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परिचय

अल्सर या छाला एक प्रकार का दर्दनाक घाव होता है, जो धीरे-धीरे ठीक होता है और कई बार फिर से विकसित हो जाता है। अल्सर होना कोई असामान्य स्थिति नहीं है। अल्सर कैसे दिखाई देते हैं और उनके क्या लक्षण हो सकते है, ये कई स्थितियों पर निर्भर करता है, जैसे अल्सर किस कारण हुआ है और वह शरीर के किस हिस्से पर विकसित हुआ है। अल्सर शरीर के किसी भी हिस्से में विकसित हो सकते हैं, जिसमें आंखें, त्वचा या पेट शामिल है। अल्सर के प्रकार के अनुसार ही उसके लक्षण विकसित होते हैं। 

अल्सर के कुछ सामान्य कारण शारीरिक व भावनात्मक तनाव, अधिक दवाएं खाना, डायबिटीज, लंबे समय तक बेड पर रहना या शरीर में पोषक तत्वों की कमी होना आदि हो सकते हैं। इसके लक्षणों में दर्द, सूजन, लालिमा, खुजली, बुखार, अपच और वजन कम होना आदि शामिल है।

कुछ मामलों में अल्सर अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन अन्य मामलों में अल्सर से होने वाली गंभीर समस्याओं से बचाव करने के लिए मेडिकल इलाज व ऑपरेशन आदि करना पड़ सकता है। अल्सर से होने वाली जटिलताओं में खून बहना, इन्फेक्शन होना या नेक्रोसिस (गल जाना) आदि शामिल है। 

(और पढ़ें - खून बहना कैसे रोकें)

  1. अल्सर क्या है - What is Ulcer in Hindi
  2. अल्सर के लक्षण - Ulcer Symptoms in Hindi
  3. अल्सर के प्रकार व कारण - Ulcer Types & Causes in Hindi
  4. अल्सर के बचाव - Prevention of Ulcer in Hindi
  5. अल्सर का परीक्षण - Diagnosis of Ulcer in Hindi
  6. अल्सर का इलाज - Ulcer Treatment in Hindi
  7. अल्सर की जटिलताएं - Ulcer Risks & Complications in Hindi
  8. अल्सर की दवा - Medicines for Ulcer in Hindi
  9. अल्सर के डॉक्टर

अल्सर क्या है - What is Ulcer in Hindi

अल्सर क्या है?

अल्सर शरीर की त्वचा की झिल्ली में होने वाला कट, छेद या दरार होती है, जिसकी वजह से उस हिस्से से जुड़ा अंदरुनी अंग ठीक तरह से काम नहीं कर पाता। 

(और पढ़ें - त्वचा विकार का इलाज)

अल्सर के लक्षण - Ulcer Symptoms in Hindi

अल्सर के लक्षण क्या हैं?

अल्सर के लक्षण उसके प्रकार पर निर्भर करते हैं:

  • दबाव अल्सर के लक्षण: 
    • त्वचा पर स्पंज के जैसा दाग बनना जो छूने पर गर्म व कठोर दिखाई दे
    • सूजन आना
    • पस जैसा पदार्थ निकलना
    • त्वचा के प्रभावित हिस्से का रंग बिगड़ जाना
    • प्रभावित क्षेत्र में दर्द व खुजली महसूस होना
      (और पढ़ें - सूजन कम करने के उपाय
       
  • जननांग अल्सर के लक्षण:
    • आपको अपने जननांग क्षेत्रों के पास दर्द महसूस होता है और छूने पर दर्द और बढ़ जाता है।
    • खुजली हो सकती है।
       (और पढ़ें - खुजली दूर करने के घरेलू उपाय)
       
