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टोटल प्रोटीन टेस्ट क्या है?

टोटल प्रोटीन टेस्ट शरीर में मौजूद प्रोटीन की मात्रा का पता लगाता है। यह प्रोटीन के दो प्रकारों की जांच करता है, जो कि ग्लोब्युलिन और एल्बुमिन हैं।

प्रोटीन ऊतकों और कोशिकाओं के बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, ये शरीर में हार्मोन और एंजाइम भी बनाते हैं। प्रोटीन शरीर की वृद्धि, विकास और पूर्ण स्वास्थ्य को ठीक तरह बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

शरीर में मौजूद पूर्ण प्रोटीन का 60 प्रतिशत भाग एल्बुमिन से बना होता है, बाकि के 40 प्रतिशत भाग में ग्लोब्युलिन होता है।

ग्लोब्युलिन की तुलना में रक्त में एल्बुमिन की मात्रा थोड़ी सी अधिक होती है। जो कि एल्बुमिन और ग्लोब्युलिन के अनुपात को 1 से थोड़ा अधिक कर देती है।

इस टेस्ट के अतिरिक्त नाम एल्बुमिन/ग्लोब्युलिन रेश्यो, टीपी और ए/जी रेश्यो हैं।

  1. टोटल प्रोटीन टेस्ट क्यों किया जाता है - Total Protein Test Kyu Kiya Jata Hai
  2. टोटल प्रोटीन टेस्ट से पहले - Total Protein Test Se Pahle
  3. टोटल प्रोटीन टेस्ट के दौरान - Total Protein Test Ke Dauran
  4. टोटल प्रोटीन टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है - Total Protein Test Ke Parinam Ka Kya Matlab Hai

टोटल प्रोटीन टेस्ट किसलिए किया जाता है?

आमतौर पर टोटल प्रोटीन और एल्बुमिन टेस्ट नियमित रूप से किए जाने वाले टेस्ट में ही शामिल होते हैं। ये रूटीन टेस्ट व्यक्ति के पूरे शरीर के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए किए जाते हैं।

टोटल प्रोटीन टेस्ट विभिन्न स्थितियों के परीक्षण में मदद करता है। जिसमें निम्न शामिल हैं:

डॉक्टर इस टेस्ट को करवाने के लिए तब भी कह सकते हैं, जब व्यक्ति को सिरोसिस जैसे लिवर डिजीज के लक्षण दिखाई दें, जिनमें निम्न शामिल हैं:

यदि टोटल प्रोटीन टेस्ट के परिणाम असामान्य आते हैं, तो अन्य टेस्ट करवाने को कहा जा सकता है।

टोटल प्रोटीन टेस्ट की तैयारी कैसे करें?

यदि व्यक्ति को किसी भी प्रकार के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो उन्हें डॉक्टर को इस बारे में बता देना चाहिए। यदि आप कोई भी दवा, सप्लीमेंट, हर्ब, विटामिन या गैर कानूनी दवा ले रहे हैं तो इसके बारे में डॉक्टर को बता दें। इसके अलावा यदि आप डॉक्टर की सलाह के बिना किसी भी प्रकार की दवा ले रहे हैं, तो इस बारे में भी डॉक्टर को जरूर बता दें।

ऐसा हो सकता है, कि डॉक्टर आपको टेस्ट से पहले कुछ विशेष दवाएं लेने से मना कर दें। किसी भी दवा को छोड़ने या उसकी खुराक में किसी प्रकार का बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

टोटल प्रोटीन टेस्ट कैसे किया जाता है?

