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कवक या फफूंदी या फंगस (Fungus) सूक्ष्मजीव होते हैं जो घर के बाहर और अंदर दोनों जगह पाए जाते हैं। कई तरह के कवक बिना कोई नुकसान पहुंचाए आपकी त्वचा पर सालों तक जीवित रहते हैं। हालाँकि, कुछ ऐसे कारक होते हैं जो कवक के बढ़ने या बदलने का कारण बनते हैं और इस वजह से ये फंगल इन्फेक्शन का रूप लेने लगते हैं।

ये संक्रमण त्वचा की सतह या अन्य क्षेत्र जो गर्म या नम रहते हैं, वहां होता है। आम तौर से इस संक्रमण के कारण बहुत ज़्यादा खुजली होने लगती है। कुछ समान्य फंगल संक्रमण के प्रकार हैं

  • एथलिट फुट (athlete's foot)
  • जोक इच (jock itch)
  • रिंगवर्म (दाद)
  • ओनिकोमीकोसिस (onychomycosis; जो नाख़ून और नाख़ून के बीच के हिस्से को नुकसान पहुंचाता है)
  • कैंडिडिआसिस (candidiasis) जो मुँह, योनि और यूरिनरी ट्रैक्ट को प्रभावित करता है।

(और पढ़ें - योनि में यीस्ट संक्रमण)

कोई भी फंगल इन्फेक्शन से संक्रमित हो सकता है और आजकी जीवनशैली में ये होना बहुत आम है। कुछ घरेलू नुस्खे हैं जिनकी मदद से आप फफूंदी को खत्म कर सकते हैं जिनकी वजह से ये संक्रमण होता है, और साथ ही लक्षणों को भी दूर करने में मदद मिलती है। 

तो आइये आपको बताते हैं फंगल इन्फेक्शन के कुछ घरेलू उपाय –

  1. फंगल इन्फेक्शन का घरेलू नुस्खा है सेब का सिरका - Fungal infection ka gharelu upay hai apple vinegar in Hindi
  2. फंगल इन्फेक्शन होम रेमेडी है दही - Fungal infection ka gharelu nuskhe hai yogurt in Hindi
  3. कवक संक्रमण का उपाय है लहसुन - Fungal infection se bachne ke upay hai garlic in Hindi
  4. फंगल इन्फेक्शन का घरेलू उपाय है टी ट्री तेल - Fungal infection dur karne ka upay hai tea tree oil in Hindi
  5. फफूंदी संक्रमण का नुस्खा है नारियल का तेल - Fungal infection dur karne ka gharelu upay hai coconut oil in Hindi
  6. फंगल इन्फेक्शन से बचने के उपाय में करे चाय का उपयोग - Fungal infection se bachne ke gharelu upay kare tea se in Hindi
  7. फफूंद संक्रमण से छुटकारा पाने का तरीका है ऑरेगैनो तेल - Fungal ka gharelu upay hai oregano oil in Hindi
  8. फंगल संक्रमण से बचने का उपाय है जैतून की पत्तियां - Fungus ka gharelu upay olive leaf in Hindi
  9. फंगल इन्फेक्शन दूर करने के उपाय में करें हल्दी का प्रयोग - Fungus ka upay hai turmeric in Hindi
  10. फंगल इन्फेक्शन को ठीक करें क्रैनबेरी जूस से - Fungus se bachne ka upay hai cranberry Juice in Hindi

सेब का सिरका किसी भी तरह के फंगल इन्फेक्शन के लिए काफी आम इलाज है। सेब के सिरके में एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं और ये संक्रमण से होने वाले फंगस को खत्म करने में भी मदद करता है। इसके साथ ही इसके एसिडिक प्राकृतिक गुण संक्रमण से बचाते हैं और इलाज में तेज़ी लाते हैं।

(और पढ़ें - रिकेटसियल संक्रमण का इलाज)

सेब के सिरके का इस्तेमाल दो तरीकों से करें -

पहला तरीका -

  1. सबसे पहले दो चम्मच सेब के सिरके को एक कप गर्म पानी में डाल दें और फिर इस मिश्रण को पी जाएँ।
  2. इस मिश्रण को पूरे दिन में दो बार ज़रूर पियें।

(और पढ़ें - सेब खाने के फायदे)

