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एनल फिशर की समस्या जब लंबे समय तक बनी रहती है तो इसके वैकल्पिक इलाज के तौर पर स्फिंक्टेरोटोमी या एनल स्फिंक्टेरोटोमी सर्जरी की जाती है। एनल फिशर एक ऐसी स्थिति है जिसमें गुदा गुहा के अंदर की त्वचा फट या कट जाती है जिसके कारण इसके नीचे मौजूद मांसपेशियों के ऊतक दिखाई देने लगते हैं। इस स्थिति में बहुत दर्द होता है विशेषकर मल त्याग के दौरान।

जब एनल फिशर के लिए किए गए सभी इलाज असफल हो जाते हैं, तो यह सर्जरी करने की सलाह दी जाती है। हालांकि यदि आपको पहले से कोई ऐसी स्थिति या रोग है जिसके कारण आप मल नहीं रोक पाते हैं तो सर्जन स्फिंक्टेरोटोमी की सलाह नहीं देते हैं। सर्जरी के दौरान आपको सुलाने के लिए जनरल एनेस्थीसिया दिया जाएगा। सर्जरी में बाहर निकली मांसपेशी पर एक चीरा लगाया जाता है, जिससे मांसपेशी पर दबाव कम होता है और फिशर ठीक होने में मदद मिलती है।

सर्जरी के कुछ घंटों बाद मरीज को डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। हालांकि सर्जरी के कुछ दिन बाद तक मरीज का दर्द बना रह सकता है। तो वहीं बहुत से लोगों को कुछ दिनों में ही लक्षणों व दर्द से आराम मिल जाता है। स्फिंक्टेरोटोमी के एक से दो हफ्ते बाद आप काम पर जा सकते हैं।

  1. स्फिंक्टेरोटोमी क्या है - What is Sphincterotomy/anal sphincterotomy in Hindi
  2. स्फिंक्टेरोटोमी क्यों की जाती है - Why is Sphincterotomy/anal sphincterotomy done in Hindi
  3. स्फिंक्टेरोटोमी से पहले की तैयारी - Preparations before Sphincterotomy/anal sphincterotomy in Hindi
  4. स्फिंक्टेरोटोमी कैसे होती है - How is Sphincterotomy/anal sphincterotomy done in Hindi
  5. स्फिंक्टेरोटोमी के बाद देखभाल - Sphincterotomy/anal sphincterotomy post care in Hindi
  6. स्फिंक्टेरोटोमी की जटिलताएं - Sphincterotomy/anal sphincterotomy Complications in Hindi

स्फिंक्टेरोटोमी जिसे एनल स्फिंक्टेरोटोमी भी कहते हैं लंबे समय से हुए एनल फिशर को ठीक करने के लिए की जाने वाली सर्जरी है।

एनल फिशर गुदा नलिका में लगा छोटा कट या दरार होती है। गुदा नलिका बड़ी आंत को मलाशय से जोड़ने वाली एक छोटी ट्यूब है। सूखे और सख्त मल के कारण एनल गुहा में मौजूद पतली व नम परत फट जाती है या कट जाती है। ट्यूमर, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज और एनल संक्रमण से भी एनल फिशर हो सकता है। हर बार जब आप मल त्यागते हैं तो फिशर खुल जाता है और मल त्यागते हुए आपको दर्द हो सकता है जिसके कारण आपका शरीर स्टूल को अंदर ही रख सकता है। इससे मल सख्त हो सकता है और स्थिति ज्यादा ख़राब हो सकती है।

यदि नॉन सर्जिकल ट्रीटमेंट जैसे फाइबर युक्त डाइट, अधिक पानी पीना और दवाओं से स्थिति ठीक नहीं होती है तो सर्जन स्फिंक्टेरोटोमी की सलाह देंगे। इस प्रक्रिया में बाहर उभरी हुयी मांसपेशी में चीरा लगाया जाता है ताकि उस पर दबाव कम पड़े और फिशर को ठीक होने का समय मिले। बहुत से लोग सर्जरी के बाद आराम से शौच जा पाते हैं।

