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मस्तिष्क की कोशिकाएं विद्युत आवेगों (Electrical impulses) के माध्यम से एक दूसरे के साथ संपर्क करती हैं। ईईजी प्रक्रिया का इस्तेमाल इन गतिविधियों से जुड़ी समस्याओं का पता लगाने के लिए किया जाता है। मस्तिष्क कोशिकाओं के ये सिग्नल मशीन द्वारा रिकॉर्ड किए जाते हैं और बाद में डॉक्टर इनको देखते हैं कि कहीं ये असाधारण तो नहीं।

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ईईजी द्वारा मस्तिष्क की तरंगों के पैटर्न पर नजर रखी जाती है और उनको रिकॉर्ड किया जाता है। धातु से बनी कुछ छोटी सपाट डिस्क (Disc) होती हैं जो एक तार से जुड़ी होती हैं, इन्हें इलेक्ट्रोड्स (Electrodes) कहा जाता है, जिसे खोपड़ी पर चिपकाया जाता है। इलेक्ट्रोड्स मस्तिष्क में विद्युत आवेगों का विश्लेषण करता है और उनको सिग्नल के रूप में कंप्यूटर तक भेजता, कंप्यूटर द्वारा इन सिग्नल्स को रिकॉर्ड किया जाता है।

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  1. ईईजी टेस्ट क्या होता है? - What is EEG Test in Hindi?
  2. ईईजी टेस्ट क्यों किया जाता है - What is the purpose of EEG Test in Hindi
  3. ईईजी टेस्ट से पहले - Before EEG Test in Hindi
  4. ईईजी टेस्ट के दौरान - During EEG Test in Hindi
  5. ईईजी टेस्ट के बाद - After EEG Test in Hindi
  6. ईईजी टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं - What are the risks of EEG Test in Hindi
  7. ईईजी टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of EEG Test mean in Hindi
  8. ईईजी टेस्ट कब करवाना चाहिए - When to get tested with EEG Test in Hindi

ईईजी टेस्ट क्या होता है?

ईईजी या इलेक्ट्रोइन्सेफेलोग्राम (Electroencephalogram) टेस्ट के तहत मस्तिष्क गतिविधियों की एक रिकॉर्डिंग होती है। ईईजी मस्तिष्क की तरंगों के पैटर्न पर नजर रखती है तथा उनको रिकॉर्ड करती है। पतली तारों से जुड़ी धातु की कई छोटी डिस्क (इलेक्ट्रोड्स) को खोपड़ी पर लगाया जाता है, जो विद्युत आवेगों की गतिविधियों को सिग्नल के रूप में कंप्यूटर पर भेजती हैं। मस्तिष्क में सामान्य विद्युत गतिविधि पहचानने योग्य पैटर्न बनाती है। ईईजी द्वारा की गई रिकॉर्डिंग में मस्तिष्क के विद्युत आवेगों की लाईनें घाटियों और चोटियों जैसी दिखाई पड़ती हैं। इन लाईनों की मदद से डॉक्टर जल्द ही पता लगा लेते हैं कि मस्तिष्क पैटर्न सामान्य है या असामान्य। पैटर्न में किसी भी प्रकार की अनियमितता दौरे और अन्य मस्तिष्क संबंधी विकारों का संकेत दे सकती है।

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ईईजी टेस्ट किसलिए किया जाता है?

