Symptoms in Hindi

शिन स्प्लिंट्स के लक्षण

स्वस्थ शरीर पाने के लक्ष्य के बीच यह सामान्य चोट एक बहुत बड़ी बाधा बन सकती है। ज्यादातर मामलों में यह बिना किसी चेतावनी के आती है। हालांकि, इसके कुछ लक्षण हैं, जिन्हें पहचानकर आप इस अंग को आराम पहुंचा सकते हैं या किसी डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं।

  • दौड़ के बाद शिन में तेज या हल्का दर्द होना
  • क्षतिग्रस्त शिन की पहचान अक्सर छूने या सूजन से की जा सकती है
  • परिणामस्वरूप पैर में दर्द
  • आराम के समय भी हल्का दर्द महसूस होना
  • शिन में अकड़न आना

शिन स्प्लिंट्स के कारण - Shin Splints Causes in Hindi

शिन स्प्लिंट्स के कारण

शिन, पिंडली के आगे की हड्डी होती है। इसमें सूजन होने की स्थिति को शिन स्प्लिंट्स कहा जाता है। इसे मेडियल टिबियल स्ट्रेस सिंड्रोम (एमटीएसएस) भी कहा जाता है। शिन स्प्लिंट्स एक सामान्य इंजरी है जो दौड़ने, चलने या रोजाना की गतिविधियों में टक्कर लगने से जुड़ी है। शिन (पिंडली) की मांसपेशियों, टेंडन और ऊतकों में सूजन के कारण व्यक्ति को दर्द महसूस होता है। निम्न कुछ सामान्य कारक हैं जिनके कारण यह स्थिति उत्पन्न होने की आशंका बनी रहती हैं :

  • नया अभ्यास या दौड़ शुरू करना
  • अधिक तीव्रता वाले व्यायाम या दौड़ का अभ्यास अपनाना
  • चढ़ाई पर चलना या दौड़ना
  • व्यायाम से पहले वॉर्मअप या स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज न करना
  • पैरों का सपाट होना
  • ठोस सतहों पर चलना या भागना जैसे पक्की सड़क
  • दौड़ने की स्थिति में खराबी
  • कमजोर टांगें, कूल्हे और कोर मसल्स

शिन स्प्लिंट्स के जोखिम कारक

शिन स्प्लिंट्स के पीछे की वजह काफी स्पष्ट है। लेकिन यह ज्यादातर अधिक कार्य करने वाले व्यक्तियों और खिलाड़ियों को प्रभावित करती है। शिन स्प्लिंट्स का खतरा अधिकतर दौड़ के कारण लगी चोट, मैराथॉन, ट्रैल रनर, पैदल यात्री, ट्रेकर्स और ऐसे स्पोर्ट्स, जिनमें दौड़ या अचानक दिशा बदलने वाले खिलाड़ियों में होता है।

ज्यादातर लोग शिन स्प्लिंट्स में घर पर इलाज या आराम करना पसंद करते हैं, जिसके कारण चोट की जटिलताओं को अक्सर नजरंदाज कर दिया जाता है। यह आगे चल कर किसी गंभीर स्थिति का रूप ले लेती है। शिन स्प्लिंट्स प्रकार की चोटें अक्सर टांगों की कई अन्य चोटों के साथ समूह बना लेती हैं जिसके कारण टांगों के हर एक भाग के लिए कोई समर्पित विशेषज्ञ नहीं हैं।

खिलाड़ी या वह व्यक्ति जो कोई वर्कआउट फॉलो करते हों या अक्सर दौड़ लगाते हों वह अपने व्यायाम की तीव्रता बढ़ाते रहते हैं, जिसके परिणामस्वरूप शिन पर प्रेशर बढ़ता चला जाता है।

शिन स्प्लिंट्स से बचाव - Prevention of Shin Splints in Hindi

शिन स्प्लिंट्स की रोकथाम

शिन स्प्लिंट्स जैसी चोटों से बचने के लिए निम्न बातों का खास ध्यान रखें :

  • दौड़, खेल या व्यायाम शुरू करने से पहले वॉर्मअप और स्ट्रेचिंग अवश्य करें।
  • नए जूते पहनें या अपनी टांगों को बेहतर पॉश्चर प्रदान करने के लिए गद्देदार तलवों का इस्तेमाल करें।
  • टांगों, कूल्हों और कोर की मांसपेशियों को मजबूत बनाएं
  • उच्च तीव्रता वाले स्पोर्ट्स जैसे दौड़ या मध्यांतर प्रशिक्षण की जगह कम तीव्रता वाले स्पोर्ट्स चुने जैसे साइकिलिंग या स्विमिंग
  • नरम सतह पर दौड़ें या अभ्यास करें।
  • अगर आपका वजन ज्यादा है तो मोटापे से छुटकारा पाएं।
  • शिन मसल और टेंडन को अधिक टाइट होने से बचाने के लिए कम्प्रेशन स्टाकिंग या किनेसोलॉजी टेप का इस्तेमाल करें।

