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क्या होता है पेट का कैंसर?

पेट के कैंसर को गैस्ट्रिक कैंसर (gastric cancer) के नाम से भी जाना जाता है। यह कुछ असाधारण और घातक (कैंसरयुक्त) कोशिकाओं का समूह होता है, जो पेट के एक हिस्से में एक ढेर बना देता है।

आमतौर पर यह पेट की आंतरिक परत में स्थित कोशिकाओं में विकसित होता है, और समय समय के साथ पेट की दीवार में फ़ैल जाता है। पेट का कैंसर पेट की दीवार से आगे बढ़ कर आस-पास के अंगों में फैलता है जैसे जिगर (यकृत), अग्नाश्य, ग्रासनली (इसोफेगस) और आंतें।

पेट के सभी प्रकार के कैंसरों में से लगभग 90-95 प्रतिशत को पेट के एडेनोकार्सिनोमा (adenocarcinoma) के रूप में जाना जाता है। पेट में होने वाले अन्य प्रकार के कैंसरयुक्त ट्यूमर जैसे लिम्फोमा (lymphoma), गैस्ट्रिक सरकोमा (gastric sarcoma), और कार्सिनोइड ट्यूमर (carcinoid tumors), आदि, लेकिन ये बहुत ही कम देखने को मिलते हैं।

पेट के कैंसर के दौरान इसके लक्षण कुछ इस प्रकार से सामने आते हैं - पेट में परेशानी और दर्द, जी मिचलाना और उल्टी लगना, वजन घटना, निगलने में कठीनाई, उल्टी में खून आना, मल में खून निकलना, और कम भोजन करने पर भी पेट का फूला हुआ महसूस होना आदि।

इसका निदान शारीरिक परिक्षण, पिछली दवाईयों का विवरण, एंडोस्कोपी (endoscopy) और ऊतकों की बायोप्सी (biopsy) से किया जाता है।

पेट के कैंसर की गंभीरता या चरण का अनुमान यह देख कर लगाया जाता है कि ट्यूमर पेट में कहां है, यह कितनी हद तक पेट के ऊतकों में फ़ैल चूका है, और अगर यह पेट के बाहर शरीर के अन्य आंतरिक अंगो में भी फैल गया हो। 

पेट के कैंसर का इलाज उसके फोड़े के आकार और उसकी जगह जहां पर वह विकसित हुआ है, इस पर निर्भर करता है। इसके अलावा रोग का चरण (गंभीरता) और मरीज की सामान्य स्वास्थ्य भी इलाज के लिए काफी महत्व रखता है।

भारत में पेट का कैंसर 

भारत में पेट के कैंसर विकसित देशों की तुलना में कम देखा गया है। हालांकि भारत के कुछ प्रदेश जैसे दक्षिणी और पूर्वोत्तर राज्यों में पेट का कैंसर काफी बड़ी संख्या में देखा गया है।

सन् 1991 में पेट का कैंसर भारत में पिरिशों में पांचवा सबसे सामान्य कैंसर और महिलाओं में सांतवां  सबसे सामान्य कैंसर था।2012 में टाटा मेमॉरियल सेंटर के अनुसार पेट का कैंसर, भारत में कैंसर से मरने वाले लोगों का दूसरा सबसे बड़ा कारण रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 25,200 पुरूषों और 27,500 महिलाओं की इसकी वजह से मौत हो गई थी।

पेट के कैंसर में जीवन-दर 

वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गेनाइजेश्न (WHO) के मुताबिक दुनियाभर में कैंसर से होने वाली मृत्यु में से लगभग 7,23,000 लोग पेट के कैंसर के कारण होती है। अगर पेट में फैलने से पहले इसका निदान और इलाज किया जा सके तो इसके मरीजों की अगले 5 साल तक जीने का दर 67% तक होता है। अगर कैंसर पेट के आसपास के ऊतकों में फैल जाए तो मरीज की अगले 5 साल तक की जीवन दर 31% तक हो जाती है। और इसके अलावा अगर पेट का कैंसर शरीर के किसी ऐसे आंतरीक अंग में हो जिस तक पहुंच पाना कठिन हो तो इस स्थिति में मरीज की अगले 5 साल तक की जीवन दर 5% रह जाती है।

  1. पेट के कैंसर के प्रकार - Types of stomach cancer in Hindi
  2. पेट के कैंसर के चरण - Stages of stomach cancer in Hindi
  3. पेट के कैंसर के लक्षण - Stomach Cancer Symptoms in Hindi
  4. पेट के कैंसर के कारण - Stomach Cancer Causes in Hindi
  5. पेट के कैंसर से बचाव - Prevention of stomach cancer in Hindi
  6. पेट के कैंसर का परीक्षण - Diagnosis of stomach cancer in Hindi
  7. पेट के कैंसर का इलाज - Stomach cancer Treatment in Hindi
  8. पेट के कैंसर के जोखिम और जटिलताएं - Stomach cancer Risks & Complications in Hindi
  9. पेट के कैंसर में परहेज़ - What to avoid during stomach cancer in Hindi?
  10. पेट के कैंसर में क्या खाना चाहिए? - What to eat during stomach cancer in Hindi?
  11. पेट का कैंसर की दवा - Medicines for Stomach Cancer (Gastric Cancer) in Hindi
  12. पेट का कैंसर के डॉक्टर

