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घुटने की समस्या और उससे होने वाले दर्द के उपचार के लिए की जाने वाली शल्यचिकित्सा (सर्जरी) को घुटनों की अर्त्रोप्लास्टी (Knee Arthroplasty) या घुटनों को बदलने की सर्जरी (Knee Replacement Surgery) कहा जाता है। अर्त्रोप्लास्टी का अर्थ है "जोड़ों की शल्यचिकित्सा" इसलिए, Knee Replacement Surgery है घुटने के जोड़ों की शल्यचिकित्सा। Knee Replacement Surgery में खराब जोड़ों (जिन जोड़ों में परेशानी है) को एक कृत्रिम धातु के जोड़ों (Artificial Metallic Joint) के साथ बदल दिया जाता है। 

  1. घुटनों का ऑपरेशन क्या होता है? - Knee replacement surgery kya hai in hindi?
  2. घुटनों का प्रत्यारोपण होने से पहले की तैयारी - Ghutno ke operation ki taiyari
  3. घुटनों का ऑपरेशन कैसे किया जाता है? - Ghutno ka operation kaise hota hai?
  4. घुटने रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद देखभाल - Ghutne ka operation hone ke baad dekhbhal
  5. घुटने बदलने के बाद सावधानियां - Knee ka operation hone ke baad savdhaniya
  6. घुटने प्रतिस्थापन की जटिलताएं - Ghutno ki surgery me jatiltaye
  7. क्रिकेटर सुरैश रैना की हुई घुटने की सर्जरी, जानिए इसके बारे में

Knee Replacement आज एक बहुत ही आम सर्जरी है जिसे न केवल बुज़ुर्ग बल्कि वे लोग भी करवा रहे हैं जिन्हें घुटने की किसी प्रकार की क्षति पहुंची हो, या जिन्हें किसी दुर्घटना की वजह से घुटने की कोई समस्या हो गयी हो जिससे चलने फिरने में परेशानी हो रही हो। निम्नलिखित घटनाएं ऐसी घटनाएं हैं जिनकी वजह से किसी व्यक्ति को Knee Replacement Surgery करवानी पड़ सकती है:

  1. अस्थिसंधिशोथ या ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis):
    Osteoarthritis एक प्रकार का गठिया है जिसमें घुटनों के जोड़ों में सूजन हो जाती है। यह गठिया होने की सम्भावना 20 या 30 वर्ष के व्यक्तियों में भी उतनी ही है जितनी कि इसकी सम्भावना एक ऐसे व्यक्ति को है जिसकी उम्र 50 या उससे ज़्यादा है। Osteoarthritis से पीड़ित लोगों के लिए जोड़ों की सूजन या दर्द एक आम स्थिति है। हालांकि, Arthroplasty या Knee Replacement Surgery केवल तब ही करवाई जानी चाहिए जब सूजन वाले घुटने से उस व्यक्ति की ज़िंदगी की गुणवत्ता को काफी हद तक नुकसान हो रहा हो। 
     
  2. रुमेटी संधिशोथ या रूमेटाइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis):
    रुमेटी संधिशोथ (Rheumatoid Arthritis) न केवल एक ऑटोइम्यून बीमारी (एक बीमारी जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करती है) है बल्कि सिस्टेमिक (Systemic, पूरे शरीर को प्रभावित करने वाला) भी है। इस विकार में भी जोड़ों में सूजन और दर्द होता है। यदि उपचार न किया जाए, तो इस विकार से हड्डियों, उपास्थि, जोड़ों के ऊतकों (Tissues) को हानि पहुँच सकती है जिसका उपचार बहुत कठिन है। चिकित्सक सर्जरी की सलाह तब ही देते हैं, जब दवाएं अपेक्षित नतीजे नहीं दे पाती। 
     
  3. घुटने की विकृति (Knee Deformity):
    यह एक ऐसी स्थिति है जिसमे घुटने बाहर निकलने लगते हैं जो स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगता है। ऐसे में आपके डॉक्टर आपको सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। 
     
  4. निष्क्रियता (Inactivity):
    घुटने के जोड़ों के दर्द से होने वाली निष्क्रियता या चलने फिरने में कठिनाई जिसमें रोज़मर्रा के काम न कर पाना भी शामिल है, चिंता का कारण हो सकते हैं। ऐसे में Knee Replacement Surgery करवाई जा सकती है।

सर्जरी की तैयारी के लिए आपको निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और जैसा आपका डॉक्टर कहे उन सभी सलाहों का पालन करना होगा: 

