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ग्लोब्युलिन टेस्ट क्या है?

ग्लोब्युलिन टेस्ट को ग्लोब्युलिन एलेक्ट्रोफेरोसिस के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ब्लड टेस्ट है जो रक्त में ग्लोब्युलिन के स्तर की जांच करने के लिए किया जाता है।

रक्त में मौजूद अलग-अलग प्रकार के ग्लोब्युलिन में अल्फा1 और अल्फा2, बीटा और गामा ग्लोब्युलिन शामिल हैं। ग्लोब्युलिन प्रोटीन का एक प्रकार हैं जो कि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा लिवर में संश्लेषित किए जाते हैं। ग्लोब्युलिन हमारे शरीर में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये ब्लड क्लॉटिंग, लिवर की कार्य-प्रक्रिया और बाहरी सूक्ष्म-जीवों व संक्रमण से लड़ते हैं। खून में ग्लोब्युलिन के स्तर की जांच कुछ टेस्टों द्वारा की जाती है जैसे प्रोटीन इलेक्ट्रोफोरेसिस और टोटल प्रोटीन टेस्ट द्वारा।

  • सीरम प्रोटीन इलेक्ट्रोफोरेसिस गामा प्रोटीन के साथ अन्य प्रोटीन की जांच भी करता है जो कि इम्यून सिस्टम डिसऑर्डर और मल्टीपल मायलोमा के परीक्षण में मदद करते हैं। 
  • टोटल प्रोटीन टेस्ट ग्लोब्युलिन के साथ-साथ एल्ब्यूमिन के स्तर की भी जांच करता है। प्रोटीन के असामान्य रूप से कम स्तर लिवर और किडनी डिजीज की ओर संकेत करते हैं।
  1. ग्लोब्युलिन टेस्ट क्यों किया जाता है - Globulin Test Kyu Kiya Jata Hai
  2. ग्लोब्युलिन टेस्ट से पहले - Globulin Test Se Pahle
  3. ग्लोब्युलिन टेस्ट के दौरान - Globulin Test Ke Dauran
  4. ग्लोब्युलिन टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है - Globulin TestKe Parinam Ka Kya Matlab Hai

ग्लोब्युलिन टेस्ट किसलिए किया जाता है?

यह टेस्ट खून में ग्लोब्युलिन के स्तर की जांच करने के लिए किया जाता है। यह कुछ विशेष प्रकार के विकारों के परीक्षण में मदद कर सकता है।

टोटल प्रोटीन टेस्ट की मदद से यह भी पता लगाया जा सकता है, कि लिवर कितने अच्छे से काम कर पा रहा है। लिवर फंक्शन टेस्ट की सलाह तब दी जाती है जब व्यक्ति को लिवर के रोग होने का खतरा हो। 

लिवर डिजीज के विभिन्न लक्षण निम्न हैं:

इम्यून सिस्टम से जुड़े विकारों के परीक्षण के लिए सीरम प्रोटीन इलेक्ट्रोफोरेसिस टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है। इन विकारों में निम्न शामिल हैं:

 

ग्लोब्युलिन टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

इस टेस्ट के लिए किसी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं होती। जो भी दवाएं और सप्लिमेंट आप अभी ले रहे हैं उनके बारे में डॉक्टर को पता होना चाहिए। जो दवाएं टेस्ट के परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं डॉक्टर उन्हें लेने से मना कर सकते हैं। इनमें कॉर्टिकोस्टेरॉयड, क्लोरोप्रोमेज़ाइन, आइसोनियाजिड, फेनासीमाइड, नियोमाइसिन, सेल्कीलेट, टोलब्यूटामाइड और सल्फोनामाइड आदि शामिल हैं। मरीजों को कोई भी दवा बंद करने से पहले उस बारे में डॉक्टर से पूछ लेना चाहिए।

ग्लोब्युलिन टेस्ट कैसे किया जाता है?

डॉक्टर आपके बांह की नस में सुई लगाकर ब्लड सैंपल लेते हैं, सैंपल लेने से पहले इंजेक्शन लगने वाली जगह को अल्कोहल युक्त दवा से साफ किया जाता है। इसके बाद सुई लगी जगह पर हल्का सा दबाव लगाकर वहां पर रुई लगा दी जाती है। इसके बाद लिया गया सैंपल परीक्षण के लिए लैब में भेज दिया जाता है। 

खून का परीक्षण करने के दौरान, खून के द्रव (फ्लूइड) को एक विशेष प्रकार के पेपर पर निकाला जाता है और इलेक्ट्रिक करंट दिया जाता है। इससे प्रोटीन गति में आने लग जाते हैं और पेपर पर एक बैंड के जैसी आकृति बना लेते हैं। जिससे हर एक प्रोटीन की सही मात्रा के बारे में पता चल जाता है।

ग्लोब्युलिन टेस्ट के परिणाम क्या बताते हैं?

कुछ कारक हैं, जो टेस्ट के रिजल्ट में बदलाव कर सकते हैं जैसे व्यक्ति का लिंग व उम्र, उसके स्वास्थ्य संबंधी पिछली स्थिति और टेस्ट करने का तरीका आदि। डॉक्टर टेस्ट की रिपोर्ट देख कर रिजल्ट का मतलब समझाते हैं। 

सामान्य परिणाम:

इस टेस्ट की सामान्य वैल्यू निम्न हैं:

  • सीरम ग्लोब्युलिन: 2.0 से 3.5 g/dL
  • आईजीएम के तत्व: 75 से 300 mg/dL
  • आईजीजी के तत्व: 650 से 1850 mg/dL
  • आइजीए के तत्व: 90 से 350 mg/dL

अलग-अलग ग्लोब्युलिन की सामान्य वैल्यू निम्न हैं:

  • अल्फा-1 (α-1): 1.7% से 5% या 0.1 से 0.4 g/dL (1 से 4 g/L)
  • अल्फा-2 (α-2): 6.7% से 12.5% या 0.4 से 1 g/dL (4 से 10 g/L)
  • बीटा (β): 8.3% से 16.3% या 0.5 से 1.2 g/dL (5 से 12 g/L)
  • गामा (γ): 10.7% से 20% या 0.6 से 1.6 g/dL (6 से 16 g/L)

असामान्य परिणाम:

ग्लोब्युलिन का बढ़ा हुआ स्तर निम्न स्थितियों के कारण हो सकता है:

ग्लोब्युलिन के कम स्तर निम्न स्थितियों में देखे जा सकते हैं:

  • लिवर संबंधी विकार 
  • नेफ्रोसिस (एक स्थिति जिसमें किडनी खून से प्रोटीन फ़िल्टर नहीं कर पाती और प्रोटीन यूरिन में लीक होने लगता है)
  • एक्यूट हेमोलीटिक एनीमिया 
  • अल्फा-1 एंटीट्रिप्सिन डेफिशियेंसी (वातस्फीति)
  • हाइपोगामाग्लोब्युलिनेमिया/ आगामाग्लोब्युलिनेमिया
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References

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