  • डायबिटिक फुट अल्सर के लक्षण: 
    • सूजन, रंग बिगड़ना और घाव के आस-पास की त्वचा गर्म महसूस होना
    • अल्सर से बदबूदार द्रव निकलना
    • अल्सर को छूने पर दर्द होना और कठोर महसूस होना
    • अल्सर के आसपास की त्वचा सख्त व मोटी हो जाना
      ( और पढ़ें - डायबिटिक फुट अल्सर का इलाज)
  • एनल फिशर के लक्षण:
    • मल त्याग करने के दौरान गुदा में तीव्र दर्द होगा
    • मल में खून की रेखाएं दिखाई देना या गुदा को पोंछने के बाद पेपर पर खून लगा दिखाई देना
    • गुदा के आस पास की त्वचा में दरार दिखाई देना
    • दरार के आगे एक छोटी सी गांठ दिखाई देना
    • गुदा क्षेत्र में जलन व खुजली महसूस होना
      (और पढ़ें - एनल फिशर के घरेलू उपाय)
  • कॉर्नियल अल्सर के लक्षण: 
  • मुंह के अल्सर और एफथॉस अल्सर के लक्षण:
    • मुंह के अंदर की त्वचा में एक या अधिक दर्दनाक घाव बनना
    • घाव के आस-पास की त्वचा में सूजन होना
    • चबाने व दांतों को ब्रश करने पर दर्द होना
    • अधिक नमकीन, मसालेदार व खट्टे खाद्य पदार्थ खाने पर मुंह में तकलीफ महसूस होना
    • भूख ना लगना
      (और पढ़ें - दांत में दर्द का इलाज)
       
  • पेप्टिक अल्सर के लक्षण:
  • वेनस अल्सर के लक्षण:
    • टखने में सूजन
    • अल्सर के आस-पास की त्वचा का रंग बिगड़ जाना या काले रंग की हो जाना
    • अल्सर के आस-पास की त्वचा सख्त हो जाना इससे आपकी टांग कठोर हो जाती है और आकार में उल्टी रखी शैंपेन की बोतल की तरह दिखाई देती है। 
    • टांग में भारीपन महसूस होना
    • टांगों में दर्द व सूजन
    • टांग की त्वचा पपड़ीदार व लाल हो जाना और टांग में खुजली होना
    • टांगों के अंदर की नसों में सूजन आना और उनका आकार बढ़ जाना (वैरिकोज वेन्स)
    • अल्सर से बदबूदार द्रव निकलना
      ( और पढ़ें - टखने में फ्रैक्चर का इलाज)
  • अल्सरेटिव कोलाइटिस के लक्षण:

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि आपके शरीर पर कहीं पर कोई अल्सर बन गया है जो कुछ दिनों से ठीक नहीं हो रहा है, तो आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए। 

इसके अलावा निम्न स्थितियों में भी डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए:

  • अल्सर से द्रव बहना
  • अल्सर से खून निकलना
  • उल्टी के साथ खून आना
  • मल में खून आना
  • खाना खाने के बाद दर्द होना

(और पढ़ें - उल्टी रोकने के घरेलू उपाय)

अल्सर के प्रकार व कारण - Ulcer Types & Causes in Hindi

अल्सर क्यों होते हैं?

अल्सर के प्रकार के अनुसार उनके विकसित होने के कारण भी अलग-अलग हो सकते हैं, जैसे:

  • दबाव अल्सर:
    इन्हें बेड अल्सर या बेड सोर्स भी कहा जाता है। दबाव अल्सर त्वचा व उसके नीचे के ऊतकों को होने वाली क्षति होती है। दबाव अल्सर मुख्य रूप से त्वचा पर लंबे समय तक दबाव रहने के कारण होता है।
    (और पढ़ें - बेडसोर का कारण)
     
  • जननांग अल्सर:
    ये जननांग क्षेत्रों में होने वाले अल्सर होते हैं। ये अल्सर आमतौर पर योनी या लिंग पर ही विकसित होते हैं। इसके अलावा ये गुदा व उसके आसपास के क्षेत्र में भी हो सकते हैं। जननांग अल्सर आमतौर पर यौन संचारित इन्फेक्शन के कारण होते हैं। इनमें दाद, सिफलिस और शैंक्रॉइड आदि शामिल है। इसके अलावा जननांग अल्सर सूजन व लालिमा संबंधी रोगों, चोट लगने या त्वचा पर लगाए जाने वाले किसी प्रोडक्ट के गलत इफेक्ट के रूप में भी हो सकते हैं।
    (और पढ़ें - जननांग दाद का इलाज)
     
