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थायरायड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (Thyroid Stimulating Hormone) टेस्ट को टीएसएच (TSH) टेस्ट भी कहा जाता है। टीएसएच टेस्ट एक सामान्य खून टेस्ट होता है, जिसका इस्तेमाल यह जांच करने के लिए किया जाता है कि थायराइड ग्रंथि ठीक से काम कर रही है या नहीं। थायराइड ग्रंथि हमारे शरीर में गर्दन के ठीक सामने उसके निचले हिस्से के पास स्थित होती है। टीएसएच पिट्यूटरी ग्रंथि (Pituitary Gland) द्वारा बनाया जाता है, पिट्यूटरी ग्रंथि एक मटर के दाने के आकार की ग्रंथि होती है, जो मस्तिष्क के निचले हिस्से में स्थित होती है।

जब थायराइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में थायराइड हार्मोन नहीं बना पाती (इस स्थिति को हाइपोथायरायडिज्म कहा जाता है) तो पिट्यूटरी ग्रंथि और अधिक टीएसएच बनाकर थायराइड ग्रंथि को हार्मोन बनाने के लिए उत्तेजित करने का प्रयास करती है। अगर पिटयूटरी ग्रंथि ठीक से काम ना कर पाए तो टीएसएच बनने की मात्रा कम हो जाती है और इस स्थिति के कारण भी हाइपोथायरायडिज्म रोग विकसित हो सकता है।

अगर थायराइड ग्रंथि अत्याधिक मात्रा में हार्मोन पैदा करने लगे (इस स्थिति को हाइपरथायरायडिज्म कहा जाता है) तो, ऐसी स्थिति में पिट्यूटरी ग्रंथि टीएसएच बनाने की मात्रा को कम कर देती है ताकि थायराइड ग्रंथि के हार्मोन के बनने की मात्रा को कम किया जा सके।

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  1. थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) टेस्ट क्या होता है? - What is Thyroid Stimulating Hormone (TSH) Test in Hindi?
  2. थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) टेस्ट क्यों किया जाता है? - What is the purpose of Thyroid Stimulating Hormone (TSH) Test in Hindi
  3. थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) टेस्ट से पहले - Before Thyroid Stimulating Hormone (TSH) Test in Hindi
  4. थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) टेस्ट के बाद - After Thyroid Stimulating Hormone (TSH) Test in Hindi
  5. थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं? - What are the risks of Thyroid Stimulating Hormone (TSH) Test in Hindi
  6. थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है? - What do the results of Thyroid Stimulating Hormone (TSH) Test mean in Hindi
  7. थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) टेस्ट कब करवाना चाहिए? - When to get Thyroid Stimulating Hormone (TSH) Test?
  8. थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) टेस्ट कैसे किया जाता है? - How is the Thyroid Stimulating Hormone (TSH) Test done?

टीएसएच टेस्ट क्या है?

थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) को पिट्यूटरी ग्रंथि द्वारा निर्मित किया जाता है। टीएसएच थायराइड ग्रंथि को थायराइड हार्मोन बनाने और उसको खून में जारी करने के लिए कहता है।

  • थायराइड गर्दन के सामने और कंठनली (Larynx) के नीचे स्थित एक ग्रंथि होती है।
  • पिट्यूटरी ग्रंथि खोपड़ी में मस्तिष्क के नीचे और नाक के उपरी हिस्से के ठीक पिछे स्थित होती है।

टीएसएच यह सुनिश्चित करता है कि शरीर, रक्त में थायराइड हार्मोन थायरोक्सिन (टी4) और ट्राईआयोडोथायरोनिन (टी3) के निरंतर स्तर को बनाए रख रहा है या नहीं। ये शरीर की ऊर्जा का उपयोग करने की दर को निंयत्रित करने में मदद करते हैं।

थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन टेस्ट खून में टीएसएच की मात्रा मापता है। टीएसएच पिट्यूटरी ग्रंथि द्वारा बनाया जाता है, यह ग्रंथि मस्तिष्क के निचले हिस्से में स्थित होती है। थायराइड ग्रंथि द्वारा जारी किए गए हार्मोन की मात्रा नियमित रखने की जिम्मेदारी भी टीएसएच की ही होती है। थायराइड शरीर के कई कार्यों को नियंत्रित करता है, जिनमें चयापचय (Metabolism) और शरीर का बढ़ना (Body Growth) भी शामिल है।

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अगर पिट्यूटरी ग्रंथि अधिक टीएसएच बनाती है, तो थायराइड भी अधिक थायराइड हार्मोन बनाने लगता है। इस तरह, दो ग्रंथियां एक साथ काम करती हैं, यह सुनिश्चित करने के लिए थायराइड हार्मोन सही मात्रा में बन रहा है। हालांकि जब यह व्यवस्था प्रणाली नष्ट हो जाती है तो थायराइड ग्रंथि, हार्मोन की मात्रा को बहुत अधिक या बहुत कम मात्रा में बना सकती है।

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टीएसएच टेस्ट क्यों किया जाता है?

