सूजन शरीर में होने वाली प्राकृतिक (आमतौर पर सुरक्षात्मक) रूप से एक प्रतिक्रिया है, यह अक्सर हानिकारक (जैसे एंटीजन) रोगजनक (जैसे संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया), मृत कोशिकाओं (चोट के कारण) या जलन या एलर्जी की वजह से होती है। कई बार, व्यक्ति के शरीर के कुछ अन्य कारक (ऑटोएन्टीजेंस) भी सूजन का कारण बन सकते हैं।

नॉन-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) सूजन की प्रक्रिया को और सूजन के विकास में शामिल चीजों को लक्षित करती हैं, यानी सूजन के कारकों को पहचानकर उनसे राहत दिलाती हैं। यह दवाएं सूजन के मामले में प्रभावी, सस्ती और उपयोगी हैं। इसके अलावा यह दर्द और बुखार जैसे लक्षणों से भी निपटने में मदद करती हैं।

भले ही यह बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं, लेकिन एनएसएआईडी को बेहद सावधानी के साथ लेना चाहिए, क्योंकि इनके कई दुष्प्रभाव (कभी-कभी घातक) भी हो सकते हैं। इसके अलावा यदि आप अन्य किसी चिकित्सकीय स्थिति के लिए दवाएं ले रहे हैं, तो ऐसे में एनएसएआईडी का सेवन दूसरी दवाओं के असर में बाधा डाल सकता है।

एनएसएआईडी दर्द निवारक दवाओं से भी संबंधित हैं। इनके उदाहरणों में आइबूप्रोफेन, डाइक्लोफिनैक, एस्पिरिन जैसी कई ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) दवाएं शामिल हैं। ओटीसी वे दवाएं होती हैं जिन्हें किसी भी मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए डॉक्टर के पर्चे की जरूरत नहीं होती है।

(और पढ़ें - सूजन कम करने के घरेलू उपाय)

  1. इंफ्लेमेटरी क्या होता है? - What is inflammation in Hindi
  2. नॉन-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवा किस काम आती है - What do NSAIDs do in Hindi
  3. एनएसएआईडी के प्रकार - Types of NSAIDs in Hindi
  4. एनएसएआईडी कब नहीं लेनी चाहिए - Contraindications: when not to take NSAIDs in Hindi
  5. एनएसएआईडी किसे लेनी चाहिए - Indications for NSAIDs in Hindi
  6. एनएसएआईडी किसे नहीं लेने चाहिए - Who should not take NSAIDs in Hindi
  7. नॉन-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवा के नुकसान - Side effects of NSAIDs in Hindi
  8. एनएसएआईडी किन दवाइयों के असर को कर सकती हैं प्रभावित - NSAID drug interactions in Hindi
  9. एनएसएआईडी : नॉन-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स के डॉक्टर

जब शरीर एंटीजन जैसे बैक्टीरिया या एलेर्जन (एलर्जी पैदा करने वाले कारक) के संपर्क में आता है तो ऐसे में शरीर की विशेष कोशिकाओं (एंटीजन-प्रजेंटिंग सेल्स) में प्रतिक्रिया होती है। इस प्रतिक्रिया की वजह से आमतौर पर दो प्रकार की प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं : इनैट इम्यून रिस्पॉन्स और एक्वॉयर्ड इम्यून रिस्पॉन्स।

  • इनैट इम्युनिटी, ऐसी प्रतिरक्षा क्षमता है, जो साइटोकीन नामक रसायनों के उत्पादन की शुरुआत करती है, जो साइक्लोऑक्सीजिनेज (साइक्लोऑक्सीजिनेज -1 और साइक्लोऑक्सीजिनेज -2 या सीओएक्स-1 और सीओएक्स-2) नामक एंजाइम के साथ मिलकर प्रोस्टाग्लैंडिंस और ल्यूकोट्रिएन को बनाने के लिए क्रिया करती है जिससे एंटीजन खत्म होता है और इस प्रक्रिया के दौरान सूजन हो जाती है।

एंजाइम प्रोटीन होते हैं जो कोशिकाओं के अंदर रासायनिक प्रतिक्रिया की दर को तेज करने के लिए जैविक रूप से मुख्य स्रोत (बायोलॉजिकल कैटेलिस्ट) के रूप में कार्य करते हैं। प्रोस्टाग्लैंडिंस ऊतक को पहुंचे नुकसान या संक्रमण वाले हिस्से पर बने वसा का एक समूह है, जो मानव शरीर में हार्मोन जैसे प्रभाव पैदा करते हैं। जबकि ल्यूकोट्रिएन ऐसा रसायन है जिसे किसी एलर्जन के संपर्क में आने के बाद शरीर रिलीज करता है।