जब किसी व्यक्ति को लंबे समय से एनल फिशर की समस्या होती है और उन्हें नॉन सर्जिकल ट्रीटमेंट से कोई फायदा महसूस नहीं होता है तो डॉक्टर एनल स्फिंक्टेरोटोमी करवाने की सलाह दे सकते हैं। एनल फिशर से पीड़ित लोगों को निम्न लक्षण दिखाई देते हैं-

सर्जरी से कुछ दिन पहले डॉक्टर आपको अस्पताल कुछ चेकअप करने के लिए बुलाएंगे। जिसके लिए आपको निम्न टेस्ट करवाने होंगे -

  • ब्लड टेस्ट
  • मेथिसिलिन-रेसिस्टेंट स्टेफिलोकोकस ऑरस (एमआरएसए) टेस्ट जो कि घाव के सैंपल में बैक्टीरिया की जांच करता है
  • इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (हृदय की विद्युत् क्रिया की जांच करने के लिए)
  • एनोस्कोपी 
  • डिजिटल रेक्टल एग्जाम

इसके साथ ही सर्जन आपको सर्जरी की तैयारी करने के लिए भिन्न निर्देश देंगे। प्री ऑपरेटिव निर्देशों में आपसे निम्न चीज़ें करने को कहा जा सकता है -

  • अपनी मेडिकल हिस्ट्री बताएं
  • आप जो भी दवाएं ले रहे हैं उनके बारे में डॉक्टर को बताएं इसमें ओटीसी, डाइट सप्लीमेंट और हर्ब्स शामिल हैं 
  • यदि आप गर्भवती हैं या आपको कोई एलर्जी है तो इसके बारे में डॉक्टर को बता दें
  • सर्जरी के दिन पेट खाली रखें
  • सर्जरी से एक दिन पहले दोपहर के भोजन के बाद अच्छे से तरल पदार्थों (जूस, पानी) आदि का सेवन करें
  • सर्जरी से एक रात पहले कुछ भी न खाये-पिएं
  • सर्जरी के बाद जटिलताओं से बचने के लिए धूम्रपान करना बंद कर दें
  • सर्जरी से एक हफ्ते पहले रक्त को पतला करने वाली दवाएं लेना बंद कर दें
  • सर्जरी के लिए जाते समय अपने साथ किसी रिश्तेदार या मित्र को ले जाएं
  • यदि आप यह प्रक्रिया करवाना चाहते हैं तो एक अनुमति फॉर्म पर हस्ताक्षर करने को कहा जाएगा

जब आप अस्पताल पहुंचेंगे तो अस्पताल का स्टाफ आपको गाउन पहनने को देगा। इसके बाद आपको ऑपरेशन थिएटर में ले जाया जाएगा जहां डॉक्टर आपकी बांह की नस में आइवी (इंट्रावेनस) लाइन लगाएंगे। इसके जरिये आपको सर्जरी के दौरान दवाएं और अतिरिक्त द्रव दिए जाएंगे। ऑपरेशन के दौरान आपकी हृदय की दर, सांस लेने की दर, तापमान और ऑक्सीजन के स्तर की जांच करने के लिए भिन्न उपकरण आपके शरीर पर लगाए जाएंगे।

प्रक्रिया के दौरान आपको जनरल एनेस्थीसिया दिया जाएगा। सर्जरी निम्न चरणों में की जाती है -

  • जब एनेस्थीसिया के प्रभाव की वजह से आप सो जाएंगे तो सर्जन गुदा नलिका की त्वचा में बाहर दिख रही मांसपेशी (एनल स्पिंचटर) के नीचे एक छोटा चीरा लगाएंगे ताकि उसे बाहर देखा जा सके
  • अब एनल स्पिंचटर में एक छोटा चीरा लगाया जाएगा
  • गुदा नलिका में लगाए गए चीरे को सिला जा सकता है
  • इसके बाद सर्जन ऑपरेशन के भाग को पट्टी से ढक देंगे ताकि रक्तस्राव न हो