  • अल्सरेटिव डर्मेटाइटिस:
    यह त्वचा संबंधी एक प्रकार का विकार होता है, जिसमें बैक्टीरिया विकसित होने लग जाते हैं। यह अक्सर त्वचा पर चोट आदि लगने से ही शुरू होता है। 
    (और पढ़ें - एटॉपिक डर्मेटाइटिस के लक्षण)
     
  • एनल फिशर:
    गुदा के आसपास या मलाशय के भीतर किसी प्रकार की दरार या छेद को एलन फिशर कहा जाता है। एनल फिशर आमतौर पर बड़े आकार या कठोर मल निकलने के कारण होता है। लंबे समय से कब्ज रहना या बार-बार दस्त लगने के कारण भी गुदा के आस-पास की त्वचा में दरार या छेद हो सकता है। (और पढ़ें - फिशर का इलाज)
     
  • डायबिटिक फुट अल्सर:
    यह डायबिटीज रोग में होने वाली मुख्य जटिलताएं में से एक है। डायबिटीज में खून का सर्कुलेशन काफी कम हो जाता है, जिस कारण से खून पर्याप्त मात्रा में पैरों तक नहीं पहुंच पाता। खून का सर्कुलेशन कम होने पर अल्सर ठीक होने में भी काफी समय लगने लगता है। 
    (और पढ़ें - डायबिटिक फुट अल्सर क्या है)
     
  • कॉर्नियल अल्सर:
    आंख के कॉर्निया (नेत्रपटल) में होने वाले अल्सर को कॉर्नियल अल्सर कहा जाता है। इसमें कॉर्निया में खुला घाव बन जाता है। कॉर्निया में होने वाले अल्सर के काफी सारे कारण हो सकते हैं, इनमें इन्फेक्शन, आंख में केमिकल चला जाना या चोट लगना, कॉर्निया में सूखापन होना और कॉन्टेक्ट लेंस को अधिक पहनना या ठीक से ना पहन पाना आदि शामिल हैं। 
    (और पढ़ें - कॉर्नियल अल्सर के लक्षण)
     
  • मुंह के अल्सर:
    मुंह के अंदर किसी प्रकार के खुले घाव को मुंह के छाले या अल्सर कहा जाता है। ये छाले आमतौर पर छोटे व दर्दनाक घाव होते हैं, जो मुंह या मसूड़ों की जड़ों में विकसित होते हैं। ऐसे कई कारक हैं, जिनके कारण मुंह के अल्सर हो जाते हैं जैसे तनाव, हार्मोन बदलाव, ठीक से सो ना पाना और विटामिन में कमी आदि। 
    (और पढ़ें - मुंह के छाले का इलाज)
     
  • कैंकर सोर (नासूर):
    इसे एफथॉस अल्सर भी कहा जाता है, यह मुंह के छाले का एक विशेष प्रकार होता है। यह मुख्य रूप से भावनात्मक तनाव, गलती से दांतों से कट जाना, पोषक तत्वों की कमी या वायरल इन्फेक्शन के कारण हो सकते हैं। 
    (और पढ़ें - नासूर का कारण)
     
  • पेट के अल्सर (पेप्टिक अल्सर):
    यह एक प्रकार का खुला घाव होता है, जो पेट की अंदरुनी परत और छोटी आंत के ऊपरी भाग में होते हैं। पेप्टिक अल्सर आमतौर पर बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण होते हैं। इसके अलावा अधिक मात्रा में पेन किलर दवाएं खाने के कारण या भावनात्मक तनाव बढ़ने के कारण भी पेट में छाले हो सकते हैं। (और पढ़ें - पेट में अल्सर का इलाज)
     
  • वेनस अल्सर:
    जब नसों के वाल्व ठीक से काम नहीं करते तब यह अल्सर होता है। टांगों में स्थित नसों का काम खून को वापस हृदय तक पहुंचाना होता है, जो कई बार अपना काम ठीक से नहीं कर पाती। ऐसा अक्सर इसलिए होता है, क्योंकि नसों में वापस खून आने से रोकने वाले वाल्व ठीक तरीके से काम नहीं कर पाते। ऐसा होने पर खून वापस टांग के नीचे जाने लग जाता है और टांग के अंदर दबाव बढ़ जाता है। इस स्थिति में त्वचा कमजोर हो जाती है और त्वचा पर लगा कट या खरोंच को ठीक होने में भी समय लगता है। 
    (और पढ़ें - हृदय रोग का इलाज​)
     