  1. सर्जरी से पहले किये जाने वाले टेस्ट्स/ जांच (Tests Before Surgery)
  2. सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की जांच (Anesthesia Testing Before Surgery)
  3. सर्जरी की योजना (Surgery Planning)
  4. सर्जरी से पहले निर्धारित की गयी दवाइयाँ (Medication Before Surgery)
  5. सर्जरी से पहले फास्टिंग/ खाली पेट रहना (Fasting Before Surgery)
  6. सर्जरी का दिन (Day Of Surgery)
  7. सामान्य सलाह (General Advice Before Surgery)

इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जाएँ - सर्जरी से पहले की तैयारी

एक अंतःशिरा रेखा (Intravenous Line) आपके हाथ या बांह से जुड़ी होती है। आपको बेहोश करने के लिए सामान्य एनेस्थीसिया दिया जाता है। मूत्र के स्त्राव के लिए एक मूत्र कैथेटर शरीर के अंदर रखा जाता है।

प्रतिस्थापन प्रक्रियाओं के दो प्रकार हैं:-

  1. पूरे घुटने की रिप्लेसमेंट (Total Knee Replacement)
  2. आंशिक घुटने की रिप्लेसमेंट (Partial Knee Replacement)

1. पूरे घुटने का प्रतिस्थापन (Total Knee Replacement):
पूरे घुटने की प्रतिस्थापन प्रक्रिया 1 से 3 घंटे ले सकती है। घुटनों की स्थिति (पोजीशन) को बदलने के लिए घुटने में एक चीरा लगाया जाता है जिससे पूरी सर्जरी के दौरान घुटने के जोड़ों को पर्याप्त रूप से देखा जा सके। चीरा पिंडली की हड्डी और जांघ की हड्डी तक पहुंचने में सहायता करती है। घुटने के अंदर की सतहों को इस प्रकार आकार दिया जाता है, जिससे वे शल्य चिकित्सा के दौरान लगाए गए कृत्रिम जोड़ों को पकड़ सके। फिर कृत्रिम अंग (artificial body part) को जांघ की हड्डी के आखिरी छोर पर लगाया जाता है। उसके बाद कृत्रिम अंग को उसकी जगह पर लगाने के लिए बोन सीमेंट का उपयोग किया जाता है। 

जब कृत्रिम अंग हड्डी पर लगा दिया जाता है उसके बाद एक प्लास्टिक स्पेसर को पिंडली की हड्डी से सम्बन्धित सतह पर रखा जाता है। प्लास्टिक स्पेसर सदमे अवशोषित करने का कार्य करता है। उसके बाद, सर्जन घुटने को 110 डिग्री तक मोड़ता है। इसके बाद, त्वचा को जहाँ से चीरा गया होता है वहां से उसे सिल दिया जाता है (स्टिचेस लगाए जाते हैं)।

2. घुटने का कोई हिस्सा बदलना (Partial Knee Replacement): 
आंशिक घुटने की रिप्लेसमेंट- Unicompartmental Knee Replacement और Unicondylar Knee Replacement के नाम से भी जाना जाता है। यह क्षतिग्रस्त घुटने के जोड़ों को बदलने के लिए शरीर को सबसे कम छेदकर या चीरकर की जाने वाली सर्जरी है। सर्जन द्वारा घुटने के जोड़ों पर काम करने के लिए पूरे घुटने के रिप्लेसमेंट की तुलना में छोटे चीरे बनाये जाते हैं। घुटने के जोड़ों के क्षतिग्रस्त भाग को सर्जरी द्वारा हटाया जाता है। एक कृत्रिम अंग को उसकी जगह लगाया जाता है। सर्जन यह सुनिश्चित करता है कि सर्जरी के पूरा होने से पहले कृत्रिम अंग बिल्कुल सही तरह से लग जाए। 

घुटने के प्रभावित हिस्से पर धातु से बना एक नी-कैप (घुटनों पर लगाया एक ढक्कन जैसा आकार) रखा जाता है। उसको जगह पर बनाये रखने के लिए बोन सीमेंट से भरा जाता है। इसके बाद, चीरा को सिला जाता है (स्टिचेस लगाए जाते हैं)। आदर्श रूप से, आप को आंशिक घुटने के बदलने के लिए कहा जाता है अगर गठिया से घुटने का केवल एक भाग ही प्रभावित हुआ है और अभी भी घुटने की गति अच्छी है, लिगामेंट स्थिर हैं और अगर आप बूढ़े हैं या आपका शरीर इतना सक्रिय नहीं है।

