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अस्थमा एक गंभीर श्वसन विकार है जो न केवल हमारे श्वसन संबंधी स्वास्थ्य पर बल्कि दैनिक कार्यों को पूरा करने की हमारी क्षमता पर भी गहरा प्रभाव डालता है। यह सांस, ठंड, खाँसी, घरघराहट, सिरदर्द, छाती की रुकावट और दर्द की तकलीफ का कारण है। लेकिन अच्छी बात यह है कि अस्थमा के लक्षण आसानी से कंट्रोल किए जा सकते हैं। अस्थमा के लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए आपको बहुत ही कम देखभाल ज़रूरी है। कुछ घरेलू उपायों का उपयोग करके आप अस्थमा को कंट्रोल कर सकते हैं।

दैनिक रूप से इन सरल घरेलू उपायो का पालन करें और अस्थमा के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए दवाओं और इनहेलर पर निर्भरता को कम करें।

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  3. अस्थमा का घरेलू नुस्खा है तुलसी - Dama se bachne ke upay hai tulsi in Hindi
  4. अस्थमा से छुटकारा पाये अजवायन से - Dama rog ka upay hai Ajwain in Hindi
  5. अस्थमा से बचने का तरीका है सरसों का तेल और कपूर - Asthma ka gharelu nuksa hai mustard oil in Hindi
  6. अस्थमा का देसी नुस्खा करें गाजर रस से - Asthma ka gharelu upay hai carrot juice in Hindi
  7. अस्थमा का उपाय है वसाका - Asthma ko thik kare vasaka se in Hindi
  8. अस्थमा का घरेलू उपाय करे पिप्पली से - Asthma ko rokne ke upay hai pippali in Hindi
  9. अस्थमा के उपाय के लिए कैमोमाइल चाय - Asthma se chutkara pane ka tarika chamomile tea in Hindi
  10. अस्थमा से बचें अंजीर के सेवन से - Asthma ko thik kare dried figs se in Hindi
  11. अस्थमा दूर करने का उपाय है हींग - Asthma se chutkara paye hing se in Hindi

अदरक और शहद का पारंपरिक संयोजन अस्थमा के लिए बहुत फायदेमंद है। यह गले को शांत करता है, ठंड और खांसी का इलाज करता है और फेफड़ों में हवा के प्रवाह में सुधार करता है। अदरक को शहद और काली मिर्च के साथ रोजाना लें। (और पढ़ें – अदरक की चाय के फायदे)

आंवला अस्थमा के लिए बहुत अच्छा होता है। आंवला श्वसन कार्यों को बरकरार रखता है और खांसी से तत्काल राहत देता है। अस्थमा और इससे संबंधित विकारों से बचने के लिए आप हर सुबह आंवला रस पी सकते हैं या पिसे हुए आंवले और शहद के मिश्रण को खा सकते हैं।

तुलसी के पत्ते श्वसन समस्याओं के लिए एक बहुत ही अच्छा घरेलू उपाय हैं। यह प्राकृतिक ब्रोन्कोडाइलेटर के रूप में कार्य करते हैं और फेफड़ों में हवा के प्रवाह को सुधारता है और ब्रोन्काइटिस से बलगम को निकालता है। 10-15 तुलसी के पत्तों से रस निकालें। बेहतर परिणाम के लिए आप अदरक और शहद को मिला सकते हैं। इस काढ़े को दिन में 2-3 बार लें। सुबह के समय तुलसी के कुछ पत्ते चबाने से भी ठंड और खाँसी से राहत मिलती है। इसके अलावा करेले की जड़, तुलसी के पत्ते और शहद को मिलाकर लेने से अस्थमा और इसके लक्षणों से बहुत राहत मिलती है। यह अस्थमा के लिए सबसे प्राचीन आयुर्वेदिक इलाज में से एक है। इसके अलावा यह वैज्ञानिक रूप से साबित हो गया है कि अस्थमा के लिए कड़वा स्वाद बहुत अच्छा होता है। एक चम्मच के आसपास करेले की जड़ का पेस्ट, शहद और एक चम्मच तुलसी के पेस्ट को मिलाएँ और इसे हर रात बिस्तर पर जाने से पहले अस्थमा को कम करने के लिए खाएँ। (और पढ़ें – डायबिटीज की दवा है करेले का रस)