पेट के कैंसर के प्रकार - Types of stomach cancer in Hindi

पेट के कैंसर के प्रकार 

कैंसर के चार प्रकार होते हैं - 

  1. एडिनोकार्सिनोमास (Adenocarcinomas) - यह कैंसर उन कोशिकाओं में विकसित होने लगता है, जो कोशिकाएं म्यूकोसा (mucosa) बनाती हैं - यह बलगम बनाने वाली पेट की सबसे सतही परत होती है। एडिनोकार्सिनोमास बहुत ही सामान्य प्रकार का पेट का कैंसर होता है। सभी प्रकार के पेट के कैंसरों में  90%-95% एडिनोकार्सिनोमास ही पाया जाता है।
  2. लिम्फोमा (Lymphoma) - यह कैंसर शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) के ऊतकों का कैंसर होता है। जो पेट और लसीका के ऊतकों सहित इनमें कहीं भी विकसित हो सकता है। लिम्फोमा पेट के कैंसरों में बहुत ही कम देखने को मिलता है। अन्य सभी पेट के कैंसरों की तुलना में यह सिर्फ 4% ही देखने को मिलता है। 
  3. गेस्ट्रोइंटेस्टिनल स्ट्रोमल ट्यूमर (Gastrointestinal stromal tumors) - यह भी काफी दुर्लभ प्रकार का पेट का कैंसर होता है। यह एक विशेष प्रकार की कोशिका में विकसित होता है, जो पेट की परत पर पाई जाती है जिसको मध्यवर्ती कोशिकाएं (इंटरस्टीशल सेल्; interstitial cells) भी कहा जाता है। माइक्रोस्कोप की मदद से जीआईएसटी (Gastrointestinal stromal tumors) की कोशिकाएं मासपेशियों और तंत्रिका कोशिकाओं के समान दिखने लग जाती हैं। इसका ट्यूमर पूरे पाचन तंत्र में कहीं भी विकसित हो सकता है, पर इसके 60-70% केस पेट में ही पाए जाते हैं।
  4. कार्सिनोइड ट्यूमर (Carcinoid tumors) - मुख्य रूप से यह पेट में हार्मोन पैदा करने वाली कोशिकाओं में विकसित होने लगता है। इसके ट्यूमर पेट में अन्य आंतरिक अंगों में नहीं फैलते हैं। पेट के कैंसर का यह प्रकार केवल 3% मरीजों में ही पाया जाता है।

पेट के कैंसर के चरण - Stages of stomach cancer in Hindi

पेट के कैंसर के चरण क्या हैं?

पेट कैंसर के चरणों को इस बात पर निर्धारित किया जाता है कि कैंसर पेट में कितना विकसित हो चुका है, और निदान होने तक वह कितना फैल चुका है।

कैंसर का स्टेज यह पता लगाने की प्रक्रिया होती है कि निदान करने से पहले कैंसर कितना फैल चुका है। कैंसर के चरणों का प्रयोग ट्यूमर के फैलाव का वर्णन करने के लिए किया जाता है। स्टेज का पता अक्सर कुछ स्कैन और अन्य टेस्ट की मदद से किया जाता है।

कैंसर के स्टेज को जानना आवश्यक होता है, क्योंकि यह मरीज की बीमारी के लिए सबसे बेहतर इलाज खोजने में डॉक्टर की मदद करता है। इसके अलावा मरीज भी कैंसर की स्थिति को अच्छे से जान पाता है और उससे जुड़ी चिंताओं पर डॉक्टर से बात कर सकता है।

विभिन्न प्रकार के कैंसरों को विभिन्न प्रकार से चरणों में विभाजित किया जाता है। पर आम तौर पर डॉक्टर "कैंसर स्टेज सिस्टम" (Cancer stage system) या "टीएनएम सिस्टम" (TNM system) का उपयोग करते हैं।

1. कैंसर स्टेज सिस्टमम

  1. स्टेज 1 - इस चरण में कैंसर का ट्यूमर ग्रासनली (इसोफेगस; esophagus) या पेट के अंदर की ऊपरी परत के ऊतकों तक ही सिमित रह जाता है। लेकिन ऐसा हो सकता है कि कैंसर कोशिकाएं आसपास की कुछ सीमित लसीका ग्रथिंयों (lymph nodes) में फैल चुकी हैं।
  2. स्टेज 2 - इस चरण में कैंसर इसोफेगस या पेट की मांसपेशियों में ज़्यादा गहराई से फ़ैल चूका होता है। इसके अलावा कैंसर लसीका ग्रंथियों तक भी ज़्यादा फैल जाता है।
  3. स्टेज 3 - इस चरण में कैंसर इसोफेगस या पेट की सभी परतों में फ़ैल चुका होता है और शरीर में आसपास के अंगों में भी फैल चुका होता है। यह एक छोटे कैंसर के रूप में उभर कर भी लसीका ग्रंथियों में व्यापक रूप से फैल सकता है।
  4. स्टेज 4 - इस चरण में कैंसर शरीर के दूर के भागों तक भी फैल चुका होता है।

