myUpchar प्लस+ सदस्य बनें और करें पूरे परिवार के स्वास्थ्य खर्च पर भारी बचत,केवल Rs 99 में -

सन् 1928 में डॉ. वाल्‍टर डैंडी ने पहली बार कैंसरकारी ब्रेन ट्यूमर के इलाज के लिए एनाटोमिकल हैमिस्‍फेयरेक्‍टोमी सर्जरी की थी। इसके बाद असाध्‍य (जिसका इलाज न हो सके) मिर्गी के मरीजों के लिए उपचार के विकल्‍प के तौर पर पहली बार सन् 1950 में डॉ. एच.जी मैकेंजी ने एनाटोमिकल हैमिस्‍फेयरेक्‍टोमी सर्जरी की थी।

पिछले कुछ सालों में विभिन्‍न तकनीकों के आ जाने से हैमिस्‍फेयरेक्‍टोमी सर्जरी में काफी बदलाव आए हैं और अब इसमें कम ऊतकों को हटाया जाता है एवं सर्जरी के बाद आने वाली जटिलताओं में भी कमी आई है।

हैमिस्‍फेयरेक्‍टोमी मिर्गी के दौरों को कम या खत्‍म करने के लिए की जाती है। इस सर्जरी के बाद 70 से 80 फीसदी मरीजों को दौरे पड़ने से छुटकारा मिलता है और बाकी के 10 से 20 फीसदी मरीजों में 80 प्रतिशत दौरे कम हो जाते हैं। रासमुसेन रोग (लगातार बढ़ने वाली बीमारी) से ग्रस्‍त मरीज को इस सर्जरी से ज्‍यादा फायदा नहीं होता है। हालांकि, इन्‍हें दवा कम लेनी पड़ती है और इनके मस्तिष्‍क के बौद्धिक कार्यों में भी सुधार आ सकता है।

हैमिस्‍फेयरेक्‍टोमी के दौरान मृत्‍यु का खतरा केवल 1 से 2 फीसदी है। 10 से 20 प्रतिशत मरीजों में गंभीर जटिलताएं देखी जा सकती हैं लेकिन इनका इलाज संभव है।

 
  1. सेरिब्रल हैमिस्फेयर निकालने की सर्जरी क्या है - Hemispherectomy kya hai
  2. हैमिस्फेयरेक्टोमी सर्जरी क्यों की जाती है - Hemispherectomy kab ki jati hai
  3. सेरिब्रल हैमिस्फेयर निकालने के ऑपरेशन से पहले की तैयारी - Hemispherectomy se pehle ki taiyari
  4. सेरिब्रल हैमिस्फेयर निकालने की सर्जरी कैसे होती है - Hemispherectomy kaise hoti hai
  5. हैमिस्फेयरेक्टोमी सर्जरी के बाद देखभाल और सावधानियां - Hemispherectomy hone ke baad dekhbhal aur savdhaniya
  6. सेरिब्रल हैमिस्फेयर निकालने के ऑपरेशन की जटिलताएं - Hemispherectomy me jatiltaye

हैमिस्‍फेयरेक्‍टोमी एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें प्रभावित सेरिब्रल हैमिस्फेयर (मस्‍तिष्‍क का आधा हिस्‍सा) को आंशिक या संपूर्ण रूप से निकाला या प्रभावित सेरिब्रल को सही सेरिब्रल से अलग किया जाता है।

मिर्गी के इलाज के लिए सर्जिकल प्रक्रिया को हैमिस्‍फेयरेक्‍टोमी कहते हैं जिसमें दो सेरिब्रल हैमिस्फेयर में से एक को निकाल दिया जाता है। दोनों सेरिब्रल मिलकर मस्तिष्‍क बनाते हैं।

जब किसी बच्‍चे के मस्तिष्‍क के एक हिस्‍से में से कई जगहों से दौरे पड़ने की संभावना हो तो इस स्थिति में हैमिस्‍फेयरेक्‍टोमी सर्जरी की जाती है। आमतौर पर यह सर्जरी उन बच्‍चों की होती है जिनमें ये विकार जन्‍मजात या जन्‍म के कुछ समय बाद ही हुआ हो।

जब दवाओं से मिर्गी का इलाज न हो सके तो इस स्थिति में हैमिस्‍फेयरेक्‍टोमी सर्जरी की जाती है। सेरिब्रल कोर्टेक्‍स मस्तिष्‍क का झुर्रीदार बाहरी हिस्‍सा है। ये दाएं और बाएं दो हिस्‍सों में बंटा हुआ है और ये दोनों हिस्‍से कई तंत्रिका तंतुओं (इन्‍हें कॉर्पस कैलोसम कहा जाता है और ये दोनों हिस्‍सों के बेस में होती हैं) के बंडल के जरिए एक-दूसरे से कनेक्‍ट करते हैं।

