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मलेरिया पूरी दुनिया में लाखों लोगों को प्रभावित करता है। मलेरिया के लिए एक बहुत अच्छी तरह से स्थापित उपचार प्रक्रिया है। पर क्योंकि एंटी-मलेरियल दवाओं के प्रति लोगों की प्रतिरोधक क्षमता या रेजिस्टेंस बढ़ गई है, इस कारण से और दूसरे अन्य कारणों से लोग मलेरिया के लिए प्राकृतिक उपचारों पर भरोसा करते रहे हैं। इन घरेलु और हर्बल उपचारों में शक्तिशाली एंटी मलेरियल दवाओं का दुष्प्रभाव कम होता है। तो चलिए हम कुछ ऐसे ही घरेलु उपचारों के बारे में जानते हैं जो मलेरिया के उपचार में बहुत लाभदायक हैं।

(और पढ़ें - मलेरिया का इलाज)

  1. मलेरिया का घरेलु उपाय है अदरक - Malaria ka upay hai ginger in hindi
  2. मलेरिया निवारण के उपाय करें दालचीनी से - Malaria se bache cinnamon se in hindi
  3. मलेरिया से बचने के उपाय हैं खट्टे फलों से - Malaria se bachne ka upay citrus fruits in hindi
  4. मलेरिया का देसी उपाय है सागरगोटा - Malaria bukhar ke upay me kare sagargota ka upyog in hindi
  5. मलेरिया बुखार का घरेलू उपाय है तुलसी - Malaria bukhar ka gharelu upay kare tulsi se in hindi
  6. मलेरिया से बचें संतरे का रस से - Malaria se bachne ka tarika hai orange juice in hindi
  7. मलेरिया बुखार के घरेलू नुस्खे में करें एनिमा का उपयोग - Malaria ka gharelu upay hai enema in hindi
  8. मलेरिया बुखार के उपाय हैं मेथी के बीज - Malaria ka desi nuskha hai fenugreek in hindi
  9. मलेरिया दूर करने के उपाय हैं हर्बल चाय - Malaria bukhar kam karne ka tarika hai herbal tea in hindi
  10. मलेरिया होने पर करे स्वस्थ आहार का सेवन - Malaria hone par karna chahiye swasth aahar ka sewan in hindi

मलेरिया के लिए एक आम और लोकप्रिय उपचार अदरक का उपयोग है। अदरक का काढ़ा मलेरिया के उपचार में लाभदायक होता है जो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है और संक्रमण से बचाने में मदद करता है। अदरक में मौजूद जिंजरोल और हाइड्रोकार्बन शरीर में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गतिविधियों को बढ़ाते हैं। इसलिए यह सबसे प्रभावी प्राकृतिक उपचार माना जाता है। 

(और पढ़ें - अदरक की चाय के फायदे)

दालचीनी मलेरिया से छुटकारा पाने का एक सर्वोत्तम उपाय है। दालचीनी का उपयोग मलेरिया के लक्षणों जैसे बुखार, सिरदर्द और दस्त को सुधारने में मदद करता है। दालचीनी में एक शक्तिशाली जैविक घटक सिनामाल्डिहाइड (cinnamaldehyde) पाया जाता है जिसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण हैं और जो मलेरिया के तेज और दर्दनाक लक्षणों को कम करने में मदद करता है।

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सामान्य तौर पर खट्टे फल मलेरिया के उपचार में मदद करते हैं। लाइम और नींबू हर जगह पर आसानी से मिल जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन और खनिज मलेरिया के बुखार को खत्म करने, संक्रमण को रोकने और उपचार प्रक्रिया को गति प्रदान करने में मदद करते हैं। इसके लिए नींबू की कुछ बूंदों या एक नींबू के रस को एक गिलास पानी में अच्छी तरह मिलाकर पिएं या खट्टे फलों का सेवन करें।

 (और पढ़ें – रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपाय)

