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कॉर्नियल ट्रांसप्लांट को केरेटोप्लास्टी भी कहा जाता है, यह एक सर्जरी प्रक्रिया है, जिसमें खराब व क्षतिग्रस्त हो चुके कॉर्निया (नेत्रपटल) को एक स्वस्थ कॉर्निया के साथ बदल दिया जाता है। स्वस्थ कॉर्निया को आमतौर पर किसी मृत व्यक्ति (अंग दानकर्ता) से लिया जाता है। कॉर्नियल ट्रांसप्लांट प्रक्रिया द्वारा पूरे कॉर्निया या फिर उसके सिर्फ क्षतिग्रस्त हिस्से को बदला जा सकता है, जो स्थिति और गंभीरता पर निर्भर करता है। सर्जरी से पहले डॉक्टर मरीज के कुछ विशेष परीक्षण करेंगे और उसे खाली पेट रहने की सलाह भी दी जा सकती है। सर्जरी के दौरान लोकल एनेस्थीसिया दिया जाएगा ताकि आपकी आंख को सुन्न किया जा सके। सर्जरी के बाद डॉक्टर आपको कुछ समय के लिए चश्मा या आई शील्ड पहनने की सलाह देंगे, ताकि आंखों को सुरक्षित रखा जा सके।

  1. कॉर्नियल ट्रांसप्लांट क्या है - corneal transplant kya hai
  2. कॉर्नियल ट्रांसप्लांट क्यों किया जाता है - Corneal transplant kyon kiya jata hai
  3. कॉर्नियल ट्रांसप्लांट से पहले - Corneal transplant se pehle
  4. कॉर्नियल ट्रांसप्लांट के दौरान - Corneal transplant ke dauran
  5. कॉर्नियल ट्रांसप्लांट के बाद देखभाल - corneal transplant ke baad dekhbhaal
  6. कॉर्नियल ट्रांसप्लांट के खतरे - corneal transplant ke khatre

कॉर्नियल ट्रांसप्लांट या केरेटोप्लास्टी एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें रोगग्रस्त या क्षतिग्रस्त कॉर्निया को स्वस्थ से बदला जाता है। इसके लिए कॉर्निया किसी मृत व्यक्ति के शरीर से लिया जाता है। डोनर से अनुमति या तो मृत्यु से पहले ली जा चुकी होती है या फिर मृत्यु के बाद परिवारजन इसकी अनुमति देते हैं।

कॉर्निया एक सफ़ेद, साफ़ और गुंबद के आकार का बाहरी हिस्सा होता है। इसमें मुख्य रूप से तीन परतें होती हैं। कॉर्निया आंख में कीटाणु, धूल-मिट्टी, खतरनाक पराबैंगनी किरणों को आने से बचाता है। इससे रोशनी को केंद्रित करने में भी मदद मिलती है जिससे व्यक्ति को साफ़ दिखाई देता है।

यदि कॉर्निया पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है तो इसका आकार बदल सकता है और यह बादल जैसा धुंधला दिखाई दे सकता है। इससे व्यक्ति को अंधापन हो सकता है।

(और पढ़ें - आंख की बीमारीयों का इलाज)

यदि आपका कॉर्निया निम्नलिखित कारणों में से किसी एक के कारण क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो आपके डॉक्टर यह सर्जरी करेंगे -

  • संक्रमण
  • केराटोकोनस (एक ऐसी स्थिति जिसके कारण कॉर्निया शंकु के आकार का हो जाता है)
  • केराटाइटिस (बैक्टीरिया, वायरस, कवक या परजीवी के कारण कॉर्निया की सूजन)
  • पहले हो चुकी आंख की सर्जरी
  • फुच्स डिस्ट्रोफी (एक ऐसी स्थिति जो कॉर्निया की आंतरिक परत में कोशिकाओं की मृत्यु का कारण बनती है)
  • दर्दनाक चोट जिसके कारण निशान पड़ जाता है या कोई चीज कॉर्निया में घुस जाती है
  • बुलस केराटोपोपैथी (कॉर्निया की एक फफोले जैसी सूजन)

आपको आंख में दर्द और प्रभावित आंख में धुंधलापन या बादल होने जैसे लक्षण हो सकते हैं।

सर्जरी करने से पहले, निम्नलिखित तैयारी आवश्यक है -

  • आपके डॉक्टर एक नेत्र परीक्षण (आई टेस्ट) करेंगे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आप सर्जरी के लिए सही हैं या नहीं
  • अपने डॉक्टर को उन सभी दवाओं के बारे में सूचित करें जो आप ले रहे हैं
  • सर्जरी से पहले 10 दिनों के लिए आपको रक्त पतला करने वाली दवाओं (उदाहरण के लिए आइबुप्रोफेन, एस्पिरिन और वारफेरिन) को रोकने की आवश्यकता हो सकती है
  • यदि आप नियमित रूप से डाईयुरेटिक्स, इंसुलिन या मधुमेह की दवाइयां लेते हैं, तो अपने डॉक्टर से पूछें कि क्या आप उन्हें सर्जरी की सुबह ले सकते हैं या नहीं
  • आपको सर्जरी से पहले आधी रात के बाद भूखे रहना होगा
  • सर्जरी से एक दिन पहले और बाद में शराब न पिएं
  • प्रक्रिया के दिन, आभूषण न पहनें या अपनी आंखों के आसपास या चेहरे पर क्रीम, लोशन या मेकअप न लगाएं
  • आपको सर्जरी के बाद घर जाने के लिए किसी दोस्त या परिवार के सदस्य की मदद लेनी पड़ेगी
  • सर्जरी करने से पहले अपने डॉक्टर को अनुमति देने के लिए एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने होंगे

