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पीईटी या पेट स्कैन (PET Scan) एक इमेजिंग टेस्ट होता है, जो शरीर में रोगों व अन्य स्थितियों की पहचान करने में डॉक्टर की मदद करता है। पीईटी का मतलब पोजीट्रान एमिशन टोमोग्राफी (Positron Emission Tomography) होता है। इस प्रकार के स्कैन की मदद से यह देखा जाता है कि अंदरूनी ऊतक किस स्थिति में हैं और कैसे काम कर रहे हैं।

कैंसर के हर मरीज को पेट स्कैन करवाने की जरूरत नहीं होती, हो सकता है अन्य प्रकार के टेस्ट व स्कैन इससे ज्यादा उपयुक्त हों। पेट स्कैन में रेडियोएक्टिव केमिकल जिसे रेडियोट्रेसर (Radiotracer) कहा जाता है, उसका इंजेक्शन बाजू की नस में लगाया जाता है। यह केमिकल नसों द्वारा पूरे शरीर में फैल जाता है और उन अंदरूनी अंगों व ऊतकों द्वारा इसको अवशोषित कर लिया जाता है, जिनका अध्ययन करना है। कभी-कभी यह स्कैन किसी अन्य टेस्ट में दिखने से पहले रोग का पता लगा लेता है।

(और पढ़ें - कैंसर का इलाज)

  1. पेट स्कैन (पीईटी) क्या होता है? - What is PET Scan in Hindi?
  2. पेट स्कैन (पीईटी) क्यों किया जाता है? - What is the purpose of PET Scan in Hindi
  3. पेट स्कैन (पीईटी) से पहले - Before PET Scan in Hindi
  4. पेट स्कैन (पीईटी) के दौरान - During PET Scan in Hindi
  5. पेट स्कैन (पीईटी) के बाद - After PET Scan in Hindi
  6. पेट स्कैन (पीईटी) के क्या जोखिम होते हैं? - What are the risks of PET Scan in Hindi
  7. पेट स्कैन (पीईटी) के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of PET Scan mean in Hindi
  8. पेट स्कैन (पीईटी) कब करवाना चाहिए - When to get PET Scan in Hindi

पोजीट्रान एमिशन टोमोग्राफी (Positron Emission Tomography) या पेट स्कैन एक विशेष रेडियोलोजी प्रक्रिया होती है। इसका इस्तेमाल शरीर में कुछ प्रकार की स्थितियों का पता लगाने एवं विभिन्न ऊतकों की जांच करने के लिए किया जाता है। कुछ समस्याओं के उपचार की स्थिति जानने के लिए भी पेट स्कैन का उपयोग किया जाता है। पेट स्कैन सामान्य रूप से न्यूरोलॉजी, ऑन्कोलॉजी और कार्डियोलॉजी के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अन्य क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल करने के लिए अभी इस पर अध्ययन किया जा रहा है। 

इस टेस्ट के दौरान मरीज को रेडियोएक्टिव पदार्थ की एक छोटी मात्रा इंजेक्शन द्वारा दी जाती है। शरीर के अंदरूनी अंग और ऊतक इस पदार्थ को उठा लेते हैं, जो क्षेत्र अधिक उर्जा का उपयोग करते हैं, वे इसे ज्यादा अवशोषित कर लेते हैं। कैंसर कोशिकाएं बहुत अधिक मात्रा में रेडिएक्टिव पदार्थ अवशोषित करती हैं, क्योंकि वे सामान्य कोशिकाओं के मुकाबले अधिक उर्जा का इस्तेमाल करती हैं। उसके बाद स्कैन की मदद से देखा जाता है कि शरीर में कहां पर कितना रेडिएक्टिव पदार्थ मौजूद है। 

(और पढ़ें - ब्रेस्ट कैंसर

पेट स्कैन क्यों किया जाता है?