टीएसएच टेस्ट को अक्सर थायराइड के स्तर को असामान्य करने वाले अंतर्निहित कारणों को निर्धारित करने के लिए किया जाता है। अंडरएक्टिव या ऑवरएक्टिव थायराइड ग्रंथि को देखने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। खून में टीएसएच स्तर की जांच करके डॉक्टर यह पता लगा सकते हैं कि आपकी थायराइड ग्रंथि कितने अच्छे से काम कर पा रही है।

टीएसएच टेस्ट, खून में टीएसएच की मात्रा को मापने में सहायता करता है। टीएसएच का स्तर अत्याधिक मात्रा में कम या ज्यादा हो जाना, शरीर में कई दीर्घकालिक रोगों व अन्य समस्याओं के शुरू होने का संकेत दे सकता है।

इन दोनों ग्रंथियों में हार्मोन के स्तर की गड़बड़ी करने वाले अंतर्निहित कारणों की मौजूदगी का पता लगाने के लिए डॉक्टर आमतौर पर टीएसएच खून टेस्ट करवाने का ही सुझाव देते हैं। इसके अलावा, अंडरएक्टिव या ऑवरएक्टिव थायराइड की जांच करने के लिए भी टीएसएच टेस्ट करवाने का सुझाव दिया जाता है।

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टीएसएच टेस्ट से पहले क्या किया जाता है?

यह टेस्ट करवाने से पहले किसी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं होती। हालांकि, अगर आप कुछ प्रकार की दवाएं ले रहे हैं, तो डॉक्टर को इस बारे में बताना जरूरी है, क्योंकि ये दवाएं टेस्ट के रिजल्ट में गड़बड़ी कर सकती हैं। इनमें से कुछ मुख्य दवाएं जो टीएसएच के स्तर को प्रभावित करती हैं:

  • ऐमियोडैरोन (Amiodarone)
  • डोपामाइन (Dopamine)
  • लिथियम (Lithium)
  • प्रेडनिसोन (Prednisone)
  • पोटैशियम आयोडाइड (Potassium Iodide)

अगर आप इन दवाओं का सेवन करते हैं, तो टेस्ट करवाने से पहले आपको इन दवाओं का सेवन छोड़ना पड़ सकता है। दवाओं के बारे में डॉक्टर से बात करें, अगर आपके डॉक्टर इन्हें छोड़ने के लिए न कहें तो आपको ये दवाएं छोड़ने की जरूरत नहीं है।

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टीएसएच टेस्ट के बाद क्या किया जाता है?

टीएसएच के लिए सैंपल लेने के बाद सुई वाली जगह पर रूई का टुकड़ा या बैंडेज लगा दी जाती है ताकि खून बहने से रोका जा सके। जब सुई के द्वारा खून निकाला जाता है, तब आपको थोड़ी चुभन सी महसूस हो सकती है और सुई निकलने के बाद थोड़ा खून भी निकल सकता है।

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टीएसएच टेस्ट में क्या जोखिम हो सकते हैं?

इस टेस्ट के कुछ मामूली ही जोखिम होते हैं। जहां पर सुई लगती है, वहां पर हल्का सा दर्द और निशान आदि पड़ सकता है। हालांकि, इसके जोखिम ज्यादातर जल्द ही गायब हो जाते हैं।

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टीएसएच टेस्ट के रिजल्ट का क्या मतलब हो सकता है?