2. टीएनएम सिस्टम

टीएनएम प्रणाली में तीन वर्ग होते हैं -

  1. T (Tumor/ट्यूमर) - कैंसर का मुख्य ट्यूमर पेट की परत में कितनी गहराई या गंभीरता से फैल चुका है?
  2. N (Node/नोड) - क्या ट्यूमर लिम्फ नोड (लसीका ग्रंथि) तक फैल गया है? अगर फैल गया है तो कितना और कहां तक?
  3. M (Metastasis/मेटासटैसिस) - क्या शरीर के अन्य भागों में भी कैंसर विकसित हो रहा है?

टेस्ट के दौरान इन तीनों श्रेणियों को अंक दिए जाते  हैं। और इनको एक साथ मिलाकर पता चलता है कि कैंसर कितना फैल गया है।

पेट के कैंसर के लक्षण - Stomach Cancer Symptoms in Hindi

पेट के कैंसर के लक्षण क्या होते हैं?

पेट कैंसर से जुड़े ऐसे कई लक्षण होते हैं, जो अन्य कई प्रकार की गंभीर बीमारीयों से भी जुड़े होते हैं। इस कारण से पेट के कैंसर को प्रारंभ में ही पहचान पाना कठिन होता है। कई कैंसर ग्रस्त मरीजों का निदान तब तक नहीं हो पाता जब तक कैंसर पूरी तरह से विकसित ना हो गया हो।

कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों में निम्नलिखित शामिल होते हैं -

  1. खाना खाते समय एकदम से पेट ज्यादा भरा हुआ महसूस होने लगना।
  2. डिस्फेजिया (Dysphagia; निगलने में कठिनाई)
  3. खाना खाने के बाद पेट का ज्यादा फूला हुआ महसूस होना।
  4. बार बार डकार आना
  5. सीने में जलन महसूस होना
  6. खट्टी डकारें या अपच जो ठीक ना हो पा रही हो (indigestion)
  7. पेट दर्द या छाती की हड्डी में दर्द
  8. पेट में हवा भरना जैसा महसूस होना
  9. उल्टी आना (उलटी में खून भी आ सकता है)

नीचे पेट के कैंसर के जोखिम को बढ़ाने वाले कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में बताया गया है जिन्हें देखकर बिलकुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए बल्कि गंभीरता से लिया जाना चाहिए, और जल्द से जल्द डॉक्टर को बताना चाहिए।

  1. डिस्फेजिया (Dysphagia; निगलने में कठिनाई)
  2. खट्टी डकार और उसके साथ निम्न में से कोई एक (या ज्यादा)
  3. अचानक वजन घटना
  4. बीमार पड़ना या एनिमिया होना (आमतौर पर मरीज खुद को थका हुआ महसूस करता है या फिर सांस फूलने लगती हैं।)

इंगलैंड के एनएचएस (National Health Service) के मुताबिक जिन 55 साले से ऊपर के लोगों को लगातार अपच की समस्या रहती हो, उनको डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए।

जिन लोगों को निरंतर अपच की समस्या हो और जीवन में पहले कभी नीचे दी गई समस्याओं में से किसी एक को अनुभव किया हो तो इस स्थिति में भी डॉक्टर को दिखाना बहुत जरूरी हैं - 

  1. एक करीबी रिश्तेदार/ व्यक्ति जिसको पेट का कैंसर था या अभी भी है।
  2. बैरेट इसोफेगस (Barret's esophagus)
  3. डिस्प्लेसिया (Dysplasia) - कोशिकाओं का असामान्य रूप से एकत्र होना। मुख्य रूप से ये कैंसर जैसे कोशिकाओं के गठन का संकेत हो सकता है।  
  4. गैस्ट्राइटिस (Gastritis) – पेट की परत में सूजन होना।
  5. घातक एनीमिया (Pernicious anemia) – जब पेट खाद्य पदार्थों से पूरी तरह विटामिन बी12 को सोख ना पाए
  6. पेट में अल्सर (छाले या फोड़े)

जब पेट का कैंसर पूरी तरह से शरीर में विकसित हो जाएगा तब उसके लक्षण और संकेत भी स्पष्ट होने लगेंगे जिनमें से कुछ नीचे बताए गए हैं।

  1. पेट के अंदर द्रव का एकत्र होना, जिससे पेट ढेलेदार सा अनुभव होने लगे
  2. एनीमिया
  3. काले रंग का मल या मल के साथ खून आना (इसे चिकितैया भाषा में "मेलेना" कहते हैं; Melena)
  4. थकावट
  5. भूख कम लगना
  6. वजन कम होना

पेट के कैंसर के कारण - Stomach Cancer Causes in Hindi

पेट का कैंसर क्यों होता है?