आपके घुटने को ठीक से पट्टी बांधने के बाद आपको रिकवरी रूम में ले जाया जाएगा। सर्जरी से बनने वाले तरल पदार्थों को निकालने के लिए जोड़ों पर एक कैथेटर ट्यूब भी लगाया जाता है। जब आप आराम कर रहे होते हैं तो आपके पैरों को झुकाने या हिलाने के लिए घुटने को एक निरंतर निष्क्रिय गति मशीन (Continuous Passive Motion, CPM) से जोड़ा जाता है, जब आप सो रहे होते हैं। आपको बार बार शौचालय न जाना पड़े इसके लिए भी एक कैथिटर लगाया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, रक्त के थक्के की संभावना को कम करने और रक्त प्रसार में सुधार के लिए आपको Compression Stockings पहनने के लिए कहा जाता है। दवाओं की कार्यवाही को नियंत्रित करने के लिए आपके नस से एक अंतःशिरा रेखा जोड़ी जाएगी। सर्जरी के बाद दस्त होना एक आम प्रतिक्रिया है। इसके लिए अपने चिकित्सक से कहें कि वे आपको दस्त की दवाएं दें।

सर्जरी के बाद क्या करें और क्या न करें

सर्जरी के बाद स्वास्थ्य में जल्दी लाभ हो ये सुनिश्चित करने के लिए आपको निम्न बातों का ध्यान रखना होगा :-

  1. सोते समय ध्यान दें कि आप सीधे सोएं और ऐसी नहीं जिससे आपका घुटना मुड़ जाए या उस पर बल पड़े।
  2. सर्जरी के बाद कम से कम 6 से 8 हफ़्तों तक ड्राइविंग न करें। ड्राइविंग तब ही करें जब आपको विशवास हो जाये की अब आप पूरी तरह से ठीक हैं।
  3. रोज़मर्रा के कार्य करते हुए ध्यान रखें कि आप अपने घुटनों पर बल न दें। 
  4. चीरे के घाव के जल्दी भरने के लिए आवश्यक है उसे साफ़ और संक्रमण रहित रखा जाए।
  5. ध्यान दें कि आप नहाते हुए बाथरूम में न फिसलें।
  6. रिकवरी के दौरान ध्यान दें कि आप भागने, कूदने, या कोई और ऐसे कार्य न करें जिससे आपके घुटने पर बल पड़े। इससे चोट लग सकती है और रिकवरी में और समय लग सकता है।
  7. अगर आपका घर बहुमंज़िला है तो सीढ़ियां न चढ़ें और सर्जरी से पहले ही अपने रहने की योजना नीचे की मंज़िल पर करवा लें। 
  8. कोशिश करें कि आप ज़्यादा देर तक बैठे न रहें क्योंकि इससे घुटनों में ऐंठन हो सकती है।
  9. सूजन और खुजली से बचने के लिए अपने घुटनों पर आइस पैक्स का इस्तेमाल करें। (और पढ़ें - खुजली दूर करने के घरेलू उपाय)
  10. डॉक्टर और फ़िज़ियोथेरेपिस्ट द्वारा निर्धारित व्यायाम और रोज़ चलने को नज़रअंदाज़ न करें।
  11. सर्जरी से पहले ही बैसाखी और छड़ी की सहायता से चलने का अभ्यास करें।
  12. डॉक्टर द्वारा बताये तरीके से CPM का प्रयोग करें क्योंकि इससे आपको अधिकतम सीमा तक गति प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
  13. घर से सारे कालीन हटा लें क्योंकि इससे गिरने का खतरा बढ़ सकता है।
  14. फिजियोथेरेपी सेशन में सिखाये गए सारे व्यायाम सीखें और सही तरीके से करें क्योंकि ये आपको ऐंठन और तकलीफ से निजात पाने में सहायता करेंगे और घुटने में रक्‍तसंचार में सुधार पाने में भी मदद करेंगे।
  15. घुटने की सर्जरी के बाद की समस्याओं को उचित आहार की मदद से रोका जा सकता है। फिजियोथेरेपी के व्यायाम करें और हर समय आराम करने की बजाय सक्रिय रहें। आदर्श रूप से ये प्रतिस्थापन अगले 15-20 वर्षों तक चल जायेगा।

घुटनों के जोड़ बदलने की सर्जरी के बाद आपको सामान्य कार्य करने के लिए 6 हफ्ते लग सकते हैं। हालांकि दर्द और सूजन जाने में 3-6 महीने लग सकते हैं। पूरी तरह से ठीक होने में एक साल तक लग सकता है। हालांकि रिकवरी का समय मरीज की शारीरिक स्थिति और सर्जरी के बाद की देखभाल पर भी निर्भर करता है। इसलिए डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें। 

