हमारे देश में टाइफाइड बुखार को एक मुख्य सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में जाना जाता है। टाइफाइड बुखार का कारण बनने वाले बैक्टीरिया के मल्टीड्रग प्रतिरोधी उपभेदों को मद्देनजर रखते हुऐ, इस विकार को कुछ अन्य महत्वपूर्ण रोगों और मृत्यु दर आदि से जुड़े जाने के लिए जाना जाता है। टाइफाइड एक बैक्टीरियल संक्रमण होता है, जो तेज बुखार, दस्त और उल्टी आदि जैसी समस्याएं पैदा कर देता है। यह घातक हो सकता है। टाइफाइड का कारण बनने वाले बैक्टीरिया को साल्मोनेला टाइफी (Salmonella typhi) के नाम से जाना जाता है। यह बैक्टीरिया किसी संक्रमित व्यक्ति द्वारा पानी या भोजन में मिल जाता है, जिससे ये दूसरे स्वस्थ व्यक्ति में फैल जाता है। यह संक्रमण उन क्षेत्रों में और तेजी से फैलता है, जहां पर साफ-सफाई का कम ध्यान रखा जाता है।

(जानें - टाइफाइड के घरेलू उपाय)

  1. विडाल (टाइफाइड) टेस्ट कब करवाना चाहिए - When to get tested with Widal (Typhoid) Test in Hindi
  2. विडाल (टाइफाइड) टेस्ट क्या होता है? - What is Widal (Typhoid) Test in Hindi?
  3. विडाल (टाइफाइड) टेस्ट क्यों किया जाता है - What is the purpose of Widal (Typhoid) Test in Hindi
  4. विडाल (टाइफाइड) टेस्ट से पहले - Before Widal (Typhoid) Test in Hindi
  5. विडाल (टाइफाइड) टेस्ट के दौरान - During Widal (Typhoid) Test in Hindi
  6. विडाल (टाइफाइड) टेस्ट के बाद - After Widal (Typhoid) Test in Hindi
  7. विडाल (टाइफाइड) टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं - What are the risks of Widal (Typhoid) Test in Hindi
  8. विडाल (टाइफाइड) टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of Widal (Typhoid) Test mean in Hindi

विडाल टेस्ट कब करवाना चाहिए?

विडाल ब्लड टेस्ट करने के लिए नीचे कुछ क्लीनिकल संकेत दिए गए हैं:

विडाल या टाइफाइड टेस्ट क्या होता है?

विडाल टेस्ट एक ऐसा तरीका होता है, जिसकी मदद से आंतों में बुखार का एक संभावित परीक्षण किया जाता है। आंतों में बुखार की समस्या को टाइफाइड बुखार के नाम से भी जाना जाता है।

आपके लक्षणों और पिछली मेडिकल जानकारियों के आधार पर डॉक्टर टाइफाइड बुखार होने का संदेह करते हैं। टाइफाइड बुखार का परीक्षण (निदान) तब होता है, जब मल, पेशाब या खून आदि की जांच में साल्मोनेला बैक्टीरिया पाया जाता है। लेकिन परीक्षण की पुष्टी तब होती है, जब बैक्टीरिया खून या शरीर के अन्य द्रवों या ऊतकों में पाया जाता है।

विडाल टेस्ट साधारण और कम खर्चीला टेस्ट होता है। टाइफाइड बुखार के परीक्षण के लिए यह एक प्राथमिक टेस्ट के रूप में अच्छा टेस्ट होता है, परीक्षण के लिए किए गए अन्य टेस्ट इसके मुकाबले अधिक खर्चीले होते हैं। जैसा कि भारत में टाइफाइड एक आम समस्या बन गई है, वैसे ही विडाल टेस्ट भी एक आम लैब टेस्ट बन गया है, भले ही इससे बेहतर अन्य टेस्ट उपलब्ध हों। 

साल्मोनेला बैक्टीरिया से संक्रमित मरीज शरीर में ऑर्गेनिज्म (Organism) के एंटीजन के खिलाफ एंटीबॉडीज का उत्पादन करने लगते हैं।

