myUpchar प्लस+ सदस्य बनें और करें पूरे परिवार के स्वास्थ्य खर्च पर भारी बचत,केवल Rs 99 में -

ठंड लगना आमतौर पर एक सामान्य स्थिति होती है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति को ठंडा मौसम न होने पर भी अत्यधिक ठंड लगती है या फिर अगर किसी व्यक्ति से ठंड सहन नहीं हो पा रही है तो यह एक असामान्य स्थिति है। इसे ठंड के प्रति अतिसंवेदनशील होना कहा जाता है और अधिक ठंड लगना ही इस समस्या का सबसे मुख्य लक्षण होता है। हालांकि, इसके कुछ अन्य लक्षण भी देखे जा सकते हैं, जो मुख्य रूप से इसके अंदरूनी कारणों पर भी निर्भर करते हैं।

अधिक ठंड लगने का सबसे मुख्य कारण शारीरिक कमजोरी होता है, इसके अलावा हाइपोथायरायडिज्म, एनीमिया और फाइब्रोमायल्जिया जैसे कुछ रोग भी अधिक ठंड सहन न कर पाने जैसे लक्षण विकसित कर सकते हैं। शारीरिक कमजोरी को दूर करके और एक स्वस्थ जीवनशैली को अपना कर अधिक ठंड लगने जैसी समस्याओं से बचाव किया जा सकता है। इसके अलावा स्वस्थ आहार और नियमित रूप से शारीरिक जांच करवा कर भी यह समस्या विकसित होने से रोकथाम करने में मदद मिलती है।

ठंड के प्रति अतिसंवेदनशीलता का इलाज करने के लिए सबसे पहले इसका परीक्षण करके अंदरुनी कारणों का पता लगाया जाता है। इसका कारण बनने वाले अंदरुनी रोगों के अनुसार ही इस स्थिति का इलाज शुरू किया जाता है। इस स्थिति का इलाज करने के लिए डॉक्टर आवश्यक दवाओं के साथ-साथ आहार में भी कुछ महत्वपूर्ण बदलाव कर सकते हैं।

  1. अधिक ठंड लगना क्या है - What is Cold Intolerance in Hindi
  2. अधिक ठंड लगने के लक्षण - Cold Intolerance Symptoms in Hindi
  3. अधिक ठंड लगने के कारण - Cold Intolerance Causes in Hindi
  4. अधिक ठंड लगने से बचाव - Prevention of Cold Intolerance in Hindi
  5. अधिक ठंड लगने का परीक्षण - Diagnosis of Cold Intolerance in Hindi
  6. अधिक ठंड लगना के इलाज - Cold Intolerance Treatment in Hindi

अधिक ठंड लगना क्या है - What is Cold Intolerance in Hindi

ठंड के प्रति अतिसंवेदनशीलता (Sensitivity to cold) को सामान्य भाषा में अत्यधिक ठंड लगना कहा जाता है। इस समस्या से ग्रस्त व्यक्ति को इतनी ठंड लगती है कि वह सहन नहीं कर पाता है। किसी कमरे में अन्य लोगों को सामान्य महसूस किए जाने पर भी इससे ग्रस्त व्यक्ति ठंड से ठिठुर जाता है। ऐसी स्थिति में गर्म कपड़े पहनने से भी राहत नहीं मिल पाती है। यह समस्या आमतौर पर पहले से हुई किसी दीर्घकालिक बीमारी से ग्रस्त लोगों में देखी जाती है।

अधिक ठंड लगने के लक्षण - Cold Intolerance Symptoms in Hindi

ठंड को सहन ना कर पाना और सामान्य मौसम में भी अत्यधिक ठंड लगना इस स्थिति का सबसे प्रत्यक्ष लक्षण होता है। इस स्थिति में व्यक्ति ठंड के प्रति इतना संवेदनशील हो जाता है कि उसे गर्म कपड़े पहनने के बाद भी ठंड लगती है। हालांकि, ज्यादातर मामलों में यह खुद कोई रोग नहीं होता है, जबकि स्वास्थ्य संबंधी समस्या में विकसित होने वाला एक लक्षण होता है। इसीलिए अत्यधिक ठंड लगने पर निम्न लक्षण भी देखे जा सकते हैं -

हाइपोथायरायडिज्म

एनीमिया

एनोरेक्सिया नर्वोसा

  • शरीर का वजन घटना
  • कब्ज होना
  • पेट में ऐंठन
  • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
  • चक्कर आना
  • बेहोशी
  • मासिक धर्म की अवधि कम हो जाना
  • नाखून और बाल शुष्क व कमजोर हो जाना
  • शारीरिक रूप से कमजोरी महससू होना
  • घाव भरने में अधिक समय लगना
  • शरीर का वजन बढ़ने का भय होना
  • एकांत व सबसे छिपकर भोजन करना
  • सामाजिक रूप से सबसे अलग रहना (अकेले रहने की आदत)

डॉक्टर को कब दिखाएं?

