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मेनोपॉज आने से पहले तक लड़कियों और महिलाओं को हर महीने मासिक धर्म या पीरियड्स का सामना करना पड़ता है। औसतन हर महिला के जीवनकाल में करीब 450 पीरियड्स होते हैं। मासिक धर्म के इस चक्र के साथ महिलाओं को हर महीने दर्द के अलावा कई और मुश्किलों और तकलीफों का भी सामना करना पड़ता है जैसे- पेट में गैस की समस्या, पेट फूलने की दिक्कत (ब्लोटिंग) और उदर-वायु आदि। इनमें से ज्यादातर समस्याएं शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण होती हैं। मासिक धर्म के दौरान शरीर में क्या-क्या होता है, यहां जानें :

  • मासिक धर्म के पहले फेज के दौरान शरीर में एस्ट्रोजेन का लेवल बढ़ने लगता है। एस्ट्रोजेन, निषेचन (फर्टिलाइजेशन) के लिए अंडों को तैयार करता है और उन्हें रिलीज करने का काम करता है। दूसरे फेज में प्रोजेस्टेरॉन का लेवल बढ़ने लगता है जो गर्भाशय की दीवार को आरोपण (इम्प्लांटेशन) के लिए तैयार करता है। (यह वह प्रक्रिया है जब निषेचित अंडा गर्भाशय की दीवार से खुद को जोड़ लेता है) जब, गर्भाशय से बाहर आया यह अंडा (ओवम) निषेचित नहीं होता और गर्भाशय की दीवार से इम्प्लांट नहीं होता तब मासिक धर्म होता है। इसके बाद शरीर में प्रोजेस्टेरॉन और एस्ट्रोजेन का लेवल अचानक से बहुत तेजी से कम होने लगता है।
  • रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि फीमेल सेक्स हार्मोन शरीर के तरल पदार्थों और इलेक्ट्रोलाइट के संतुलन को प्रभावित करता है। शरीर में पानी और नमक के अवरोधण के कारण ही मासिक धर्म के दौरान पेट फूलने (ब्लोटिंग) की समस्या होती है।
  • गर्भाशय से प्रोस्टाग्लैनडिन्स का भी उत्पादन होता है जो सिकुड़न (कॉन्ट्रैक्शन) के लिए जिम्मेदार होता है जिसकी मदद से मासिक धर्म के दौरान खून और गर्भाशय की मोटी दीवार शरीर से बाहर निकलने लगती है। रिसर्च में यह बात साबित भी हुई है कि प्रोस्टाग्लैन्डिस, पेट और आंत को सुरक्षित रखने का काम करती है, लेकिन इसकी वजह से डायरिया जैसे दुष्प्रभाव भी देखने को मिलते हैं।

(और पढ़ें : मासिक धर्म सेहत से जुड़ी इन समस्याओं का भी देते हैं संकेत)

मासिक धर्म के दौरान और उससे ठीक पहले शरीर में होने वाले हार्मोन्स से जुड़े बदलाव के कारण ही शरीर, पानी और नमक को रोककर रखता है और पेरिस्टैल्सिस की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। (पेरिस्टैल्सिस- आंतों की सिकुड़न जैसी गतिविधि है जो खाने को इधर-उधर घुमाने में मदद करती है)। इसकी वजह से मासिक धर्म के दौरान और इससे ठीक पहले, पेट फूला हुआ महसूस होता है, पेट में गैस फील होती है, ब्लोटिंग महसूस होती है और पेट से जुड़ी कई दूसरी समस्याएं भी महसूस होती हैं।

मासिक धर्म के दौरान पेट फूलने की वजह से भले ही दिक्कत या असहजता महसूस हो, लेकिन यह कोई परेशानी की बात नहीं है। आगे पढ़ें और जानें पीरियड्स के दौरान पेट फूलने का कारण, लक्षण और इससे बचने के उपायों के बारे में।

  1. मासिक धर्म में पेट फूलने के लक्षण - Period me bloating ke lakshan
  2. मासिक धर्म के दौरान पेट फूलने का कारण - Period me bloating ka karan
  3. मासिक धर्म के दौरान पेट फूलने से बचने के टिप्स - Period me bloating se bachne ke tips
  4. मासिक धर्म के दौरान पेट फूलना के डॉक्टर

पेट की गड़बड़ी और पेट फूलना ये कुछ ऐसे सामान्य संकेत हैं, जिससे पता चलता है कि आपका मासिक धर्म जल्द ही शुरू होने वाला है। पेट फूलने के लक्षणों में ये बातें भी शामिल होती हैं :

  • पेट में भारीपन महसूस होना
  • पेट में कड़ापन या खिंचाव महसूस होना

(और पढ़ें : पेट फूलने का कारण)

बहुत सी महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान पेट में गैस और उदर-वायु की समस्या महसूस होती है। बहुत सी महिलाओं को ऐसा भी लग सकता है कि उनकी आंत पूरी तरह से भरी हुई है। इन सबकी वजह से भी पेट फूलने की समस्या बढ़ सकती है। 

18 से 55 साल के बीच की 156 स्वस्थ महिलाओं पर की गई छोटी सी स्टडी में से 73 प्रतिशत महिलाओं को मासिक धर्म से पहले पेट और जठरांत्र से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा और करीब 69 प्रतिशत महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान पेट से जुड़ी कम से कम एक समस्या जरूर हुई। इस स्टडी के दौरान 62 प्रतिशत महिलाओं को मासिक धर्म से पहले पेट फूलने की समस्या का सामना करना पड़ा और 51 प्रतिशत महिलाओं को पीरियड के दौरान ब्लोटिंग की दिक्कत हुई।

