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पेल्विक परीक्षण क्या है?

डॉक्टर पेल्विक एग्जाम या परीक्षण महिला के अंगों की जांच करने और स्त्रीरोगों संबंधित समस्या की भी पहचान के लिए कर सकते हैं। पेल्विक परीक्षण के दौरान डॉक्टर महिला में निम्न की जांच करते हैं:

  • अंडाशय
  • गर्भाशय ग्रीवा 
  • फैलोपियन ट्यूब
  • गर्भाशय
  • मलाशय
  • मूत्राशय

हाल ही में मिले दिशानिर्देशों के अनुसार, जो महिलाएं यौन रूप से सक्रिय हैं या पहले कभी थी, उन्हें पेल्विक परीक्षण के तीन बार सामान्य परिणाम आने के बाद हर तीन सालों में एक पेपिलोमा टेस्ट (पैप टेस्ट) करवाते रहना चाहिए। डॉक्टर इस टेस्ट की सलाह महिला के स्वास्थ्य के अनुसार देते हैं।

(और पढ़ें - लैब टेस्ट क्या है)

  1. पेल्विक परीक्षण क्यों किया जाता है - Pelvic Exam Kyu Kiya Jata Hai
  2. पेल्विक परीक्षण से पहले - Pelvic Exam Se Pahle
  3. पेल्विक परीक्षण के दौरान - Pelvic Exam Ke Dauran
  4. पेल्विक परीक्षण के परिणाम का क्या मतलब है - Pelvic Exam Ke Parinam Ka Kya Matlab Hai

पेल्विक परीक्षण किसलिए किया जाता है?

नियमित पेल्विक परीक्षण रजोनिवृत्ति के समय और रजोनिवृत्ति के बाद कैंसर का पता लगाने में मदद करते हैं, क्योंकि इन अवस्थाओं में कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इस परीक्षण की सलाह तब भी दी जाती है, यदि महिला को निम्न में से कोई समस्या हो:

  • दस से ज्यादा दिन तक योनि से रक्तस्त्राव होना 
  • पेट के निचले भाग में या योनि (वल्वा) में अत्यधिक दर्द 
  • पीरियड्स के दौरान अत्यधिक दर्द व ऐंठन महसूस होना
  • योनि से स्त्राव या अंतर्वस्त्रों में गीलेपन के कारण योनि में जलन, खुजली और बदबू होना (विशेषकर शारीरिक संबंध के बाद) 
  • स्तन विकसित होने के तीन सालों बाद या 15 साल की उम्र के बाद भी पीरियड्स नहीं होना 
  • शारीरिक संबंध बनाने के बाद पीरियड्स नहीं होना

पेल्विक परीक्षण की तैयारी कैसे करें?

इस टेस्ट के लिए किसी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं होती। महिला से टेस्ट से पहले वाशरूम जाने को कहा जा सकता है। कभी-कभी एक यूरिन सैंपल की जरूरत हो सकती है। 

पेल्विक परीक्षण​ कैसे किया जाता है?

यदि महिला को अपने स्वास्थ्य से संबंधित कोई समस्या है, तो इसके बारे में उसे डॉक्टर को बताना चाहिए। एग्जाम शुरू करने से पहले महिला को हॉस्पिटल के कपड़े पहनने को कहा जाएगा ताकि टेस्ट करने में आसानी हो।

परीक्षण के दौरान महिला को कमर के बल लेटने को कहा जाता है। डॉक्टर या नर्स पेट के निचले हिस्से को हल्का सा दबाते हैं ताकि अंगों को ऊपर से महसूस कर सकें। इसके बाद स्पेक्युलम एग्जाम के लिए डॉक्टर आपसे टेबल पर थोड़ा आगे खिसकने के लिए भी कह सकते हैं।

स्पेक्युलम एग्जाम के लिए महिला से घुटने मोड़ कर पैरों को फीट होल्डर पर रखने के लिए कहा जाता है। स्पेक्युलम (एक मेडिकल उपकरण है जिसका प्रयोग शारीरिक छिद्रों की जांच करने के लिए किया जाता है) को योनि के अंदर डाला जाता है ताकि योनि और गर्भाशय ग्रीवा को जांच के लिए सही और स्पष्ट तरह से देखा जा सके। स्पेक्युलम को लगाने के बाद पेप स्मीयर टेस्ट किया जाता है। पेप स्मीयर के लिए डॉक्टर एक छोटे ब्रश या स्पैटुला की मदद से गर्भाशय ग्रीवा में से कुछ रक्त कोशिकाएं लेते हैं। संक्रमण का पता लगाने के लिए योनि से द्रव के सेंपल भी लिए जा सकते हैं।

