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पुरुषों के शरीर का एक अभिन्‍न और महत्‍वपूर्ण अंग है पेनिस। पुरुषों के यौन अंग को पेनिस कहा जाता है। यौन क्रिया के अलावा पुरुषों में पेनिस पेशाब को शरीर से बाहर निकालने का भी काम करती है। पेनिस कैंसर या पेनिस में कोई गंभीर चोट लगने या किसी गंभीर स्थिति के कारण पेनिस का कुछ हिस्‍सा या इसे पूरा निकालना पड़ सकता है। इस प्रक्रिया को पेनेक्‍टोमी कहा जाता है।

पेनिस निकालने की सर्जरी पेनेक्‍टोमी सबसे ज्‍यादा पेनिस कैंसर की स्थिति में की जाती है। अगर कैंसर बहुत ज्‍यादा बढ़ गया है और उसे दवाओं या अन्‍य किसी थेरेपी की मदद से ठीक नहीं किया जा सकता है तो इस स्थिति में पेनिस को निकालना पड़ सकता है। चूंकि, किसी पुरुष के शरीर से पेनिस निकालना बहुत बड़ी बात है इसलिए ये सर्जरी बहुत गंभीर मामलों में ही की जाती है।

पेनाइल यानी पेनिस कैंसर भारत जैसे विकासशील देशों में जननांगों से संबंधित सबसे आम कैंसर है। पेनिस कैंसर के मामले खतना की प्रक्रिया, साफ-सफाई, फिमोसिस (जिसमें लिंग की त्वचा की ऊपरी चमड़ी जिसे फोरस्किन कहा जाता है, अत्यधिक टाइट हो जाती है), सेक्‍स पार्टनरों की संख्‍या, एचपीवी संक्रमण, तंबाकू उत्‍पादों के सेवन और अन्‍य कारणों के आधार पर भिन्‍न हो सकते हैं।

पश्चिमी देशों में पेनिस कैंसर बहुत कम होता है और हर साल लगभग एक हजार पुरुष इस बीमारी का‍ शिकार होते हैं। अमेरिका और यूरोप में सामने आने वाले कैंसर के मामलों में से 0.4 से 0.6 फीसदी पुरुष पेनिस कैंसर से ग्रस्‍त होते हैं। बाकी देशों में यह स्थिति बहुत अलग है और एक महत्‍वपूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या बनी हुई है। एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में सामने आने वाले कुल कैंसर के मामलों में से 20 से 30 फीसदी मरीज पेनिस कैंसर के होते हैं।

भारत के शहरों में एक लाख पुरुषों में से 0.7 से लेकर 2.3 फीसदी मामले पेनिस कैंसर के होते हैं। ग्रामीण इलाकों में पेनिस कैंसर की दर एक लाख में 3 पुरुषों को प्रभावित करती है।

  1. पेनिस निकालने की सर्जरी क्या है? - Penectomy kya hai
  2. पेनिस निकालने की सर्जरी क्यों की जाती है? - Penectomy kab ki jati hai
  3. पेनिस निकालने की सर्जरी से पहले की तैयारी - Penectomy se pehle ki taiyari
  4. पेनिस निकालने की सर्जरी कैसे होती है - Penectomy kaise hoti hai
  5. पेनिस निकालने की सर्जरी के बाद देखभाल और सावधानियां - Penectomy hone ke baad dekhbhal aur savdhaniya
  6. पेनिस निकालने की सर्जरी की जटिलताएं - Penectomy me jatiltaye
  7. पेनिस निकालने की सर्जरी के बाद डॉक्टर के पास कब जाएं - penectomy ke baad doctor ke paas kab jayein

पेनिस यानि पुरुषों के लिंग को पूरी तरह से या इसके कुछ हिस्‍से को निकालने के लिए जो सर्जरी की जाती है उसे पेनेक्‍टोमी कहते हैं। पेनिस को हटाने की प्रक्रिया मानसिक और शारीरिक दोनों ही रूप से बहुत महत्‍वपूर्ण होती है। अगर मरीज की स्थिति ज्‍यादा गंभीर हो तो डॉक्‍टर पूरी पेनिस या इसके कुछ हिस्‍से को हटाने की सलाह दे सकते हैं।

इसके अलावा पेनाइल यानी पेनिस कैंसर होने की स्थिति में प्रमुख तौर पर पेनेक्‍टोमी सर्जरी की जाती है। कुछ दुर्लभ मामलों में पेनिस में कोई गंभीर चोट लगने पर इस सर्जरी की सलाह दी जा सकती है। पेनिस कैंसर एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है जो पेनिस (लिंग -पुरुष गुप्तांग) की त्वचा और ऊतकों को प्रभावित करता है। यह तब होता है जब पेनिस में मौजूद सामान्य रूप से स्वस्थ कोशिकाएं नियंत्रण से बाहर बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर बनता है।

