नसों की कमजोरी - Nerve Weakness in Hindi

Dr. Nabi Darya Vali (AIIMS)MBBS

June 16, 2018

September 23, 2021

नसों की कमजोरी
नसों की कमजोरी

नसों की कमजोरी क्या होता है ?

"न्यूरोपैथी" (Neuropathy) एक मेडिकल शब्द है जिसका प्रयोग नसों के अलग-अलग विकारों के लिए किया जाता है जिनमें शरीर के कुछ हिस्सों की नसों में कमजोरी हो जाती है या वह गतिहीन हो जाती हैं। कुछ लोगों के लिए यह समस्या थोड़े समय के लिए होती है लेकिन कुछ लोगों के लिए यह स्थायी भी हो सकती है।

प्रभावित नस के प्रकार के आधार पर या तो नस से सम्बंधित शरीर का अंग ठीक से काम नहीं कर पाता या वह कुछ महसूस नहीं कर पाता।

कुछ बीमारियों या पोषण की कमी या जीवनशैली से सम्बंधित समस्याओं के कारण नसों की कमजोरी या तंत्रिका तंत्र (Nervous System) की कमजोरी हो सकती है। इसके परीक्षण के लिए लक्षणों की जाँच, ब्लड टेस्ट या नसों के टेस्ट का प्रयोग किया जाता है और इसका इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है।

इसकी वजह का इलाज करने से नसों की कमजोरी की समस्या ठीक की जा सकती है। इसके लिए दवाएं और अन्य थेरेपी भी उपलब्ध हैं।

(और पढ़ें - कमजोरी)

पेरिफेरल (Peripheral) नसें क्या होती हैं?

हमारे तंत्रिका तंत्र (Nervous System) के दो भाग होते हैं:

  • केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) - मस्तिष्क व रीढ़ की हड्डी में जाने वाली नसें
  • पेरिफेरल तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System) - मस्तिष्क व रीढ़ की हड्डी के बाहर मौजूद नसें

पेरिफेरल तंत्रिका तंत्र की नसों को "पेरिफेरल नसें" या परिधीय नसें भी कहा जाता है।

नसों की कमजोरी के लक्षण - Nerve Weakness Symptoms in Hindi

नसों की कमजोरी के लक्षण क्या होते हैं ?

नसों की कमजोरी के लक्षण निम्नलिखित हैं -

नसों की कमजोरी महसूस होते ही डॉक्टर के पास जाएं।

नसों की कमजोरी के कारण और जोखिम कारक - Nerve Weakness Causes & Risk Factors in Hindi

नसों में कमजोरी क्यों होती है ?

नसों की कमजोरी निम्नलिखित कारणों से हो सकती है -

  1. मल्टीप्ल स्केलेरोसिस, गिल्लन बर्रे सिंड्रोम (Guillain-Barré syndrome: एक ऐसा विकार जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली पेरिफरल नसों को नुकसान पहुंचाती है), मायसस्थीनिया ग्रेविस (Myasthenia gravis: मांसपेशियों की कमजोरी व थकान), लुपस, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (आईबीडी) जैसी स्व-प्रतिरक्षित बीमारियां (auto-immune disease)
  2. शुगर या डायबिटिक न्यूरोपैथी (Diabetic neuropathy)
  3. दवाओं के दुष्प्रभाव और विषाक्त पदार्थ (और पढ़ें - बॉडी को डिटॉक्स कैसे करें)
  4. दिमाग तक संकेत भेजने वाली नसों को प्रभावित करने वाली बीमारियां (मोटर न्यूरॉन बीमारियां)
  5. पोषण तत्वों की कमी
  6. हर्पीस, एचआईवी और हेपेटाइटिस सी जैसे संक्रमण जो वाइरस, बैक्टीरिया और परजीवी के कारण होते हैं
  7. ट्यूमर या हड्डी बढ़ने के कारण होने वाला दबाव (और पढ़ें - ब्रेन ट्यूमर
  8. नसों के स्वास्थ्य या कार्य को प्रभावित करने वाली आनुवांशिक समस्याएं
  9. नसों की बनावट या विकास को प्रभावित करने वाली जन्मजात समस्याएं
  10. नसों की बनावट या विकास को प्रभावित करने वाले विषाक्त पदार्थ
  11. नसों को प्रभावित करने वाले पदार्थों का अधिक सेवन
  12. नसों के कार्यों या नसों को नुक्सान पहुंचाने वाले ड्रग्स का सेवन (और पढ़ें - नशे की लत्त)
  13. नसों के ट्यूमर या आस-पास के ऊतकों के ट्यूमर, जो नसों के ऊतक पर दबाव डालते हैं या उन्हें नुक्सान पहुंचाते हैं