  • एक्वायर्ड इम्यूनिटी, एंटीजन को लक्षित करने के लिए एंटीजन-स्पेसिफिक एंटीबॉडी को संश्लेषित (जोड़ती या मिलाती) करती है। ये एंटीबॉडीज खून में बने रहते हैं और ऐसे एंटीजन को पहचानने और उसका मुकाबला करने की क्षमता रखते हैं, जो दोबारा से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

सूजन इनैट इम्युनिटी का हिस्सा है। इसे निम्नलिखित संकेतों और लक्षणों से पहचाना जा सकता है, चाहे कारण जो भी हो, जरूरी नहीं कि यह हमेशा किसी बीमारी या संक्रमण से जुड़ा होता है। कभी-कभी, प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी जन्मजात गड़गड़ी के कारण भी ऐसा हो सकता है, आमतौर पर शरीर में मौजूद एंटीजन की वजह से शरीर सूजन के रूप में प्रतिक्रिया करता है। इन्हें ऑटोइम्यून बीमारियों के रूप में जाना जाता है। उदाहरण के लिए, सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस (एसएलई) और संधिशोथ यानी रूमेटाइड आर्थराइटिस (आरए)।

सूजन के पांच मुख्य संकेत इस प्रकार हैं :

  • कैलर : सूजन वाले हिस्से में गर्मी महसूस होना। गर्मी किसी भी हीट (गर्मी) के प्रति संवेदनशील रोगजनकों को मारने में मदद कर सकती है।
  • डोलर : सूजन वाले हिस्से में दर्द। इस दौरान आपको प्रभावित हिस्से को तब तक आराम देने की आवश्यकता है जब कि आप ठीक नहीं हो जाते हैं।
  • रूबर : सूजन वाले हिस्से में लालिमा।
  • ट्यूमर : प्रभावित हिस्से में सूजन। ऐसे मामले में, सूजन से ही हमें पता चलता है कि प्रतिरक्षा कोशिकाएं सही से अपना काम कर रही हैं।
  • फंक्टियो लेएजा : सूजन वाले हिस्से या अंग के कार्य में कमी। इस स्थिति में आपको प्रभावित हिस्से को आराम देने से ठीक होने में मदद मिलती है।

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सूजन के प्रकार : सूजन एक जटिल जैविक और शारीरिक प्र​तिक्रिया है। हालांकि, इंफ्लेमेटरी रिस्पॉन्स यदि बहुत कमजोर होगा, तो ऐसे में वह एंजीटन से प्रभावी रूप से नहीं निपट सकता है और यदि इंफ्लेमेटरी रिस्पॉन्स बहुत मजबूत या अधिक होगा, तो यह प्रभावित हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता है। सूजन एक्यूट (अल्पकालिक) या क्रोनिक (दीर्घकालिक) दो प्रकार की हो सकती है।

एक्यूट इंफ्लेमेशन के कारण नीचे गए हैं :

  • चोट
  • संक्रमण
  • एंटीजन

क्रोनिक इंफ्लेमेशन के कारण नीचे दिए गए हैं :

  • अतिसंवेदनशीलता या एलर्जी
  • ऑटोइम्यून बीमारियां : इसमें प्रतिरक्षा प्र​णाली शरीर के स्वस्थ्य ऊतकों को नुकसान पहुंचाने लगती है। उदाहरण के लिए, रूमेटाइड आर्थराइटिस (आरए) और सोरायसिस आम ऑटोइम्यून रोग हैं।
  • एक्यूट इंफ्लेमेशन का पूरी तरह से ठीक न होना
  • लगातार या कम मात्रा में उस हानिकारक पदार्थ के लक्षण दिखना, जिसकी वजह से इंफ्लेमेशन हो रहा है।

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आमतौर पर, सूजन एक संकेत है जो हमें यह बताती है कि प्रतिरक्षा प्रणाली रोगजनकों को मारने और चोट के बाद खराब ऊतकों को ठीक करने के लिए अपना काम कर रही है। हालांकि, कभी-कभी दर्द और सूजन जैसे इंफ्लेमेशन के लक्षण बढ़ सकते हैं। इन स्थितियों में, राहत पाने के लिए आइबुप्रोफेन या डाइक्लोफिनैक (वॉलिनी की तरह मलहम) का प्रयोग किया जा सकता है। हमें यह समझना जरूरी है कि ये दवाएं शरीर में काम कैसे करती हैं, इनके दुष्प्रभाव क्या हैं और किन स्थितियों में इन दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए।