किसी भी गतिविधि के कारण शिन स्प्लिंट्स होने पर उसे तुरंत रोक देना अनिवार्य होता है। समस्या से दूर भागना उसे और बढ़ा सकता है। इस बात को सुनिश्चित कर लें कि समस्या केवल शिन स्प्लिंट्स तक ही सीमित है और अन्य अंगों या अधिक गंभीर नहीं हुई है, ताकि ठीक होने में ज्यादा समय न लगे।

शिन स्प्लिंट्स का परीक्षण - Diagnosis of Shin Splints in Hindi

शिन स्प्लिंट्स का परीक्षण

शिन स्प्लिंट्स के शुरुआती लक्षण भले ही समय के साथ चले जाएं, लेकिन शिन में लगातार हो रहे दर्द को नजरअंदाज न करें, क्योंकि यह आपके फिट रहने के लक्ष्य में रुकावट बनता चला जा सकता है। आराम करने और सूजन से प्रभावित हिस्से की बर्फ से सिकाई या दवा लेने से भी कोई भी लक्षण यदि ठीक न हो पाए तो किसी डॉक्टर से संपर्क कर लें।

  • डॉक्टर चोट को पूरी तरह से जांचने और परखने के लिए एक शारीरिक परीक्षण करेंगे और किसी भी अन्य कारण के बारे में पता लगाएंगे, जिनके कारण शिन में दर्द हो रहा हो जैसे टेंडिनाइटिस या स्ट्रेस फैक्चर।
  • इसके अलावा इमेजिंग स्कैन की भी आवश्यकता पड़ सकती है, जिसके लिए एक्स-रे किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल स्ट्रेस फ्रैक्चर वाले मामलों में हड्डी के टूटने का पता लगाने के लिए किया जाता है।

शिन स्प्लिंट्स का इलाज - Shin Splints Treatment in Hindi

शिन स्प्लिंट्स का इलाज

शिन स्प्लिंट्स के दौरान शिन में सूजन होना आम बात है, इसलिए निम्न कुछ ऐसे उपाय और इलाज हैं जिनकी मदद से आप दर्द और सूजन को नियंत्रित, कम या ठीक कर सकते हैं -

  • नियमित गतिविधि (अभ्यास) को तुरंत रोक दें। खुद को चोट से बचाने का सबसे बेहतर तरीका होता है खुद को उसके प्रति बढ़ते हुए रोकना। इसीलिए जब कभी दर्द महसूस हो तो कुछ समय के लिए रुक जाएं और अपने शिन को आराम दें।
  • अक्सर शिन में दर्द का कारण पैरों पर पड़ रहा वजन होता है, इसलिए पैर को ऊंचाई वाली जगह पर रखें।
  • क्षतिग्रस्त शिन को आराम दें। दौड़ या व्यायाम से कुछ समय की छूटी ले लें और अपने पैरों को अच्छी तरह से आराम प्रदान करें।
  • प्रभावित हिस्से की बर्फ से सिकाई करें। आपको ऐसा महसूस होगा जैसे पिंडली जल रही हो। ठंडी सिकाई या कम्प्रेशन से शिन के दर्द से आराम पाया जा सकता है।
  • ओटीसी व दर्दनिवारक दवाएं भी शिन स्प्लिंट्स के कारण हो रहे दर्द से आराम दिलाने में मदद कर सकती हैं।
  • शिन की आराम से मालिश करने से दर्द को नियंत्रित किया जा सकता है और इससे त्वचा के आसपास के टाइट ऊतक भी मुलायम हो जाते हैं। आप चाहें तो फोम रोलर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • दर्द कम न होने पर आपके डॉक्टर समस्या को पहचानने के लिए फिजिकल थेरपी की सलाह दें सकते हैं।
Dr. Vivek Dahiya

Dr. Vivek Dahiya

ओर्थोपेडिक्स

Dr. Vipin Chand Tyagi

Dr. Vipin Chand Tyagi

ओर्थोपेडिक्स

Dr. Vineesh Mathur

Dr. Vineesh Mathur

ओर्थोपेडिक्स

क्या आप या आपके परिवार में किसी को यह बीमारी है? सर्वेक्षण करें और दूसरों की सहायता करें

और पढ़ें ...
ऐप पर पढ़ें