दूसरा तरीका -

  1. इसके अलावा सेब के सिरके को बराबर मात्रा में पानी के साथ मिला लें और फिर इसे प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं।
  2. आधे घंटे के लिए इसे ऐसे ही लगा हुआ रहने दें।
  3. आप अपने प्रभावित क्षेत्र को इसमें आधे घंटे के लिए डुबोकर भी रख सकते हैं।
  4. आधे घंटे के बाद उस क्षेत्र को तौलिये से पोछ लें।

(और पढ़ें - सेब के सिरके के फायदे

फंगल इन्फेक्शन का इलाज करने के लिए आप दही का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। दही में प्रोबायोटिक्स के गुण कवक को बढ़ने नहीं देते क्योंकि ये लगातर लैक्टिक एसिड का उत्पादन करता रहता है।

दही का इस्तेमाल तीन तरीकों से करें -

पहला तरीका -

  1. सबसे पहले दही में रूई को डालें और फिर इसे प्रभावित क्षेत्र पर लगा लें।
  2. इसे आधे घंटे के लिए ऐसे ही लगा हुआ रहने दें और फिर गर्म पानी से उस क्षेत्र को धो लें।
  3. जब तक संक्रमण साफ़ नहीं हो जाता तब तक पूरे दिन में इसे दो बार ज़रूर लगाएं।

(और पढ़ें - रात में दही खाना चाहिए)

दूसरा तरीका -

  1. योनि संक्रमण के दौरान टैम्पोन को दही में डुबोकर योनि में दो घंटे तक लगाकर रखें। (और पढ़ें - योनि में इन्फेक्शन उपाय)
  2. पूरे दिन में दो बार इस प्रक्रिया को दोहराएं।

तीसरा तरीका -

  1. इसके साथ ही अपने रोज़ाना के आहार में दही का सेवन ज़रूर करें।
  2. जब तक संक्रमण चला नहीं जाता तब तक दही को पूरे दिन में दो या तीन बार ज़रूर लगाएं।

(और पढ़ें - दही के फायदे

लहसुन में एंटीवारयल गुण होते हैं और किसी भी तरह के फंगल इन्फेक्शन के लिए ये बेहद प्रभावी है। इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीबायोटिक के भी गुण होते हैं जो इलाज में तेज़ी लाते हैं।

लहसुन का इस्तेमाल तीन तरीकों से करें -

पहला तरीका -

  1. सबसे पहले दो लहसुन की फाकों को क्रश कर लें और फिर पेस्ट बनाने के लिए उसमे कुछ बूँदें जैतून के तेल की मिलाएं।
  2. अब इस पेस्ट को प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं और आधे घंटे के लिए इसे ऐस ही लगा हुआ होड़ दें।
  3. फिर उस क्षेत्र को गुनगुने पानी से धो ले और धीरे धीरे त्वचा को साफ़ करें।
  4. इस संक्रमण से छुटकारा पाने के लिए इस प्रक्रिया को पूरे दिन में दो बार ज़रूर करें।

(और पढ़ें - खाली पेट लहसुन खाने से फायदे)

दूसरा तरीका -

  1. योनि में फंगल इन्फेक्शन का इलाज करने के लिए, सबसे पहले एक लहसुन की फांक को रेशमी कपडे में बाँध लें और फिर उसे आधे घंटे के लिए योनि में रखें।
  2. कुछ दिनों तक इस प्रक्रिया को रोज़ाना एक बार ज़रूर दोहराएं।

तीसरा तरीका -

  1. इसके साथ ही आप अपने आहार में लहसुन को मिलाकर खा सकते हैं।
  2. और आप डॉक्टर से सलाह लेकर लहसुन के सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं।

(और पढ़ें - लहसुन के फायदे

टी ट्री तेल एक प्राकृतिक एंटीफंगल कंपाउंड है जो कवक को खत्म करने में मदद करता है जिसकी वजह से फंगल इन्फेक्शन होता है। इसके साथ ही इसके एंटीसेप्टिक गुण संक्रमण को फैलने से रोकते हैं।

टी ट्री तेल का इस्तेमाल तीन तरीकों से करें -

पहला तरीका -

  1. सबसे पहले टी ट्री तेल और जैतून का तेल या बादाम के तेल को बराबर मात्रा में एक साथ मिला लें।
  2. अब इस मिश्रण को पूरे दिन में कई बार प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं।

(और पढ़ें - बादाम खाने के फायदे)

