अक्सर हम पॉलिसी के बारे में सुनते हैं जैसे पॉलिसी क्या है, पॉलिसी कैसे चेक करें या पॉलिसी टर्म किसे कहते हैं। लेकिन वास्तव में इसका क्या महत्व है या किस तरह से यह हमारे लिए फायदेमंद है, इस पर गौर नहीं करते हैं।
मौजूदा दौर में दो तरह की बीमा कंपनियां मौजूद है, लाइफ इन्शुरन्स कंपनी और जनरल इन्शुरन्स कंपनी। जनरल इन्शुरन्स कंपनियां हेल्थ इन्शुरन्स भी बेचती हैं, लेकिन आजकल सिर्फ हेल्थ इन्शुरन्स करने वाली कंपनियां भी मौजूद हैं। दोनों या कहें तीनों तरह के इन्शुरन्स बिजनेस में कई बीमा कंपनियां मौजूद हैं। यह सभी बीमा कंपनियां सैकड़ों तरह की पॉलिसी बेच रही हैं। जो व्यक्ति इन पॉलिसियों को खरीदता है, वह 'बीमित व्यक्ति' कहलाता है, लेकिन यह कोई वस्तु नहीं है, जिसमें एक बार पैसा देकर उस चीज को खरीदा जा सकता है, बल्कि यह एक सेवा है जिसे जारी रखने के लिए निश्चित अंतरात पर आपको प्रीमियम के रूप में पैसा जमा करना होता है। खैर, किसी भी पॉलिसी का उद्देश्य बीमित व्यक्ति को आर्थिक नुकसान की भरपाई करने में मदद करना होता है। नीचे आर्टिकल में पॉलिसी से संबंधित लगभग सभी जानकारियां दी गई हैं, जिन्हें पढ़कर आप आसानी से पॉलिसी, पॉलिसी होल्डर, पॉलिसी ईयर व संबंधित टॉपिक्स को समझ पाएंगे।
- इन्शुरन्स पॉलिसी क्या है - What is insurance policy in Hindi
- इन्शुरन्स पॉलिसी और बीमा में संबंध - Relationship between policy and insurance in Hindi
- इन्शुरन्स पॉलिसी का उपयोग किस लिए किया जाता है? - What is a insurance policy used for in Hindi
- इन्शुरन्स पॉलिसी होल्डर का मतलब क्या होता है? - Insurance policy holder in Hindi
- इन्शुरन्स पॉलिसी डॉक्यूमेंट - Insurance policy document in Hindi
- डुप्लीकेट इन्शुरन्स पॉलिसी पेपर कैसे डाउनलोड करें? - Download duplicate Insurance policy papers in Hindi
- इन्शुरन्स पॉलिसी शेड्यूल क्या है? - Insurance policy schedule in Hindi
- इन्शुरन्स पॉलिसी टर्म - Insurance policy Term in Hindi
- इन्शुरन्स पॉलिसी ईयर - Insurance policy years in Hindi
इन्शुरन्स पॉलिसी क्या है - What is insurance policy in Hindi
पॉलिसी एक दस्तावेज है, एक तरह का अनुबंध पत्र, जिसमें बीमा कंपनी के अनुबंध के नियमों व शर्तों की जानकारी होती है। यह मुसीबत के समय या यूं कहें कि पैसों की जरूरत पड़ने पर आपको उस स्थिति से निपटने में मदद करती है।
हम सभी वर्तमान स्थिति को देखते हुए भविष्य के लिए तैयारी करते हैं और पॉलिसी इसके सबसे बड़े उदाहरणों में से एक है। हालांकि, भारत में सैकड़ों तरह की पॉलिसी मौजूद हैं, जिनमें अलग-अलग कवरेज या ऑफर दिए जाते हैं जैसे गर्भावस्था को कवर करने के लिए मैटरनिटी हेल्थ इन्शुरन्स, पहले से मौजूद बीमारियों के लिए प्री एग्जिस्टिंग इलनेस प्लान, पूरे परिवार को कवर करने के लिए फैमिली फ्लोटर प्लान, उम्रदराज लोगों के लिए सीनियर सिटीजन हेल्थ इन्शुरन्स इत्यादि।