  • अल्सरेटिव कोलाइटिस:
    यह इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज का एक प्रकार होता है। यह तब होता है जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली भोजन, अच्छे बैक्टीरिया और बड़ी आंत के अंदर की कोशिकाओं को गलती से क्षति पहुंचाने लग जाती है। सफेद रक्त कोशिकाएं जो आमतौर पर आपको अपने कोलन की परत में किसी प्रकार की क्षति होने से रक्षा करती है। वे सूजन, लालिमा और अल्सर का कारण बनते हैं।

(और पढ़ें - अल्सरेटिव कोलाइटिस का कारण)

अल्सर के बचाव - Prevention of Ulcer in Hindi

अल्सर की रोकथाम कैसे करें?

जीवनशैली में कुछ सुधार व बदलाव करके कुछ प्रकार के अल्सर की रोकथाम की जा सकती है, जैसे: 

  • शराब छोड़ दें
  • धूम्रपान छोड़ दें और धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के धुएं से भी बचें
  • दवाओं को भोजन के साथ लें
  • खूब मात्रा में पानी पिएं (और पढ़ें - गुनगुना पानी पीने के फायदे)
  • नियमित रूप से गुनगुने पानी में नमक डालकर कुल्ला करें
  • संतुलित व पोषक तत्वों से भरपूर भोजन खाएं (और पढ़ें - संतुलित आहार का महत्व)
  • अच्छी स्वच्छता बनाए रखें
  • कुछ खाद्य पदार्थों को ना खाएं जैसे मसालेदार खाना, खट्टे फल और अधिक वसायुक्त भोजन आदि (और पढ़ें - फलों के फायदे)
  • शरीर की अंदरूनी बीमारियों को कंट्रोल करके रखें
  • पेन किलर दवाओं का बहुत अधिक सेवन न करें
  • शरीर का सामान्य वजन बनाए रखें

(और पढ़ें - पेन किलर दवाओं के नुकसान)

अल्सर का परीक्षण - Diagnosis of Ulcer in Hindi

अल्सर की जांच कैसे की जाती है?

अल्सर की जांच करने के लिए डॉक्टर आपके आपके लक्षणों के बारे में पूछेंगे और आपका शारीरिक परीक्षण करेंगे।

यदि आपके डॉक्टर को लगता है कि आपको पेप्टिक अल्सर हो गए हैं, तो वे आपके पेट को छूकर देखेंगे और आपसे पूछेंगे कि कहीं पेट में दर्द, पेट फूलना या पेट को छूने पर दर्द होने जैसी कोई समस्या तो नहीं हो रही है। इस दौरान डॉक्टर स्टीथोस्कोप उपकरण की मदद से पेट से आ रही आवाजें भी सुन सकते हैं। 

जांच के दौरान कुछ अन्य टेस्ट भी करने पड़ सकते हैं, जैसे:

  • एंडोस्कोपी:
    इस प्रक्रिया में एक पतली, लंबी व लचीली ट्यूब का इस्तेमाल किया जाता है जिसके एक सिरे पर कैमरा लगा होता है। इस ट्यूब की मदद से पेट व आंत की अंदरूनी परत की जांच की जाती है। इस उपकरण की मदद से अंदरूनी त्वचा से सेंपल के रूप में टुकड़ा भी निकाला जा सकता है, इस प्रक्रिया को बायोप्सी कहा जाता है।
    (और पढ़ें - एंडोस्कोपी क्या है)
     
  • बेरियम एनिमा:
    यह एक गाढ़ा द्रव होता है, जिसकी मदद से एक्स रे में और साफ छवि आती है।
     
  • डायबिटीज की जांच करना:
    यदि अल्सर ठीक नहीं हो रहे हैं, तो यह समस्या डायबिटीज से जुड़ी हो सकती  है। डॉक्टर आपके डायबिटीज की जांच करने के लिए ब्लड शुगर टेस्ट, फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट या एचबीए1सी टेस्ट आदि कर सकते हैं।
     
  • स्वैब टेस्ट:
    सेकेंड्री इन्फेक्शन की जांच करने के लिए स्वैब टेस्ट किया जा सकता है। 

(और पढ़ें - लैब टेस्ट क्या है)

अल्सर का इलाज - Ulcer Treatment in Hindi

अल्सर का इलाज कैसे किया जाता है?

