myUpchar प्लस+ सदस्य बनें और करें पूरे परिवार के स्वास्थ्य खर्च पर भारी बचत,केवल Rs 99 में -

आज की भागदौड़ भरी जिन्दगी में सौंदर्य पाने के लिए पाउडर, क्रीम, सीरप, ब्यूटी सैलून तथा सौंदर्य विशेषज्ञों पर महिलाओं की निर्भरता जरूरत से ज्यादा बढ़ गई है। उन्हें लगता है कि महंगे सौंदर्य प्रसाधनों के बाहरी उपयोग तथा महंगे ब्यूटी सैलूनों की ट्रीटमेंट से कोमल, आकर्षक, गोरी तथा मुलायम त्वचा प्राप्त की जा सकती है, लेकिन यह पूरा सच नहीं है। क्योंकि सौंदर्य शारीरिक, भावनात्मक तथा आध्यात्मिक अवस्थाओं का मिश्रण माना जाता है।

व्यक्ति की मानसिक तथा शारीरिक अवस्थाएं एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं तथा मानसिक स्थिति का शारीरिक स्थिति पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इसका एक, दूसरा पहलू भी है, जिसे हम आत्मिक या आंतरिक सौंदर्य के नाम से जानते हैं। आंतरिक सौंदर्य मानव संरचना का हिस्सा माना जाता है तथा आंतरिक सौंदर्य की गणना के बिना सौंदर्य को पूरी तरह से परिभाषित नहीं किया जा सकता तथा किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व के लिए आपको शारीरिक तथा आत्मिक सौंदर्य को समझना होगा।

(यह भी पढ़ें - फटी एड़ियां : शहनाज हुसैन से जानें घर पर ही कैसे मिलेगी राहत)

किसी भी महिला का सौंदर्य महज महंगे उत्पादों के प्रयोग का परिणाम नहीं होता, बल्कि हमारे विचार, भावनात्मक संतुलन भी हमारी त्वचा, बालों आदि के सौंदर्य को पूरी तरह प्रभावित करते हैं। हमारी त्वचा के भावों के माध्यम से पूरी दुनिया हमारी मानसिक स्थिति को जान जाती है। अगर हम शर्मिंदा महसूस करें तो हमारी त्वचा पीली पड़ जाती है जबकि डर के माहौल में हमारी त्वचा सफेद हो जाती है! परेशानियों के दिनों में हमारी त्वचा/रंगरूप रातों रात शुष्क, पीली या फीकी पड़ जाती है। आज की तनाव से भरी भागदौड़ वाली जिन्दगी में बालों का झड़ना, सफेद होना, कील-मुहांसे, झुर्रियां आदि आम समस्या हो गई हैं।

मेडिटेशन मानसिक, शारीरिक तथा आध्यात्मिक सम्बन्धसूत्र ही नहीं है बल्कि मेडिटेशन से तनाव, भय, चिंता, बेताबी तथा व्यग्रता भी समाप्त होती है, जोकि सभी त्वचा के विकारों के लिए उत्तरदायी मानी जाती है। मेडिटेशन से शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, मन शांतचित्त होता है साथ ही तनाव कम होता है तथा हृदय रोगों से मुक्ति मिलती है। इससे त्वचा में प्रकृतिक निखार, कोमलता, आकर्षण तथा चमक झलकती है व आपकी सुंदरता को चार चांद लगते हैं।

(यह भी पढ़ें - शहनाज हुसैन के इन टिप्स से आपकी बढ़ती उम्र जाएगी थम)

मेडिटेशन से त्वचा में प्रकृतिक ‘‘सीवम आयल‘‘ पैदा होता है जोकि त्वचा के हार्मोन को संतुलित करता है तथा त्वचा में ऑक्सीजन के संचार से शरीर में रक्त के प्रवाह को संतुलित करता है, जिससे आपकी सुंदरता बढ़ती है तथा व्यक्तित्व में निखार आता है। प्रारम्भ में आप आधारभूत में शुरू कर सकती हैं। अपने कमरे के शांत वातावरण में बिस्तर या मैट पर लेट जाइए तथा अपने शरीर को पूर्णत: आरामदायक स्थिति में रखिए अगर आपके पीठ/बाजू/कन्धे आदि में दर्द हो या कोई अन्य शारीरिक परेशानी हो तो उसे कतई नजरअंदाज ना करें। अपनी आंखें बंद करके लंबी गहरी सांसें लीजिए तथा उसके बाद सामान्य गहरी सांसें लेते रहिए तथा अपने ध्यान अपनी सांस पर केन्द्रित कीजिए तथा इस प्रक्रिया को चलने दीजिए। प्रारम्भ में आप सुबह, शाम सांसों पर 5 मिनट तक केन्द्रित रखिए तथा बाद में निरंतर अभ्यास से अपनी समय अवधि बढ़ाते रहिए।

आप मेडिटेशन के समय सामाजिक या अन्य घटनाओं पर ज्यादा केन्द्रित कतई ना कीजिए। आप घटनाओं को अपने विचारों में आने दीजिए, लेकिन उनके ऊपर जरूरत से ज्यादा फोकस मत कीजिए बल्कि उन्हें धारा प्रवाह बाहर जाने दीजिए तथा किसी भी विचार से अपने आपको संबधित मत कीजिए, तथा उस पर अपने विचार कतई मत मुड़ने दीजिए। विचारों के नियमित धारा प्रवाह बहने से एक समय में आपके मन में स्वतः ही विचार शून्यता आ जाएगी तथा आप ध्यान मुद्रा में जुड़ जाएंगे।

(यह भी पढ़ें - शहनाज हुसैन के ये होम मेड पैक अपनाएं और अपनी त्वचा को मुलायम चमकदार अपनाएं)

मेडिटेशन को अपनी जीवन शैली में जोड़ते हुए इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाइए। मेडिटेशन से दवाई की तरह किसी भी तत्काल आराम/परिणाम की कतई अपेक्षा ना करें। मेडिटेशन एक निरंतर प्रक्रिया है तथा इसके परिणाम आपको एक निश्चित समय अवधि के बाद ही मिलेंगे। मेडिटेशन में अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए कतई धैर्य ना छोड़ें, बल्कि प्रकृति को अपना चक्र पूरा करने दें। मेडिटेशन के एक घंटा पहले किसी भी खानपान, चाय, काफी आदि से परहेज करें तथा आप नियमित मेडिटेशन करते हैं तो मांसाहारी भोजन, मदिरा, अंडों आदि के सेवन से परहेज करना ही बेहतर होगा। नियमित मेडिटेशन से शरीर में प्राण वायु का संचार होता है, जिससे शरीर में टिशू तथा सैल पुनः जीवित होते हैं, जिससे शरीर में यौवन तथा सौंदर्य बहाल होता है तथा आपका व्यक्तित्व निखरकर बाहर आता है। 

मेडिटेशन से आपका ब्लड प्रेशर नियमित रूप से संतुलित होता है जिससे तनाव से जुड़ी बीमारियां जैसे सिरदर्द, अल्सर, भूख ना लगना, मांसपेशियों में खिंचाव, तथा जोड़ों का दर्द से मुक्ति मिलती है। 

वैज्ञानिक तौर पर यह प्रमाणित हो चुका है कि मेडिटेशन शरीर में एक ऐसा केमिकल रिहा करता है, जो कि शरीर में तनाव तथा हार्मोन के केमिकल का प्रतिकार करके आपको पूर्ण मानसिक शांति की स्थिति में लाता है तथा आपके यौवन और सौंदर्य में चार चांद लगाता है।

और पढ़ें ...
ऐप पर पढ़ें