पेट स्कैन का उपयोग कई प्रक्रियाओं में किया जाता है, जिनमें निम्नलिखित शमिल हैं -

  • मस्तिष्क के रक्त प्रवाह और चयापचय गतिविधि का अध्ययन करने के लिए पेट स्कैन किया जाता है। पीईटी स्कैन डॉक्टर को तंत्रिका तंत्र संबंधी समस्याएं ढूंढने में भी मदद कर सकता है, जैसे पार्किंसंस रोगस्ट्रोक और स्किज़ोफ्रेनिया (Schizophrenia)।
  • मस्तिष्क के बदलावों की पहचान करना, जो मिर्गी (Epilepsy) का कारण बन सकते हैं।
  • कुछ प्रकार के कैंसर का मूल्यांकन करना, खासकर जैसे लिम्फोमा और ब्रेन कैंसरगले का कैंसरसिर और गर्दन का कैंसरलंग कैंसरपौरुष ग्रंथि के कैंसर आदि। अपने शुरुआती चरणों में अन्य टेस्टों, जैसे सीटी स्कैन और एमआरआई के मुकाबले पीईट स्कैन में अधिक स्पष्ट दिखाई देता है।
  • पेट स्कैन का इस्तेमाल यह देखने के लिए भी किया जाता है कि कैंसर कितना गंभीर है और क्या यह शरीर के अन्य भागों में भी फैल गया है (Metastasized)। कैंसर का मूल्यांकन करने के लिए अक्सर सीटी और पीईटी दोनों स्कैन करना आवश्यक होता है।
  • पेट स्कैन डॉक्टर को कैंसर के लिए सबसे बेहतर इलाज का चयन करने में मदद करता है और यह भी बताता है कि उपचार कितने अच्छे से काम कर रहा है। पीईटी स्कैन यह देखने के लिए भी किया जा सकता है कि क्या ट्यूमर को निकालने के लिए सर्जरी की जा सकती है या नहीं।
  • जब लक्षण स्पष्ट ना हों तो अल्जाइमर रोग का पता करने के लिए या अगर किसी को कम उम्र में (65 से कम उम्र) डिमेंशिया के लक्षण महसूस होने लगें तो ऐसी स्थिति में पेट टेस्ट की मदद ली जाती है।
  • ह्रदय में खून के कम बहाव का पता करने, क्योंकि यह कोरोनरी आर्टरी डिजीज हो सकता है।
  • दिल के क्षतिग्रस्त ऊतकों को ढूंढने के लिए, खासकर दिल का दौरा पड़ने के बाद।
  • हृदय रोगों से ग्रसित लोगों के लिए बेहतर उपचार ढूंढना में मदद करने के लिए, जैसे कोरोनरी धमनी बाईपास सर्जरी आदि में। 

पेट स्कैन से पहले क्या किया जाता है?

पीईट स्कैन होने से पहले अपने डॉक्टर को निम्न चीजों के बारे में बताएं:

  • अगर आपको डायबिटीज है और आप डायबिटीज को कंट्रोल करने की दवाएं लेते हैं, तो आपको टेस्ट करवाने से पहले डायबिटीज कंट्रोल करने वाली दवा की खुराक कम करनी पड़ सकती है। इस बारे में डॉक्टर से बात करें।
  • अगर आप किसी प्रकार की दवा, सप्लिमेंट या हर्बल दवा ले रहे हैं, तो आपको ये दवाएं बंद करनी पड़ सकती हैं, क्योंकि कुछ दवाएं पेट टेस्ट के रिजल्ट को प्रभावित कर सकती हैं।
  • अगर आप गर्भवती हैं या हो सकती हैं, तो इस बारे में डॉक्टर को बताएं। (और पढ़ें - गर्भावस्था के लक्षण)
  • अगर आपको किसी प्रकार की एलर्जिक प्रतिक्रिया है। 
  • अगर आप बच्चे को स्तनपान करवाती हैं, तो इस टेस्ट में मरीज को इंजेक्शन में दिए जाने वाले रेडिएक्टिव केमिकल दूध में मिल सकता है। अगर मां का पीईटी स्कैन हुआ है, तो स्कैन के 2 दिन तक उसे बच्चे को स्तनपान नहीं करवाना चाहिए।
  • अगर आपको बंद जगहों में डर लगता है (Fear of enclosed spaces) तो इस बारे में डॉक्टर को बताएं।

पेट स्कैन टेस्ट होने से 24 घंटे पहले तक धूम्रपान ना करें और ना ही शराब या कैफीन का सेवन करें।

टेस्ट होने से 6 घंटे पहले तक कुछ भी खाना-पीना नहीं चहिए।

पेट स्कैन के दौरान क्या किया जाता है?

  • पीईटी स्कैन टेस्ट को अस्पताल के न्यूक्लियर मेडिसिन डिपार्टमेंट या एक स्पेशल पीईटी सेंटर (PET Center) में किया जाता है।
  • इस टेस्ट के दौरान मरीज को एक टेबल पर लेटाया जाता है, जो एक बड़े स्कैनर, कैमरा और कंप्यूटर से जुड़ी होती है।
  • रेडियोएक्टिव केमिकल (Radioactive Tracer) के इंजेक्शन को आमतौर पर बाजू की नस में लगाया जाता है। इस केमिकल को पूरे शरीर में घूमने के लिए 30 से 60 मिनट तक लग जाते हैं। इस समय के दौरान डॉक्टर मरीज को हिलने व बोलने से मना कर सकते हैं।
  • पेट स्कैनर मशीन मरीज के चारों तरफ घूमता है और तस्वीरें स्कैन करता है। स्कैनर इन तस्वीरों को कंप्यूटर स्क्रीन पर भेजता है, जिससे डॉक्टर उनको देख पाते हैं। स्कैन तस्वीरों की एक सीरीज बनाने के लिए कई स्कैन किए जाते हैं। जब स्कैन हो रहा हो, तो उस समय आराम से लेटे रहना बहुत जरूरी होता है। 

पेट स्कैन के बाद क्या किया जाता है?