शरीर में पानी और नमक के अवरोधन और आंत की गतिविधि में बदलाव की वजह से मासिक धर्म से कुछ दिन पहले पेट फूलने की समस्या का सामना करना पड़ता है। बहुत सी महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान कुछ दिन तक पेट फूलने की समस्या बरकरार रहती है। मासिक धर्म के दौरान शरीर में पानी और नमक का असंतुलन और पेट की गतिविधियों में बदलाव के ये कारण हैं :

  • हार्मोन्स से जुड़े बदलाव : शरीर में एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरॉन में हुआ बदलाव, तरल पदार्थों और इलेक्ट्रोलाइट के संतुलन को प्रभावित करते है। इस कारण शरीर में जल अवरोधण (वॉटर रिटेंशन) होने लगता है।
  • आंत की प्रक्रिया का धीमा होना: मासिक धर्म के दौरान, कुछ महिलाओं के शरीर में पेट और आंत की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इस कारण कुछ महिलाओं में पेट में भारीपन और कब्ज की भी दिक्कत हो सकती है।
  • सिकुड़न में बढ़ोतरी : आंत की मांसपेशियों में होने वाली सिकुड़न की वजह से खाना, आंत में इधर से उधर गतिशील होने लगता है। मासिक धर्म के दौरान, गर्भाशय से प्रोस्टाग्लानडिस का उत्पादन होता है- यह एक तरह का फैटी ऐसिड है, जिसकी वजह से सिकुड़न (कॉन्ट्रैक्शन्स) होते हैं ताकि मेन्स्ट्रुअल ब्लड को मासिक धर्म के दौरान शरीर से बाहर निकाला जा सके। प्रोस्टाग्लानडिन्स की वजह से आंत में सिकुड़न बढ़ने लगती है और इसी कारण बहुत सी महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान दस्त या डायरिया का भी अनुभव होता है।

(और पढ़ें : मासिक धर्म में दर्द के उपाय)

पेट फूलने की समस्या कई बार बेहद तकलीफदेह हो सकती है। हालांकि, कई आसान तरीकों से इस परिस्थिति से छुटकारा पाया जा सकता है। इस समस्या से बचने के लिए आप इन टिप्स को अपना सकती हैं :

  • स्वस्थ भोजन करें : कम नमक और फाइबर से भरपूर डाइट का सेवन करें, क्योंकि इसकी मदद से आपके पेट और आंत की गतिविधियां बेहतर होने लगती हैं और शरीर में जल अवरोधन (वॉटर रिटेंशन) को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही साथ खूब सारा पानी पीना न भूलें।
  • मैग्नीशियम से भरपूर चीजें खाएं : मैग्नीशियम मैक्रोमिनरल है। वयस्क महिलाएं जो गर्भवती नहीं हैं और बच्चे को स्तनपान नहीं करा रही हैं, उन्हें रोजाना करीब 310 से 320 मिलिग्राम मैग्नीशियम की जरूरत होती है। पर्याप्त मात्रा में मैग्नीशियम का सेवन करने से मांसपेशियों को आराम मिलता है और प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है। बादाम, मूंगफली, काजू, दलिया और सोया मिल्क - ये कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं, जिसमें मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में होता है।
  • पोटैशियम से भरपूर चीजें खाएं : पोटैशियम, खून में सोडियम की मात्रा को संतुलित करता है और मूत्रत्याग को भी बढ़ाने का काम करता है। इसकी मदद से पेट फूलने की समस्या कम होती है और नमक व पानी का अवरोधन भी कम होता है। पालक, केला और ऐवकाडो ये कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिसमें पोटैशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
  • हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें : थोड़ी बहुत एक्सरसाइज करने से तनाव कम होता है और पीएमएस के लक्षण जैसे- क्रैम्प्स को कम करने में मदद मिलती है। आप चाहें तो मासिक धर्म के दौरान योग, स्विमिंग और सांस संबंधी एक्सरसाइज कर सकती हैं।
  • प्रोबायोटिक और प्रीबायोटिक सप्लिमेंट: अगर आपकी आंत (गट) स्वस्थ है तो वह हार्मोन्स के लेवल में होने वाले बदलाव को आसानी से सह पाएगा। लिहाजा अपनी डाइट में प्रोबायोटिक और प्रीबायोटिक से भरपूर चीजों को शामिल करें। इससे आंत में गुड बैक्टीरिया का विकास बढ़ता है और इससे पेट फूलने के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है।
  • दवाइयां लें : आप चाहें तो शरीर में पानी के अवरोधन को कम करने के लिए मूत्रवर्धक दवाइयों का सेवन कर सकते हैं। एंटीस्पास्मोडिक दवाइयां भी पीएमएस के लक्षणों को कम करने में मदद करती हैं। कब्ज की दिक्कत हो तो महिलाएं ओटीसी लैक्सेटिव या स्टूल सॉफ्टनर का भी इस्तेमाल कर सकती हैं।
  • घरेलू उपाय : आप चाहें तो मासिक धर्म के दौरान पेट फूलने की समस्या से बचने के लिए घरेलू उपायों को भी आजमा सकती हैं। जैसे - गर्म पानी में एक चौथाई चम्मच शाह जीरा डालकर पिएं।

(और पढ़ें : मासिक धर्म को जल्दी रोकने के उपाय)

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References

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