निम्न स्थितियों में पेनेक्टोमी करवाने की जरूरत पड़ सकती है -

  • अगर पेनिस कैंसर काफी बढ़ चुका है या इसके फैलने का खतरा काफी ज्‍यादा है तो इस स्थिति में सर्जरी से कुछ या सारे इंगुइनल लिम्‍फ नोड्स (ग्रोइन के अंदर के लिम्फ नोड्स) को निकाला जा सकता है। अगर कैंसर इंगुइनल लिम्‍फ नोड्स तक फैलने वाला हो, तो उस स्थिति में ही यह कदम उठाया जाता है।
  • अगर कोई पुरुष अपना लिंग बदलकर महिला बनने की इच्‍छा रखता है तो पेनेक्‍टोमी सर्जरी से उसका पेनिस हटा दिया जाता है।
  • पेनिस कैंसर की गंभीरता के आधार पर ही यह तय किया जाता है कि पेनिस का कितना हिस्‍सा हटाया जाना है।
  • फोरनियर गैंग्रीन से ग्रस्‍त पुरुषों की भी पेनेक्‍टोमी सर्जरी करनी पड़ सकती है। फोरनियर गैंग्रीन में अंडकोष की थैली (जिसमें अंडकोष भी शामिल है), पेनिस या पेरिनिअम (अंडकोष की थैली और गुदा के बीच वाला हिस्‍सा) में संक्रमण हो जाता है। अगर ये संक्रमण बहुत ज्‍यादा बढ़ जाए या दवा से ठीक न हो पाए तो इस स्थिति में पेनेक्‍टोमी सर्जरी से पेनिस का कुछ हिस्‍सा या उसे पूरा हटाना पड़ सकता है।

सर्जरी करने से पहले डॉक्‍टर इस बात का पता लगाएंगें कि कैंसर किस स्‍टेज पर है और कितना फैल चुका है। सर्जरी से पहले डॉक्‍टर ब्‍लड टेस्‍ट, चेस्‍ट एक्‍स-रे और ईसीजी (कार्डियोग्राम) करवाते हैं। अगर मरीज एंटीकोगुलेंट थेरेपी (खून के थक्‍के जमने से रोकने के लिए) पर है तो ऑपरेशन से कुछ दिन पहले एंटीकोगुलेंट थेरेपी को रोकने की जरूरत पड़ सकती है।

पेनेक्‍टोमी सर्जरी से पहले मरीज को नस में जनरल या स्‍पाइनल नलिका में एंट्राथेकल एनेस्‍थीसिया दिया जाता है। सर्जरी के लिए मरीज को सीधा लिटाकर उसके यौन अंगों को साफ किया जाता है और ऑपरेशन के बाद यूरोकैथेटर (मूत्राशय में लगाया जाता है जिससे पेशाब बाहर आता है) लगाया जाता है, जिसे सर्जरी के लगभग एक सप्‍ताह के बाद निकाल दिया जाता है।

कैंसर की अवस्था को शुरुआती, माध्यम या अंतिम अवस्था के तौर पर विभाजित किया जा सकता है -

  • शुरुआती स्थिति का मतलब है कि कैंसर ने सिर्फ पेनिस की बाहरी त्वचा को प्रभावित किया है
  • मध्यम अवस्था का मतलब है कि कैंसर पेनिस की त्वचा पर और पेनिस के अंदर जा चुका है ग्रोइन भाग के आसपास की लसिका ग्रंथियों में पाया जा सकता है 
  • अंतिम अवस्थाओं में कैंसर होने का मतलब है कि यह शरीर के अन्य हिस्सों में और लसिका ग्रंथियों में भी फैल चुका है 

कैंसर का ट्रीटमेंट ट्यूमर की जगह, उसके फैलने के प्रकार और ट्यूमर के आकार पर निर्भर करता है।

बायोप्सी और इमेजिंग टेस्ट के अलावा सर्जरी से पहले निम्न चीजें भी की जा सकती हैं -