विडाल टेस्ट निम्नानुसार काम करता है:

  • टेस्ट करने के लिए व्यक्ति के खून को बैक्टीरियल साइट, जिसे एंटीजन भी कहा जाता है, उसमें मिलाया जाता है।
  • अगर इस घोल में गांठें या गुच्छे बनने लगते हैं, तो उस व्यक्ति के खून में एंटीबॉडीज हैं। जिनकी विशेष रूप से बैक्टीरियम की जगह पर पहचान कर ली जाती है।

साल्मोनेला बैक्टीरिया के संपर्क में आने से प्रतिक्रिया के रूप में सीरम में एंटीबॉडी का उत्पादन होने लगता है और ऑर्जेनिज्म गुच्छों में बदलने लगते हैं। यही विडाल टेस्ट का आधार होता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, ऐसे कई कारक हैं, जो विडाल टेस्ट के रिजल्ट को प्रभावित कर सकते हैं। इस टेस्ट पर बहुत अधिक भरोसा ना करना ही बेहतर माना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन, जब संभव हो तो विडाल टेस्ट की बजाय कल्चर (Cultures) टेस्ट के इस्तेमाल की सलाह देता है।

लेकिन, जब तक कोई दूसरा सरल, सस्ता और विश्वसनीय तरीका उपलब्ध नहीं होता, तब तक शायद विडाल टेस्ट का इस्तेमाल भारत में ऐसे ही जारी रहेगा।

विडाल टेस्ट क्यों किया जाता है?

टाइफाइड बुखार के शुरूआतों चरणों में ही उसका सटीक परीक्षण करना काफी महत्वपूर्ण होता है।

  • टाइफाइड बुखार का पता लगाने के लिए विडाल टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है।
  • उन व्यक्तियों की पहचान करने के लिए जो संभावित रूप से बैक्टीरिया के वाहक (Carriers) हो सकते हैं।
  • इसके अतिरिक्त क्लिनिकल आधारों पर टाइफाइड का परीक्षण करना कठिन हो सकता है, क्योंकि इसमें मौजूद लक्षण विविध प्रकार के हो सकते हैं या अन्य ज्वर-संबंधी बीमारियों से मिलते-झुलते भी हो सकते हैं। यही कारण है कि विडाल टेस्ट को महत्वपूर्ण माना जाता है।

(और पढ़ें - काला ज्वर)

विडाल टेस्ट से पहले क्या किया जाता है?

इस टेस्ट को एक साधारण खून टेस्ट के रूप में किया जाता है, इसलिए इस टेस्ट से पहले कोई विशेष सावधानी बरतने की जरूरत नहीं पड़ती। ब्लड सैंपल को बाजू से लिया जाता है, इसलिए टेस्ट के लिए जाने से पहले आधी बाजू या बाजू आसानी से ऊपर की जा सकने वाली टी-शर्ट या शर्ट पहन लें।

कुछ निश्चित प्रकार की दवाएं होती हैं, जो विडाल टेस्ट के रिजल्ट को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए अगर आप किसी भी प्रकार की दवा या हर्बल उत्पाद आदि का सेवन कर रहे हैं, तो टेस्ट से पहले ही अपने डॉक्टर को इस बारे में बता दें। ऐसा करने से आपके टेस्ट के रिजल्ट और सटीकता से प्राप्त होते हैं और गलत परीक्षण होने की संभावनाएं भी काफी हद तक कम हो जाती हैं।

विडाल टेस्ट के दौरान क्या किया जाता है?