NSAIDs कैसे काम करते हैं : विभिन्न प्रकार के नॉन-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स सूजन के कारकों को रोकने और स्थिति से राहत प्रदान करने के लिए प्रतिरक्षा मार्ग में अलग-अलग स्टेप्स को ब्लॉक करती हैं। ऐसे में दर्द निवारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एनएसएआईडी एक या दोनों साइक्लोऑक्सीजिनेज एंजाइम को ब्लॉक करके अपना काम करते हैं, इससे प्रोस्टाग्लैंडिंस का उत्पादन रुक जाता है। प्रोस्टाग्लैंडिंस सूजन के लक्षणों (विशेष रूप से दर्द) को विकसित करता है।

प्रोस्टाग्लैंडीन इन्हिबिशन द्वारा एनएसएआईडी के कार्य और प्रभाव :

  • एनाल्जेसिया : दर्द से राहत देता है।
  • एंटीपायरेटिक प्रभाव : बुखार कम करता है।
  • एंटी-इंफ्लेमेटरी : सूजन के पांच लक्षणों (दर्द, लालिमा, चलने या सांस लेने में दिक्कत, सूजन और गर्मी) से लड़ता है।
  • एंटीथ्रॉम्बोटिक : कुछ एनएसएआईडी ल्यूकोट्रिएन के उत्पादन को ब्लॉक करके खून के थक्के बनने से रोक सकते हैं। यह एंटीथ्रॉम्बोटिक गुण एस्पिरिन में मौजूद है, जिसका उपयोग दिल के दौरे और स्ट्रोक जैसे स्थितियों के उपचार और रोकथाम के लिए भी किया जाता है।
  • डक्टस आर्टेरियोसस (सामान्य रक्त वाहिका जो महाधमनी और नवजात शिशुओं में पल्मोनरी आर्टरी को जोड़ता है) को बंद करना : आमतौर पर, जन्म के तुरंत बाद डक्टस आर्टेरियोसस अपने आप ही बंद हो जाता है, लेकिन कभी-कभी, यह अपने आप बंद नहीं होता है, जिससे 'पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस' (हृदय दोष) हो जाता है। हालांकि, डोमेथेसिन जैसे नॉन-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स की मदद से प्रीटर्म बेबी (गर्भावस्था के 37 सप्ताह से पहले पैदा होने वाले बच्चे) में पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस को बंद करने में मदद मिल सकती है।

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इन दवाईयों की कार्रवाई के आधार पर, एनएसएआईडी को निम्नलिखित प्रकारों में बांटा गया है:

नॉन-सेलेक्टिव एनएसएआईडी : ये सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली एनाल्जेसिक या दर्द से राहत देने वाली दवा का एक प्रकार है, जो कि अधिकांश फार्मेसी में उपलब्ध है। ये दवाएं साइक्लोऑक्सीजिनेज (COX-1 और COX-2) एंजाइम दोनों को ब्लॉक करती हैं और इस प्रकार यह शरीर के सभी हिस्सों में प्रोस्टाग्लैंडिंस के उत्पादन को रोकती है, जिसमें पेट का अस्तर भी शामिल है, जहां साइक्लोऑक्सीजिनेज -1 (COX-1) द्वारा प्रोस्टाग्लिन का निर्माण होता है। इसलिए, इन दवाओं के अत्यधिक उपयोग से पेट में ब्लीडिंग और पेट के अल्सर की समस्या हो सकती है।

सामान्य नॉन-सेलेक्टिव एनएसएआईडी में शामिल हैं :

सेलेक्टिव एनएसएआईडी (Cyclooxygenase - 2 / COX-2 अवरोधक): कुछ नए एनएसएआईडी केवल COX-2 एंजाइम की क्रिया को रोकते हैं, जो दर्द पैदा करने वाले प्रोस्टाग्लैंडीन का उत्पादन करते हैं। यह पेट के अस्तर के सुरक्षात्मक प्रोस्टाग्लैंडीन पर कोई असर नहीं करताे हैं। लाभकारी होते हुए भी, इन दवाओं को अन्य दुष्प्रभावों के कारण आमतौर पर निर्धारित (प्रिस्क्राइब्ड) नहीं किया जाता है।

सेलेक्टिव एनएसएआईडी की क्रियाएं इस प्रकार हैं :

  • एनाल्जेसिया (दर्द निवारक दवा)
  • एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन को रोकने वाली दवाएं)