  • डॉक्टर आपको सर्जरी की प्रक्रिया व सर्जरी के बारे में सभी बातें समझा देंगे 
  • नर्स आपके वजन, रक्तचाप, नब्ज और तापमान की जांच करेंगी 
  • फिजियोथेरपिस्ट आपको सांस लेने का व्यायाम और पैरों की एक्सरसाइज के बारे में  बताएंगे। जिन्हें आपको सर्जरी के बाद करना होगा जिससे आप जल्दी ही ठीक हो पाएंगे
  • सर्जरी से छह घंटे पहले से कुछ न खाएं और सर्जरी में दो घंटे पहले पानी न पिएं 
  • सर्जरी से पहले वाली शाम को या फिर सुबह अस्पताल जाएं
  • जब आप अस्पताल पहुंच जाएं तो नर्स आपको कार्बोहाईड्रेट्स से भरपूर एक पेय देंगी। इससे आपको ऊर्जा मिलेगी और आप जल्दी ही ठीक होंगे 
  • यदि आपने किसी भी तरह का कोई आभूषण पहना है या कॉन्टेक्ट लेंस, नेल पोलिश और मेक अप लगाया है तो आपको उसे हटाने के लिए कहा जाएगा 
  • आपको सर्जरी से पहले रिलैक्स महसूस करवाने के लिए टेबलेट या इंजेक्शन दिया जाएगा

पेनेक्‍टोमी सर्जरी में विभिन्‍न तकनीकों का इस्‍तेमाल किया जा सकता है। टोटल या पार्शियल पेनेक्‍टोमी की जा सकती है या फिर इसमें और भी प्रक्रियाओं को शामिल किया जा सकता है। आइए जानते हैं इनके बारे में।

  • टोटल पेनेक्‍टोमी : इसमें पूरे पेनिस को ही निकाल दिया जाता है। इस मामले में सर्जन पेरिनिअम में पेशाब के लिए एक नया रास्‍ता बनाते हैं।
  • पार्शियल पेनेक्‍टोमी: इस सर्जरी में पेनिस के सिर्फ सिरे को हटाया जाता है।

दोनों ही प्रक्रियाएं जनरल या एंट्राथेकल एनेस्‍थीसिया देने के बाद ही कर सकते हैं। एनेस्‍थीसिया लेने के बाद मरीज बेहोश रहता है या फिर सर्जरी के दौरान प्रभावित हिस्‍से को सुन्‍न कर दिया जाता है जिससे होश में भी मरीज को दर्द महसूस नहीं होता है।

इसके आगे की प्रक्रिया में लिम्‍फ नोड्स, अंडकोष और अंडकोष की थैली को हटाने की जरूरत पड़ सकती है। पेनिस और अंडकोष को हटाने की सर्जरी को इमैकुलेशन कहते हैं, लेकिन ये कैंसर के गंभीर स्‍टेज पर पहुंचने पर ही की जाती है।

कुछ स्थितियों में जैसे कि कैंसर के ऊतकों तक गहराई से पहुंचने पर कुछ लिम्‍फ नोड्स को हटाने की जरूरत पड़ सकती है।

कैंसर सिर्फ एक हिस्‍से में हुआ है या सबसे करीबी लिम्‍फ नोड तक फैल चुका है, ये पता लगाने के लिए डॉक्‍टर कैंसर के करीब रेडिओएक्‍टिव डाई डालते हैं। जब इस डाई में लिम्‍फ नोड दिखते हैं तो उनमें से कैंसर वाली लिम्‍फ नोड की पहचान कर उन्‍हें निकाल लिया जाता है।

अगर कैंसर हो तो ही अन्‍य लिम्‍फ नोड्स को भी निकाला जाता है। यदि कैंसर नहीं पाया गया तो आगे सर्जरी करने की जरूरत नहीं पड़ती है।

ग्रोइन (पेट और जांघ के बीच का हिस्‍सा) में लिम्‍फ नोड्स की जांच के लिए ग्रोइन पर एक चीरा लगाया जाता है, ताकि जांच के लिए लिम्‍फ नोड्स को निकाला जा सके।

पेनिस कैंसर के पहले स्‍टेज पर उपचार के लिए विभिन्‍न विकल्‍प मौजूद हैं। अगर ट्यूमर सिर्फ पेनिस की ऊपरी त्‍वचा पर है तो खतना किया जा सकता है या फिर मोह्ज सर्जरी, बड़ा चीरा लगाना या पार्शियल पेनेक्‍टोमी की जाती है। इसके अलावा रेडिएशन थेरेपी या लेजर एबलेशन (लेजर बीम से ट्यूमर निकालना) भी कर सकते हैं।