अल्सर का इलाज उसके प्रकार के अनुसार किया जाता है, जैसे:

  • दबाव अल्सर:
    नियमित रूप से पॉजिशन बदलना, दबाव कम करने के लिए विशेष प्रकार के गद्दों का उपयोग करना और क्रीम आदि से अल्सर को ढँकना प्रेशर अल्सर के इलाज के मुख्य विकल्प हैं। कुछ गंभीर मामलों में दबाव अल्सर को ठीक करने के लिए ऑपरेशन आदि करना पड़ सकता है।
     
  • जननांग अल्सर:
    जननांगों में होने वाले अल्सर का इलाज करने के लिए अक्सर एंटीबायोटिक दवाओं का कोर्स दिया जाता है। एंटीबायोटिक दवाओं की मदद से यौन संचारित संक्रमण को खत्म कर दिया जाता है, जिससे अल्सर ठीक हो जाते हैं।
     
  • डायबिटिक फुट अल्सर:
    यदि दबाव को कम करने उचित  इलाज करने के बाद भी अल्सर ठीक नहीं हो रहे या इन्फेक्शन लगातार बढ़ रहा है, तो इस स्थिति का इलाज करने के लिए डॉक्टर अक्सर एंटीबायोटिक, एंटीप्लेटलेट या एंटी क्लोटिंग दवाएं देते हैं। ऐसी स्थिति में ऑपरेशन करवाने की आवश्यकता कम ही पड़ती है।

    हालांकि यदि किसी भी इलाज से अल्सर ठीक नहीं हो रहा है और इन्फेक्शन होने का खतरा लगातार बढ़ रहा है तो ऐसी स्थिति में ऑपरेशन किया जाता है। ऑपरेशन की मदद से इन्फेक्शन को रोक दिया जाता है जिससे स्थिति और बदतर नहीं हो पाती। (और पढ़ें - डायबिटीज डाइट चार्ट)
     
  • एनल फिशर:
    एक्युट एनल फिशर 6 हफ्तों से अधिक समय तक नहीं रहता। एक्युट एनल फिशर आम समस्या है और घरेलू उपायों की मदद से ही ठीक हो जाती है। क्रोनिक एनल फिशर आमतौर पर 6 हफ्तों से ज्यादा समय तक भी रह लेते हैं और इनका इलाज करने के लिए दवाएं व ऑपरेशन आदि करना पड़ सकता है। ऐसे में खूब मात्रा में पानी पीना चाहिए और फाइबर से भरपूर भोजन खाना चाहिए।
     
  • कॉर्नियल अल्सर:
    यदि अल्सर छोटा है और कॉर्निया की सतह पर हुआ है तो वह कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। आंख के अंदर का कचरा साफ करने और सतह पर बने अल्सर को जल्दी ठीक करने के लिए अपनी आंख को दिन में एक या दो बार साफ पानी या सेलाइन सोलूशन के साथ धोएं। यदि आपके डॉक्टर को लगता है कि बैक्टीरियल संक्रमण के कारण आपको कॉर्नियल अल्सर हुआ है, तो उसका इलाज करने के लिए कॉर्निया में बार-बार एंटीबायोटिक क्रीम लगाई जाती है। (और पढ़ें - आंख में दर्द होने पर क्या करना चाहिए)
     
  • मुंह के अल्सर और कैंसर सोर (नासूर):
    ऐसी स्थिति में डॉक्टर ऐसे माउथवॉश का उपयोग करने के लिए कहते हैं जो अल्कोहल से मुक्त हो और उसमें क्लोरिक्सीडिन ग्लूकोनेट हो। इसके अलावा डॉक्टर स्टेरॉयड माउथवॉश या मलहम लगाने के लिए भी कह सकते हैं। हल्के गुनगुने पानी में थोड़ा सा नमक डालकर नियमित रूप से कुल्ला करें। दर्द को कम करने वाली दवाएं जैसे पैरासीटामोल आदि लें। अल्सर पर एंटीसेप्टिक जेल लगाएं। पोषक तत्वों के सप्लीमेंट्स लें जैसे फोलिक एसिड, विटामिन बी6, विटामिन बी12 और जिंक आदि। (और पढ़ें - नमक के गरारे करने के फायदे)
     