टीएसएच का सामान्य स्तर:

व्यस्कों में टीएसएच का सामान्य स्तर 0.4 से 5 mIU/L (मिली–इंटरनेश्नल यूनिट्स प्रति लीटर) के बीच होना चाहिए और थायरोक्सिन पर टीएसएच स्तर 0.5 से 2.5 mlU/L के बीच होना चाहिए।

टीएसएच का उच्च स्तर:

अगर टीएसएच का स्तर सामान्य से ऊपर है, तो अंडरएक्टिव थायराइड होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। गर्भावस्था भी टीएसएच के स्तर को बढ़ा सकती है। अगर आप कुछ विशेष दवाएं जैसे, स्टेरॉयड, डोपैमाइन, ओपिओइड और दर्दनिवारक (मॉर्फिन) दवाएं ले रहे हैं, तो स्तर सामान्य से निम्न हो सकता है।

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टीएसएच का निम्न स्तर:

यह भी संभव है कि रीडिंग टेस्ट के स्तर को वापस सामान्य से नीचे दिखा रही हो और ऑवरएक्टिव थायराइड का संकेत दे रही हो। जिसके कई कारण हो सकते हैं, जो निम्नलिखित हैं:

  • ग्रेव्स रोग (इसमें प्रतिरक्षा प्रणाली थायराइड ग्रंथि पर आक्रमण कर देती है।)
  • शरीर में आयोडीन की मात्रा का अधिक होना।
  • थायराइड हार्मोन की दवाएं अधिक मात्रा में लेना।
  • अत्याधिक मात्रा में नेचुरल सप्लिमेंट्स लेना, जिनमें थायराइड हार्मोन हो।

थायराइड संबंधी विकारों की जांच करने के लिए ही सिर्फ टीएसएच का ही इस्तेमाल नहीं किया जाता। अन्य टेस्ट जैसे फ्री टी-3, फ्री टी-4, रिवर्स टी-3, और एंटी-टीपीओ एंटीबॉडी आदि का इस्तेमाल यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि मरीज को थायराइड के उपचार की जरूरत है या नहीं?

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टीएसएच टेस्ट कब करवाना चाहिए?

डॉक्टर अक्सर टीएसएच टेस्ट करवाने का सुझाव दे देते हैं, जिसकी कई वजह हो सकती हैं हैं।

1) अगर आपमें  इसके लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर यह जानने के लिए कि थायराइड ग्रंथि ठीक से काम कर रही है या नहीं, टीएसएच टेस्ट का सुझाव दे देते हैं।

अंडरएक्टिव थायराइड ग्रंथि (Hypothyroidism) के लक्षण –

ऑवरएक्टिव थायराइड ग्रंथि (Hyperthyroidism) के लक्षण:

2) यह देखने के लिए कि हाइपोथायरायडिज्म के लिए ली गई थायराइड की दवाएं उम्मीद के अनुसार काम कर रही हैं या नहीं। अगर दवा की खुराक को कम या ज्यादा करने की जरूरत है या दवा को पूरी तरह से बदलने की जरूरत है। ऐसी स्थितियों में टीएसएच टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है।

3) इसके अलावा, टीएसएच टेस्ट का इस्तेमाल सबक्लिनिकल हाइपोथायरायडिज्म (Subclinical Hypothyroidism) नामक स्थिति का परीक्षण करने के लिए भी किया जाता है, जो आमतौर पर कोई बाहरी संकेत या लक्षण नहीं दिखाता। इस स्थिति में, आपके ट्राईआयोडोथायरोनिन और थायरोक्सिन का स्तर सामान्य रहता है लेकिन टीएसएच का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है।

टीएसएच टेस्ट कैसे किया जाता है?

टीएसएच टेस्ट में खून का सैंपल आदि लेना शामिल होता है। खून का सैंपल आम तौर पर कोहनी के अंदरूनी हिस्से की नस से लिया जाता है।

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कुछ प्रक्रियाएं जो नर्स या डॉक्टर द्वारा की जाती हैं, जैसे:

  • सबसे पहले जिस जगह पर सुई लगाई जाती है, उस जगह को एंटीसेप्टिक या स्टेरलाइज़िंग सोलूशन द्वारा साफ कर लिया जाता है।
  • उसके बाद बांह के उपरी हिस्से में पट्टी या प्लास्टिक का बैंड बाध दिया जाता है, जिससे नसें उभर जाती हैं।
  • उसके बाद नस को ढूंढकर उसमें से खून निकालने के लिए सुई लगा दी जाती है। सुई के साथ एक ट्यूब, सिरिंज या शीशी जुड़ी होती है, जिसमें खून इकट्ठा किया जाता है।
  • जब पर्याप्त मात्रा में खून निकाल लिया जाता है, तो डॉक्टर सुई को निकाल लेते हैं, सुई वाली जगह से खून निकलने से रोकने के लिए रूई या बैंडेज लगा देते हैं।

इस पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में कुछ ही मिनट का समय लगता है और उसके बाद सैंपल को लेबोरेटरी में विश्लेषण के लिए भेज दिया जाता है।

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