दूसरा तरीका -

  1. इसके अलावा आप तीन बार टी ट्री तेल लें और एक बार एलो वेरा जेल लें।
  2. अब दोनों को अच्छे से मिला लें।
  3. फिर इस मिश्रण को अपने प्रभावित क्षेत्र पर लगाकर हल्के हल्के रगड़ें।
  4. पूरे दिन में दो बार इस प्रक्रिया को करें।

तीसरा तरीका -

  1. योनि संक्रमण के लिए अपने टैम्पोन में टी ट्री तेल में कुछ बूँदें और फिर इसे अपने योनी में दो से तीन घंटे तक रखें।
  2. इस प्रक्रिया को पूरे दिन में बार ज़रूर दोहराएं।

(और पढ़ें - टी ट्री ऑयल के फायदे)

नोट - गर्भवती महिलायें टी ट्री तेल उपाय का इस्तेमाल न करें।

नारियल का तेल किसी भी तरह के फंगल इन्फेक्शन के लिए बेहद प्रभावी घरेलू उपाय है। इसमें फैटी एसिड होता है जो फंगल इन्फेक्शन को कम करता है। ये फैटी एसिड प्राकृतिक फंगीसाइड्स की तरह काम करता है जो कवक को खत्म करता है।

नारियल के तेल का इस्तेमाल तीन तरीकों से करें -

पहला तरीका -

  1. सबसे पहले नारियल के तेल को प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं और फिर सूखने तक का इंतज़ार करें।
  2. जब तक संक्रमण चला नहीं जाता तब तक इस प्रक्रिया को पूरे दिन में दो या तीन बार ज़रूर दोहराएं।

दूसरा तरीका -

  1. इसके अलावा बराबर मात्रा में नारियल और दालचीनी का तेल मिलाएं और फिर प्रभावित क्षेत्र पर इसे लगा लें।
  2. इस उपाय को पूरे दिन में दो बार ज़रूर दोहराएं।

तीसरा तरीका -

  1. योनि संक्रमण के लिए टैम्पोन को नारियल के तेल में डुबोएं और फिर इसे योनि में रख लें। (और पढ़ें - योनि में यीस्ट संक्रमण का इलाज)
  2. दो घंटे के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दें।
  3. टैम्पोन हटाने के बाद उस क्षेत्र को गुनगुने पानी से धो लें।
  4. जब तक सक्रमण चला नहीं जाता तब तक इस प्रक्रिया को पूरे दिन में एक बार ज़रूर दोहराएं।

(और पढ़ें - नारियल तेल के फायदे

चाय में टैनिन्स होते हैं जो कवक को खत्म करते हैं जिनकी वजह से फंगल इन्फेक्शन होता है। इसके साथ ही चाय में एंटीबायोटिक और एस्ट्रिजेंट के गुण होते हैं जो फंगल इन्फेक्शन के संक्रमण को दूर करते हैं जैसे जलन, सूजन और स्किन इरिटेशन। 

(और पढ़ें - सूजन कम करने के उपाय)

चाय को दो तरीकों से इस्तेमाल करें –

पहला तरीका -

  1. गर्म पानी में दस मिनट तक टी बैग को रखे रखें।
  2. अब उस बैग को गर्म पानी से हटा लें और फिर उसे आधे घंटे के लिए फ्रिज में रख दें।
  3. अब इस कोल्ड टी बैग को प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं।
  4. जब तक संक्रमण चला नहीं जाता तब तक इस उपाय को पूरे दिन में तीन बार दोहराएं।

(और पढ़ें - टी बैग के उपयोग)

दूसरा तरीका -

  1. अंगूठे के नाख़ून या एथलिट फुट के लिए, चार कप गर्म पानी में पांच टी बैग को पांच मिनट के लिए  उबालने को रख दें।
  2. अब पानी के ठंडा होने का इंतज़ार करें और फिर उसमे प्रभावित क्षेत्र को आधे घंटे के लिए उबलने को रख दें।
  3. इस प्रक्रिया को पांच से छः हफ्ते तक पूरे दिन में दो बार ज़रूर दोहराएं।

(और पढ़ें - ग्रीन टी के फायदे)

ऑरेगैनो तेल में एंटीफंगल गुण होते हैं जो कवक से लड़ते हैं जिनकी वजह से फंगल इन्फेक्शन होता है। इसके साथ ही इसके एंटीमाइक्रोबियल गुण फंगल इन्फेक्शन से बचाने में मदद करते हैं।

