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नसों की कमजोरी को मेडिकल भाषा में “न्यूरोपैथी” (Neuropathy) कहा जाता है। इस स्थिति में शरीर की कुछ नसें कमजोर हो जाती हैं, कुछ लोगों को यह समस्या थोड़े समय के लिए होती है लेकिन कुछ मामलों में यह स्थायी भी हो सकती है।

प्रभावित नस से संबंधित शरीर का अंग ठीक से काम नहीं कर पाता। वैसे तो इस स्थिति का इलाज करने के लिए डॉक्टर से इलाज करवाने की जरूरत पड़ती है, लेकिन अगर स्थिति गंभीर नहीं है, तो कुछ घरेलू उपायों की मदद से भी नसों की कमजोरी को दूर किया जा सकता है।

  1. नसों की कमजोरी का घरेलू उपाय है सेंधा नमक - Naso ki kamjori ka gharelu upay hai sendha namak
  2. अश्वगंधा है नसों में कमजोरी का देसी इलाज - Ashwagandha hai naso mein kamjori ka desi ilaj
  3. नसों की कमजोरी को करें कैमोमाइल-टी से दूर - Naso ki kamjori ko karein chamomile tea se dur
  4. नसों की कमजोरी का इलाज है ग्रीन-टी - Naso ki kamjori ka ilaj hai green tea
  5. नसों की कमजोरी का देसी नुस्खा है गर्म सिकाई - Naso ki kamjori ka desi nuskha hai garm sikai
  6. ठंडी सिकाई से दूर होती है नसों की कमजोरी - Thandi sikai se dur hoti hai naso ki kamjori

सेंधा नमक साधारण नमक के मुकाबले कई गुना फायदेमंद माना जाता है। सेंधा नमक सूजन को कम करता है और मांसपेशियों व नसों के बीच के संतुलन को बेहतर बनाता है। सेंधा नमक में मैग्नीशियम और सल्फेट पाया जाता है, जो इसके गुणों का मुख्य स्रोत होता है। सेंधा नमक के पानी में नहाने से नसों और मांसपेशियों की कमजोरी को दूर किया जाता है।

आवश्यक सामग्री 

  • 1 कप सेंधा नमक
  • 1 बाल्टी पानी

इस्तेमाल का तरीका

  • अपने नहाने के पानी में एक कप सेंधा नमक मिलाएं
  • अगर आपको किसी एक हिस्से की नस में दर्द हो रहा है, तो उस हिस्से को इस पानी में 20 मिनट तक डाल कर रखें
  • इसके अलावा इस पानी से नहा भी सकते हैं

कब इस्तेमाल करें

इस प्रक्रिया को दिन में एक बार करें जब तक आपकी नसों का दर्द पूरी तरह से ठीक न हो जाए।

अश्वगंधा हमारे शरीर को गर्मी, शक्ति और ताकत देता है, जिससे नसों के काम करने की क्षमता में भी सुधार होता है। अश्वगंधा के पत्तों से ज्यादा अश्वगंधा की जड़ को आयुर्वेद में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी जड़ में ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो तंत्रिका तंत्र  को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। 

आवश्यक सामग्री

  • 1 चम्मच अश्वगंधा पाउडर
  • 1 गिलास दूध/पानी

इस्तेमाल का तरीका

अश्वगंधा पाउडर को दूध या पानी में मिलाकर रोज रात सोने से पहले और सुबह उठने के बाद पिएं।

कब इस्तेमाल करें

इसका एक महीने तक रोजाना सेवन करें, जब तक नसों की कमजोरी के लक्षण कम न हो जाए।

सदियों से कैमोमाइल को औषधियों में इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि इसमें एंटी-इंफ्लामेटरी (सूजन व जलन कम करने वाले) और एंटी-ऑक्सीडेंट्स (ऑक्सीकरण को रोकने वाले) गुण पाए जाते हैं। यह लंबे समय से घाव भरने, छाले, गाउट, त्वचा की खरोंच, जलन के निशान और पीड़ादायक नासूर आदि को ठीक करने में  मदद करती है। हाल ही में किए गए अध्ययनों के बाद कैमोमाइल को नसों की कमजोरी दूर करने और चिंता को कम करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाने लगा है। इसके अलावा कैमोमाइल डरावने सपनों, अनिद्रा और अन्य नींद की समस्याओं का इलाज करने में मदद करती है।

आवश्यक सामग्री

  • 1 कप पानी 
  • कैमोमाइल की 2-3 पत्तियां
  • ½ चम्मच शहद 

इस्तेमाल का तरीका

  • कैमोमाइल के पत्तों और पानी को सॉसपैन में उबाल लें
  • पत्तियों को 3-4 मिनट के लिए पानी में भिगा रहने दें
  • अब इसे छान कर एक कप में डाल लें
  • इसके अंदर ½ चम्मच शहद मिलाएं और गुनगुना होने पर पिएं