नसों की कमजोरी के जोखिम कारक क्या होते हैं ?

निम्नलिखित कारक नसों की कमजोरी का जोखिम बढ़ा सकते हैं -

नसों की कमजोरी से बचाव - Prevention of Nerve Weakness in Hindi

नसों की कमजोरी होने से कैसे बचा जा सकता है?

नसों की कमजोरी से बचने के लिए आप निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं -

  • शराब न पिएं या संतुलन में पिएं। (और पढ़ें - शराब की लत)
  • सिगरेट न पिएं या अगर पीते हैं तो छोड़ने की कोशिश करें।
  • संतुलित आहार का सेवन करें।
  • नियमित व्यायाम करें।
  • विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आने से बचे ।
  • खेल खेलते समय अपने पैरों को बचा कर रखें।

अगर आपको शुगर है, तो अपने पैरों का खास ख़याल रखें। रोज़ाना अपने पैरों को धोएं और उनकी जांच करें व अपनी त्वचा को लोशन लगाकर नम रखें।

(और पढ़ें - पैरों की मसाज के फायदे)

यदि आपको नसों की कमजोरी की समस्या है, तो आपके लिए छोटी मोटी दुर्घटना होने का जोखिम अधिक होता है, इस जोखिम को कम करने के लिए आप निम्नलिखित उपाय अपना सकते हैं -

  • अपने पाँव को बचाने के लिए हमेशा जूते पहन कर रखें।
  • अपने पैरों को ऐसी वस्तुओं से बचाएं जिनसे आप ठोकर खा कर गिर सकते हैं।
  • पानी का तापमान देखने के लिए अपने हाथों या पैरों की जगह अपनी कोहनी का प्रयोग करें।
  • अपने बाथरूम में हैंडल लगवाएं।
  • फिसलने से बचने के लिए बाथरूम में पायदान का उपयोग करें।
  • एक ही अवस्था में अधिक देर तक न रहें, हर घंटे कुछ देर के लिए उठें और घूमें। यह खासकर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो लम्बे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करते हैं।

नसों की कमजोरी का परीक्षण - Diagnosis of Nerve Weakness in Hindi

नसों की कमजोरी का परीक्षण कैसे होता है ?

नसों की कमजोरी का पता लगाने के लिए निम्नलिखित परीक्षण किए जाते हैं -

  • पहले की समस्याओं की जांच
    आपके डॉक्टर आपकी पहले की समस्याओं, लक्षणों, जीवनशैली, शराब पीने की आदत और परिवार में किसी को हुए तंत्रिका संबंधी रोगों (Neurological disease) की जाँच करेंगे। (और पढ़ें - शराब छोड़ने के घरेलु उपाय)
     
  • तंत्रिकाओं की जांच
    आपके डॉक्टर आपकी मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ने वाले ऊतक के कार्यों, मांसपेशियों की ताक़त व खिचाव, कुछ उत्तेजनाओं को महसूस करने की आपकी योग्यता और आपके शरीर की मुद्रा व ताल-मेल की जांच करेंगे।
     