सर्जरी निम्न तरीके से की जाती है -

  • डॉक्टर आपकी आंख में आई ड्रॉप की कुछ बूंदें डालेंगे और आपको आराम करने के लिए कुछ दवाएं देंगे
  • इसके बाद आपकी आंख को सुन्न करने के लिए एनेस्थीसिया दिया जाएगा और इससे सर्जरी के दिन आंखों की गति को रोका जा सकता है। आप सर्जरी के दौरान जगे हुए होंगे
  • आपकी आंख को खुला रखने के लिए एक उपकरण लगाया जाएगा। हालांकि, एनेस्थीसिया के कारण आपको कुछ दिखाई नहीं देगा
  • सर्जन आपकी आंख की जांच करेंगे और देखेंगे कि डोनर का कॉर्निया आपकी आंख के लिए ठीक है या नहीं

कौन से तरह की केरेटोप्लास्टी की जानी है यह इस बात पर निर्भर करता है कि कॉर्निया का कौन सा हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है और कॉर्निया का कितना भाग बदला जाना है। केरेटोप्लास्टी निम्न तकनीक द्वारा की जाती है -

  • पेनिट्रेटिंग केरेटोप्लास्टी -
    पूरे क्षतिग्रस्त हो चुके कॉर्निया को छोटे गोल ब्लेड की मदद से निकाला जाता है। इसके बाद इसे एक स्वस्थ कॉर्निया से बदल दिया जाता है।
     
  • एंडोथेलियाल केरेटोप्लास्टी -
    इसमें कॉर्निया की सबसे अंदर की परत को डोनर द्वारा डोनेट की गयी परत से बदला जाता है। इसमें टांकों की बजाय डॉक्टर एयर बबल का प्रयोग करेंगे।
     
  • डीप एंटीरियर लेमेलर केरेटोप्लास्टी -
    इसमें कॉर्निया की बाहरी परत को बदला जाता है।

सर्जरी के दौरान डॉक्टर आंख की अन्य समस्याओं जैसे मोतियाबिंद आदि का इलाज भी कर सकते हैं। सर्जरी के बाद डॉक्टर आंख के ऊपर एक शील्ड लगा देंगे ताकि आपकी आंख सुरक्षित रहे।

कॉर्नियल ट्रांसप्लांट में एक से दो घंटे लग सकते हैं। सर्जरी के बाद डॉक्टर या नर्स यह जांच करेंगे कि एनेस्थीसिया का प्रभाव खत्म हुआ है या नहीं। यदि एनेस्थीसिया का प्रभाव खत्म हो गया है और आप अच्छा महसूस कर रहे हैं, तो आप अपने किसी सगे संबंधी की मदद से घर जा सकते हैं।

सर्जरी से पूरी तरह से ठीक होने में लगभग एक साल लग सकता है। आपको घर पर निम्नलिखित देखभाल करने की आवश्यकता हो सकती है -

  • अपने डॉक्टर द्वारा बताई गई आंखों की ड्राप और दर्द निवारक दवाओं का उपयोग करें
  • एंडोथेलियल केराटोप्लास्टी के बाद, आपको सर्जरी के बाद कुछ दिनों तक अपने चेहरे को ऊपर रखने की आवश्यकता होगी। इस स्थिति में रहने से बदले गए ऊतक को एक स्थान पर रहने में मदद मिलती है
  • डॉक्टर द्वारा दी गई सलाह के अनुसार निर्धारित समय तक ड्राइविंग न करें
  • ऐसी गतिविधियां न करें जिससे आपकी आंखों पर दबाव पड़े
  • भारी वस्तुओं को उठाने से बचें
  • धूल, धुएं या उड़ती रेत के संपर्क में आने से बचें
  • एक सुरक्षात्मक आई शील्ड या चश्मा पहनें
  • अपनी आंखों पर रगड़ने या दबाने से बचें
  • आपके डॉक्टर आपको बताएंगे कि आप अपनी दैनिक गतिविधियों को फिर से कब शुरू कर सकते हैं
  • जब आप स्नान करते हैं तो अपनी आंखें बंद रखें
  • तीन महीने तक तैराकी और गर्म टब में न नहाएं
  • आपको कुछ सप्ताह के लिए काम से दूर रहना पड़ सकता है

कॉर्नियल ट्रांसप्लांट सर्जरी के बाद आपकी दृष्टि अच्छी हो जाएगी

डॉक्टर के पास कब जाएं?

यदि आपको निम्नलिखित लक्षण हैं, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर को सूचित करना चाहिए -

  • आंखों में अत्यधिक लालिमा और दर्द होने पर
  • प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता में वृद्धि होने पर
  • दिखाई देने की समस्या होने पर

कॉर्नियल ट्रांसप्लांट सर्जरी के कुछ जोखिम निम्नलिखित हैं -

  • रेटिना का अलग होना
  • मोतियाबिंद
  • आंख की सूजन
  • आंख की सतह पर गंभीर संक्रमण (अल्सर या आंख का फोड़ा) या आंख के अंदर (एंडोफथालमाइटिस)
  • ग्लूकोमा की शुरुआत या ग्लूकोमा का बिगड़ना
  • कॉर्निया का लगाया गया हिस्सा फिर से अलग हो जाना
  • अपवर्तक त्रुटियां (जिनसे स्पष्ट रूप से देखने में असमर्थता हो सकती है)
  • आंख में रक्तस्राव

संदर्भ

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  2. Johns Hopkins Medicine [Internet]. The Johns Hopkins University, The Johns Hopkins Hospital, and Johns Hopkins Health System; Corneal Transplantation
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