  • ईईजी टेस्ट का उपयोग कुछ प्रकार के मस्तिष्क विकारों का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है। जब मिर्गी होती है, तो दौरा पड़ने की गतिविधियों से ईईजी की लाईनों में तेजी से उतार-चढ़ाव होने लगते हैं।
  • जिन लोगों के मस्तिष्क में घाव आदि होता है, जिसके परिणास्वरुप मस्तिष्क में ट्यूमर या स्ट्रोक जैसी समस्या भी हो सकती है, उन लोगों की ईईजी वेव कम होती हैं। ईईजी की लाईनों के उतार-चढ़ाव में कमी, मस्तिष्क के घाव, आकार और गंभीरता पर निर्भर करती हैं। (और पढ़ें - मस्तिष्क संक्रमण का इलाज)
  • इस टेस्ट का इस्तेमाल अन्य विकारों का परीक्षण करने के लिए भी किया जाता है, जो मस्तिष्क गतिविधियों पर प्रभाव डालते हैं, जैसे अल्जाइमर रोग, कुछ प्रकार के मनोविकार (Psychoses), और नींद विकार जिसको नार्कोलेप्सी (Narcolepsy) कहा जाता है। (और पढ़ें - अल्जाइमर रोग के लिए आहार)
  • ईईजी का इस्तेमाल मस्तिष्क की संपूर्ण विद्युत गतिविधियों को निर्धारित करने के लिए भी किया जा सकता है, (उदाहरण के लिए मस्तिष्क में आघात, ड्रग इन्टॉक्सिकेशन और कोमा आदि में पड़े मरीजों के मस्तिष्क में चोट आदि का मूल्यांकन करने के लिए)
  • ईईजी का इस्तेमाल किसी सर्जरी प्रक्रिया के दौरान मस्तिष्क में खून के बहाव पर नजर रखने के लिए भी किया जा सकता है। (और पढ़ें - सर्जरी से पहले की तैयारी)
  • लगातार कोमा में पड़े किसी मरीज के मस्तिष्क की मृत्यु की पुष्टी करने के लिए भी ईईजी टेस्ट किया जाता है।
  • किसी मेडिकल प्रक्रिया के दौरान मरीज को मेडिकली कोमा में लाने के लिए अनेस्थेसिया (बेहोश करने की दवा) के स्तर का सही चयन करने में भी ईईजी (A continuous EEG) मदद करता है।

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ईईजी टेस्ट से पहले क्या किया जाता है?

  • अगर आप किसी भी प्रकार की दवा, हर्बल उत्पाद या किसी भी सप्लीमेंट्स का सेवन कर रहे हैं, तो टेस्ट करवाने से पहले ही डॉक्टर को इनके बारे में बता दें। (और पढ़ें - दवाओं की जानकारी)
  • टेस्ट होने से एक रात पहले ही अपने सिर को अच्छे से धो लें। किसी भी प्रकार के कंडीशनर या स्टाइलिंग उत्पादों का इस्तेमाल अपने बालों में ना करें। क्योंकि बालों के उत्पाद इलेक्ट्रोड्स को सिर पर चिपके रहने में कठिनाई पैदा कर सकते हैं, ये इलेक्ट्रोड्स मस्तिष्क से विद्युत आवेगों को रिकॉर्ड करते हैं। (और पढ़ें - पेट स्कैन क्या है)
  • जिस दिन टेस्ट किया जाना है, उस दिन कैफीन (चाय-कॉफी आदि) का सेवन ना करें, क्योंकि कैफीन के उत्पाद टेस्ट के रिजल्ट को प्रभावित कर सकते हैं। (और पढ़ें - मसाला चाय के फायदे)
  • निर्देश दिए जाने तक अपनी सामान्य दवाएं लेते रहें।
  • यदि आप अपने ईईजी परीक्षण के दौरान सोना चाहते हैं, तो पहले ही इस बारे में डॉक्टर से बात कर लें। क्योंकि आपके डॉक्टर आपको उस रात कम सोने या पूरी रात जागने के लिए कह सकते हैं।

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ईईजी टेस्ट के दौरान क्या किया जाता है?

ईईजी टेस्ट प्रक्रिया के दौरान आपको किसी प्रकार की दिक्कत महसूस नहीं होती या बहुत ही कम परेशानी महसूस हो पाती है। खोपड़ी पर लगाए गए इलेक्ट्रोड्स किसी प्रकार की संवेदना को संचारित नहीं करते, ये सिर्फ मस्तिष्क तरंगों को रिकॉर्ड करते हैं।

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टेस्ट के दौरान:

  • एक तकनिशियन आपके सिर का माप लेगा और फिर एक स्पेशल पेन्सिल से आपके सिर पर कुछ निशान बनाएगा, जहां पर इलेक्ट्रोड्स को चिपकाए जाते हैं। रिकॉर्डिंग की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए इन निशानों की जगह को एक क्रीम द्वारा साफ किया जा सकता है। (और पढ़ें - बायोप्सी जांच क्या है)
  • एक विशेष चिपकाने वाले पदार्थ का इस्तेमाल करते हुऐ तकनिशियन इलेक्ट्रोड्स को खोपड़ी पर लगाते हैं। कई बार इसकी बजाए एक इलास्टिक की टोपी भी आपको पहनाई जा सकती है, जिसमें इलेक्ट्रोड्स फिट किए होते हैं । ये इलेक्ट्रोड्स तार के द्वारा एक उपकरण से जुड़े होते हैं, यह उपकरण मस्तिष्क की तरंगों का विश्लेषण (Amplifies) करता है और उनको कंप्यूटर में रिकॉर्ड करता है। (और पढ़ें - लिवर फंक्शन टेस्ट)
  • इलेक्ट्रोड्स चिपकने के बाद ईईजी टेस्ट की प्रक्रिया पूरी होने में लगभग 60 मिनट का समय लगता है। अगर आप टेस्ट के दौरान सोना चाहते हैं, तो टेस्ट की प्रक्रिया पूरी होने में 3 घंटों से भी ज्यादा समय लगता है। (और पढ़ें - आयरन टेस्ट)
  • कई बार, तकनीशियन आपको अपनी आँखें खोलने और बंद करने, कुछ सरल गणना करने, किसी पैराग्राफ को पढ़ने, किसी तस्वीर को देखने, कुछ मिनटों के लिए गहराई से साँस लेने के लिए या चमकती रोशनी (फ्लैश लाइट) को देखने के लिए कह सकते हैं।

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ईईजी टेस्ट के बाद क्या किया जाता है?

  • ईईजी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तकनीशियन इलेक्ट्रोड्स को उतार देते हैं और जिसके साथ उनको चिपकाया गया था उस पदार्थ को धो देते हैं। अगर आपको उस समय सक्रिय रूप से दौरे पड़ रहे हों या आपके डॉक्टर मना करें तो खुद गाड़ी चला कर घर नहीं जाना चाहिए। अगर ईसीजी को रात में किया गया है, तो घर जाने के लिए किसी की मदद लेना बेहतर है। (और पढ़ें - थायराइड फंक्शन टेस्ट)
  • अगर ईईजी प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की सीडेटिव दवा नहीं दी गई हो, तो इस प्रक्रिया के बाद किसी प्रकार का साइड इफेक्ट महसूस नहीं होता और आप अपनी रोजाना की गतिविधियों में जा सकते हैं। (और पढ़ें - एक्स रे क्या है)
  • अगर ईईजी प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की सीडेटिव दवा का इस्तेमाल किया गया है, तो इस दवा का असर उतरने में थोड़ा समय लगता है। (और पढ़ें - ईसीजी टेस्ट)
  • ईईजी टेस्ट के लिए आपने जिन दवाओं का सेवन बंद किया था, आप टेस्ट के बाद उनको फिर से शुरू कर सकते हैं। (और पढ़ें - ब्लड शुगर टेस्ट)
  • मस्तिष्क के विशेषज्ञ डॉक्टर, जिनको न्यूरोलॉजिस्ट (Neurologist) कहा जाता है, आपके मस्तिष्क की रिकॉर्डिंग के पैटर्न की जांच करते हैं।

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ईईजी टेस्ट के क्या जोखिम हो सकते हैं?

ईईजी टेस्ट प्रक्रिया का उपयोग कई सालों से किया जा रहा है, और इसको एक सुरक्षित प्रक्रिया माना जाता है। इस टेस्ट के कारण कोई तकलीफ नहीं होती। ये इलेक्ट्रोड्स सिर्फ गतिविधियों को रिकॉर्ड करते हैं और किसी प्रकार की संवेदना उत्पन्न नहीं करते। इसके अलावा, इसमें बिजली का झटका लगने से जुड़े किसी प्रकार के जोखिम नहीं होते।

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कुछ बहुत ही दुर्लभ मामलों में ईईजी के कारण किसी व्यक्ति को दौरे आदि पड़ सकते हैं (जिसे दौरे संबंधी कोई विकार हो)। कुछ मामलों में चमकती रोशनी देखना या गहराई से सांल लेना आदि से दौरे संबंधी समस्या हो सकती है। अगर आपको परीक्षण के दौरान ही दौरा पड़ता है, तो डॉक्टर तुरंत आपका उपचार कर देते हैं।

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अन्य जोखिम आपकी विशिष्ट मेडिकल स्थिति के आधार पर हो सकते हैं। अगर आप टेस्ट संबंधी किसी भी बात को लेकर चिंतित हैं, तो अपने चिकित्सक से इस बारे में पहले ही चर्चा कर लें।