प्रीडोमिनेंट एंटीपायरेक्टिक कार्रवाई के साथ अन्य एनाल्जेसिक : पेरासिटामोल, जिसे एसिटामिनोफेन के रूप में भी जाना जाता है। यह देश में सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली दवाओं में से एक है। इसमें कोई एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण नहीं है, लेकिन यह एक उपयोगी एनाल्जेसिक यानी दर्द से राहत देनी वाली) और एंटीपीयरेटिक यानी बुखार को कम करने में मदद करने वाली दवा है।

एसिटामिनोफेन के कार्य :

  • एनाल्जेसिया
  • एंटीपीयरेटिक

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हालांकि, एनएसएआईडी तत्काल रूप से लक्षणों से राहत दिला सकते हैं और यह आसानी से भी उपलब्ध हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल हमेशा सावधानीपूवर्क करना चाहिए, क्योंकि पहले से मौजूद कुछ स्थितियां एनएसएआईडी से बदतर हो सकती हैं। इसलिए डॉक्टर से परामर्श के बाद ही इन दवाइयों का सेवन करें :

  • पेट या आंतों में पेप्टिक अल्सर : नॉन-सेलेक्टिव एनएसएआईडी के सेवन से बचा जाना चाहिए, लेकिन डॉक्टर 'सेलेक्टिव COX-2 इनहिबिटर' लेने की सलाह दे सकते हैं। (और पढ़ें - अल्सर का इलाज)
  • एक्यूट ब्लीडिंग (विशेष रूप से एस्पिरिन, जो थक्के बनने से रोकती है यह ब्लीडिंग रोकने में भी महत्वपूर्ण है)
  • किडनी की बीमारी : गंभीर रूप से किडनी के कार्य में कमी, जिससे किडनी फेलियर या क्रोनिक किडनी डिजीज हो सकती है।
  • कॉन्जेस्टिव हार्ट फेलियर
  • गर्भावस्था के अंतिम दो ट्राइमेस्टर या 6 महीने : यह बच्चे के दिल में डक्टस आर्टेरियोसस के समय से पहले बंद होने का कारण बन सकता है।

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निम्नलिखित लक्षणों से ग्रस्त लोगों को एनएसएआईडी लेने का सुझाव दिया जा सकता है :

  • एक्यूट (अचानक या तेज) और क्रोनिक (धीरे-धीरे या लंबे समय तक प्रभावित करने वाला) दर्द
  • सिरदर्द (और पढ़ें - सिरदर्द के घरेलू उपाय)
  • माइग्रेन
  • डिसमेनोरिया (मासिक धर्म का दर्द)
  • ऑपरेशन के बाद होने वाला दर्द
  • इंफ्लेमेटरी आर्थराइटिस
  • रूमेटाइड आर्थराइटिस
  • कावासाकी डिजीज
  • बुखार (एंटीपायरेटिक): लक्षणों के प्रबंधन के लिए एनएसएआईडी दिया जा सकता है।
  • प्रीमैच्योर शिशु में डक्ट्स आर्टेरियोसस : इंडोमेथेसिन
  • दिल का दौरा या स्ट्रोक के बाद खून का पतला होना : एस्पिरिन की कम खुराक में एंटी-प्लेटलेट एक्शन होता है जो खून के थक्के बनने की प्रक्रिया को रोकने में मदद करता है।
  • कोलन कैंसर की रोकथाम : कोलोन पॉलीप्स के ऐसे मामले में जो वंशानुगत होते हैं, उनमें कोलन कैंसर की रोकथाम के लिए कम उम्र से एस्पिरिन लेने की शुरुआत की जाती है।

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एनएसएआईडी के सेवन से निम्नलिखित लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए :

  • अस्थमा से ग्रस्त : एनएसएआईडी से अस्थमा के दौरे बढ़ सकते हैं।
  • मधुमेह से पीड़ित : मधुमेह वाले लोगों को हाइपोग्लाइसीमिया (लो ब्लड शुगर) हो सकता है।
  • हाई बीपी वाले लोग : बीपी का स्तर अनियंत्रित हो सकता है। (और पढ़ें - हाई बीपी कम करने के घरेलू उपाय)
  • गर्भवती महिलाएं : दूसरी और तीसरी तिमाही में महिलाओं को एनएसएआईडी नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि इससे बच्चे में दिल की बीमारियां हो सकती हैं। (और पढ़ें - प्रेगनेंसी का तीसरा महीना)
  • यदि सर्जरी कराने वाले हों तो : एनएसएआईडी (विशेष रूप से एस्पिरिन) को सर्जरी से कम से कम एक सप्ताह पहले रोका जाना चाहिए, ताकि ब्लीडिंग के जोखिम को कम किया जा सके।
  • जी6पीडी की कमी (ग्लूकोज - 6 फॉस्फेट - डिहाइड्रोजनेज की कमी) के रोगी : हेमोलीटिक एनीमिया हो सकता है।