4 में से 3 पेट के कैंसर के मामलों में मरीज की जीवनशैली के कारक जुड़े होते हैं। पेट कैंसर होने के कारणों की स्पष्ट जानकारी नहीं है, मगर यहां पर कुछ ऐसे कारक दिए जा रहे हैं जो पेट में कैंसर विकसित होने का खतरा बढ़ा सकते हैं।

  1. हैलिकॉबैक्टर पाइलोरी संक्रमण (Helicobacter pylori infection) – 3 में से 1 पेट के कैंसर का मामला हैलिकॉबैक्टर पाइलोरी (H.pylori) के संक्रमण की वजह से होता है। एच पाइलोरी एक बैक्टीरिया होता है जो पेट की अंदरूनी परत के म्यूकस (mucous; एक चिपचिपा पदार्थ) में रहता है। ज्यादातर लोगों में इसके संक्रमण से कोई समस्या उत्पन्न नहीं होती, मगर कई बार लंबे समय तक संक्रमण रहने से सूजन और पेट में अल्सर (फोड़े या छले) होने लगते हैं।
  2. सिगरेट पीना – तंबाकू का सेवन पेट कैंसर के विकसित होने के जोखिम को बढ़ा देता है। उदाहरण के तौर पर यहां अनुमान लगाया गया है कि ब्रिटेन में हर 5 पेट कैंसरों में से 1 को धूम्रपान करने की वजह से हुआ है।
  3. एल्कोहॉल – कुछ शोध करने पर पाया गया की एल्कॉहोल के सेवन से भी पेट कैंसर विकसित होने के कारण बनते हैं।
  4. अत्यधिक वजन या मोटापा – कुछ अध्ययनों के मुताबिक पेट का वजन बढ़ना या मोटापे के कारण भी पेट का कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है। हालांकि इस बात की अभी पूरी तरह से पुष्टी नहीं की गई है।
  5. हानिकारक आहार – अधिक भुने हुऐ खाद्य पदार्थ (smoked food) और अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थों को हमेशा पेट कैंसर से जोड़ा जाता है। क्योंकि इनके सेवन से पेट कैंसर के विकसित होने का जोखिम बढ़ जाता है। इसके अलावा, जैसे की दुनियाभर में खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए फ्रिज का इस्तेमाल बढ़ गया है, इसके कारण पेट कैंसर विकसित होने के जोखिम भी कम हो गए हैं।

पेट के कैंसर से बचाव - Prevention of stomach cancer in Hindi

पेट का कैंसर होने से कैसे रोका जा सकता है?

पेट के कैंसर का कोई स्पष्ट कारण नहीं है, इसलिए इसके विकसित होने से पहले इसकी रोकथाम नहीं की जा सकती है। पर रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ छोटे-छोटे बदलाव लाकर पेट में कैंसर होने के जोखिम को कम किया जा सकता है।

उदाहरण के तौर पर आप इन्हें इस्तेमाल भी कर सकते हैं:-

  1. व्यायाम – रोजाना व्यायाम करना पेट कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद करता है। हफ्ते के ज्यादातर दिनों में अपनी रोज की शारीरिक गतिविधियों से खुद को फिट रखने की कोशिश करें।
  2. फल और सब्जियों का अधिक सेवन करनें – अपने रोजाना के आहार में ज्यादा से ज्यादा फल और सब्जियां शामिल करने की कोशिश करें। अपने आहार के लिए रोज विभिन्न रंगयुक्त फल और सब्जियों का चयन करें।
  3. अपने खाने में अधिक नमकीन और भुने हुए पदार्थों की मात्रा को कम करें – इस तरह के खाद्य पदार्थ की की मात्रा को कम करें और अपने पेट को स्वस्थ बनाएं रखें।
  4. धूम्रपान बंद करें – अगर आप धूम्रपान करतें हैं तो इसे छोड़ दें अगर नहीं करते तो इसे शुरू तो बिलकुल भी मत करें क्योंकि धूम्रपान अन्य कैंसरों सहित पेट में कैंसर के जोखिम को भी बढ़ाता है। धूम्रपान छोड़ना कठिन हो सकता है इसलिए इसको छोड़ने के लिए डॉक्टर की मदद लें। (और पढ़ें - धूम्रपान छोड़ने के उपाय)
  5. एस्पिरिन (aspirin) या अन्य एनएसएआईडी (NSAID) दवा का उपयोग ध्यान से करें – अगर आप ह्दय से जुड़ी समस्याओं के कारण एस्पिरिन लेते हैं या गठिया (arthritis) के रोग के लिए एनएसएआईडी लेते हैं, तो इस बारे में डॉक्टर से बात करें और इस बात की जानकारी रखें कि ये दवाएं आपके पेट को कितना प्रभावित कर सकती हैं।
  6. पेट के कैंसर के जोखिम के बारे अपने डॉक्टर से बात करें – अगर आपको अपने पेट में कैंसर होने का खतरा बढ़ता दिखाई पड़ रहा है, तो डॉक्टर इस बारे में डॉक्टर से बात करें। साथ ही आप पेट के कैंसर के संकेत देखने के लिए सामयिक एंडोस्कोपी के लिए भी डॉक्टर के साथ विचार कर सकते हैं।

पेट के कैंसर का परीक्षण - Diagnosis of stomach cancer in Hindi

पेट के कैंसर का निदान कैसे किया जाता है?