अस्थमा का इलाज करने के लिए आप दैनिक रूप से आधा चम्मच अजवायन को एक गिलास छाछ के साथ ले सकते हैं। यह श्वसन मार्ग से बलगम को बाहर करती है और साँस लेने की प्रक्रिया को आसान बनाती है। आप अस्थमा के लक्षणों से राहत पाने के लिए छाती पर 2-3 बार अजवायन पेस्ट लगा सकते हैं।

गर्म सरसों के तेल और कपूर के साथ छाती और ऊपरी हिस्से के क्षेत्र की मालिश करने से कंजेस्टेड फेफड़ों में तुरंत राहत मिलती है और श्वास लेने में आसानी होती है। अस्थमा के दौरे के दौरान यह बहुत फायदेमंद होती है।

गाजर और पालक का रस भी अस्थमा को नियंत्रण में रखने का एक बढ़िया तरीका है। लगातार अस्थमा के दौरे को रोकने के लिए रोजाना 2-3 बार गाजर और पालक का रस पिएं। इस रस को तैयार करने के 15 मिनट के भीतर ही पीना चाहिए, उसके बाद यह कम प्रभावी रह जाता है। (और पढ़ें – वजन कम करने के लिए पालक से बनें व्यंजन)

वसाका अस्थमा के लिए सबसे शक्तिशाली जड़ी-बूटियों में से एक है और सैकड़ों वर्षों से श्वसन विकारों के इलाज में उपयोग की जा रही है। यह ठंड और खाँसी से बहुत जल्दी राहत प्रदान करती है, गले को साफ करती है और ब्रोंकाइटिस और अस्थमा में बहुत उपयोगी होती है। दिन में एक या दो बार इसके पत्तों या फूलों का 10-20 मिलीलीटर रस पिएं। आप इसकी जड़ से भी रस तैयार कर सकते हैं। (और पढ़ें - ब्रोंकाइटिस के घरेलू उपचार)

श्वसन विकारों का इलाज करने के लिए आयुर्वेद में पिप्पली का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। यह ठंड और खाँसी से राहत देती है और क्रॉनिक अस्थमा की स्थिति में बहुत उपयोगी है। यह बंद छाती को खोलने में सहायक होती है और हिचकी को कम करती है। शहद के साथ एक चौथाई चम्मच पिप्पली पाउडर को दिन में दो बार लें। गर्भावस्था में, पिप्पली पाउडर को एक छोटी मात्रा में घी के साथ लिया जा सकता है। इसके अधिक सेवन से बचें क्योंकि यह गर्म होने के कारण पेट को परेशान कर सकती है।

(और पढ़ें - प्रेगनेंसी में पेट दर्द हो तो क्या करे और लड़का पैदा करने के उपाय)

अस्थमा के लिए, हर सुबह कैमोमाइल चाय पिएं या कैमोमाइल तेल का उपयोग कर ऊपरी पीठ और छाती की मालिश करें। यह श्वसन के मार्ग को साफ करती है और अस्थमा के हमलों को रोकती है। यह ब्रोन्काइटिस में आराम देती है और आपके तनाव हार्मोन को कम करके एक अच्छी नींद देती है। (और पढ़ें – दस्त की दवा है बबूने का फल)

अंजीर श्वसन मार्ग से बलगम को ख़त्म करके राहत प्रदान करता है। इसके पोषण संबंधी गुण श्वास लेने और श्वसन तंत्र के समग्र स्वास्थ्य को सुधारने में भी मदद करते हैं।  3-4 अंजीर रातभर पानी में भिगोएँ और उन्हें अगली सुबह खाली पेट खाएं। आप बेहतर परिणाम के लिए जिस पानी में इसको भिगोया है वो पानी भी पी सकते हैं।

हींग (Asafetida) पारंपरिक रूप से ब्रोंकाइटिस, अस्थमा आदि श्वसन विकारों का इलाज करने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह एक अच्छा श्वसन उत्तेजक है और ठंड और खाँसी से राहत में मदद करता है। यह कफ बंद कर देता है और बंद छाती को खोलने में सहायक होता है। हींग को पानी के साथ पीसकर पेस्ट बनाएँ। खांसी को दूर करने के लिए इसे अपनी छाती पर लगा सकते हैं। अस्थमा और इसके लक्षणों से निपटने के लिए आप अदरक और शहद के साथ भी इसके पेस्ट का सेवन कर सकते हैं।

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