निम्‍न स्थितियों में हैमिस्‍फेयरेक्‍टोमी सर्जरी की जाती है:

  • जब मिर्गी की स्थिति में बीमारी वाले हिस्‍से से शुरू हो रहे दौरों को दवाओं से कंट्रोल करना मुश्किल हो जाए।
  • शरीर के एक हिस्‍से के कमजोर होने के अलावा दाएं-बाएं की चीजों के न दिखने के साथ या इसके बिना हाथों का काम न कर पाना।
  • असाध्‍य दौरों की वजह से मानसिक मंदता
  • एक सेरिब्रल हैमिस्फेयर के कारण असामान्‍य स्थिति का बढ़ना जिससे मिर्गी का इलाज और मुश्किल हो जाए।
  • कोर्टिकल विकास में विकृति, स्‍ट्रोक, हेमि‍मेगैलेनसेफली (मस्तिष्क में विकृति), स्‍टर्ज-वेबर-डिमिट्री रोग (त्वचा और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाला) और रासमुसेन इन्सेफेलाइटिस (नसों से संबंधित विकार) जैसी बीमारियों में ऊपर बताए गए लक्षण दिखते हैं। इसके अधिकतर मरीजों में जीवन के शुरुआती वर्षों में ही दौरे पड़ना और कमजोरी शुरू हो जाती है।

मिर्गी के लिए सर्जरी करने से पहले डॉक्‍टर कई तरह के टेस्‍ट करवाते हैं जिसमें इलेक्ट्रोइन्सेफेलोग्राम (ईईजी) शामिल है। इसमें सिर की त्‍वचा या मस्तिष्‍क के अंदर इलेक्‍ट्रिकल एक्टिविटी को रिकॉर्ड करने के लिए इलेक्‍ट्रोड्स लगाए जाते हैं। इस जांच से पता चलता है कि दौरे मस्तिष्‍क के किस हिस्‍से से पड़ रहे हैं।

मस्तिष्‍क की तस्‍वीरें लेने के लिए कई न्‍यूरोइमेजिंग (नसों की) प्रक्रियाएं की जाती हैं। इससे मस्तिष्‍क की संरचना में आई असामान्‍यता का पता चल सकता है। इन प्रक्रियाओं में मैग्‍नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई), एक्‍स-रे, सीटी स्‍कैन या पीईटी इमेजिंग शामिल है।

इसके अलावा न्‍यूरोसाइकोलॉजिकल टेस्‍ट किए जाते हैं जिसके रिजल्‍ट की तुलना सर्जरी के बाद के रिजल्‍ट से की जाती है। वाडा टेस्‍ट भी किया जा सकता है जिसमें मस्तिष्‍क के आधे हिस्‍से को नींद की अवस्‍था में जाने के लिए इंजेक्‍शन के जरिए दवा दी जाती है। इससे न्‍यूरोलॉजिस्‍ट को ये जानने में मदद मिलती है कि मस्तिष्‍क में भाषा और अन्‍य कार्य कहां से हो रहे हैं और इससे ये भी पता चल सकता है कि सर्जरी कितनी सफल होगी।

मस्तिष्क दो बराबर हिस्सों में बंटा होता है। इन दोनों हिस्सों को एक गहरी नलिका द्वारा अलग किया गया होता है लेकिन ये दोनों, नसों के एक मोटे बैंड (जिसे कॉर्पस कैलोसम कहते हैं) के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में होते हैं। प्रत्येक हिस्से के 4 भाग (लोब्स) होते हैं।

डॉक्टर सिर की त्वचा पर कट लगाकर खोपड़ी में से हड्डी का एक टुकड़ा निकाल लेते हैं। अब डॉक्‍टर मस्तिष्क को ढकने वाली सख्त झिल्ली ड्यूरा को साइड कर के उन हिस्‍सों को निकालते हैं जहां से दौरे शुरू हो रहे हैं। आमतौर पर ये टेंपोरल लोब होता है। 

अब डॉक्‍टर कॉर्पस कैलोसम में कट लगाते हैं जिससे कि मस्तिष्‍क के एक हिस्‍से से दूसरे हिस्‍से को कोई संकेत न पहुंच पाए। अगर मस्तिष्‍क के एक हिस्‍से से दौरे शुरू हो रहे हैं तो ये दूसरे स्‍वस्‍थ हिस्‍से तक भी फैल सकता है। कॉर्पस कैलोसम में कट लगाकर स्‍वस्‍थ हिस्‍से को दौरे से होने वाले नुकसान का खतरा कम हो जाता है।

इसके बाद सर्जन ड्यूरा और निकाली गई हड्डी को वापिस उसकी जगह पर लगाकर चीरे को टांकों से बंद कर देते हैं।