सैंपल के बाद स्पेकुलम को हटा दिया जाता है। परीक्षण के लिए डॉक्टर योनि में एक या दो उंगली डाल कर भी जांच कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर एक रेक्टल एग्जाम (गुदा परीक्षण) भी किया जा सकता है। यौन संचारित रोगों की जांच के लिए पेप स्मीयर टेस्ट के साथ नीचे दिए गए अन्य टेस्ट भी किए जा सकते हैं:

कुछ डॉक्टर अंगों की जांच के लिए पेल्विक अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए भी कह सकते हैं। 
योनि में स्पेकुलम लगने से कुछ महिलाओं को हल्का-सा दबाव और तकलीफ महसूस हो सकती है। महिला को अपने कूल्हे और टांग अपने आराम के अनुसार रखने चाहिए। जिन महिलाओं को वेजाइनल संक्रमण होता है, उन्हें टेस्ट के दौरान दर्द और जलन हो सकती है। जब डॉक्टर या नर्स अंडाशय की जांच करेंगे तो हल्का सा दर्द हो सकता है। दर्द से राहत के लिए महिला को लंबी और गहरी सांस लेनी चाहिए। पेप स्मीयर के लिए सैंपल लेते समय हल्की सी चुभन जैसी संवेदना हो सकती है। यदि दर्द अधिक हो रहा है, तो महिला को इसके बारे में डॉक्टर को बता देना चाहिए।

पेल्विक परीक्षण के परिणाम क्या बताते हैं?
सामान्य परिणाम:

  • अंडाशय और गर्भाशय का आकार सही है और वह सही जगह पर स्थित हैं। गर्भाशय को हल्का सा हिलाने में कोई दर्द नहीं होता। 
  • मूत्रमार्ग या बारथोलिन ग्रंथियों (योनि के आस-पास की ग्रथियां) में सूजन नहीं है। 
  • गर्भाशय ग्रीवा, भग (वल्वा) और योनि में जलन, संक्रमण या किसी भी प्रकार की असामान्य स्थिति होना। 
  • गर्भाशय से जुड़े लिगामेंट या रेक्टम व गर्भाशय के आस-पास के क्षेत्र में किसी प्रकार के असामान्य ऊतकों का जमा न होना।
  • रसोली और अन्य सख्त ऊतकों का कोई संकेत न होना।

असामान्य परिणाम:

  • एसटीडी के होने के संकेत होना जैसे जेनिटल वार्ट्स और हर्पीस दिख सकते हैं। लक्षणों के सही कारण की पुष्टि के लिए डॉक्टर अन्य टेस्ट करवाने के लिए भी कह सकते हैं। 
  • गर्भाशय ग्रीवा, योनि का बाहरी भाग और योनि में किसी भी प्रकार की असामान्यता, सूजन या घाव होना। 
  • परीक्षण के दौरान गर्भाशय का बिलकुल भी न हिलना
  • जब गर्भाशय थोड़ा सा हिलता है तो गर्भाशय और मलाशय के बीच वाले हिस्से में दर्द महसूस होना।
  • ओवरी का बड़ा दिखना, छूने पर दर्द होना व न हिलना । एक या दोनों ओवरी के नीचे एक छोटी गांठ महसूस होना।
  • छोटी गांठें और ऊतकों में कठोरता महसूस होना
  • गर्भाशय में रसोली होना

कुछ स्थितियों के कारण पेल्विक एग्जाम के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। टेस्ट के परिणामों में किसी भी प्रकार की असामान्यता दिखने पर डॉक्टर आपको बता देंगे। 

और पढ़ें ...

References

  1. Center for Young Women's Health. Your First Pelvic Exam. Boston Children's Hospital, US
  2. Michigan Medicine [internet]. University of Michigan. Pelvic Examination.
  3. National Cancer Institute [Internet]. Bethesda (MD): U.S. Department of Health and Human Services; NCI Dictionary of Cancer Terms
  4. Long WN. Pelvic Examination. Clinical Methods: The History, Physical, and Laboratory Examinations. 3rd edition. Boston: Butterworths; 1990.
  5. Westhoff CL, Jones HE, Guiahi M. Do new guidelines and technology make the routine pelvic examination obsolete?. J Womens Health (Larchmt). 2011 Jan;20(1):5-10. PMID: 21194307
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