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इन्शुरन्स पॉलिसी और बीमा में संबंध - Relationship between policy and insurance in Hindi
जैसा कि ऊपर बताया गया है कि व्यक्ति जब बीमा पॉलिसी खरीदता है, तो ऐसे में उसे दस्तावेज के रूप में पॉलिसी बॉन्ड दिया जाता है, जिसमें पॉलिसी से जुड़े सभी नियम व शर्तें मौजूद होती हैं। यानी पॉलिसी लेने का मतलब है लिखित दस्तावेजों का होना, जिन्हें हमेशा संभालकर रखने की जरूरत होती है। बिना अनुबंध पत्र हस्ताक्षर किए बीमा नहीं लिया जा सकता है। देखा जाए, तो पॉलिसी बॉन्ड कानूनी रूप से बीमा करवाने का सबूत होता है। बीमा पॉलिसी के दो प्रकार है-
- लाइफ इन्शुरन्स पॉलिसी
- जरनल इन्शुरन्स पॉलिसी
लाइफ इन्शुरन्स
इसमें लाइफ इन्शुरन्स पॉलिसी ली जाती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी ने 10 लाख का जीवन बीमा कराया है और पॉलिसी पीरियड के दौरान (जब तक प्रीमियम भर रहे हों) उसकी मौत हो जाती है तो ऐसे में बीमा कंपनी पॉलिसी बॉन्ड के तहत उसके नॉमिनी को बीमा राशि यानी 10 लाख रुपये ट्रांसफर कर देगी। यहां ध्यान दीजिए, यदि प्रीमियम की अवधि के दौरान बीमित व्यक्ति को कुछ नहीं होता है और वह सभी प्रीमियम जिंदा रहते जमा कर देता है तो ऐसे में बीमा कंपनी बीमित व्यक्ति को सम-एश्योर्ड और अन्य बोनस राशि ट्रांसफर कर देती है।
जनरल इन्शुरन्स
इसमें लाइफ इन्शुरन्स पॉलिसी को छोड़कर सभी पॉलिसी शामिल है जैसे मोटर इन्शुरन्स पॉलिसी, हाउस इन्शुरन्स पॉलिसी, ट्रेवल इन्शुरन्स पॉलिसी, हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी आदि।
- मोटर इन्शुरन्स पॉलिसी : भारत में किसी भी वाहन का कम के कम थर्ड पार्टी बीमा कराया अनिवार्य है, ऐसा न करने पर आपको जुर्माने के रूप में भारी रकम अदा करनी पड़ सकती है। यदि आपने कॉम्प्रीहेंसिव पॉलिसी ली है तो मोटर इन्शुरन्स पॉलिसी के हिसाब से आपके वाहन को किसी भी तरह से नुकसान होता है, तो बीमा कंपनी इसके लिए मुआवजा देती है, यहां तक कि यदि वाहन चोरी हो गया है तो ऐसे में मोटर बीमा पॉलिसी आपकी काफी मदद कर सकती है। यदि आपकी गाड़ी से एक्सीडेंट हो जाता है और किसी अन्य व्यक्ति की मौत हो जाती है या कोई अन्य नुकसान होता है तो थर्ड पार्टी बीमा यहां काम आता है। कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी में थर्ड पार्टी भी शामिल होता है।
- हाउस इन्शुरन्स पॉलिसी : इसमें घर को किसी भी तरह के नुकसान होने पर बीमा पॉलिसी कवरेज देती है। इस नुकसान का कारण प्राकृतिक या कृत्रिम आपदा दोनों हो सकती है। घर में चोरी और आग लगने पर भी हाउस इन्शुरन्स पॉलिसी आपकी मदद करती है।
- यात्रा बीमा पॉलिसी : यात्रा में हमेशा जोखिम बना रहता है, ऐसे में यदि बीमित व्यक्ति को यात्रा में कोई नुकसान हुआ है जैसे गंभीर चोट आना, सामान चोरी हो जाना इत्यादि, तो बीमा कंपनी मुआवजा देती है।