  • पेप्टिक अल्सर:
    पेट के एसिड की मात्रा को कम करने के लिए या एसिड को बेअसर करने के लिए डॉक्टर कुछ दवाएं लिख सकते हैं, जिनमें ओमेप्राजोल, रेनिटिडिन और एंटासिड्स आदि शामिल हैं। यदि पेप्टिक अल्सर दवाओं से ठीक ना हो पाए या उससे गंभीर जटिलताएं विकसित होने लग जाएं जैसे पेट के अंदर खून बहना, तो ऐसी स्थिति में इसका इलाज करने के लिए ऑपरेशन किया जाता है। (और पढ़ें - पेट में इन्फेक्शन का इलाज)
     
  • वेनस अल्सर:
    उचित उपचार करने पर वेनस अल्सर के ज्यादातर मामले तीन से चार महीनों के भीतर ठीक हो जाते हैं। डॉक्टर आपको कुछ निश्चित समय के लिए आपकी टांग को हृदय के स्तर से ऊपर उठा कर रखने के लिए भी कह सकते हैं, ऐसा करने से खून के सर्कुलेशन में मदद मिलती है। डॉक्टर आमतौर पर लगातार आधा घंटा और दिन में कुल तीन से चार घंटे तक ऐसा करने के लिए कह सकते हैं।

    यदि अल्सर बैक्टीरिया से संक्रमित हो चुके हैं, तो संक्रमण को खत्म करने के लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। कुछ मामलों में टांग में खून का सर्कुलेशन ठीक करने के लिए ऑपरेशन भी किया जा सकता है। ऐसा करने से अल्सर ठीक होने लग जाते हैं और उसके बाद हमरा होने वाली अन्य समस्याओं से भी बचाव हो जाता है।
     
  • अल्सरेटिव कोलाइटिस:
    इसके इलाज में मुख्य रूप से दवाएं, आहार में बदलाव और सर्जरी आदि शामिल है। दवाओं में एंटी-इन्फ्लेमेटरी दवाएं, प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाने वाली दवाएं और कोर्टिकोस्टेरॉयड दवाएं आदि शामिल हैं। अन्य उपचारों में एंटीबायोटिक दवाएं, दर्द निवारक दवाएं और दस्त की रोकथाम करने वाली दवाएं आदि शामिल हैं। कुछ मामलों में अल्सरेटिव कोलाइटिस को हटाने के लिए ऑपरेशन आदि करना पड़ सकता है। 

(और पढ़ें - पेट में इन्फेक्शन होने पर क्या करे)

अल्सर की जटिलताएं - Ulcer Risks & Complications in Hindi

अल्सर से क्या जटिलताएं होती हैं?

त्वचा पर अल्सर होने पर निम्नलिखित समस्याएं विकसित हो सकती हैं:

  • खून में विषाक्तता:
    यदि किसी व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली अत्यधिक कमजोर है और उसकी त्वचा पर अल्सर बने हुए हैं जो संक्रमित हो गए हैं। ऐसी स्थिति में इन्फेक्शन अल्सर से खून व अन्य अंगों तक फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इस स्थिति को ब्लड पॉइजनिंग या सेप्टिसीमिया के नाम से जाना जाता है। (और पढ़ें - ब्लड इन्फेक्शन के लक्षण)
     
  • ओस्टियोमायलाइटिस (Osteomyelitis):
    इस स्थिति में इन्फेक्शन हड्डियों तक फैल जाता है। (और पढ़ें - हड्डी में दर्द का कारण)
     