कब इस्तेमाल करें

कैमोमाइल चाय को दिन में 2 बार पिए, सुबह और शाम पीना बेहतर माना जाता है।

ग्रीन टी एक बहुत ही लोकप्रिय औषधि है, जो कई स्वास्थ्य लाभ पहुंचाती है। ग्रीन टी ब्लड प्रेशर से लेकर वजन कम करने तक में मदद करती है। ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट्स और टी पॉलीफिनोल्स (कैलोरी को कम करने वाले यौगिक) होते हैं, जो स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं। ग्रीन टी में एमिनो एसिड होते हैं, जो चिंता को कम करके नसों में आराम पहुंचाते हैं। अध्ययनों में यह पाया गया है की एल-थिनाइन (चिंता को कम करने वाला एमिनो एसिड) मस्तिष्क पर सीधा प्रभाव डालता है। एल-थिनाइन दिमाग में अल्फा वेव एक्टिविटी (आराम पहुंचाने वाली तरंगे) पैदा करता है, जिससे आराम करने की क्षमता बढ़ती है और नसों की कमजोरी भी दूर हो जाती है।

आवश्यक सामग्री

  • 1 चम्मच ग्रीन-टी पाउडर या बैग
  • 1 कप गर्म पानी
  • ½ चम्मच शहद

इस्तेमाल का तरीका

  • पानी को 3 से 4 मिनट के लिए सॉसपैन पर गर्म कर लें
  • अब इस पानी को एक कप में डालें

कब इस्तेमाल करें

ग्रीन टी का सेवन रोजाना दिन में दो बार सुबह और शाम को करें।

गर्म सिकाई आमतौर पर दर्द व सूजन जैसी स्थिति में काफी आराम प्रदान करती है और साथ ही एक सुखद अनुभव देती है, जो नसों के दर्द को कम करके उन्हें मजबूत बनाने में मदद करती है। हमारे शरीर में कई तंत्रिकाए हैं, जिन्हें गर्म सिकाई से आराम पहुंचाया जा सकता है। गर्म सिकाई कई तरह से की जा सकती है।

आवश्यक सामग्री

  • 1 बर्तन गर्म पानी/गर्म तवा
  • कपड़ा/गर्म पट्टी

इस्तेमाल का तरीका

  • कपड़े को गर्म पानी में भिगोएं और अपने उस हिस्से पर लगाएं, जिसमें आपको कमजोरी महसूस हो सही हो।
  • चाहें तो कपड़े की जगह गर्म पट्टी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं
  • इस उपाय को 15 से 20 मिनट के लिए करें
  • इसके अलावा आप चाहें तो गर्म पानी की जगह तवे का भी इस्तेमाल कर सकते हैं
  • तवे को गर्म करके उस पर नम कपड़ा रखें
  • कपड़े के गर्म होने पर अपने प्रभावित हिस्से पर लगा कर सिकाई करें (ध्यान रहे कपड़ा अधिक गर्म ना हो पाए, क्योंकि वह त्वचा को जला सकता है)

अगर आपको एक से अधिक हिस्सों में नसों की कमजोरी महसूस हो रही है तो दिन में दो बार गर्म पानी से नहाएं।

कब इस्तेमाल करें

इस उपाय को रोजाना एक बार अपनाए जब तक नसों की कमजोरी से प्रभावित हिस्सों में आराम ना मिल जाए।

ठंडी सिकाई में गर्म सिकाई जितना आराम तो नहीं मिल पाता, लेकिन यह नसों संबंधी दर्द को कम करने में काफी प्रभावी होती है। यह त्वचा में सुन्न कर देने वाले प्रभाव पैदा करती है जिससे दर्द से आराम मिलता है। बर्फ एंटी-इंफ्लामेटरी के रूप में काम करती है यानी की यह सूजन को कम करने में मदद करती है। इसके अलावा ठंडी सिकाई नसों को सुन्न करती है और दर्द के कारण कमजोर हुई नसों को मजबूत बनाती है। यदि किसी व्यक्ति को गर्म सिकाई से कुछ महसूस न हो रहा हो तो वह ठंडी सिकाई का उपयोग कर सकता है।

आवश्यक सामग्री

  • बर्फ के छोटे टुकड़े
  • कपड़ा

इस्तेमाल का तरीका

  • बर्फ के टुकड़ों को एक कपड़े में बांध लें
  • अब इसे अपने प्रभावित हिस्से पर 10 से 15 मिनट के लिए लगा कर रखें
  • बर्फ को त्वचा पर सीधे न लगाएं इससे जलन हो सकती है
  • आप चाहें तो बर्फ की जगह ठंडे पानी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं

कब इस्तेमाल करें

इस प्रक्रिया को दिन में एक बार इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

नसों की कमजोरी को दूर करने और उन्हें मजबूत बनाने के लिए आपको अपने जीवन में भी कुछ सुधार लाने होंगे जैसे की अच्छी डाइट लेना, अपने आहार में फलों, सब्जियों और गेहूं को शामिल करना। इसके अलावा रोजाना व्यायाम करना भी नसों में दर्द से आराम प्रदान करता है और उन्हें मजबूत बनाता है और धूम्रपान का सेवन न करें।

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