पेट के कैंसर से ग्रसित लोगों में कैंसर की शुरूआत में उसके लक्षण या संकेत बहुत ही कम देखने को मिल पाते हैं। अक्सर पेट कैंसर जब तक विकसित नहीं होता तब तक इसका निदान नहीं होता पाता है।

निदान के लिए डॉक्टर सबसे पहले कुछ इन कामों को कर सकता है जैसे:-

शारीरिक परिक्षण और मरीज से पहले की जानकारी लेना :-

शरीर के सामान्य लक्षणों की जाँच करने के लिए एक शारीरिक परिक्षण किया जाता है। इसमें रोग के संकेत, जैसे गांठ या कुछ अन्य महसूस होना शामिल होता है जैसी बातें मरीज से पूछी जाती हैं। डॉक्टर द्वारा मरीज के स्वास्थ्य की आदतों के बारे में जानना और पहले हुई बीमारीयों के बारे में जानना भी इसमें शामिल हो सकता है। शारीरिक असामान्यताओं के बारे में जानने के लिए डॉक्टर खून की जाँच भी कर सकते हैं। जिसमें एच पाइलोरी (H. pylori) की उपस्थिति की भी जाँच की जाती है।

शारीरिक परिक्षण के बाद अगर आपके डॉक्टर को लगता है कि आपमें पेट कैंसर के लक्षण दिखते हैं तो उसके बाद निदान से जुड़े अन्य टेस्ट करने की आवश्यकता पड़ेगी। निदान के लिए टेस्ट में सिर्फ पेट और इसोफेगस में ट्यूमर (जिसके प्रभावित होने का संदेह हो) और अन्य असामान्यताओं की जाँच की जाएगी।जिनमें ये टेस्ट शामिल होंगे:-

  1. रक्त रसायन-विज्ञान अध्ययन (Blood chemistry studies) – यह खून की जाँच करने की एक प्रक्रिया है। शरीर के आंतरिक अंगों और ऊतकों द्वारा कुछ पदार्थ खून में जारी किए जाते हैं। उन पदार्थों की मात्रा को मापने के लिए खून की जांच की जाती है। पदार्थों की मात्रा अगर सामान्य से कम या ज्यादा है तो यह रोग का संकेत बन सकती है।
  2. अपर एंडोस्कोपी (Upper endoscopy) – यह शरीर के अंदर की जानकारी लेने की प्रक्रिया होती है, जिसकी मदद से इसोफेगस, पेट, और ड्यूडिनम (छोटी आंत का पहला हिस्सा) आदि अंगो में हो रही असामान्य प्रक्रियाओं की जांच की जाती है। एक पतली ट्यूब जिसके एक सिरे पर टॉर्च लगी होती है जिसे एंडोस्कोप कहा जाता है। एंडोस्कोप को मुंह से जरीए शरीर के अंदर इसोफेगस में भेजा जाता हैं और उसकी मदद से अंदर की तस्वीरें मॉनिटर पर देखी जाती हैं।
  3. बेरियम स्वालो (Barium swallow) - इस प्रक्रिया में पेट और इसोफेगस के कई एक्स –रे किए जाते हैं मगर इनसे पहले मरीज को तरल पदार्थ में बेरियम (सफेद चांदी जैसी एक धातु) मिलाकर पिलाया जाता है। बेरियम द्वारा पेट और इसोफेगस पर परत बना ली जाती है, जिसके बाद एक्स-रे किए जाते हैं। इस प्रक्रिया को अपर जीएल सीरीज (upper GI series) भी कहा जाता है।
  4. सी.टी. स्कैन (CT scan) – इस प्रक्रिया में शरीर के भीतरी अंगों की अलग-अलग दिशाओं से तस्वीरें ली जाती हैं। तस्वीरों की मदद से शरीर के अंगों की महत्वपूर्ण जानकारीयां मिल पाती हैं। ये तस्वीरें कंप्यूटर द्वारा बनाई जाती हैं जो एक एक्स-रे मशीन से जुड़ा होता है। शरीर के अंतरिक अंगों और ऊतकों को स्पष्ट रूप से देखने के लिए एक डाई को इन्जेक्शन की मदद से नस के अंदर डाल दिया जाता है या उसे निगल लिया जाता है।
  5. बायोप्सी (biopsy) – इस प्रक्रिया में कोशिकाओं और ऊतकों को हटाया जाता है ताकि माइक्रोस्कोप की मदद से अंदर देखा जा सके। माइक्रोस्कोप की मदद से कैंसर के संकेतों की जांच की जाती है। आम तौर पर बायोप्सी की प्रक्रिया को एंडोस्कोपी के दौरान किया जाता है।

पेट के कैंसर का इलाज - Stomach cancer Treatment in Hindi

पेट के कैंसर का इलाज क्या है?