यदि किसी व्यक्ति को अचानक से अत्यधिक ठंड लगने लगी है या फिर उसकी ठंड सहन करने की क्षमता धीरे-धीरे कम हो रही है, तो डॉक्टर को दिखा लें। यदि एक दिन के भीतर यह समस्या ठीक न हो पाए, तो डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए। इसके अलावा अत्यधिक ठंड लगने के साथ यदि ऊपर बताए गए लक्षण भी हो रहे हैं, तो जल्द से जल्द डॉक्टर के पास चले जाएं।

अधिक ठंड लगने के कारण - Cold Intolerance Causes in Hindi

आपके शरीर का तापमान कई अलग-अलग प्रणालियों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। मस्तिष्क का एक छोटा सा हिस्सा जिसे हाइपोथैल्मस कहा जाता है। यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए एक थर्मोस्टेट के रूप में काम करता है। हाइपोथैल्मस शरीर को गर्मी या ठंड पैदा करने के संकेत देता है। हाइपोथैल्मस थायराइड ग्रंथि को शरीर का मेटाबॉलिज्म को आवश्यकता अनुसार कम या ज्यादा करने के निर्देश देता है। इस प्रक्रिया में थायराइड ग्रंथि भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इस ग्रंथि को ठीक से काम करने पर कैलोरी अवशोषित नहीं हो पाती, जिसके परिणामस्वरूप शरीर के लिए गर्मी और ईंधन बनता है।

रक्त के माध्यम से शरीर के सभी हिस्सों में गर्मी संचारित होती है और वसा इन हिस्सों में गर्मी को बनाए रखने में मदद करता है। इनमें से किसी भी प्रक्रिया में कोई असामान्यता आने पर भी ठंड सहन न कर पाने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

शारीरिक रूप से कमजोर व अस्वस्थ लोगों में भी अधिक ठंड लगने की समस्या हो सकती है। इसके अलावा कई ऐसे स्वास्थ्य रोग हैं, जो अत्यधिक ठंड लगने का कारण बन सकते हैं -

  • एनीमिया
    जब खून में लाल रक्त कोशिकाओं की मात्रा सामान्य स्तर से कम हो जाए, तो इस स्थिति को एनीमिया कहा जाता है।
     
  • एनोरेक्सिया
    यह एक ऐसा विकार है, जिसमें मरीज मुख्य रूप से शरीर का वजन बढ़ने के डर से भोजन करना बंद कर देता है। एनोरेक्सिया के कारण शरीर का वजन असामान्य रूप से कम होने लगता है और कमजोरी आने लगती है। वजन कम होना और कमजोरी दोनों ही अत्यधिक ठंड लगने की स्थिति पैदा कर सकते हैं।
     
  • हाइपोथायरायडिज्म
    जब गर्दन में मौजूद थायराइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में थायराइड हार्मोन न बना पाए, तो इस स्थिति को हाइपोथायरायडिज्म कहा जाता है।
     
  • रक्त वाहिकाओं से संबंधित समस्याएं
    इसमें रेनॉड सिंड्रोम जैसे विकार शामिल हैं, जिनके कारण हाथ - पैरों में खून का संचार रुक जाता है और वे ठंडे पड़ने लगते हैं।
     
  • हाइपोथैल्मस से संबंधित विकार
    मस्तिष्क का यह हिस्सा शरीर में गर्मी पैदा होने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। इसमें किसी भी प्रकार की समस्या होने पर यह प्रक्रिया भी प्रभावित हो जाती है।
     
  • फाइब्रोमायल्जिया
    यह एक दीर्घकालिक रोग है, जिसमें पूरे बदन में दर्द व तकलीफ हो जाती है। यह स्थिति त्वचा को भी प्रभावित करती है, जिससे अत्यधिक ठंड लगने जैसी समस्याएं भी विकसित हो सकती हैं।

ठंड के प्रति अतिसंवेदनशील होने का खतरा कब बढ़ता है?

शारीरिक रूप से कमजोर होना इस स्थिति के खतरे को सबसे अधिक बढ़ाता है। इसके अलावा यदि शरीर की त्वचा का कोई हिस्सा पहले किसी प्रकार की क्षति से प्रभावित हो चुका है, उसमें यह समस्या होने का खतरा अधिक बढ़ जाता है। उदाहरण के तौर पर फ्रॉस्टबाइट से प्रभावित हुई उंगलियां ठीक होने के बाद भी ठंड के प्रति अतिसंवेदनशील रह सकती हैं।

अधिक ठंड लगने से बचाव - Prevention of Cold Intolerance in Hindi

यदि आपको ठंड के प्रति अतिसंवेदनशीलता होती है, तो आप कोशिश करें कि किसी भी ऐसी जगह पर ना जाएं जहां का तापमान ठंडा हो। साथ ही साथ गर्म कपड़े पहन कर रखें और विशेष रूप से अपने शरीर के उन हिस्सों को गर्म कपड़ों से ढक कर रखें, जो इससे अधिक प्रभावित होते हैं।