विडाल टेस्ट के लिए सैंपल एकत्रित करने की प्रक्रिया निम्न तरीकों से किया जाता है।

वयस्कों से ब्लड का सैंपल प्राप्त करने की प्रक्रिया:

  • टेस्ट करने के लिए सबसे पहले जहां सुई लगानी होती है उस से 3-4 इंच ऊपर एक इलास्टिक बैंड लपेटा जाता है। (सैंपल खासतौर पर कोहनी के अंदरुनी तरफ की नसों से निकाला जाता है)
  • उसके बाद जहां पर सुई लगानी होती है, उस जगह को एंटीसेप्टिक द्वारा साफ किया जाता है।
  • इसके बाद सुई पर लगी टोपी को हटा दिया जाता है और उसको नस के ऊपर सीधा पकड़ा जाता है। त्वचा को खींचकर टाइट कर लिया जाता है।
  • इसके बाद सुई को आगे की तरफ धकेल दिया जाता है और सुई त्वचा में प्रविष्ट कर जाती है।
  • इसके बाद सुई से जुड़े सीरिंज से पर्याप्त मात्रा में खून का सैंपल निकाल लिया जाता है।
  • सैंपल निकालने के के बाद बाजू से इलास्टिक बैंड को हटा दिया जाता है। सुई के ऊपर हल्के से रुई का एक टुकड़ा रखा जाता है और नीचे से धीरे-धीरे सुई को निकाल लिया जाता है।
  • उसके तुरंत बाद खून के सैंपल को सीरिंज से ब्लड कंटेनर में डाल लिया जाता है और इसे टेस्टिंग के लिए लैब में भेज दिया जाता है।

विडाल ब्लड टेस्ट के बाद क्या किया जाता है?

सैंपल लेने के बाद सुई को निकाल लिया जाता है और उस जगह से खून बहने की रोकथाम करने के लिए रुई का टुकड़ा या बैंडेज लगा दी जाती है। खून निकलने के दौरान हल्की की चुभन या दर्द महसूस होती है। सुई लगने वाली जगह पर नीला या बैंगनी निशान भी पड़ सकता है, जो कुछ दिनों में ठीक हो जाता है।

विडाल टेस्ट के क्या जोखइम होते हैं?

खून का सैंपल निकालने से जुड़े निम्न जोखिम हो सकते हैं:

  • अत्याधिक खून बहना,
  • बेहोश होना या सिर घूमना,
  • हेमाटोमा (त्वचा के अंदर खून जमना),
  • संक्रमण (सुई के छेद में संक्रमण होने के कुछ मामूली जोखिम) इत्यादि।

विडाल टेस्ट के रिजल्ट का क्या मतलब होता है?

विडाल ब्लड टेस्ट का पॉजिटिव रिजल्ट निम्न का संकेत दे सकता है:

  • टाइफाइड के साथ संक्रमण,
  • टाइफाइड के खिलाफ टीकाकरण,
  • आंतों का बुखार या टाइफाइड बुखार, अगर संबंधित लक्षण मौजूद हों। (और पढ़ें - बुखार कम करने के घरेलू उपाय)

अगर किसी व्यक्ति का टीकाकरण किया गया है, तो उसमें टाइफाइड बैक्टीरिया के खिलाफ एंटीबॉडी शामिल होंगे, जिससे विडाल टेस्ट का नकली/ झूठा रिजल्ट प्राप्त हो सकता है। यह टेस्ट वर्तमान संक्रमण और पिछले संक्रमण के बीच अंतर स्पष्ट नहीं कर पाता और साल्मोनेला की विभिन्न प्रजातियों में साथ क्रॉस रिएक्ट भी कर सकता है।

विडाल टेस्ट के झूठे पॉजिटिव रिजल्ट निम्न मामलों में होने के लिए भी जाने जाते हैं:

अकेले टेस्ट के रूप में लैब टेस्ट के रिजल्ट की व्याख्या नहीं की जाती है। उपयुक्त क्लीनिकल ​​निष्कर्षों और अतिरिक्त पूरक परीक्षण/ सूचना आदि इसके साथ जुड़ने के बाद टेस्ट के रिजल्ट की व्याख्या की जाती है। क्लीनिकल सीनारिओ (Clinical scenario) के आधार पर डॉक्टर आपको आपके टेस्ट के रिजल्ट के बारे में समझाएंगे।