  • ब्लड टेस्ट
    ब्लड टेस्ट से विटामिन की कमी, शुगर, प्रतिरक्षा प्रणाली की असमान्यता और पेरिफेरल नसों को नुक्सान पहुंचाने वाली समस्याओं का पता चलता है।
     
  • इमेजिंग टेस्ट (Imaging tests)​
    सीटी स्कैन या एमआरआई स्कैन से रीढ़ की हड्डी की डिस्क के नुक्सान, ट्यूमर और अन्य असामान्यताओं का पता चलता है। (और पढ़ें - स्लिप डिस्क)
     
  • नसों के कार्यों का टेस्ट
    इलेक्ट्रोमायोग्राफी (Electromyography) आपकी मांसपेशियों की इलेक्ट्रीकल गतिविधि को रिकॉर्ड करता है, जिससे मांसपेशियों के नुक्सान का पता चलता है।
     
  • नसों की बायोप्सी
    नसों की बायोप्सी में नस के एक छोटे से हिस्से को निकालकर असामान्यताएं देखने के लिए उसकी जांच की जाती है।
     
  • त्वचा की बायोप्सी
    इसमें आपके डॉक्टर त्वचा का एक छोटा सा भाग निकालते हैं और नसों के नुक्सान की जांच करते हैं।

नसों की कमजोरी का इलाज - Nerve Weakness Treatment in Hindi

नसों की कमजोरी का इलाज कैसे होता है ?

नसों की कमजोरी का इलाज करने के लिए इसकी वजह का इलाज किया जाता है। कई इलाज नसों की कमजोरी से राहत दे सकते हैं और आप अपनी दैनिक गतिविधियां फिर से कर सकते हैं। कभी-कभी अलग-अलग इलाजों का संयोजन सबसे अच्छा काम करता है।

  1.  शुगर के कारण होने वाली नसों की कमजोरी को ठीक करने के लिए जीवनशैली में परिवर्तन किए जाते हैं। जैसे - धूम्रपान छोड़ना, शराब का सेवन न करना, एक स्वस्थ वजन बनाए रखना और रोज़ाना व्यायाम करना अदि। (और पढ़ें - वजन घटाने के आसान तरीके)
  2. विटामिन बी12 की कमी के कारण होने वाली नसों की कमजोरी के लिए विटामिन बी 12 के टीके व दवाएं दी जाती हैं।
  3.  किसी दवा के कारण नसों की कमजोरी को उस दवा को लेना बंद करने से ठीक किया जा सकता है।

कुछ असामान्य प्रकार की नसों की कमजोरी को निम्नलिखित दवाओं से ठीक किया जा सकता है -

  • कॉर्टिकॉस्टिरॉइड (Corticosteroids) - सूजन को कम करने वाली दवाएं।
  •  इम्युनोसप्रैसेंट (Immunosuppressant) - प्रतिरक्षा प्रणाली की गतिविधि को कम करने वाली दवाएं।
  • इम्युनोग्लोबुलिन (Immunoglobulin) - एंटीबाडी नामक प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा बनाए गए ब्लड प्रोटीन का मिश्रण।
  • सर्जरी - यदि आपको ट्यूमर या किसी अन्य वजह से नसों पर दबाव के कारण नसों की समस्या हुई है, तो आपको दबाव कम करने के लिए सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।

हालांकि, ऐसा ज़रूरी नहीं है कि नसों की कमजोरी की वजह हमेशा इलाज से ठीक हो सके।

नसों की कमजोरी के कारण हो रही परेशानी को कम करने के लिए उपाय निम्नलिखित हैं -

  • ध्यान लगाना (मेडिटेशन)
  • मसाज 
  • एक्यूपन्चर (Acupuncture)
  • ट्रांसक्यूटेनस इलेक्ट्रिकल नर्व स्टिम्युलेशन (Transcutaneous electrical nerve stimulation) - इसमें त्वचा से इलेक्ट्रोड जोड़े जाते हैं जो आपको हलके करंट के झटके देते हैं। इसका प्रयोग एक महीने के लिए रोज़ाना तीस मिनट तक किया जाना चाहिए।
  • फिसिकल थेरेपी (Physical therapy) - अगर आपको मांसपेशियों की कमजोरी है, तो फिसिकल थेरेपी से आपकी गतिविधियों को सुधारा जा सकता है। इसके लिए आपको छड़ी, वॉकर व्हीलचेयर की आवश्यकता हो सकती है।

