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हम सभी जानते हैं कि व्यायाम हमारी सेहत के लिए कितना फायदेमंद होता है। रोजाना व्यायाम करने से कई लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों से भी छुटकारा पाया जा सकता है। इनमें हृदय रोग, टाइप 2 डायबिटीज, स्ट्रोक और यहां तक कि कुछ प्रकार के कैंसर भी शामिल हैं। क्रॉनिक डिजीज एंड ट्रांसलेशनल मेडिसिन जर्नल के अनुसार ज्यादा व्यायाम खतरनाक भी हो सकता है। इस जर्नल के ऑथर वैन-जिंग चेन का कहना है कि व्यायाम की लत का पता उसके लक्षणों से लगाया जा सकता है। रोजाना कसरत करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को फायदे पहुंचता है इस बात की पुष्टि कई शोध कर चुके हैं। हालांकि, बेकाबू या नियमित रूप से अधिक कसरत करने से इसके उलटे प्रभाव भी पड़ सकते हैं। जैसे :

इसके कारण मांसपेशियों और हड्डियों में दर्द या चोट भी लग सकती है, जो इम्यून सिस्टम में खराबी पैदा कर सकता है। इस स्थिति को “एक्सरसाइज एडिक्शन” (ईए) कहा जाता है। ईए की पहचान व्यायाम के प्रति बेकाबू इच्छा से की जा सकती है, इसके अलावा इसके लक्षणों में निम्न प्रमुख रूप से शामिल हैं :

मांसपेशियों में निरंतर दर्द होना
जो लोग अधिक शारीरिक व्यायाम करते हैं उनकी मांसपेशियों में निरंतर दर्द संभावित होता है। मांसपेशियों का नियमित रूप से अधिक इस्तेमाल करने से जोड़ों, हड्डियों और अन्य अंगों में दर्द हो सकता है। ईए से ग्रस्त व्यक्ति दर्द होने के बावजूद भी अपना व्यायाम नहीं रोकते हैं। अधिक कसरत स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की बजाय जानलेवा हो सकती है। इसके कारण किडनी फेल होने का खतरा बना रहता है। 

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इस स्थिति से बचने के लिए अपने शरीर को संपूर्ण आराम दें और पिछली कसरत के दर्द के ठीक होने के बाद ही अगला व्यायाम शुरू करें।

निद्रा रोग
अति उत्साहित व आमतौर से अधिक कसरत करना शरीर के स्ट्रेस-रिस्पॉन्स सिस्टम को प्रभावित कर सकता है। शरीर कसरत करते समय व उसके बाद कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन हॉर्मोन्स पैदा करता है, जिसके कारण निद्रा रोग जैसे इंसोम्निया की स्थिति उत्पन हो सकती है। मांसपेशियों के अधिक इस्तेमाल से शरीर बेचैन हो सकता है और साथ ही निरंतर हाइपरएक्साइटेब्लिटी जैसी स्थिति उत्पन हो सकती है, जिसकी वजह से भी इंसोम्निया (नींद न आना) हो सकता है।

सांस फूलना
हृदय का लगातार नियमित रूप से अधिक शारीरिक गतिविधियों को झेलना उसमें खराबी पैदा कर देता है। इस खराबी में हृदय की मोटी परत और घाव शामिल हैं। अधिक व्यायाम से इस स्थिति में सांस फूलने और अनियंत्रित दिल की धड़कन जैसी समस्याओं से ग्रस्त होने का खतरा बना रहता है।

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भोजन विकार (ईटिंग डिसऑर्डर)
1992 में अमेरिकन कॉलेज ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन द्वारा की कई स्टडी के मुताबिक 62 फीसदी एथलीट ईटिंग डिसऑर्डर से ग्रस्त होते हैं। यूके के लौघ्बोरौघ विश्वविद्यालय (Loughborough University) के डॉक्टरों की मानें तो अधिक व्यायाम घ्रेलिन (Ghrelin) नाम के हॉर्मोन की मात्रा को कम कर देता है जो भूख को उत्तेजित करता है व पेप्टाइड वाईवाई हार्मोन की मात्रा बढ़ा देता है जो भूख को कम करने के लिए जिम्मेदार होता है।

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इसके लक्षणों को कम करने के लिए व्यक्ति को अधिक जिम जाना छोड़ना होगा। इसके अलावा व्यायाम के समय को नियंत्रित रखने की आवश्यकता होती है। साथ ही शरीर को आराम पहुंचाने के लिए हफ्ते में एक या दो दिन जिम की छुट्टी कर लेनी चाहिए। अगर इन सब के बाद भी एक्सरसाइज एडिक्शन कम नहीं होता है तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होगा।

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