सर्जरी के बाद एक या दो दिन तक मरीज को आईसीयू में रखा जा सकता है और इसके बाद उसे 3 से 4 दिन तक अस्‍पताल के सामान्‍य कमरे में शिफ्ट किया जाता है। सर्जरी के 10 से 14 दिनों के बाद टांके खुलते हैं। पहले कुछ हफ्तों में मरीज को साइड इफेक्‍ट हो सकते हैं जो आमतौर पर धीरे-धीरे ठीक हो जाते हैं। इसके साइड इफेक्‍ट कुछ इस तरह हो सकते हैं:

सर्जरी के बाद मरीज की देखभाल में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • अधिकतर लोग सर्जरी के 6 से 8 हफ्तों के बाद पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं।
  • मरीज को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने और हाथ-पैरों को ठीक तरह से काम करने में मदद करने के लिए रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम के एक हिस्‍से के तौर पर फिजीकल और ऑक्‍यूपेशनल थेरेपी (जिसमें दैनिक कार्य करने में शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम बनाना) दी जाती है।
  • सर्जरी के बाद कम से कम 2 साल तक दौरे पड़ने की दवा लेनी होती है। दौरे न पड़ने की स्थिति में भी दवा लेनी होती है। डॉक्‍टर आपको बताएंगें कि इन दवाओं को लेना कब बंद करना है और कब इनकी खुराक कम की जाएगी।

बाकी सर्जरी की तरह ही हैमिस्‍फेयरेक्‍टोमी में भी कुछ जटिलताएं सामने आ सकती हैं, जैसे कि:

इस सर्जरी से होने वाली अन्‍य जटिलताएं इस प्रकार हैं:

  • शरीर के जिस हिस्‍से पर सर्जरी की गई है उसके विपरीत वाले हिस्‍से को हिलाने में दिक्‍कत आना या कुछ महसूस न कर पाना।
  • मस्तिष्‍क में फ्लूइड बनना जिसे हटाने के लिए वीपी शंट नामक सर्जरी करनी पड़े।
  • देखने में दिक्‍कत होना
और पढ़ें ...

References

  1. UCLA health [Internet]. University of California. Oakland. California. US; Hemispherectomy
  2. National Health Service [internet]. UK; Epilepsy
  3. Columbia University Departmennt of Neurology [Internet]. US; Epilepsy and Seizures
  4. Cleveland Clinic. [Internet]. Cleveland. Ohio. US; Hemispherectomy
  5. Texas Children's Hospital Epilepsy Center [Internet]. US; Hemispherectomy
  6. UPMC Children's Hospital of Pittsburgh [Internet]. Pennsylvania. US; Positron Emission Tomography (PET) Scans
  7. Epilepsy Society [internet]. Buckinghamshire, UK; Neuropsychology - testing the brain
  8. Schachter SC. Vagus nerve stimulation therapy summary: five years after FDA approval. Neurology. 2002;59(6 Suppl 4):S15-S20. PMID: 12270963.
  9. Engel J Jr, Wiebe S, French J, et al. Practice parameter: temporal lobe and localized neocortical resections for epilepsy. Epilepsia. 2003;44(6):741-751. PMID: 12790886.
  10. Johns Hopkins Medicine [Internet]. The Johns Hopkins University, The Johns Hopkins Hospital, and Johns Hopkins Health System; Wada Testing
  11. Sperling MR, O'Connor MJ, Saykin AJ, Plummer C. Temporal lobectomy for refractory epilepsy. JAMA. 1996;276(6):470-475. PMID: 8691555.
  12. Yasuda CL, Tedeschi H, Oliveira EL, et al. Comparison of short-term outcome between surgical and clinical treatment in temporal lobe epilepsy: a prospective study. Seizure. 2006;15(1):35-40. PMID: 16337144.
  13. Wiebe S, Blume WT, Girvin JP, Eliasziw M; Effectiveness and Efficiency of Surgery for Temporal Lobe Epilepsy Study Group. A randomized, controlled trial of surgery for temporal-lobe epilepsy. N Engl J Med. 2001;345(5):311-318. PMID: 11484687.
  14. Dupont S, Tanguy ML, Clemenceau S, Adam C, Hazemann P, Baulac M. Long-term prognosis and psychosocial outcomes after surgery for MTLE. Epilepsia. 2006;47(12):2115-2124. PMID: 17201711.
  15. Kim JS, Park EK, Shim KW, Kim DS. Hemispherotomy and Functional Hemispherectomy: Indications and Outcomes. J Epilepsy Res. 2018;8(1):1-5. Published 2018 Jun 30. PMID: 30090755.
  16. Brotis AG, Georgiadis I, Fountas KN. Hemispherectomy: Indications, Surgical Techniques, Complications, and Outcome. Journal of Neurology & Neurophysiology. 2015; 6(4).
ऐप पर पढ़ें