- स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी : मेडिकल इमर्जेंसी हो या मेडिकल कंडीशन, यदि वह स्थिति बीमा कंपनी के कवर में आती है तो वह इलाज से जुड़ा सारा खर्चा उठाते हैं।
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इन्शुरन्स पॉलिसी का उपयोग किस लिए किया जाता है? - What is a insurance policy used for in Hindi
पॉलिसी बेचने वाली बीमा कंपनी और पॉलिसी को खरीदने वाले व्यक्ति के बीच के कॉन्ट्रेक्ट पेपर्स को पॉलिसी बॉन्ड के रूप में जाना जाता है, इन पेपरों में नियम या दिशा-निर्देश मौजूद होते हैं, जिसका उपयोग क्लेम करने के दौरान किया जाता है। उदहारण के तौर पर मान लीजिए कि किसी ने हेल्थ इन्शुरन्स लिया है, अब ऐसे में जब बीमित व्यक्ति क्लेम करता है, तो हेल्थ इन्शुरन्स कंपनी पॉलिसी की शर्तों के हिसाब से नुकसान का हर्जाना भरती है। पॉलिसी बॉन्ड में हॉस्पिटलाइजेशन के अलावा प्री एंड पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन के बारे में भी जानकारी होती है। इसके उपयोग से आप यह समझ सकते हैं कि क्लेम करते समय पॉलिसीधारक की क्या जिम्मदारियां हैं, हेल्थ इन्शुरन्स में क्या-क्या कवर होता है और क्या-क्या कवर नहीं होता है इत्यादि।
इन्शुरन्स पॉलिसी होल्डर का मतलब क्या होता है? - Insurance policy holder in Hindi
सीधे शब्दों में कहें, तो पॉलिसी होल्डर को पॉलिसी धारक या पॉलिसी ओनर भी कहते हैं, यह वह व्यक्ति या समूह होता है, जिसके नाम पर बीमा पॉलिसी होती है। यह जरूरत पड़ने पर पॉलिसी बॉन्ड में लिखे सारे लाभ ले सकता है। पॉलिसी होल्डर चाहे तो पॉलिसी अवधि के दौरान क्लेम कर सकता है और चाहे तो नहीं भी कर सकता है। दोनों के अपने फायदे हैं - मान लीजिए यदि बीमित व्यक्ति के सामने बड़ी विपदा आई है तो ऐसे में खर्च भी ज्यादा हो सकता है। अचानक से आए इस तरह के खर्चों से निपटने के लिए ही इन्शुरन्स कराया जाता है, ताकि आपकी बीमा कंपनी इस खर्चे को उठाए और आप बिना किसी खास तनाव के विपत्ति से उबर सकें। दूसरी तरफ यदि आप पॉलिसी अवधि के दौरान क्लेम नहीं करते हैं, तो पॉलिसी रिन्यू के दौरान आपको नो क्लेम बोनस मिल सकता है, जिसमें या तो आपके द्वारा दिए जा रहे प्रीमियम पर कुछ प्रतिशत की छूट शामिल होगी या फिर बीमा राशि में बढ़ोतरी कर दी जा सकती है।
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इन्शुरन्स पॉलिसी डॉक्यूमेंट - Insurance policy document in Hindi
पॉलिसी डॉक्यूमेंट ऐसे दस्तावेज हैं, जिन्हें कानूनी रूप से बाध्यकारी दस्तावेज माना जाता है। इसमें पॉलिसीधारक द्वारा बीमा के लिए प्रस्ताव पत्र (प्रपोजल फॉर्म), पॉलिसी शेड्यूल, प्रीमियम की पहली रसीद, मेडिकल एग्जामिनर की रिपोर्ट इत्यादि पेपर्स शामिल होते हैं। इसके अलावा इन डॉक्यूमेंट में वे पेपर भी शामिल हैं, जिन्हें बीमा कंपनी जरूरत पड़ने पर मांग सकती है और पॉलिसीधारक को जमा करने होते हैं। पॉलिसी डॉक्यूमेंट की वजह से ही ऑनलाइन व ऑफलाइन क्लेम, क्लेम सेटलमेंट, पॉलिसी रिन्यूअल, नो क्लेम बोनस और कानूनी रूप से नॉमिनी को पैसे ट्रांसफर करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य संभव हो सकते हैं।