सर्जरी को पूरा होने में एक घंटे से भी कम का समय लगता है। इस प्रक्रिया के हो जाने के बाद हॉस्पिटल स्टाफ आपको रिकवरी वार्ड में ले जाएगा जब तक कि आप वापस होश में नहीं आ जाते हैं। जब आप उठेंगे तो आपको चलने फिरने को कहा जाएगा। इससे होने वाली जटिलताओं को कम किया जा सकता है। सर्जरी के ही दिन आपको कुछ घंटों में अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।

सर्जरी के बाद देखभाल करने के लिए सर्जन आपको निम्न निर्देश देंगे-

  • सर्जरी के कुछ दिनों बाद तक समय पर शौच न आना और मल त्यागते समय दर्द होने जैसी समस्याएं हो सकती है। समय पर शौच आने के लिए डॉक्टर लैक्सेटिव (मल को मुलायम करने की दवा) दे सकते हैं जिससे मल त्यागते समय दर्द की समस्या कम हो। इसी दौरान आप निर्देशानुसार पेन किलर भी ले सकते हैं। इसके साथ ही आप फाइबर युक्त आहार लें और बहुत सारा पानी भी पिएं
  • यदि आपका पेट ख़राब है तो कम वसा युक्त भोजन लें और सादा भोजन खाएं जैसे दही, सफ़ेद चावल और टोस्ट
  • सर्जरी के बाद संचालन को ठीक रखने व कब्ज और निमोनिया से बचने के लिए हल्के व्यायाम करें जैसे वॉक करना
  • नहाने के बाद ऑपरेशन वाले स्थान को न रगड़ें इसके बजाय थपथपा कर तौलिया से साफ़ करें। खुशबु वाले साबुन का प्रयोग न करें इससे त्वचा पर चिड़चिड़ापन हो सकता है
  • यह सलाह दी जाती है कि आप अपने पैर को टॉयलेट में बैठते समय किसी छोटी मेज पर टिका लें ताकि ऑपरेशन के स्थान पर अधिक दबाव न पड़े
  • सर्जरी के दो हफ्ते बाद आप काम पर लौट सकते हैं

एनल स्फिंक्टेरोटोमी से एनल फिशर के कारण हो रहे दर्द व लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है।

डॉक्टर के पास कब जाएं?

यदि आपको निम्न में से कुछ भी महसूस हो तो डॉक्टर को तुरंत सूचित करें -

  • बुखार
  • कंपकंपी
  • जी मिचलाना
  • उल्टी आना
  • कब्ज जो दवा लेने के बाद भी तीन दिन से ज्यादा समय तक बना रहे
  • पेशाब करने में तकलीफ
  • मलाशय से अतिरिक्त रक्तस्त्राव
  • मल पर नियंत्रण न कर पाना
  • मलाशय से डिस्चार्ज निकलना और ख़राब बदबू आना
  • ऑपरेशन वाली जगह पर सूजन

सर्जरी से जुड़े संभावित जोखिम और जटिलताओं में शामिल हैं-

  • रक्तस्त्राव
  • संक्रमण
  • गुदा से मल या गैस निकलने पर नियंत्रण न रख पाना
  • छाती में संक्रमण
  • श्वास संबंधी समस्याएं
  • गुर्दे का ठीक तरह से कार्य न करना
  • फेफड़ों या पैरों में रक्त के थक्के जमना
  • एनेस्थीसिया के प्रति रिऐक्शन
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संदर्भ

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  2. American Society of Colon and Rectal Surgeons [Internet]. Illinois. US; Anal Fissure
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