सर्जरी के बाद 

  • आपको रिकवरी रूम में शिफ्ट कर दिया जाएगा 
  • जब तक आपकी स्थिति ठीक नहीं हो जाती है, तब तक सामान्य वार्ड में नहीं ले जाया जाएगा 
  • आपको आराम महसूस करवाने के लिए दर्दनिवारक गोलियां दी जाएंगी 
  • पेनिस पर पट्टी की जाएगी और सर्जरी के एक दिन बाद निकाल दी जाएगी 
  • सर्जरी के दौरान लगे टांकें घुलनशील होते हैं और दो से तीन हफ्तों में गायब हो जाते हैं 
  • पार्शियल पेनेक्टोमी के लिए सर्जरी के बाद दो दिन तक मूत्राशय में कैथिटर लगाया जाता है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि मूत्र बिना किसी समस्या के निकल रहा है 
  • टोटल पेनेक्टोमी की स्थिति में कैथिटर सात से दस दिनों में निकाला जाता है। घाव के पास एक ड्रेन लगाई जाती है और अस्पताल से डिस्चार्ज होने से पहले निकाल दी जाती है 
  • आपको जब भी मन हो आप खाना-पीना शुरू कर सकते हैं 
  • सर्जरी के बाद दो से तीन दिन तक अस्पताल में रहना पड़ सकता है

सर्जरी के निम्न बातों का ध्यान रखना होगा -

  • टोटल या पार्शियल पेनेक्‍टोमी सर्जरी के बाद एक या दो दिनों तक अस्‍पताल में रहना पड़ता है।
  • अगर आपकी पार्शियल पेनेक्‍टोमी हुई है तो आप पेनिस के बाकी बचे हुए हिस्‍से से पेशाब कर सकते हैं। टोटल पेनेक्‍टोमी की स्थिति में पेशाब के लिए पेरिनिअम में नया रास्‍ता बनाया जाता है। इसके बाद बैठकर पेशाब करना पड़ता है।
  • खून के थक्‍के जमने, संक्रमण और कब्‍ज को रोकने के लिए दवा दी जाएगी। दर्द को कम करने के लिए भी डॉक्‍टर आपको दवा देंगे। साथ ही जल्‍दी रिकवर करने के लिए डॉक्‍टर आपको ये भी बताएंगे कि आपको किस तरह की शारीरिक गतिविधयों से बचना है।
  • रिकवरी के दौरान दैनिक कार्यों को करने के लिए आपको किसी की जरूरत पड़ सकती है। जो भी आपका ध्‍यान रख रहा है, उसे उन कामों के बारे में बताएं जिन्‍हें करने में आपको दिक्‍कत आ रही हो।
  • डॉक्‍टर द्वारा बताई गई सभी दवाओं का सेवन जरूर करें। इससे दर्द, संक्रमण और कब्‍ज की दिक्‍कत नहीं होगी।
  • एनेस्‍थीसिया के बाद फेफड़ों को भी दुरुस्‍त रखने की जरूरत होती है। डॉक्‍टर आपको फेफड़ों से संबंधित कुछ एक्‍सरसाइज करने की सलाह दे सकते हैं। लिंफेटिक फ्लूइड (लसीका प्रणाली से स्रावित होने वाला तरल) को निकालने के लिए गहरी सांस लेने और रिलैक्‍स करने वाली एक्‍सरसाइज मददगार हो सकती है।

डॉक्टर के पास कब जाएं?

यदि आपको निम्न में से कोई भी लक्षण महसूस होते हैं तो डॉक्टर से संपर्क करें -

  • बुखार और कंपकपी, जो संक्रमण की तरफ संकेत करती है
  • दर्द जो कि बिना दवाओं के नियंत्रित नहीं होता है
  • पेशाब करने में समस्या
  • घाव से खून आना
  • घाव के पास सूजन, लालिमा, रक्तस्त्राव या गंदी बदबू आना

सभी सर्जरी की तरह पेनेक्‍टोमी के भी कुछ जोखिम होते हैं जिनमें से कुछ सर्जरी के दौरान तो कुछ सर्जरी के बाद सामने आते हैं। ये सर्जरी के तुरंत बाद या रिकवरी के दौरान दिख सकते हैं। कुछ जटिलताएं केवल थोड़े समय के लिए ही होती हैं, जबकि कुछ हमेशा के लिए रहती हैं।

सभी सर्जरी की तरह पेनेक्‍टोमी में भी एनेस्‍थीसिया के दुष्‍प्रभाव या बहुत ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होने की दिक्‍कत हो सकती है। इसके अलावा भी पेनेक्‍टोमी के और कई तरह के जोखिम रहते हैं, जैसे कि -

डिस्चार्ज के बाद आपको छह से आठ हफ्ते में डॉक्टर के पास जाना होगा। आपको घाव की जांच करवाने के लिए सर्जरी के दस दिन बाद नर्स के पास जाना पड़ सकता है।

और पढ़ें ...

References

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