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हाई बीपी (हाई ब्लड प्रेशर, High blood pressure) को उच्च रक्तचाप (Hypertension) भी कहा जाता है। यह अपने आप में तो एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है ही, और अगर हाई बीपी का इलाज ना किया जाए तो यह अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है जैसे कि दिल का दौरा। जर्नल ऑफ हाइपरटेन्शन की 2014 की एक रिपोर्ट के अनुसार 29.3% भारतीय उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं। इसका एक ही तरीका है कि आप नियमित रूप से इसकी जांच करवाएं। और अगला तर्कसंगत कदम ये है कि कैसे आप उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करें।

  1. कैसे उच्च रक्तचाप में लाभदायक है योग - How Does Yoga Help with High Blood Pressure?
  2. हाई बीपी के लिए योगासन - Yoagasanas for High Blood Pressure in Hindi
  3. प्राणायाम करेगा हाई बीपी की ट्रीटमेंट में फायदा - Pranayama for High Blood Pressure in Hindi
  4. हाई बीपी के लिए योग करते समय जरूरी हैं ये सावधानियां - Precautions while doing Yoga for High Blood Pressure

न तो उच्च (high) और न ही निम्न (low) रक्तचाप शरीर के लिए अच्छा है। सबसे ज़्यादा ज़रूरी है शरीर का संतुलित रहना। आप कैसे उच्च और निम्न रक्तचाप को संतुलित कर सकते हैं ? ये सवाल करोड़ो लोगो के दिमाग में आता है। इसका जवाब योग के पास मिलेगा। योगासन करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और किसी भी प्रकार की बिमारी पास नहीं आती। योगासन से रक्तचाप नियंत्रित रहता है और तनाव को दूर करने में भी मदद मिलती है। इसके अलावा स्वस्थ आहार लेना भी बहुत ज़रूरी है। 

  1. योग आसन तंत्रिकाओं को शांत करता है और असामान्य हृदय गति को ठीक करता है।
  2. योग प्रतिरक्षा को बढ़ाने और दिल की समस्याओं जैसे दिल का दौरा और स्ट्रोक की घटनाओं को कम करने में मदद करता है। (और पढ़ें - ब्रेन स्ट्रोक के कारण)
  3. शरीर और दिमाग़ को आराम न मिलने पर सबसे ज़्यादा तनाव और हाई बीपी होने का ख़तरा होता है। योग करने से नींद अच्छे से आती है और तनाव कम होता है।
  4. मोटापा हाई बीपी का कारण बन सकता है। योग का नियमित करने से और बेहतर आहार खाने से शरीर का वज़न नियंत्रित रहता है।
  5. योग शरीर और मन को सकारात्मक ऊर्जा देता है। योग आपके जीवन में ख़ुशी लाता है। लंबे समय से चल रहे हाई ब्लड प्रेशर को कम करने में भी मदद करता है।

हाई ब्लड प्रेशर के लिए सबसे अच्छा योग है रीढ़ की हड्डी को क्षैतिज (horizontal) स्थिति में घुमाना। यह हृदय को धीमा रखता है जिसकी वजह से दिल को मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाने में ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती।

नीचे दिए गए आसन निम्न उच्च रक्तचाप को संतुलित रखने में मदद करेंगे। हालांकि, ये ज़रूरी है कि आप इन योग के अभ्यास को किसी प्रशिक्षित विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में करें। इसके अलावा इन योग को आराम से और मनोरंजक तरीके से करें।

बालासन - तनाव और थकान से राहत देता है। यह रक्त परिसंचरण को भी सामान्य रखता है। (और पढ़ें – थकान दूर करने के घरेलू उपाय)

वज्रासन - इस योग को दोपहर या रात के खाने के बाद भी कर सकते हैं। यह मोटापे को नियंत्रित करने में मदद करता है और निचले पेट के हिस्सों में रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है।

पश्चिमोत्तानासन - पेट की चर्बी को कम करने में मदद करता है। यह एक प्रभावी तनाव रिलीवर के रूप में भी कार्य करता है और हाई बीपी को भी सामान्य रखता है।

अर्धमत्स्येन्द्रासन - दिल और तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करता है जिससे हाई ब्लड प्रेशर को सामान्य रखने में मदद मिलती है।

बद्ध कोणासन - दिल को उत्तेजित करता है और पूरे शरीर में रक्त के बेहतर परिसंचरण को पहुंचाता है। यह तनाव और घबराहट से भी राहत देता है।

जानुशीर्षासन - पेट की चर्बी के लिए ये अच्छा काम करता है और वसा को कम करने में मदद करता है। वजन घटाते समय यह रक्त के दबाव को नियंत्रित रखने में मदद करता है।

वीरासन - पैरों के चारों ओर रक्त परिसंचरण को बढ़ाता है और रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है।