पेट के कैंसर का इलाज कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे कैंसर की गंभीरता और इसके साथ-साथ मरीज का स्वास्थ्य और उसकी प्राथमिकताएं आदि। इसके इलाज में सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी और दवाएं आदि विकल्प शामिल हैं।

1. सर्जरी -

सर्जरी का उद्देश्य पेट के कैंसर को शरीर से बाहर निकालना होता है, ताकी स्वस्थ ऊतक ग्रस्त होने से बच जाएं। हालांकि सर्जरी के दौरान ये भी देखना होता है कि कोई कैंसर से ग्रस्त कोशिका शरीर में ना रह पाए। इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं -

  1. एंडोस्कोपी म्यूकोसल रिसेक्शन (endoscopic mucosal resection) - इसका उद्देश्य कैंसर से प्रारंभिक चरणों में ही पेट से ट्यूमर को निकाल देना होता है। शल्य-चिकित्सक एंडोस्कोपी की मदद से पेट की बहुत छोटे ट्यूमर्स को शरीर से निकल देते हैं, जो पेट की अंदरूनी परत में विकसित हो जाते हैं।
  2. सबटोटल गैस्ट्रेक्टॉमी (Subtotal gastrectomy) – इस सर्जरी की मदद से पेट का वह भाग जो कैंसर से प्रभावित हो जाता है, उसे शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
  3. टोटल गैस्ट्रेक्टॉमी (Total gastrectomy) – इसमें सर्जरी की मदद से पूरे पेट को हटा दिया जाता है।

पेट संबंधित सर्जरी में सभी प्रक्रियाएं पेचीदा होती हैं जो ठीक होने में भी लंबा समय ले सकती हैं। सर्जरी की प्रक्रिया के बाद मरीज को दो सप्ताह तक अस्पताल में रहना पड़ सकता है। उसके बाद मरीज को घर पर स्वस्थ होने के लिए कई हफ्तों तक आराम करना होता है।

(और पढ़ें - पेट के कैंसर की सर्जरी)

2. रेडिएशन थेरेपी (radiation therapy) :–

रेडिएशन थेरेपी में उर्जा की किरणों (energy rays) की मदद से कैंसर कोशिकाओं को खत्म किया जाता है। रेडिएशन थेरेपी को पेट के कैंसर के इलाज के लिए सामान्य रूप से प्रयोग नहीं किया जाता क्योंकि इसमें आसपास के अन्य अंगों को हानि पहुंचने का खतरा बना रहता है। हालांकि, अगर पेट कैंसर विकसित हो चुका है या/ और अत्यधिक दर्द और खून बहने जैसे लक्षण दिखने लगे हैं तो ऐसे में रेडिएशन थेरेपी ही मुख्य विकल्प माना जाता है।

रेडिएशन थेरेपी के दो प्रकार होते हैं जिनको इस्तेमाल किया जाता है -

  1. निओएजुवेंट रेडिएशन (Neoadjuvant radiation) – इस थेरेपी का प्रयोग सर्जरी से पहले किया जाता है। इसकी मदद से ट्यूमर्स को छोटा किया जाता है ताकि सर्जरी के दौरान ट्यूमर्स को आसानी से निकाला जा सके।
  2. एजुवेंट रेडिएशन (Adjuvant radiation) – इस थेरेपी का प्रयोग सर्जरी के बाद किया जाता है। इसका उद्देश्य पेट में बची हुई कैंसर कोशिकाओं को खत्म करना होता है।

3. कीमोथेरेपी (Chemotherapy) –

कीमोथेरेपी में कुछ ख़ास दवाइयों का उपयोग किया जाता है जो तेज़ी से बढ़ रही कैंसर कोशिकाओं को ख़त्म कर देती हैं। इन दवाइयों को साइटोटोक्सिक (cytotoxic) दवाओं के नाम से जाना जाता है। ये दवाइयां मरीज के शरीर में फैल जाती है और कैंसर के शुरू होने वाली जगह पर वार करती है। इसके साथ ही अगर कैंसर अन्य अंगों में फ़ैल गया है, तो उधर भी कैंसर कोशिकाओं को ख़तम करती हैं।

