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क्रायोथेरेपी उपचार के उद्देश्य से शरीर को ठंडा करने की क्रिया को कहा जाता है। हिंदी में इसे क्रायो चिकित्सा कहा जाता है। खेल जगत में और चिकित्सा के क्षेत्र में क्रायोथेरेपी के अंतर्गत बर्फ के टुकड़ो का उपयोग या ठंढे पानी में स्नान (कोल्ड वॉटर इमर्शन - सीडब्लूआई) जैसी तकनीक काम में ली जाती रही है। वर्तमान में पूरे शरीर की क्रायो चिकित्सा अधिक प्रसिद्ध हो रही है।

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क्रायो चिकित्सा में शरीर के किसी अंग पर या पूरे शरीर को बहुत ज्यादा ठंडा कर दिया जाता है। इससे प्रभावित अंगों से गर्मी बाहर निकल जाती है, जिससे रक्त धमनियां एक दम से सिकुड़ जाती है और इंफ्लमैशन को कम करने में मदद मिलती है।

इस लेख में विस्तार से बताया गया है कि क्रायो चिकित्सा क्या है, क्रायो चिकित्सा कैसे होती है और इसके साथ यह भी बताया गया है क्रायोथेरेपी से प्रोस्टेट कैंसर का इलाज कैसे किया जाता है और क्रायो चिकित्सा के क्या लाभ और नुकसान हो सकते हैं।

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  1. क्रायो चिकित्सा क्या है - Cryotherapy kya hai in hindi
  2. क्रायो चिकित्सा कैसे होती है - Cryotherapy procedure in hindi
  3. प्रोस्टेट कैंसर का इलाज क्रायो चिकित्सा से - Cryotherapy procedure for prostate cancer in hindi
  4. क्रायो चिकित्सा के फायदे - Cryotherapy benefits in hindi
  5. क्रायो चिकित्सा के नुकसान - Cryotherapy side effects in hindi

क्रायो थेरेपी का शाब्दिक अर्थ “कोल्ड थेरेपी” है। यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें शरीर को कुछ मिनट के लिए बहुत अधिक ठंडे तापमान पर रखा जाता है।

क्रायो चिकित्सा केवल शरीर के किसी एक अंग की भी की जा सकती है और पूरे शरीर की भी की जा सकती है। किसी निश्चित अंग पर यह थेरेपी विभिन्न तरीकों से की जा सकती है जैसे कि - बर्फ के टुकड़े उपयोग करके, बर्फ से मसाज, ठंडे स्प्रे, बर्फ स्नान इत्यादि।

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पूरे शरीर की क्रायो चिकित्सा का सिद्धांत यह है कि शरीर को कुछ समय के लिए बहुत ही अधिक ठंडी हवा में रखना, इससे आपको कई सारे स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं। इसमें व्यक्ति को एक बंद चैम्बर में बिठा दिया जाता है लेकिन चैम्बर के ऊपर सिर बाहर रखने की जगह रहती है। अंदर का तापमान - 200 से - 300 डिग्री फारेनहाइट तक कम कर दिया जाता है। व्यक्ति को इस अत्यधिक ठंडे तापमान में दो से चार मिनट रहना होता है।

आपको क्रायो चिकित्सा के केवल एक सत्र से भी लाभ हो सकता है लेकिन अधिकतम लाभ तभी लिया जा सकता है जब आप इसका नियमित उपयोग करते हैं। कुछ खिलाडी तो दिन में दो बार इसका उपयोग करते हैं। दूसरे लोग दस दिन तक तो दिन में एक बार और उसके बाद हर महीने में एक बार इसका उपयोग करते हैं।

त्वचा विज्ञान के अंतर्गत क्रायो चिकित्सा में तीन प्रमुख तकनीकों का उपयोग किया जाता है।

पहली, सबसे आसान तकनीक जो आमतौर पर मस्से और अन्य तरह की त्वचा की वृद्धि के लिए ही उपयोग की जाती है। इसमें डॉक्टर रुई के टुकड़े को किसी “क्रायोजेन” जैसे कि तरल नाइट्रोजन में डूबाते हैं और इसे त्वचा की वृद्धि वाली जगह पर सीधा लगा देते हैं ताकि वो त्वचा फ्रीज हो जाए। लगभग -320°F के तापमान पर तरल नाइट्रोजन एक मात्र उपलब्ध क्रायोजेन है।

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इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य होता है त्वचा की उस जगह को तुरंत जमाना और फिर इसे धीरे-धीरे पिघलने देना ताकी उस क्षेत्र में त्वचा की अधिकतम कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो सके। त्वचा की वृद्धि के अाकार के आधार पर दूसरी बार यह प्रक्रिया दोहराने की जरुरत हो सकती है।

दूसरी, इस तकनीक में तरल नाइट्रोजन या किसी अन्य क्रायोजेन को त्वचा पर सीधा स्प्रे किया जाता है। यह फ्रीजिंग पांच से बीस सेकंड तक रह सकती है। इसमें भी आकार के हिसाब से दूसरे सत्र की जरुरत पड़ सकती है। कभी-कभी आपके डॉक्टर थर्मामीटर से जुड़ी हुई एक पतली सुई घाव में डाल कर जाँच करते हैं कि घाव सही तरह से फ्रीज हुआ या नहीं।