नसों की कमजोरी की जटिलताएं - Nerve Weakness Complications in Hindi

नसों की कमजोरी की जटिलताएं क्या होती हैं ?

कमजोर नसों से कई अन्य स्वास्थ सम्बन्धी समस्याएं हो सकती हैं जिनमें से कुछ आम समस्याएं निम्नलिखित हैं -

  • साइटिका - यह नसों की जड़ पर दबाव पड़ने के कारण होने वाली एक समस्या है।
  • मल्टीप्ल स्क्लेरोसिस - एक ऐसी स्थिति है जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली तंत्रिकाओं की "माइलिन शीथ" (Myelin sheath; नसों के चारों ओर मौजूद परत) को नुक्सान पहुंचाती है।
  • बेल्स पल्सी (Bell's palsy) - चेहरे के एक तरफ की नसों की सूजन जिससे प्रभावित क्षेत्र में नसों की कमजोरी होती है।
  • डाईबेटिक न्यूरोपैथी - डायबिटीज के कारण नसों को नुक्सान पहुंचाने वाली एक समस्या। (और पढ़ें - शुगर कम करने के घरेलू उपाय)
  • स्ट्रोक - जब आपके मस्तिष्क के ऊतक में खून की बाधित सप्लाई के कारण रक्त का थक्का जम जाता है, तो उसे स्ट्रोक होता है। (और पढ़ें - स्ट्रोक का इलाज
  • पार्किंसन रोग - गतिविधियों को नुक्सान पहुंचाने वाला एक रोग। (और पढ़ें - पार्किंसन रोग के लक्षण)

नसों की कमजोरी में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Nerve Weakness in Hindi?

 नसों की कमजोरी के लिए क्या खाना चाहिए ?

विटामिन बी और विटामिन डी युक्त भोजन करने से नसों का स्वास्थ सही रहता है।

इसके लिए अन्य खाद्य पदार्थ निम्नलिखित हैं -



संदर्भ

  1. Krzysztof Suszyński. Physiotherapeutic techniques used in the management of patients with peripheral nerve injuries. Neural Regen Res. 2015 Nov; 10(11): 1770–1772. PMID: 26807111
  2. Usha Kant Misra et al. Diagnostic approach to peripheral neuropathy. Ann Indian Acad Neurol. 2008 Apr-Jun; 11(2): 89–97. PMID: 19893645
  3. Sumit Kar et al. Nerve damage in leprosy: An electrophysiological evaluation of ulnar and median nerves in patients with clinical neural deficits: A pilot study. Indian Dermatol Online J. 2013 Apr-Jun; 4(2): 97–10. PMID: 23741664
  4. Shri K Mishra et al. The therapeutic value of yoga in neurological disorders. Ann Indian Acad Neurol. 2012 Oct-Dec; 15(4): 247–254. PMID: 23349587
  5. National Cancer Institute [Internet]. Bethesda (MD): U.S. Department of Health and Human Services; Nerve Problems (Peripheral Neuropathy) and Cancer Treatment.

नसों की कमजोरी के डॉक्टर

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नसों की कमजोरी की दवा - Medicines for Nerve Weakness in Hindi

नसों की कमजोरी के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

नसों की कमजोरी की ओटीसी दवा - OTC Medicines for Nerve Weakness in Hindi

नसों की कमजोरी के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

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