कीमोथेरेपी के दो प्रकार होते हैं:-

  1. निओएजुवेंट कीमोथेरेपी (Neoadjuvant chemotherapy) – इस थेरेपी का उपयोग सर्जरी से पहले किया जाता है, इसकी मदद से ट्यूमर सिकुड़ जाता है। जिसके बाद सर्जरी की मदद से ट्यूमर को आसानी से निकाल लिया जाता है।
  2. एजुवेंट कीमोथेरेपी (adjuvant chemotherapy) – इसका उपयोग सर्जरी के बाद किया जाता है। इसकी मदद से सर्जरी के बाद पेट में बची हुई कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है।

गैस्ट्रिक लिम्फोमा, गैस्ट्रोइंटेस्टिनल स्ट्रोमल ट्यूमर और कुछ अन्य प्रकार के गैस्ट्रिक कैंसर के लिए कीमोथेरेपी मुख्य उपचार तरीका माना जाता है।

4. दवाएं -

उदाहरण के लिए कुछ दवाइयां जैसे सूटेंट (सनीटीनिब; sunitinib), ग्लिवेक (इमानिटिनिब; imatinib) आदि ये दवाइयां गैस्ट्रोइंटेस्टिनल स्ट्रोमल ट्यूमर के मरीजों को दी जाती हैं। जो उनके शरीर में कैंसर की विशिष्ट प्रकार की असामान्यताओं पर हमला करती हैं। 

पेट के कैंसर के जोखिम और जटिलताएं - Stomach cancer Risks & Complications in Hindi

पेट कैंसर के जोखिम कारक क्या है?

नीचे कुछ ऐसे जोखिम कारकों के बारे में बताया गया है जो पेट कैंसर से जुड़े हैं:-

  1. कुछ चिकित्सा संबंधी स्थितियां जिसमें शामिल हैं, इसोफेजाइटिस (esophagitis), जीईआरडी (GERD/ gastroesophageal reflux disease), पेट में अल्सर (peptic stomach ulcer), बैरेट इसोफेगस (Barrett's esophagus), क्रोनिक गैस्ट्राइटिस (chronic gastritis), पेट में पोलिप्स (stomach polyps) आदि।
  2. धूम्रपान - लगातार और लंबे समय से धूम्रपान कर रहे लोगों को धूम्रपान ना करने वाले लोगों के मुकाबले पेट का कैंसर होने का जोखिम दोगुना होता है।
  3. हैलिकॉबैक्टर पाइलोरी संक्रमण (Helicobacter pylori infection) – इसके बैक्टिरिया ज्यादातर लोगों को हानि नहीं पहुंचाते। लेकिन कुछ लोगों को इसके कारण से पेट में अल्सर और संक्रमण हो जाता है। पेट में लंबे समय तक अल्सर रहने से पेट कैंसर के जोखिम बढ़ जाते हैं।
  4. अनुवांशिक बीमारीयां – अगर परिवार का कोई व्यक्ति पेट संबंधित अन्य बीमारी या पेट के कैंसर से ग्रसित हो चुका हो तो परिवार के अन्य लोगों के लिए भी इसका जोखिम बढ़ सकता है।
  5. आहार – जो लोग नियमित रूप से नमकीन मछली, अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ, भुना हुआ मीट, और मसालेदार सब्जियां (जैसे आचार या तली हुई मसालेदार सब्जियां) आदि भोजन खाते हैं। उनके लिए पेट कैंसर होने का जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है।
  6. उम्र - पेट कैंसर के होने का जोखिम 55 साल की उम्र के बाद काफी बढ़ जाता है।
  7. लिंग - महिलाओं की तुलना में पुरूषों को पेट कैंसर होने का खतरा दोगुना रहता है।
  8. पहले कभी कैंसर हुआ हो – जो लोग पहले इसोफेगस कैंसर या उन्हें नॉन-हॉजकिन लिंफोमा (non-Hodgkin's lymphoma) से ग्रस्ति हुऐ हैं उनमें पेट कैंसर के होने की ज्यादा संभावनाएं रहती हैं। जिन पुरूषों को पहले कभी प्रोस्टेट कैंसर, ब्लैडर कैंसर या टेस्टिकुलर कैंसर हुआ है, उनके लिए भी पेट का कैंसर होने की संभावनाएं ज्यादा बढ़ जाती हैं। महिलाओं में जिनको पहले कभी सर्वाइकल कैंसर (cervical), ओवेरियन कैंसर (ovarian) या ब्रेस्ट कैंसर (breast cancer) हो चुका है उन महिलाओं के लिए भी पेट का कैंसर का जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है। 

पेट के कैंसर में परहेज़ - What to avoid during stomach cancer in Hindi?

पेट कैंसर में क्या परहेज करना चाहिए?