इसके अलावा अपने आहार में पोषक तत्वों युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करें और शरीर को कमजोर न होने दें। इस दौरान ऐसे किसी भी चीज को न खाएं, जिसकी तासीर ठंडी हो। यदि आपको लगता है कि आपको इन उपायों के बाद भी राहत महसूस नहीं हो रही है, तो डॉक्टर से इस बारे में बात कर लें।

अधिक ठंड लगने का परीक्षण - Diagnosis of Cold Intolerance in Hindi

यदि आपको पहली बार यह समस्या होने लगी है और ठीक नहीं हो रही है, तो डॉक्टर के पास जाकर इसकी जांच करवा लेनी चाहिए। परीक्षण के दौरान डॉक्टर लक्षणों से संबंधित पिछली सभी जानकारियों के बारे में पूछेंगे और आपके शरीर की जांच करेंगे। आपकी स्थिति के आधार पर डॉक्टर ब्लड टेस्ट समेत कुछ अन्य टेस्ट भी करवा सकते हैं। ब्लड टेस्ट की मदद से शरीर में ब्लड काउंट और हार्मोन की जांच की जाती है।

इसके अलावा परीक्षण के दौरान मरीज से कुछ सवाल भी पूछे जा सकते हैं -

  • क्या आपको पहले कभी यह समस्या हुई है?
  • क्या आप किसी प्रकार की दवा या कोई सप्लीमेंट ले रहे हैं?
  • आपको अत्यधिक ठंड लगने के लक्षण कब शुरू हुए थे?
  • क्या आपके लक्षण गंभीर होते जा रहे हैं?
  • क्या ऐसा होता है कि आपको ठंड लग रही है और आपके आस-पास वालों को नहीं?
  • आप भोजन में क्या लेते हैं और दिन में व्यायाम करते हैं या नहीं?

अधिक ठंड लगना के इलाज - Cold Intolerance Treatment in Hindi

अधिकतर मामलों में अत्यधिक ठंड लगना या फिर ठंड सहन कर पाना खुद कोई बीमारी नहीं होती है, बल्कि किसी रोग से होने वाला लक्षण होता है। इस स्थिति का इलाज पूरी तरह से डॉक्टर द्वारा किए गए परीक्षण के रिजल्ट और इसके कारण पर निर्भर करता है। ठंड के प्रति अतिसंवेदनशीलता का इलाज निम्न स्थितियों के अनुसार किया जाता है -

  • एनीमिया
    अगर आपको एनीमिया के कारण यह समस्या हुई है, तो इसका इलाज भी एनीमिया के अनुसार ही किया जाएगा। इसमें मुख्य रूप से आयरन के सप्लीमेंट्स दिए जाते हैं।
     
  • एनोरेक्सिया
    एनोरेक्सिया नर्वोसा का इलाज करना एक लंबी प्रक्रिया होती है। इससे होने वाले लक्षणों के अनुसार ही दवाएं दी जाती हैं। इस समस्या का इलाज करने के लिए मुख्य रूप से एक विशेष मेडिकल टीम की आवश्यकता पड़ती है, जिसमें पोषक तत्वों और स्वस्थ जीवनशैली के विशेषज्ञ शामिल होते हैं। कुछ गंभीर मामलों में इस स्थिति का इलाज करने के लिए मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों की आवश्यकता भी पड़ती है।
     
  • हाइपोथायरायडिज्म
    हाइपोथायरायडिज्म का इलाज करने के लिए मरीज को रोजाना ओरल सिंथेटिक हार्मोन (Oral synthetic hormone) दिया जाता है। इस स्थिति का इलाज जीवनभर चलता है, लेकिन स्थिति के अनुसार दवा की खुराक को समय-समय पर कम या ज्यादा किया जा सकता है।
     
  • रक्त वाहिकाओं से संबंधित समस्याएं
    रक्त वाहिकाओं से संबंधित समस्याओं का इलाज उनके कारणों के अनुसार अलग-अलग तरीकों से किया जा सकता है। कुछ गंभीर मामलों में इसका इलाज करने के लिए दवाओं के साथ-साथ सर्जरी भी करवाने की आवश्यकता पड़ सकती है।
     
  • हाइपोथैल्मस से संबंधी विकार
    हाइपोथैल्मस से संबंधित समस्याओं के इलाज भी स्थिति के कारण के अनुसार ही किया जाता है। इसके इलाज में ट्यूमर को ठीक करने के लिए सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी और खून बहने व संक्रमण को रोकने के लिए विशेष प्रक्रियाएं आदि शामिल हैं।
     
  • फाइब्रोमायल्जिया
    फाइब्रोमायल्जिया के इलाज का मुख्य लक्ष्य इसके लक्षणों को कम करना होता है। इसके इलाज में दर्द को कम करने के लिए दवाएं, फिजियोथेरेपी और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी आदि शामिल हैं। इसमें मरीज के लिए एक विशेष सहायता टीम भी बनाई जाती है।
और पढ़ें ...
ऐप पर पढ़ें