विटामिन ई एक आवश्यक विटामिन है जो शरीर में कई महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अन्य विटामिनों की तरह इसे भी अधिक मात्रा में लेने से स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएँ हो सकती हैं और इसे ही विटामिन ई ओवरडोज़ या विटामिन ई टाक्सिसिटी के रूप में जाना जाता है।

और पढ़ें -(विटामिन ई के स्रोत, फायदे और नुकसान)

 
  1. विटामिन ई टाक्सिसिटी क्या है?
  2. विटामिन ई टाक्सिसिटी के लक्षण
  3. विटामिन ई युक्त खाद्य पदार्थ
  4. विटामिन ई का सेवन किसे करना चाहिए?
  5. विटामिन ई के नुकसान
  6. अन्य दवाओं के साथ अंतःक्रिया
  7. विटामिन ई की अधिकता या टाक्सिसिटी के उपचार एवं रोकथाम
  8. सारांश

विटामिन ई टाक्सिसिटी तब होती है जब शरीर में अत्यधिक मात्रा में विटामिन ई जमा हो जाता है और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का कारण बनता है। विटामिन ई वसा में घुलनशील विटामिन है जो एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है। यह हृदय रोग, कुछ तरह के कैंसर, दृष्टि संबंधी समस्याओं और मस्तिष्क विकारों के जोखिम को कम कर सकता है। 

विटामिन ई का प्रमुख कार्य रक्त वाहिकाओं को चौड़ा रखना और खून के थक्के बनने से रोकना है। प्रति दिन विटामिन ई के 15 मिलीग्राम का सेवन किया जा सकता है।  

और पढ़ें -(काले घेरों को हटाने के लिए विटामिन ई के फायदे)

 
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और पढ़ें -(विटामिन ई कैप्सूल के फायदे और नुकसान)

 
  • सोयाबीन तेल, सूरजमुखी तेल, कुसुम तेल, गेहूं के बीज का तेल, मकई का तेल

  • सूरजमुखी के बीज, बादाम, हेज़लनट्स, मूंगफली का मक्खन, मूंगफली

  • कीवी, आम, टमाटर

  • पालक, ब्रोकोली

विटामिन ई का सेवन करते समय ध्यान रखने की जरूरत है कि यह वसा में घुलनशील विटामिन है जो शरीर में अत्यधिक वसा को बढ़ा सकता है, खासकर यदि आप आहार या पूरक के माध्यम से अत्यधिक मात्रा में विटामिन ई का सेवन कर रहें हैं।  

विटामिन ई के साथ ही आयरन की कमी को पूरा करना भी बहुत जरूरी हैं । माई उपचार आयुर्वेद के आयरन सप्लीमेंट्स टेबलेट्स को लेकर आप अपनी आयरन की कमी को पूरा कर सकते हैं बिना किसी दुष्प्रभाव के , क्यूँकि ये पूरी तरह सुरक्षित हैं।  

 
 

 

 

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अक्सर लोग इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए, कैंसर के खतरे को कम करने के लिए , या विटामिन के एंटीऑक्सीडेंट और संभावित एंटी-एजिंग प्रभावों के माध्यम से अपने बालों, त्वचा और नाखूनों को मजबूत करने के लिए विटामिन ई का सेवन करते हैं। 

ऐसे लोग जो कम वसा युक्त भोजन करते हैं या ऐसे रोग जो शरीर में कम वसा वाले आहार लेने से होते हैं ,जो वसा को पचाने और अवशोषित करने की क्षमता को प्रभावित करते हैं, जैसे क्रोहन रोग या सिस्टिक फाइब्रोसिस, उनमें विटामिन ई की कमी का खतरा बढ़ सकता है। 

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अत्यधिक विटामिन ई के सेवन से रक्त पतला हो सकता है और बहुत अधिक मात्रा में रक्तस्राव हो सकता है। यह रक्त के थक्के को जमने से भी रोकता है। जिस के कारण रक्तस्रावी स्ट्रोक, या मस्तिष्क में रक्तस्राव के जोखिम बढ़ सकते हैं।  

इसके अलावा, एक अध्ययन से पता चलता है कि अत्यधिक विटामिन ई का सेवन करने से मृत्यु का खतरा भी हो सकता है, लेकिन इस संभावना का पता लगाने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है। 

 

विटामिन ई का सामान्य स्तर पर सेवन करने से अन्य दवाओं के साथ इस के दुष्प्रभाव कम ही देखे जाते हैं। हाँ लेकिन अधिक मात्रा हो जाने पर विटामिन ई ,स्तन कैंसर के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवा टेमोक्सीफेन और अंग प्रत्यारोपण कराने वाले लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली इम्यूनोसप्रेसेंट साइक्लोस्पोरिन के साथ दुष्प्रभाव पैदा कर सकती है।  

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मामूली विटामिन ई टाक्सिसिटी के उपचार के लिए विटामिन ई पूरक का सेवन बंद कर देना उचित रहता है , लेकिन अधिक गंभीर जटिलताओं के लिए डॉक्टर से सलाह लेना ही उचित रहेगा।

विटामिन ई टाक्सिसिटी को रोकने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप विटामिन ई का दैनिक सेवन - पूरक और खाद्य पदार्थ दोनों से - प्रति दिन 1,000 मिलीग्राम से अधिक न लें। अकेले विटामिन-ई युक्त खाद्य पदार्थ खाने से वैसे भी विटामिन ई ओवरडोज़ होने की संभावना नहीं होती।

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हालाँकि विटामिन ई एक आवश्यक पोषक तत्व है, लेकिन ऐसा हो सकता है कि पूरक लेने के कारण लभी आप इस की अधिक मात्रा का सेवन कर लें। विटामिन ई टाक्सिसिटी रक्त के पतले होने जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है और किसी भी कारण से स्ट्रोक और मृत्यु का खतरा बढ़ सकता है। विटामिन ई टाक्सिसिटी को रोकने के लिए प्रति दिन 1,000 मिलीग्राम से अधिक विटामिन ई न लें।

 
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