कुछ हानिकारक खाद्य पदार्थ जिनका सेवन करने से बचना चाहिए। जिनमें से कुछ नीचे बताए गए हैं:-

  1. तैयार मीट (Processed meat) – पाचन तंत्र (digestive-tract) में कैंसर और पेट के कैंसर के साथ मीट का गहरा रिश्ता माना जाता है। ऐसी स्थिति में कई डॉक्टर तैयार मीट के सेवन को कम करने की सलाह देते हैं और यहां तक कि कई डॉक्टर तो अब इसे पूरी तरह से छोड़ने की सलाह देने लगे हैं।
  2. नमक युक्त भोजन (Salty foods) – शरीर को अपनी सामान्य प्रक्रिया के लिए एक सिमित और कम मात्रा में ही नमक की जरूरत पड़ती है पर कुछ लोग जरूरत से ज्यादा नमक युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने लगे हैं। नमक की ज्यादा मात्रा वाले खाद्य पदार्थों को पेट कैंसर से जोड़ा जाता है। आलू के चिप्स, और डिब्बाबंद नमकीन पदार्थों का सेवन अधिक मात्रा में ना करें, खाने के दौरान नमकदानी प्रयोग करने से भी बचें।
  3. हैलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) – पेट कैंसर से बचने के लिए सिर्फ खाद्य पदार्थों में ही परहेज नहीं करना है। इसके अलावा हैलिकोबेक्टर पाइलोरी के संक्रमण होने से भी खुद को बचाना है। ये सामान्य बैक्टिरिया होते हैं जो पेट में अल्सर (छाले या फोड़े) कर देते हैं जिससे पेट कैंसर होने का खतरा बढ़ा जाता है।

पेट के कैंसर में क्या खाना चाहिए? - What to eat during stomach cancer in Hindi?

पेट का कैंसर हो तो क्या खाएं?

पेट के कैंसर के इलाज के लिए आहार को एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पोषण के लिए सही मात्रा में कैलोरी, विटामिन, प्रोटीन, और मिनरल्स लेने की जरूरत पड़ती है। जो शरीर में ताकत को बनाए रखता है और रोग ठीक करने में मदद करता है।

  1. अधिक प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ – प्रोटीन के लिए अधिक मात्रा में दूध पीना, अंडे और पनीर खाएं।
  2. उच्च फाइबर खाद्य पदार्थ, मगर कम मात्रा में – साबुत अनाज का चयन करते समय, साबुत गेंहू से बनी ब्रैड, साबुत अनाज का पास्ता और साबुत चावल चयन करें। इन खाद्य पदार्थों में उच्च मात्रा में फाइबर होता है। लेकिन इन्हे कम मात्रा में खाना चाहिए क्योंकि इनको खाने के बाद आप आप असहज महसूस कर सकते हैं। सेम की फलियां, मसूर की दाल, पत्तेदार सब्जियां और गोभी आदि पर भी ये बात लागू होती है। 
  3. बिना नमक का आहार – पेट के कैंसर के मरीजों को अक्सर मतली महसूस होती है। बिना नमक का खाना खाने से इससे राहत मिल सकती है। 
  4. साफ तरल पदार्थ – तरल पदार्थ जैसे सेब का जूस, शोरबा (सूप), चाय आदि को धीरे-धीरे पीना लाभदायक हो सकता है।
Dr. Arabinda Roy

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ऑन्कोलॉजी

Dr. Ashutosh Gawande

Dr. Ashutosh Gawande

ऑन्कोलॉजी

Dr. C. Arun Hensley

Dr. C. Arun Hensley

ऑन्कोलॉजी

पेट का कैंसर की दवा - Medicines for Stomach Cancer (Gastric Cancer) in Hindi

पेट का कैंसर के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
AdriamycinAdriamycin 10 Mg Injection221.61
AdriblastinaAdriblastina Injection1309.52
Adronex RdAdronex Rd 10 Mg Injection185.71
AdrosalAdrosal 10 Mg Injection196.43
CadriaCadria 10 Mg Injection166.66
CardiaroneCardiarone 100 Mg Tablet65.47
DoxilydDoxilyd 10 Mg Injection119.04
DoxohopeDoxohope 20 Mg Injection8163.26
DoxorexDoxorex 10 Mg Injection321.75
Doxorubicin (Dr. Reddys)Doxorubicin 10 Mg Injection116.66
DoxorubicinDoxorubicin 10 Mg Injection200.0
DoxorubinDoxorubin 10 Mg Injection130.95
DoxotarDoxotar 10 Mg Injection285.0
DoxoteroDoxotero 10 Mg Injection165.0
DoxulipDoxulip 20 Mg Injection7890.0
DoxutecDoxutec 10 Mg Injection170.0
DuxocinDuxocin 10 Mg Injection190.94
LyphidoxLyphidox 10 Mg Injection198.91
MetodoxMetodox 10 Mg Injection63.09
OncodriaOncodria 10 Mg Injection199.64
PiglitPiglit 2 Mg Injection6184.52
ZodoxZodox 10 Mg Injection196.19
ZubidoxZubidox 10 Mg Injection200.0
LyomitLyomit 10 Mg Injection430.83
Mitomycin CMitomycin C 10 Mg Injection522.0
OncocinOncocin 10 Mg Injection333.33
CarcidoxCarcidox 200 Mg Capsule253.65
AdrimAdrim 10 Mg Injection214.28
DoxiglanDoxiglan 50 Mg Injection999.0

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