हृदय हमारे शरीर का अहम अंग होता है, जो पूरे शरीर में रक्त पंप करता है. जब शरीर रक्त पंप करने में असमर्थ होता है, तो हृदय से जुड़ी कई गंभीर बीमारियां होने का जोखिम बढ़ जाता है. इसमें हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर होना भी शामिल हैं. हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर दोनों ही हृदय रोग हैं. अधिकतर लोग हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर को एक ही समझ बैठते हैं, जबकि ये दाेनों अलग-अलग समस्याएं हैं. हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर के लक्षण और कारण भी भिन्न होते हैं.

आज इस लेख में आप हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर के लक्षण, कारण व इलाज के बारे में विस्तार से जानेंगे -

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  1. हार्ट अटैक
  2. हार्ट अटैक के लक्षण
  3. हार्ट अटैक के कारण
  4. हार्ट अटैक का इलाज
  5. हार्ट फेलियर
  6. हार्ट फेलियर के लक्षण
  7. हार्ट फेलियर के कारण
  8. हार्ट फेलियर का इलाज
  9. सारांश
हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर में अंतर के डॉक्टर

हार्ट अटैक किसी भी व्यक्ति को अचानक आता है. हार्ट अटैक तब आता है, जब हृदय की तरफ जाने वाली आर्टरी में से एक अवरुद्ध हो जाती है और रक्त प्रवाह को बाधित कर देती है. इस स्थिति में हृदय तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है और ऑक्सीजन के बिना हृदय की मांसपेशियां मरने लगती हैं, जिससे व्यक्ति को हार्ट अटैक आ जाता है.

आपको बता दें कि हार्ट अटैक में हृदय के रक्त पंप करने की क्षमता कमजोर हो जाती है, जिसकी वजह से हार्ट फेलियर हो सकता है. कभी-कभी हार्ट अटैक आने के बाद अचानक हार्ट फेलियर हो सकता है.

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वैसे तो हार्ट अटैक के लक्षण ध्यान देने योग्य नहीं होते हैं. इसलिए, इसे साइलेंट हार्ट अटैक भी कहा जाता है. फिर भी हार्ट अटैक आने से पहले शरीर कुछ सामान्य संकेत दे सकता है, जिन्हें बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. हार्ट अटैक के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं -

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हार्ट अटैक कोरोनरी आर्टरी में रुकावट के कारण आ सकता है. आमतौर पर हार्ट अटैक तब आता है, जब कोई स्थिति हृदय को नुकसान पहुंचाती है या फिर जब हृदय को रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है. हार्ट अटैक के कारण इस प्रकार हैं -

कोरोनरी आर्टरी रोग

कोरोनरी आर्टरी डिजीज को हार्ट अटैक का मुख्य कारण माना जाता है. इस स्थिति में आर्टरी की दीवारों पर प्लाक का निर्माण होता है. फिर आर्टरी में पट्टिका जमा होती हैं और कोरोनरी आर्टरी संकीर्ण हो जाती हैं. इससे कोरोनरी आर्टरी के भीतर पट्टिका टूट सकती है, जिससे ब्लड क्लॉट बनता है. ब्लड क्लॉट कोरोनरी आर्टरी के माध्यम से रक्त के प्रवाह को बाधित कर देता है और हार्ट अटैक का कारण बन सकता है.

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कोरोनरी आर्टरी में ऐंठन

कोरोनरी आर्टरी में अचानक से ऐंठन आने पर हार्ट अटैक आ सकता है. दरअसल, जब कोरोनरी आर्टरी में ऐंठन आती है, तो रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है. यह तनावअधिक ठंड या कोकीन जैसी दवाओं के उपयोग के कारण हो सकता है.

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हार्ट अटैक के इलाज का उद्देश्य हृदय की मांसपेशियों को गंभीर क्षति पहुंचाने से रोकना या कम करना होता है. इसका इलाज करने से पहले हार्ट अटैक की पुष्टि करना जरूरी होती है. डॉक्टर कुछ दवाइयों और थेरेपी की मदद से हार्ट अटैक का इलाज कर सकते हैं. 

हार्ट अटैक का इलाज करने बाद डॉक्टर रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं. इसके लिए कोरोनरी एंजियोप्लास्टी ट्रीटमेंट कर सकते हैं. इसमें धमनी को खोलने और रक्त प्रवाह को बेहतर करने के लिए बैलून का उपयोग किया जाता है. इस स्थिति में डॉक्टर धमनी को खुला रखने के लिए स्टेंट डाल सकते हैं. साथ ही डॉक्टर हार्ट अटैक का इलाज करने के बाद थक्के, ब्लड प्रेशर और हृदय पर दबाव कम करने के लिए दवा लिख सकते हैं. इससे दोबारा आने वाले हार्ट अटैक को रोका जा सकता है.