  • नेक्रोसिस और गैंगरीन:
    यह भी एक प्रकार का इन्फेक्शन होता है। जब कोई अल्सर बैक्टीरिया से संक्रमित हो जाता है तो यह इन्फेक्शन होता है। गैंगरीन और नेक्रोसिस में ऊतक नष्ट होने लग जाते हैं। (और पढ़ें - एथेरोस्क्लेरोसिस का इलाज)

मुंह के अल्सर से होने वाली जटिलताएं:

मुंह के अल्सर से बहुत ही कम मामलों में कोई जटिलता हो पाती है। ज्यादातर मामलों में मुंह के छाले समय के साथ अपने धीरे-धीरे ठीक होने लग जाते हैं। इससे कुछ जटिलताएं भी हो सकती है, जिनमें निम्न शामिल हैं:

पेट में अल्सर से होने वाली जटिलताएं:

  • परफोरेशन (Perforation):
    इसमें पेट या छोटी आंत की परत में एक छेद बन जाता है। यह अल्सर होना बहुत ही गंभीर स्थिति होती है, यदि इसका इलाज ना किया जाए तो यह प्रभावित परत को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर देता है।
     
  • ब्लीडिंग होना:
    यदि पेट या छोटी आंत के अंदर की कोई रक्त वाहिका क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो उनसे खून बहने लगता है। ऐसी स्थिति में उल्टी या मल में खून आने लगता है या काले रंग का मल आने लगता है।
     
  • भोजन की रुकावट होना:
    इस स्थिति में भोजन आपके पेट से निकल नहीं पाता। इसमें अल्सर पेट के एक सिरे में विकसित हो जाते हैं, जिस कारण वहां पर सूजन व स्कार ऊतक बनने लग जाते हैं। इस वजह से आंत का सिरा संकुचित हो जाता है। 

(और पढ़ें - खाना खाने का सही समय)

Dr. Abhishek Mishra

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अल्सर की दवा - Medicines for Ulcer in Hindi

अल्सर के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
Schwabe Corallium rubrum CHSchwabe Corallium rubrum 1000 CH96
Bjain Sarsaparilla DilutionBjain Sarsaparilla Dilution 1000 CH63
ADEL 40 And ADEL 86 KitAdel 40 And Adel 86 Kit 499
SBL Sarsaparilla Mother Tincture QSBL Sarsaparilla Mother Tincture Q 145
Schwabe Nymphaea odorata MTSchwabe Nymphaea odorata MT 148
Schwabe Anthracinum CHSchwabe Anthracinum 10M CH148
Bjain Carcinosinum DilutionBjain Carcinosinum Dilution 1000 CH63
SBL Mercurius iodatus flavus DilutionSBL Mercurius iodatus flavus Dilution 1000 CH86
SBL Mercurius praecipitatus ruber DilutionSBL Mercurius praecipitatus ruber Dilution 1000 CH86
ADEL Sarsaparilla Mother Tincture QADEL Sarsaparilla Mother Tincture Q 184
Dr. Reckeweg Radium Brom DilutionDr. Reckeweg Radium Brom Dilution 1000 CH136
ADEL 78 Dercut OintmentADEL 78 Dercut Ointment340
ADEL 86 Verintex N External DropADEL 86 Verintex N External Drop200
SBL Monotropa uniflora DilutionSBL Monotropa uniflora Dilution 1000 CH86
Bjain Lyssinum DilutionBjain Lyssinum Dilution 1000 CH63
SBL Stillingia silvatica DilutionSBL Stillingia silvatica Dilution 1000 CH86
ADEL Plumbum Iod DilutionADEL Plumbum Iod Dilution 1000 CH144
Schwabe Lyssinum CHSchwabe Lyssinum 1000 CH96
Dr. Reckeweg Plumbum iodatum DilutionDr. Reckeweg Plumbum iodatum Dilution 1000 CH136
Schwabe Sarsaparilla CHSchwabe Sarsaparilla 1000 CH96
SBL Bismuthum nitricum DilutionSBL Bismuthum nitricum Dilution 1000 CH86
ADEL Vinca Minor Mother Tincture QADEL Vinca Minor Mother Tincture Q 208
Bjain Sarsaparilla Mother Tincture QBjain Sarsaparilla Mother Tincture Q 319
Bjain Stillingia silvatica DilutionBjain Stillingia silvatica Dilution 1000 CH63

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