पेट स्कैन पूरा होने के बाद स्कैन टेबल से उठते समय मरीज को जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और धीरे-धीरे हिलना चाहिए। क्योंकि प्रक्रिया के दौरान लेटे होने के कारण मरीज को चक्कर या सिर घूमने जैसा महसूस हो सकता है।

टेस्ट के बाद डॉक्टर मरीज को खूब मात्रा में पानी पीने और बार-बार पेशाब करने की सलाह देते हैं। (और पढ़ें - खाली पेट पानी पीने के 9 बड़े फायदे)

जहां पर इंजेक्शन की सुई लगी थी, वहां पर सूजन व लालिमा आदि की जांच की जाती है। अगर प्रक्रिया पूरी होने पर घर आने के बाद आपको सुई वाली जगह पर दर्द, सूजन व लालिमा महसूस हो तो डॉक्टर को इस बारे में बताएं, क्योंकि ये संक्रमण या अन्य रिएक्शन के संकेत हो सकते हैं।

पीईटी टेस्ट किसी भी प्रकार के दर्द का कारण नहीं बनता। 

पेट स्कैन के क्या जोखिम हो सकते हैं?

पेट स्कैन के दौरान इस्तेमाल की गई रेडिएशन किरणों की मात्रा लगभग उतनी ही होती है, जितने रेडिएशन सीटी स्कैन टेस्ट में इस्तेमाल की जाती है। इस स्कैन में थोड़े समय तक रहने वाले ट्रेसर (Short-lived tracers) का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे रेडिएशन शरीर में 2 से 10 घंटे के भीतर चली जाती है। अगर आप गर्भवती हैं या बच्चे को स्तनपान करवाती है, तो टेस्ट से पहले डॉक्टर को इस बारे में बता दें। जो शिशु गर्भ में विकसित हो रहे हैं, वे रेडिएशन के प्रति और अधिक संवेदनशील होते हैं, क्योंकि उनके अंग विकसित हो रहे होते हैं।

(और पढ़ें - स्तनपान से जुड़ी समस्याएं और उनके समाधान)

बहुत ही कम मामलो में रेडिएशन ट्रेसर केमिकल से किसी व्यक्ति को एलर्जी आदि की समस्या हो पाती है। कुछ लोगों को इंजेक्शन की जगह पर दर्द, सूजन व लालिमा आदि हो सकती है।

पेट स्कैन के रिजल्ट का क्या मतलब होता है?

शरीर में जहां रेडियोएक्टिव ट्रेसर एकत्रित हो जाता है, वहां पर पेट स्कैन की तस्वीरों में सफेद धब्बे दिखाई देते हैं। ये धब्बे केमिकल गतिविधि के उच्च स्तर को बताते हैं और ऊतकों और अंगों के कामकाज के बारे में जानकारी देते हैं। एक डॉक्टर जो स्कैन तस्वीरों की जांच करने के लिए प्रशिक्षित होता है (Radiologist), वह आपके डॉक्टर को जांच के परिणाम की रिपोर्ट करता है।

सामान्य रिजल्ट –

सामान्य रिजल्ट का मतलब होता है कि अंदरूनी अंगों और ऊतकों में आकार, आकृति और स्थिति से संबंधित कोई समस्या नहीं है और शरीर के किसी भी भाग में रेडियोएक्टिव ट्रेसर असाधारण तरीके से इकट्ठा नहीं हुआ है।

असामान्य रिजल्ट –

असामान्य रिजल्ट इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर के किस भाग पर अध्ययन किया गया है। असामान्य रिजल्ट के कई कारण हो सकते हैं, जैसे:

  • अंदरूनी अंगों के आकार, आकृति और स्थिति में बदलाव होना।
  • कैंसर
  • संक्रमण
  • अंदरूनी अंगों के कार्यों से संबंधित समस्या। 

पेट स्कैन कब करवाना चाहिए?

पेट स्कैन करवाने के कुछ मुख्य कारणों में निम्नलिखित शामिल हैं, लेकिन ये सीमित नहीं हैं:

  • कैंसर के मामले में यह पता लगाने के लिए की कहीं कैंसर शरीर के आस पास के भागों में तो नहीं फैल गया।
  • कैंसर के उपचार की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने के लिए।
  • मस्तिष्क के ऊतकों में रक्त के थक्के की उपस्थिति और ऑक्सीजन प्रवाह की जांच करने के लिए।
  • अगर सीटी या एमआरआई स्कैन में कोई संदिग्ध जगह मिल जाती है और उस पर आगे जांच करने की आवश्यकता होती है।
  • कैंसर उपचार के बाद, यह देखने के लिए की कैंसर कहीं फिर से तो नहीं हो रहा।
  • जब न्यूरोलॉजी (तंत्रिका-विज्ञान) लक्षणों के संकेत मौजूद हों।

(और पढ़ें - प्रोस्टेट कैंसर)

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