ऑरेगैनो तेल का इस्तेमाल तीन तरीकों से करें -

पहला तरीका -

  1. सबसे पहले ऑरेगैनो तेल और जैतून के तेल को एक साथ मिला लें।
  2. अब इस मिश्रण को प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं और कुछ घंटे के लिए इसे ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें।

दूसरा तरीका -

  1. इसके अलावा आप तीन बूँदें ऑरेगैनो तेल की एक ग्लास पानी में डालें और फिर इस मिश्रण को पी जाएँ।
  2. इस मिश्रण को पूरे दिन में दो बार ज़रूर पियें।

तीसरा तरीका -

  1. इसके साथ ही आप अपने आहार के बाद पूरे दिन में दो बार ऑरेगैनो के एक या दो कैप्सूल्स को खा सकते हैं।

(और पढ़ें - जोड़ों में इन्फेक्शन का इलाज)

नोट - कभी भी अल्कोहल मिला ऑरेगैनो तेल का इस्तेमाल न करें।  

जैतून की पत्तियों में एंटीफंगल और एंटीमाइक्रोबियल के गुण होते हैं जो कवक को खत्म करने में मदद करते हैं। इसके साथ ही ये प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है और तेज़ी से सुधार भी करता है।

जैतून की पत्तियों का इस्तेमाल दो तरीकों से करें -

पहला तरीका -

  1. सबसे पहले कुछ जैतून की पत्तियों को मिक्स कर लें और फिर इसका पेस्ट तैयार कर लें।
  2. अब इस पेस्ट को अपने प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं।
  3. आधे घंटे के लिए इसे ऐसे ही लगा हुआ रहने दें।
  4. अब उस क्षेत्र को गर्म पानी से धो लें और फिर धीरे धीरे त्वचा को साफ़ करें।
  5. इस उपाय को पूरे दिन में एक या दो बार ज़रूर दोहराएं।

दूसरा तरीका -

  1. इसके अलावा आप दो या तीन कप जैतून की पत्तियों की चाय को पी लें।
  2. इस चाय को बनाने के लिए, सबसे पहले एक या दो चम्मच क्रश और सूखे जैतून की पत्तियों को 10 से 15 मिनट के लिए एक कप पानी में उबालने को रख दें।
  3. अब इस मिश्रण को छानकर पी जाएँ।

(और पढ़ें - कैंडिडा संक्रमण का इलाज)

हल्दी एक बेहतरीन प्राकृतिक एंटीसेप्टिक, एंटीबायोटिक और एंटीफंगल एजेंट है। इसके साथ ही इसके इलाज करने के गुण जल्दी सुधार करते हैं और संक्रमण से बचाते हैं।

हल्दी को दो तरीकों से इस्तेमाल करें -

पहला तरीका -

  1. सबसे पहले कच्ची हल्दी की जड़ का जूस निकाल लें।
  2. अब उस जूस को प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं।
  3. दो से तीन घंटे के लिए उस जूस को ऐसे ही लगा हुआ रहने दें।
  4. फिर उस क्षेत्र को गुनगुने पानी से साफ़ कर लें।
  5. इस उपाय को पूरे दिन में बार ज़रूर दोहराएं।

दूसरा तरीका -

  1. सबसे पहले एक कप दूध में एक चम्मच हल्दी मिला लें।
  2. अब उसमे शहद मिलाएं और फिर उस मिश्रण को गर्म गर्म पी जाएँ।
  3. ये मिश्रण आपकी प्रतिरोधक क्षमता को सही रखेगा और संक्रमण से भी बचाएगा।

(और पढ़ें - हल्दी के फायदे

क्रैनबेरी में एंटीफंगल गुण होते हैं जो कवक का इलाज बहुत ही बेहतरीन तरीके से करते हैं।

क्रैनबेरी का इस्तेमाल कैसे करें -

  1. कुछ महीने तक पूरे दिन में कई बार एक ग्लास क्रैनबेरी जूस को पियें।
  2. इससे सुधार में तेज़ी आएगी।
  3. इसके आलावा आप केमिस्ट से क्रैनबेरी टेबलेट भी ले सकते हैं।
  4. इनका सेवन पूरे दिन में दो या तीन बार ज़रूर करें।

(और पढ़ें - करौंदा के फायदे)

इन घरेलू उपायों के अलावा स्वच्छता भी ज़रूर रखें जिससे फंगल इन्फेक्शन को दूर रखने में मदद मिले। अगर आपका इन्फेक्शन बहुत गंभीर है तो अपने डॉक्टर को ज़रूर दिखाएं।

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