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ईईजी टेस्ट के रिजल्ट का क्या मतलब होता है?
ईईजी टेस्ट को तकनीशियन द्वारा किया जाता है, उसके बाद जो डॉक्टर ईईजी के विशेषज्ञ होते हैं, वे रिकॉर्डिंग कि व्याख्या करते हैं। रिकॉर्डिंग के रिजल्ट को उस डॉक्टर के पास भेज दिया जाता है, जिसने ईईजी करवाने का आदेश दिया था। डॉक्टर आपको रिजल्ट पर चर्चा करने के लिए किसी विशेष समय बुला सकते हैं।

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ईजीजी मस्तिष्क की कई जगहों से मस्तिष्क तरंगों को रिकॉर्ड करता है। व्याख्या करने के लिए न्यूरोलॉजिस्ट मस्तिष्क के हर क्षेत्र के लिए मॉनिटर पर अलग स्क्रीन बनाता है।

न्यूरोलॉजिस्ट जब परीक्षण करते हैं, तो वे कुछ पैटर्न्स को देखते हैं, जो मस्तिष्क के किसी विशेष क्षेत्र की समस्या को दिखाते हैं।

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  • उदाहरण के लिए कुछ प्रकार के दौरे पड़ने की स्थिति में विशिष्ट प्रकार की मस्तिष्क तरंगों का पैटर्न होता है, जिसकी पहचान करने के लिए न्यूरोलॉजिस्ट प्रशिक्षित होते हैं।
  • इसी तरह सामान्य मस्तिष्क में भी एक विशिष्ट प्रकार की मस्तिष्क तरंगें होते हैं, जिनकी पहचान करने के लिए न्यूरोलॉजिस्ट को प्रशिक्षित किया जाता है।
  • एक न्यूरोलॉजिस्ट को रिकॉर्ड की हुई सभी ट्रेसिंग को देखना चाहिए और यह तय कर लेना चाहिए कि क्या सामान्य स्थिति में है और क्या सामान्य स्थिति में नहीं है। इसके साथ ही यह भी निर्धारित कर लेना चाहिए की असामान्य ट्रेसिंग क्या दर्शा रही है।

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ईईजी का रिजल्ट आसामान्य आने के कारण निम्न हो सकते हैं:

ईईजी की जटिलताएं और अवधि अलग-अलग हो सकती है, इसका रिजल्ट आमतौर पर एक-दो दिन में आ जाता है।

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ईईजी टेस्ट कब करवाना चाहिए?

निम्न परिस्थितियों में डॉक्टर आपको ईईजी टेस्ट करवाने के लिए कह सकते हैं-

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  • अगर डॉक्टरों को लगता है कि आपको मिर्गी की समस्या है।
  • अगर आपको मिर्गी की समस्या है और डॉक्टर उसके बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं।
  • अगर डॉक्टर निश्चित नहीं है कि आपको ये दौरे मिर्गी के ही पड़ रहे हैं या किसी और विकार की समस्या है।
  • अगर आपके लिए मिर्गी की सर्जरी पर विचार किया जा रहा है।
  • अगर वे मिर्गी के लिए बेहतर दवा का पता करना चाहते हैं।

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ईईजी प्रक्रिया की मदद से मस्तिष्क गतिविधियों में बदलाव को निर्धारित किया जाता है, जो मस्तिष्क संबंधी विकारों का परीक्षण करने में काफी मददगार होता है। ईईजी टेस्ट में मस्तिष्क की बुद्धिमता को नहीं मापा जा सकता और ना ही मानसिक रोग का पता लगाया जा सकता। ईईजी निम्न विकारों का परीक्षण करने और उनका इलाज करने में काफी मददगार हो सकता है-

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  • मिर्गी और अन्य दौरे संबंधी विकार,
  • मस्तिष्क में ट्यूमर,
  • मस्तिष्क में चोट लगना,
  • मस्तिष्क संबंधी रोग जिसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे मस्तिष्क विकृति (Encephalopathy),
  • मस्तिष्क में सूजन
  • स्ट्रोक,
  • नींद संबंधी विकार,
  • मनोभ्रंश (Dementia), इत्यादि।

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