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चने की दाल स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होती है। चने की दाल में फाइबर, प्रोटीन और विभिन्न विटामिन और खनिज अधिक मात्रा में पाए जाते हैं जबकि इसमें फैट की मात्रा बहुत कम होती है। इन्हें आम तौर पर सूप बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। आप एक सुपरमार्केट या स्वास्थ्य खाद्य स्टोर से इनको प्राप्त कर सकते हैं। चने की दाल को काले चने से तैयार किया जाता है। तो आइये जानते हैं इसके लाभों के बारे में -

  1. चना दाल के फायदे कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए - Split Chickpeas for Lowers Cholesterol in Hindi
  2. चने की दाल के गुण रखें कैंसर से दूर - Split Peas for Cancer in Hindi
  3. चना दाल खाने के फायदे मधुमेह के लिए - Yellow Split Peas for Diabetics in Hindi
  4. चना दाल का उपयोग करें सल्फेट सेंसिटिविटी को कम - Split Chickpeas Reduces Sulfite Sensitivity in Hindi
  5. चने की दाल के फायदे रखें ह्रदय को स्वस्थ - Split Chickpeas for Heart Health in Hindi
  6. चने की दाल का सेवन करें वजन कम करने में मदद - Chana Dal ke Fayde for Weight Loss in Hindi
  7. चना दाल के लाभ हैं इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम में उपयोगी - Split Chickpeas Benefits for Irritable Bowel Syndrome in Hindi

चने की दाल घुलनशील फाइबर का एक अच्छा स्रोत है। यदि आप अपने दैनिक आहार में चने की दाल (एक छोटा सा कप) का सेवन करते हैं तो आपको दैनिक रूप से आहार फाइबर का लगभग 65% मिल सकता है। फाइबर आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में उपयोगी है (कुल मिलाकर बहुत कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल)। चने की दाल में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र में जैल जैसा पदार्थ बनाती है। इसलिए यह कोलेस्ट्रॉल युक्त पित्त को शरीर से बाहर निकालता है। (और पढ़ें - हाई कोलेस्टरॉल कम करने के घरेलू उपाय)

चने की दाल में आइसोफ्लेवोन्स पाए जाते हैं जो कुछ प्रकार के कैंसर, विशेष रूप से स्तन कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर के विकास के जोखिम को कम करते हैं। असल में, इसोफ्लेवोन्स एक प्रकार के एस्ट्रोजेन हैं, इसलिए ये शरीर में हार्मोन का अनुसरण करते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि रजोनिवृत्त महिलाओं में हॉट फ्लैशेस को कम करने के लिए डेडेज़िन-समृद्ध आइसोवाल्वोन भी बहुत अच्छे होते हैं। मटर और चने की दाल में क्यूमस्ट्रोल की उच्च मात्रा होती है।

कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के अलावा, चने की दाल में मौजूद उच्च फाइबर सामग्री से रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इस कम ग्लिसेमिक भोजन में मौजूद घुलनशील फाइबर शर्करा के अवशोषण को धीमा कर देता है और इसलिए धीरे-धीरे और लगातार धीमी गति से ग्लूकोज में मदद करता है जिससे यह रक्त शर्करा को बढ़ने से रोकता है। फिर भी, यह ऊर्जा की एक पर्याप्त और स्थिर आपूर्ति प्रदान करता है। इसलिए, यह शुगर (मधुमेह) से ग्रस्त लोगों के लिए अच्छा होता है। (और पढ़ें - शुगर का आयुर्वेदिक इलाज)

सल्फाइट संवेदनशीलता वाले लोगों को सल्फाइट युक्त भोजन का सेवन करने से दिल की धड़कन का तेज होना, सिरदर्द, दस्त, मतली और इसी तरह के लक्षण हो सकते हैं। सल्फाइट प्रोसेस किए गए खाद्य पदार्थ अधिकतर प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ होते हैं जैसे कि बेक्ड खाना, जैम, आलू के चिप्स, सिरप, स्टार्च, सिरका आदि। अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति सल्फाइट के प्रति अधिक असंवेदनशील होते हैं। चने के दाल ट्रेस मिनरल के साथ परिपूर्ण होती है जिसे मोलिब्डेनम कहा जाता है जो कि सल्फाइट्स के विषाक्तीकरण में मदद करता है। (और पढ़ें - सिर दर्द के घरेलू उपाय)

चने की दाल आपके दिल के लिए अच्छी होती हैं क्योंकि ये आपकी रक्त वाहिकाओं में पट्टिका को कम करने में मदद करती हैं जिससे हृदय रोगों को रोकने में मदद मिलती है। इस भोजन में मौजूद घुलनशील फाइबर आपके रक्त के कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है जिससे हृदय रोग के विकास के जोखिम को कम किया जाता है। चने के दाल में पोटेशियम होता है जो रक्तचाप को कम करने में मदद करता है। हाई बीपी (उच्च रक्तचाप) भी हृदय रोग पैदा करने के लिए योगदान देता है। इसके अलावा, इसमें ट्रिपटोपान नामक एक एमिनो एसिड होता है जो आपके शरीर को सेरोटोनिन उत्पादन में मदद करता है जो बदले में नींद को नियंत्रित करता है और आपके मूड को सुधारता है। (और पढ़ें - हाई बीपी कम करने के घरेलू उपाय)

चने की दाल फाइबर और प्रोटीन में समृद्ध होने के कारण, आपके वजन घटाने के प्रयासों में आपकी मदद कर सकता है। यहां तक कि इस भोजन के सेवन से आपको लंबे समय तक भूख महसूस नहीं होती हैं। इसके अलावा, यह पौष्टिक (विटामिन B1, B5, K, और फोलेट, आयरन, मैग्नीशियम, जस्ता आदि में समृद्ध) और यह वसा रहित होती है। यह विशेष रूप से शाकाहारियों के लिए प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है। यह कैलोरी में भी कम होती है, फिर भी इसमें मौजूद जटिल कार्बोहाइड्रेट के कारण यह आपको ऊर्जा प्रदान करती है। 

(और पढ़ें - वजन कम करने के लिए डाइट टिप्स)

चने की दाल पाचन संबंधी विकारों से निपटने में सहायक होती है जैसे इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम और डिवर्टीकुलोसिस। जो कि इसमें मौजूद उच्च घुलनशील फाइबर सामग्री की वजह से इन विकारों का इलाज करने में लाभकारी होता है। चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (आईबीएस) से पीड़ित लोगों को अक्सर अघुलनशील फाइबर के बजाय अधिक घुलनशील आहार देने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह एक बल्क एजेंट के रूप में काम करता है और साथ ही यह मल को आसानी से पारित करने में सहायक होती है। (और पढ़ें - इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम का उपचार)

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