सेतुबंधासन - गुर्दे को मजबूत और तंत्रिका तंत्र में संतुलन बनाये रखता है। यह शरीर में रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है।

अर्ध हलासन - अर्ध हलासन करने से जांघों, पेट और कूल्हों में वसा कम होती है। हाई बीपी को नियंत्रित करने में मदद करता है।

सुखासन - सुखासन करने से तनाव कम होता है। इससे शरीर और मन शांत रहते हैं।  यह उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद करता है।

शवासन - तनाव, अवसाद और थकान से राहत देता है। यह शरीर को आराम और अच्छी नींद देने में बहुत ही सहायक है। यह रक्त परिसंचरण को उत्तेजित करता है।

क्या योग और प्राणायाम हाई बीपी को कम करने में मदद कर सकते हैं? यहाँ बहुत सारे सबूत हैं जिनसे रक्तचाप को कम किया जा सकता है। श्वास व्यायाम भी स्वाभाविक रूप से रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकता है। गहरी सांस लेने से तंत्रिका तंत्र शांत रहता है और रक्त प्रवाह को ऊतकों तक पहुंचाने में मदद मिलती है। एक अध्ययन से पता चला है कि चुपचाप बैठने की बजाये आधे मिनट में 6 बार गहरी साँस लेने से सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर को 3.4 यूनिट तक कम किया जा सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर के लिए योग का उपयोग करना सबसे ज़्यादा उपयोगी होता है, यदि बहु-चिकित्सा दृष्टिकोण के रूप में किया जाए तो। जिसमें जीवनशैली में परिवर्तन और आयुर्वेदिक उपचार शामिल हैं। हमेशा की तरह, जब प्राकृतिक उपचार की बात आती है तो जल्दी परिणाम प्राप्त करना आमतौर पर उतना आसान नहीं होता है जितना कि एक गोली के ज़रिये होता है। अच्छी बात तब होती है जब आप खुद रक्तचाप को कम करने के लिए कदम उठाते हैं।

उच्च रक्तचाप के लिए कुछ फायदेमंद प्राणायाम यहां दिए गए हैं -

भस्त्रिका प्राणायाम - शरीर के सभी भागों में ऑक्सीजन की आपूर्ति को बढ़ाता है, इस प्रकार रक्त परिसंचरण में सुधार होता है। यह तनाव और हाई बीपी से राहत देता है।

कपालभाति प्राणायाम - पेट में जमी वसा को दूर करने में मदद करता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर कम होता है।

भ्रामरी प्राणायाम - यह प्राणायाम में शरीर में ऐसी कंपन पैदा होता है कि इसको करने से शरीर और मन को आराम मिलता है। यह तनाव और चिंता से राहत देता है और हाई बीपी को संतुलित रखने में मदद करता है।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम - यह एक शांत और शक्तिशाली प्राणायाम है। यह आपकी धमनियों में काफी हद तक रुकावटों को दूर करने में मदद कर सकता है। यह मस्तिष्क तक रक्त परिसंचरण में सुधार करता है।

पूर्ण योगिक श्वास - आपको धीरे धीरे साँस लेने में मदद करता है। यदि आपकी हृदय गति बहुत तेज है, तो यह तकनीक हृदय गति को धीमा कर देती है। यह आपके पूरे शरीर को आराम देता है।

ऐसे कोई भी आसन ना करें जिसमें आपका शरीर औंधी स्तिथि में हो। उल्टी मुद्रा करने से रक्त का प्रवाह अनियंत्रित हो सकता है इसलिए उल्टी मुद्रा वाले आसनों से बचें। उधारण के तौर पर -

  1. शीर्षासन और सर्वांगासन मस्तिष्क में रक्तचाप बढ़ाते हैं, क्योंकि इनमें आपका सिर उल्टा होता है और रक्त का प्रवाह इससे अनियंत्रित हो जाता है। 
  2. अधो मुखा व्रक्सासना (Handstand) ना करें।
  3. विपरीत-करणी आसन भी उच्च रक्तचाप में नुकसान दे सकता है। तो इस आसन को भी करने से बचें। 

इन बातों का खास तौर से ध्यान रखें:

  1. याद रहे की योगाभ्यास से आराम निरंतर अभ्यास करने के बाद ही मिलता है और धीरे धीरे मिलता है।
  2. आसन से जोड़ों का दर्द बढे नहीं, इसके लिए अभ्यास के दौरान शरीर को सहारा देने वाली वस्तुओं, तकियों व अन्य उपकरणों की सहायता जैसे ज़रूरी समझें वैसे लें।
  3. अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक जोर न दें। अगर दर्द बढ़ जाता है तो तुरंत योगाभ्यास बंद कर दें और चिकित्सक से परामर्श करें। (और पढ़ें: योग के नियम)
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