डुप्लीकेट इन्शुरन्स पॉलिसी पेपर कैसे डाउनलोड करें? - Download duplicate Insurance policy papers in Hindi
ज्यादातर बीमा कंपनियों का ई-पोर्टल है, जहां ग्राहक व पॉलिसी से जुड़ी जरूरी जानकारी और दस्तावेज स्कैन कॉपी के रूप में मौजूद होते हैं। आप बीमा पॉलिसी की डुप्लीकेट कॉपी की मदद से पॉलिसी को रिन्यू करने के साथ-साथ उन्हें डाउनलोड भी कर सकते हैं। इसके लिए आपको कस्टमर आईडी, बीमा पॉलिसी नंबर और रजिस्टर मोबाइल नंबर के साथ लॉग इन करने की जरूरत होती है।
पॉलिसी पेपर ऑनलाइन डाउनलोड करने के लिए आप निम्न चरणों का पालन कर सकते हैं :
- कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं
- अपनी पॉलिसी की ई-कॉपी डाउनलोड करने के विकल्प का चयन करें
- पॉलिसी नंबर और पंजीकृत मोबाइल नंबर डालें
- पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी के लिए इंतजार करें
- सत्यापन के लिए पोर्टल में ओटीपी दर्ज करें
- इसके बाद, अपना पंजीकृत ईमेल आईडी डालें
- आपकी बीमा पॉलिसी की एक प्रति मेल आईडी पर पीडीएफ के रूप में मिल जाएगी, जहां से आप इसे डाउनलोड कर सकते हैं।
अगर ऊपर बताए गए कदम आपके काम नहीं आते हैं, तो आपको अपनी बीमा कंपनी के कस्टमर केयर से संपर्क करना चाहिए।
इन्शुरन्स पॉलिसी शेड्यूल क्या है? - Insurance policy schedule in Hindi
पॉलिसी शेड्यूल पॉलिसी का कवर पेज होता है, जिसमें जरूरी बातों के अलावा, पॉलिसी व पॉलिसीधारक या बीमित व्यक्ति की जानकारी होती है।
दूसरे शब्दों में कहें तो पॉलिसी शेड्यूल आपकी बीमा पॉलिसी द्वारा दिए गए कवरेज की रूपरेखा है। यह इन्शुरन्स कॉन्ट्रैक्ट यानी बीमा अनुबंध का हिस्सा है, जो पॉलिसीधारक की पहचान करता है और इसमें बीमित व्यक्ति या संपत्ति, कवरेज की राशि, एक्सक्लुजन, डिडक्टिबल्स और भुगतान के तरीके की जानकारी होती है।
इनके अलावा पॉलिसी से संबंधित कुछ अन्य टर्म भी हैं, जिनके बारे में आपको जानकारी होनी चाहिए जैसे - पॉलिसी टर्म और पॉलिसी ईयर।
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इन्शुरन्स पॉलिसी टर्म - Insurance policy Term in Hindi
पॉलिसी टर्म उन वर्षों की संख्या है, जितने समय के लिए पॉलिसी एक्टिव रहती है यानी जोखिम शुरू होने की तिथि से शुरू होकर अंतिम बार पॉलिसी जब तक रिन्यू की जा सकती है। यह जानकारी पॉलिसी शेड्यूल में दी होती है।
इन्शुरन्स पॉलिसी ईयर - Insurance policy years in Hindi
पॉलिसी ईयर की शुरुआत उस तिथि से होती है, जिस तिथि से पॉलिसी प्रभावी होती है। मान लीजिए 10 जनवरी 2021 से प्रभावी पॉलिसी 09 जनवरी 2022 तक वैध रहेगी। हालांकि, यह समय प्रत्येक पॉलिसी के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। यह पता लगाने के लिए कि आपका पॉलिसी वर्ष कब शुरू होता है, आपको पॉलिसी दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए।





