भारत में नए कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या 900 के पार चली गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कुछ देर पहले इसकी पुष्टि की है। शनिवार सुबह से शाम के बीच कुल 36 नए मामले सामने आए हैं। इससे मरीजों की संख्या 873 से 909 हो गई है। इस बीच, बिहार में स्वाइन फ्लू और बर्ड फ्लू की दस्तक ने राज्य के अधिकारियों की हलचल बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बिहार में सार्स-सीओवी-2 से फैले प्रकोप के बीच शुक्रवार को स्वाइन फ्लू और बर्ड फ्लू के मामले सामने आए हैं। एक साथ तीन बीमारियों के फैलने के बाद सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद निरीक्षण के लिए निकले। इस बाबत उन्होंने पशु और मत्स्य संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक भी की।

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मीडिया में आई जानकारी के मुताबिक, बर्ड फ्लू के चलते बिहार के पटना, नालंदा और नवादा में सैकड़ों पक्षियों की मौतें हुई हैं। वहीं, भागलपुर और रोहतास से स्वाइन फ्लू के मामले सामने आए हैं। सरकार और प्रशासन की ओर से इस संबंध में आवश्यक कदम उठाए जाने की बात कही जा रही है।

क्या होता है बर्ड फ्लू?
बर्ड फ्लू को एवियन इन्फ्लूएंजा के नाम से भी जाना जाता है। यह एक प्रकार का वायरल इन्फेक्शन होता है। इससे सिर्फ पक्षी ही नहीं, बल्कि मनुष्य और अन्य जानवर भी संक्रमित हो जाते हैं। हालांकि यह वायरस मुख्य रूप से सिर्फ पक्षियों तक ही सीमित होते हैं। लेकिन कुछ मामलों में मनुष्यों के भी इससे संक्रमित होने की आशंका होती है। अभी तक दर्जनों से भी ज्यादा प्रकार के बर्ड फ्लू संक्रमणों की पहचान कर ली गई है, जिनमें हाल ही में मनुष्यों को संक्रमित करने वाले वायरस के दो प्रकार के बर्ड फ्लू शामिल हैं। ये दोनो वायरस 'एच5एन1' और 'एच7एन9' के नाम से जाने जाते हैं। जब बर्ड फ्लू मनुष्यों के शरीर में हमला करते हैं तो इससे जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है।

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बर्ड फ्लू के लक्षण
मनुष्यों में संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित जानवर या दूषित वातावरण से सीधे संपर्क में आने पर फैलता है। इन वायरसों में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के शरीर में फैलने की क्षमता नहीं होती। मनुष्यों में बर्ड फ्लू के शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, निचले और ऊपरी श्वसन तंत्र में संक्रमण (ऊपरी में कम सामान्य) आदि होते हैं। इसके अलावा कुछ लक्षण हो सकते हैं, जैसे-

चमकी बुखार का पहला मामला
बिहार में केवल बर्ड फ्लू और स्वाइन फ्लू से ही हड़कंप नहीं मचा है, बल्कि पिछले साल राज्य में कई बच्चों की जान लेने वाले चमकी बुखार ने भी अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। दरअसल मुजफ्फरपुर में एक बार फिर चमकी बुखार का मामला सामने आया है, जिसे विज्ञान की भाषा में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) कहा जाता है। जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) में एक साढ़े तीन साल के बच्चे को एईएस के लक्षण के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। गौरतलब है कि बीते साल चमकी बुखार से बिहार में सौ से अधिक बच्चों की मौत हुई थी।

क्या है चमकी बुखार और इसके लक्षण?
एक्‍यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम को दिमागी बुखार भी कहा जाता है। ये बीमारी हमारे देश में कुछ खास मौसम में बहुत तेजी से फैलती है। भारत के उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार राज्‍य में ये बीमारी सबसे ज्‍यादा पाई जाती है। इसके लक्षण में कई सामान्य संकेत देखने को मिलते हैं, जैसे-

  • एक्‍यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से ग्रस्‍त होने पर मरीज़ को सबसे पहले बुखार आता है
  • बुखार के साथ दस्त या उल्‍टी भी हो सकती है
  • इन लक्षणों के साथ सिरदर्द, उल्‍टी और रोशनी से दिक्‍कत होने लगे तो ये दिमागी बुखार का संकेत हैं
  • दिमागी बुखार होने पर मरीज़ बेसुध हो जाता है और इधर-उधर की बातें करने लगता है
  • मरीज को अपना पेशाब रोक पाने में भी दिक्‍कत होती है
  • एक्‍यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के गंभीर होने पर व्‍यक्‍ति को दौरे पड़ सकते हैं

अधिकारियों को सतर्क रहने की सलाह
बहरहाल, बिहार समेत पूरे देश में इस वक्त कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैला है। बिहार में अब तक कोविड-19 से संक्रमित नौ मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि एक मरीज की मौत हो गई है। ऐसे में बिहार सरकार ने अब अधिकारियों को पूरी तरह से अलर्ट रहने का आदेश दिया है। साथ ही उन जगहों पर नजर रखने को कहा है, जहां से पक्षियों की अप्राकृतिक मौत की सूचना दी गई थी। साथ ही बर्ड फ्लू को फैलने से रोकने और जांच के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए के लिए कहा गया है।