(और पढ़ें: G6PD टेस्ट क्या है)

अलग-अलग प्रकार के एनएसएआईडी के साइड इफेक्ट नीचे दिए गए हैं।

नॉन-सेलेक्टिव एनएसएआईडी :

  • पेट का अल्सर, आंतों का अल्सर, ब्लीडिंग (और पढ़ें - ब्लीडिंग कैसे बंद करें)
  • गुर्दे की कार्यक्षमता में कमी : किडनी में चोट, पहले से या लंबे समय से चल रही किडनी की बीमारी या एनाल्जेसिक नेफ्रोपैथी (एनएसएआईडी के लंबे समय तक उपयोग के कारण किडनी  की बीमारी)
  • थ्रोम्बोसिस का जोखिम : दिल का दौरा या स्ट्रोक (एस्पिरिन और नेप्रोक्सन को छोड़कर)
  • दमा रोगियों में अस्थमा के दौरे तेज होना (और पढ़ें - अस्थमा अटैक आने पर क्या करना चाहिए)
  • रेये सिंड्रोम (यह उन बच्चों में होता है जो चिकनपॉक्स संक्रमण से पीड़ित हैं और एस्पिरिन ले रहे हैं)
  • हेमोलिटिक एनीमिया (लाल रक्त कोशिकाएं खराब या नष्ट होना) यह उन लोगों में हो सकता है जो जी6पीडी नामक एंजाइम की कमी में एस्पिरिन ले रहे हैं। G6PD ग्लूकोज -6-फॉस्फेट डिहाइड्रोजनेज है।

सेलेक्टिव एनएसएआईडी :

पेरासिटामोल (एसिटामिनोफेन):

  • हेपाटोटॉक्सिसिटी (लिवर को नुकसान होना, जिसमें अत्यधिक नशे की वजह से अचानक से लिवर फेलियर शामिल है)

(और पढ़ें - लिवर को कैसे मजबूत करें)

एनएसएआईडी कई दवाओं के असर को बाधित कर सकते हैं या उनकी प्रभावकारिता को कम कर सकते हैं या इनके सेवन से कई अन्य जटिलताएं हो सकती हैं। एनएसएआईडी का दूसरी दवाओं पर असर इस प्रकार है :

  • एंटीहाइपरटेन्सिव ड्रग्स : हाई बीपी वाली कुछ दवाइयां जैसे कि फुरोसेमाइड (मूत्रवर्धक) और कैप्टोप्रिल (एसीई इनहिबिटर)। इन दवाओं के साथ जब एनएसएआईडी ली जाती हैं तो फुरोसेमाइड और कैप्टोप्रिल का असर या प्रभाव कम हो सकता है। इसी वजह से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। (और पढ़ें - ब्लड प्रेशर कम करने की आयुर्वेदिक दवा)
  • एंटीथ्रॉम्बोटिक दवाएं : कुछ दवाएं जो प्लेटलेट को इकट्ठा होने और ब्लड क्लॉटिंग को रोकती हैं या खून को पतला करने वाली दवाइयां जैसे कि वार्फरिन (warfarin) और यहां तक कि एस्पिरिन भी उसी फैक्टर से जुड़ती हैं, जिनसे एनएसएआईडी दवाइयां जुड़कर कार्य करती हैं। इसलिए, अगर इन दवाइयों को एनएसएआईडी के साथ लिया जाता है, तो इनका प्रभाव शून्य या कम हो सकता है।
  • एंटीडिप्रेसेंट : सेलेक्टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर (SSRIs) अवसाद के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं हैं। यह रक्तस्राव की प्रवृत्ति को बढ़ाती हैं। यदि इन दवाओं के साथ-साथ एनएसएआईडी भी लिया जाए खून की कमी या पेट के अल्सर का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
  • लिथियम : लिथियम का उपयोग उन्माद विकार और बायपोलर विकार के इलाज के लिए किया जाता है। एनएसएआईडी के साथ इस दवा के सेवन से कंपकंपी, बोलने में दिक्कत और मांसपेशियों से जुड़ी समस्या हो सकती है।
  • अल्कोहल : जब एनएसएआईडी के साथ अल्कोहल लिया जाता है, तो अल्कोहल से पेट से खून बहने का खतरा बढ़ जाता है।

(और पढ़ें - सूजन की होम्योपैथिक दवा क्या है)

Dr. Abhas Kumar

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संदर्भ

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