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हार्ट फेलियर की समस्या आमतौर पर धीरे-धीरे विकसित होती है. हार्ट फेलियर तब होता है, जब हृदय की कमजोर मांसपेशियां शरीर में कोशिकाओं को पोषण देने के लिए रक्त पंप करने में असमर्थ हो जाती हैं. हार्ट फेलियर एक क्रोनिक कंडीशन है, जो धीरे-धीरे गंभीर होती है, लेकिन दवाइयों की मदद से हार्ट फेलियर के लक्षणों को बढ़ने से रोकने में मदद मिल सकती है.

हार्ट फेलियर के लक्षण गंभीरता पर निर्भर करते हैं. सांस लेने में तकलीफ और हृदय के दाईं या बाईं तरफ दर्द होना हार्ट फेलियर के सबसे आम लक्षण होते हैं, लेकिन जैसे-जैसे हृदय कमजोर होता है, इसके लक्षण बिगड़ते जाते हैं. हार्ट फेलियर के लक्षण निम्न हो सकते हैं - 

  • सामान्य कमजोरी महसूस करना
  • सांस लेने में कठिनाई
  • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
  • बार-बार खांसना
  • थकान लगना
  • उंगली और होंठों का नीला पड़ना
  • सोने में कठिनाई
  • भूख में कमी

(और पढ़ें - हृदय रोग का इलाज)

आमतौर पर कुछ चिकित्सीय स्थितियां, चोट और संक्रमण हार्ट फेलियर का कारण बन सकते हैं. हार्ट फेलियर दिल के बाएं और दाएं दोनों हिस्सों को प्रभावित कर सकता है. बायां हिस्सा ऑक्सीजन से युक्त ब्लड को पूरे शरीर में पंप करता है, जबकि दायां भाग ऑक्सीजन लो ब्लड को एकत्र करता है और ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए इसे फेफड़ों में पंप करता है. जब इन कार्य में बाधा आती है, तो हार्ट फेलियर की स्थिति पैदा हो सकती है. हार्ट फेलियर के कारण निम्न हो सकते हैं -

सिस्टोलिक फेलियर

सिस्टोलिक फेलियर अक्सर पुरानी स्थितियों के कारण होती है. इस स्थिति में हृदय कमजोर और डैमेज हो सकता है. ये समस्याएं सिस्टोलिक फेलियर का कारण बन सकती हैं -

  • दिल की धमनी का रोग
  • पिछले हार्ट अटैक से हृदय को हुआ नुकसान
  • हृदय वाल्व की स्थिति

(और पढ़ें - दिल के दौरे की होम्योपैथिक दवा)

डायस्टोलिक फेलियर

डायस्टोलिक फेलियर उन स्थितियों के कारण हो सकती है, जो हृदय को रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत करने के लिए मजबूर करती हैं. डायस्टोलिक फेलियर की स्थिति में हृदय टिश्यू सख्त हो सकते हैं. डायस्टोलिक फेलियर इन कारणों से हो सकता है -

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दाईं तरफ हार्ट फेलियर

दाईं तरफ हार्ट फेलियर मुख्य रूप से बाईं तरफ हार्ट फेलियर की वजह से होता है. जब दिल का बायां हिस्सा कमजोर होता है, तो रक्त आपके दिल के दाहिने हिस्से में वापस आ जाता है. इससे हृदय को रक्त पंप करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है. दाईं तरफ हार्ट फेलियर के कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं.

हार्ट फेलियर की अवस्था में डॉक्टर दिल के दौरे में इस्तेमाल होने वाली दवाएं दे सकते हैं. इसमें रक्तचाप कम करने या हृदय गति को धीमा करने वाली दवाएं शामिल हैं. इसके अलावा, ड्यूरेटिक दवा भी दी जा सकती है. इससे सूजन और सांस की तकलीफ कम होगी.

दवा के साथ-साथ जीवनशैली में बदलाव जैसे - धूम्रपान छोड़ना, वजन कम करना, नमक कम करना और व्यायाम करना भी हार्ट फेलियर में फायदेमंद साबित हो सकता है. समस्या अधिक होने पर सर्जरी कर पेसमेकर तक लगाया जा सकता है. वहीं, गंभीर मामलों में हृदय प्रत्यारोपण किया जा सकता है.

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हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर दो स्थितियां हैं, जो समान जोखिम का कारण बन सकती हैं. दिल का दौरा तब पड़ता है, जब रक्त प्रवाह आंशिक रूप से या पूरी तरह से बाधित हो जाता है. वहीं, हार्ट फेलियर तब होता है, जब हृदय शरीर में पर्याप्त रक्त को सही तरीके से पंप नहीं कर पाता है. वैसे तो ये दोनों ही हृदय को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर के लक्षण, कारण व उपचार एक-दूसरे से अलग-अलग होते हैं. ऐसे में सही लाइफस्टाइल, खानपान और नियमित व्यायाम से हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर के लक्षणों को बढ़ने से रोका जा सकता है.

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