ये एक ऐसी सर्जरी है जो आपके जीवन में सुधार लाकर उसे बेहतर कर सकती है। मगर, अन्य सर्जरी की तरह इसमें भी कई जोखिम हैं जिनपर ध्यान देना ज़रूरी है। ऐसे ही कुछ जोखिम नीचे दिए गए हैं:

  1. गहरी नस की घनास्रता (Deep Vein Thrombosis)
    साधारण शब्दों में Deep Vein Thrombosis का अर्थ है गहरी नसों (ज़्यादातर पैरों की) में रक्त के थक्कों का गठन हो जाना। रक्त के थक्के बनने के कई कारण हो सकते हैं। रक्तप्रवाह में निकल जाने वाले एंटीजन और वसा में भी रक्त के थक्के बनाने की क्षमता होती है।
  2. फ्लूइड बिल्डअप (Fluid Buildup; द्रव इकठा हो जाना)
    यह बहुत गंभीर परेशानी नहीं है। घुटने के पीछे तरल पदार्थ बन सकते हैं और इसे आसानी से बहार भी निकला जा सकता है।
  3. अकड़न
    मरीज अपने घुटनों में अकड़न का अनुभव कर सकते हैं जो एक घुटने की सर्जरी के बाद पूरी तरह से सामान्य है। रोगी अपने घुटनों को आगे पीछे नहीं मोड़ या झुका पाते। यह परेशानी एक फिजियोथेरेपिस्ट की सहायता से कम की जा सकती है। घुटने की सामान्य गति सीमा भी अभ्यास की मदद से प्राप्त की जा सकती है।
  4. संक्रमण
    संक्रमण एक आम या हलके में लिए जाने वाला जोखिम नहीं है। यदि सर्जरी के बाद घुटने के जोड़ों के भीतर संक्रमण विकसित होता है, तो यह बेहद दर्दनाक स्थिति हो सकती है। सर्जरी के कुछ हफ्तों
    तक संक्रमण होने का जोखिम रहता है और इस समय इससे बचने के लिए दवाओं और एंटीबायोटिक्स की मदद ली जाती है।
  5. बदले हुये घुटने से आवाज़ आना
    इम्प्लांट से हल्की आवाज़ होना आम है। चूंकि इम्प्लांट्स प्लास्टिक और धातु से बने होते हैं, इसलिए घुटने को हिलाने या कुछ कार्य करने पर आवाज़ आना सामान्य है और कोई चिंता का विषय नहीं है।
  6. रक्त वाहिका में चोट
    सर्जरी के दौरान घुटनों के पीछे की नसों में चोट या रक्त वाहिकाओं को क्षति पहुँचने की थोड़ी सम्भावना रहती है।
  7. नसों में चोट
    दुर्लभ मामलों में, यह संभव है कि घुटने के जोड़ों (जिसकी सर्जरी की जा रही है) से सटी हुई कोई नस सर्जरी के दौरान गलती से क्षतिग्रस्त हो जाए। इससे नसों के कार्य (क्षति के आधार पर) भी बिगड़ सकता है। यदि क्षति गंभीर है, तो न्यूरोलॉजिस्ट (नसों का डॉक्टर) को दिखाएँ।
  8. अपनी जगह से हिल जाना (Dislocation)
    नए फिट किये गए जोड़ों का विस्थापन (अपनी जगह से खिसक जाना) भी हो सकता है जिसे सर्जरी द्वारा ठीक किया जा सकता है।
  9. घाव
    घावों और घुटनों के पास की त्वचा को ठीक से भरना ज़रूरी है। अगर रिकवरी अपेक्षित रूप से न हो पाए तो स्किन ग्राफ्ट (त्वचा का प्रत्यारोपण) का सहारा लेना पड़ सकता है।
  10. एलर्जी
    इम्प्लांट धातुओं (जैसे टाइटेनियम और अन्य धातुओं के मिश्रण) से तैयार किया जाता है। बहुत से लोगों को कुछ वस्तुओं और धातुओं से एलर्जी होती है। चिकित्सक को उनके बारे में सूचित किया जाना चाहिए।
  11. हड्डी का फ्रैक्चर
    सर्जिकल उपकरणों और आकस्मिक क्षति की वजह से प्रक्रिया के दौरान आसपास की हड्डियों के फ्रैक्चर और क्षति की पूरी सम्भावना रहती है।
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