टोटल प्रोटीन टेस्ट एक ब्लड सैंपल की मदद से किया जाता है। डॉक्टर हथेली के पिछले हिस्से की नस या कोहनी के पिछले भाग की नस में सुई लगाकर ब्लड सैंपल लेते हैं। निम्न चरणों का पालन करते हुए टेस्ट के लिए ब्लड सैंपल लिया जाता है:

  • व्यक्ति से बैठने या लेटने को कहा जाता है और एक मुट्ठी बनाने को बोला जाता है।
  • उसके बाद व्यक्ति की बांह में एक विशेष रबर बैंड बांधा जाता है।
  • बैंड बांधने के बाद नसें साफ नजर आने लगती हैं, इसके बाद खून निकालने वाली जगह को एंटीसेप्टिक दवा से साफ किया जाता है। 
  • नस में सुई लगाकर ब्लड सैंपल ले लिया जाता है।
  • पर्याप्त रक्त मिल जाने पर सुई लगी जगह पर बैंडेज लगा दी जाती है।

जिस जगह इंजेक्शन लगा है उस पर हल्का दबाव लगाने के लिए कहा जाता है ताकि रक्त का प्रवाह रोका जा सके। 

टोटल प्रोटीन टेस्ट के परिणाम क्या बताते हैं?

इस टेस्ट के रिजल्ट की सामान्य वैल्यू हर लैब के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। रिजल्ट की सही जांच के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

सामान्य परिणाम:

टोटल प्रोटीन के स्तर की सामान्य वैल्यू 6.0 से 8.3 g/dL है। 

असामान्य परिणाम:

सामान्य से कम वैल्यू के निम्न कारण हो सकते हैं:

  • प्रोटीन-लूज़िंग एंट्रोपैथी (Protein-losing enteropathy) ऐसी कोई भी स्थिति जिसमें जठरांत्र पथ प्रभावित हो, जिससे शरीर में प्रोटीन की मात्रा में कमी आए। 
  • अगामाग्लोब्युलिनीमिया (Agammaglobulinemia) रक्त प्लाज्मा में गामा ग्लोब्युलिन की कमी जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने लग जाती है।
  • नेफ्रोटिक सिंड्रोम 
  • कुपोषण 
  • हेमरेज (रक्तस्त्राव)
  • कुअवशोषण (एक स्थिति जिसमें व्यक्ति का शरीर आहार से पोषक तत्व अवशोषित नहीं कर पाता)
  • अत्यधिक जलना 
  • ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस (किडनी में मौजूद ग्लोमेरुली या किडनी के छोटे फ़िल्टर में सूजन)
  • लिवर डिजीज

टोटल प्रोटीन टेस्ट की सामान्य से अधिक वैल्यू निम्न कारणों से हो सकती है:

  • मल्टीपल मायलोमा (कैंसर का एक दुर्लभ प्रकार जो कि सेल प्लाज्मा में पाया जाता है, सेल प्लाज्मा सफ़ेद रक्त कोशिका का एक प्रकार है)
  • तीव्र संक्रमण या सूजन
  • हेपेटाइटिस सी, बी और एचआईवी 
  • वाल्डेनस्ट्रॉम डिजीज (कैंसर का एक प्रकार जिसमें कैंसर की कोशिकाएं बड़ी मात्रा में असामान्य प्रोटीन बनाती हैं)

टोटल प्रोटीन के माप के स्तर गर्भावस्था के दौरान बढ़ सकते हैं। जिन लोगों के शरीर में पानी की कमी होती है या असामान्य रूप से प्रोटीन की अधिक मात्रा बन रही होती है उनके भी वैल्यू बढ़े हुए हो सकते हैं। 

नोट: टेस्ट‍ के रिजल्ट‍ और व्यक्ति के लक्षणों के आधार पर ही उचित निदान किया जाना चाहिए। उपरोक्त जानकारी पूरी तरह से शैक्षिक दृष्टिकोण से दी गई है और यह किसी भी तरह से डॉक्टर की चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है।

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References

  1. KidsHealth. Blood Test: Liver Function Tests. The Nemours Foundation. [internet].
  2. United States Department of Agriculture. Total Protein and A/G Ratio. National Nutrient Database for Standard Reference Legacy Release; Agricultural Research Service
  3. Johns Hopkins Medicine [Internet]. The Johns Hopkins University, The Johns Hopkins Hospital, and Johns Hopkins Health System; Blood Test
  4. MedlinePlus Medical: US National Library of Medicine; Total protein
  5. Center for Disease Control and Prevention [internet], Atlanta (GA): US Department of Health and Human Services; Total protein