तीसरी, इस तकनीक में तरल नाइट्रोजन या किसी अन्य क्रायोजेन को किसी यंत्र में डाला जाता है और इसी यंत्र को त्वचा के वृद्धि वाले भाग पर रखा जाता है ताकि वह जगह फ्रीज़ हो सके। इसमें फ्रीज़ होने में स्प्रे तकनीक की तुलना में दो से तीन गुना अधिक वक्त लगता है।

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क्रायो चिकित्सा का उपयोग जब कैंसर के इलाज में किया जाता है तब इसमें निम्नलिखित तरीका अपनाया जाता है -

  • बाहरी ट्यूमर के लिए तरल नाइट्रोजन को रुई से या स्प्रे से लगाया जाता है।
  • अंदर के किसी ट्यूमर के लिए तरल नाइट्रोजन को एक “क्रायोप्रोब” नाम के यंत्र में डाला जाता है। इसके बाद यह क्रायोप्रोब ट्यूमर के पास रख दिया जाता है। इस यंत्र को शरीर के अंदर के ट्यूमर तक पहुंचाने और आस-पास के टिश्यू को बचाने के लिए डॉक्टर अल्ट्रासाउंड तकनीक का उपयोग करते हैं।

आप इलाज की इस प्रक्रिया को करवाने के बाद उसी दिन भी घर जा सकते है या एक रात हॉस्पिटल में ही रहना पड़ सकता है। आपको किसी भी प्रकार के संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए आपके डॉक्टर एंटी बायोटिक दवा भी दे सकते हैं।

प्रोस्टेट कैंसर का इलाज क्रायोथेरेपी से करने पर रक्त का बहुत कम नुकसान होता है। हालाँकि आपको निम्नलिखित कुछ नुकसान हो सकते हैं -

चोट लग जाने पर जिस तरह से हम सूजन कम करने और जल्दी ठीक करने के लिए बर्फ लगाते है उसी तरह से क्रायो थेरेपी हमारे शरीर को कई प्रकार के फायदे करती है। इसमें वही काम बड़े स्तर पर क्रायो चिकित्सा की फ्रीजिंग तकनीक से जरुरत वाले अंग पर प्रभावी ढंग से किया जाता है। क्रायो चिकित्सा के कुछ लाभ निम्नलिखित हैं -

  • दर्द को प्रभावी रूप से कम करती है तथा कई प्रकार के जीर्ण रोगों से जुड़ी असुविधा को दूर करती है। (और पढ़े - बदन दर्द के घरेलू उपाय)
  • खिलाड़ियों को खेल के बाद जल्दी रिकवर होने में मदद मिलती है।
  • वर्तमान त्वचा की परेशानियों पर लंबे समय तक असरदार सकारात्मक प्रभाव डालती है।
  • शरीर के जिद्दी फैट को दूर करने और मोटापा कम करने में मदद करती है। (और पढ़े - फिट होने के उपाय)
  • शरीर में रक्त संचार सही करके टिश्यूज़ तक ऑक्सीजन और पोषक पहुँचने की प्रक्रिया को सुधारती है।
  • शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थ बाहर निकाल देती है। (और पढ़े - शरीर से विषाक्त पदार्थ कैसे निकाले)
  • शोध से यह भी पता चला है कि मांसपेशियों के दर्द को ठीक करने में भी प्रभावी है। कुछ खिलाडी भी इस बात से सहमति जताते हैं।

किसी भी प्रकार की क्रायो चिकित्सा के सबसे आम साइड इफेक्ट्स त्वचा का सुन्न होना, चुभन जैसा अहसास, त्वचा लाल होना और जलन हो सकते हैं। ये प्रभाव अक्सर अस्थायी होते हैं। अगर 24 घंटे के अंदर ये प्रभाव समाप्त नहीं होते है तो अपने डॉक्टर से मदद लें।

आपको कभी भी थेरेपिस्ट द्वारा बताए गए समय से अधिक समय तक क्रायो चिकित्सा नहीं लेनी चाहिए। पूरे शरीर की क्रायो थेरेपी में यह समय लगभग 4 मिनट का होता है। अगर आप घर पर बर्फ के टुकड़े या बर्फ स्नान का उपयोग करते हैं तो कभी भी 20 मिनट से अधिक किसी भी अंग पर बर्फ नहीं लगानी चाहिए। बर्फ के टुकड़ो को टॉवल में लपेट ले ताकि आपकी त्वचा को नुकसान न हो।

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जिन लोगों को डायबिटीज या तंत्रिकाओं को प्रभावित करने वाली कोई भी बीमारी है उन्हें क्रायो चिकित्सा नहीं करवानी चाहिए। हो सकता है कि उनको इसका पूरा प्रभाव महसूस न हो, जिससे तंत्रिकाओं को और अधिक नुकसान हो सकता है।

नोट - ये लेख केवल जानकारी के लिए है। myUpchar किसी भी सूरत में किसी भी तरह की चिकित्सा की सलाह नहीं दे रहा है। आपके लिए कौन सी चिकित्सा सही है, इसके बारे में अपने डॉक्टर से बात करके ही निर्णय लें।

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