सागरगोटा भारत और आसपास के देशों में एक लोकप्रिय हर्बल रेमेडी के रूप में उपयोग किया जाता है क्योंकि इसके बीज में शक्तिशाली सक्रिय तत्व होते हैं जो बुखार को ख़त्म करने और प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। सैकड़ों वर्षों से मलेरिया के उपचार में लोग इसका उपयोग करते आए हैं। 

(और पढ़ें – बुखार में क्या खाना चाहिए)

मलेरिया के लक्षणों और उसकी तीव्रता को कम करने के लिए कई वर्षों से लोग पवित्र तुलसी का उपयोग करते रहे हैं। तुलसी में यूजिनॉल (eugenol) नामक तत्व पाया जाता है जो बैक्टीरिया संक्रमण को समाप्त करने में मदद करती है और मलेरिया जैसी समस्या से छुटकारा दिलाती है। 

(और पढ़ें - बैक्टीरियल संक्रमण का इलाज)

संतरे में विटामिन सी पाया जाता है जो प्रतिरक्षा प्रणाली को बूस्ट करने और मलेरिया के उपचार में मदद करता है। संतरे का रस शरीर को हाइड्रेट रखने और संक्रमण के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद करता है। संतरे में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट भी मलेरिया के प्रभाव को कम करने में मदद करते हैं। (और पढ़ें - एंटीऑक्सीडेंट के फायदे)

मलेरिया आंत को संक्रमित कर सकता है जिसके कारण मलेरिया में लोगों को दस्त होता है। इसलिए आंत्र को साफ रखना महत्वपूर्ण है और परजीवी को विकसित होने से रोकना ज़रूरी है। गर्म पानी यानि एनिमा आंत्र को स्वच्छ और स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है। एनिमा सदियों से चली आ रही एक ऐसी स्वास्थ्य प्रक्रिया है जिसे विशेष कर जटिल रोगों के इलाज के लिए आंत और पेट के अन्दर जमी हुई गंदगी या संक्रमण को बाहर निकालने के लिए किया जाता है। इसमें गुदा मार्ग से एक पानी की पाइप डालकर पानी को पेट की बड़ी आंत तक पहुँचाया जाता है और जितनी देर तक रोगी सहन कर सके, उसके बाद शौच के जरिये इसे बाहर निकाल दिया जाता है। यह मलेरिया से ग्रस्त मरीजों को लगातार दस्त होने से हो रही सूजन और परेशानी का सामना करने में मदद करता है।

(और पढ़ें - दस्त में क्या खाना चाहिए)

रुक-रुक कर बुखार आने के कारण मलेरिया रोगी अक्सर कमजोरी महसूस करते हैं। मेथी का बीज इस कमजोरी से निपटने के लिए सबसे अच्छा प्राकृतिक उपाय है। यह आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाकर और परजीवी से लड़ते हुए मलेरिया के जल्दी उपचार में मदद करता है। इसलिए मलेरिया के रोगियों को मेथी के बीजों के अधिक सेवन की सलाह दी जाती है। 

(और पढ़ें - बुखार से बचने का उपाय)

इमली डालकर बनाई गई हर्बल चाय मलेरिया के लक्षण जैसे बुखार और सिरदर्द को कम करने में मदद करती है। मलेरिया रोगी राहत पाने के लिए नियमित रूप से इस चाय का उपभोग कर सकते हैं। 

(और पढ़ें – डेंगू से बचाव का उपाय)

मलेरिया के जल्दी उपचार में आहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जैसे ही मलेरिया का बुखार कम हो जाए, कुछ दिनों के लिए एक विशेष ताजा फल डाइट के साथ दूध देने की सलाह दी जाती है। इसके कुछ दिनों के बाद मरीज को ताजे फल और कच्ची सब्जियों के साथ संतुलित आहार का पालन करना चाहिए। अधिक तेल या मक्खन का उपयोग किए बिना हल्का आहार खाना चाहिए। ऑइली, मसालेदार और जंक फूड स्थिति को और अधिक खराब कर सकते हैं। मलेरिया के मरीजों को जल्दी राहत पाने के लिए सेबकेलाअंगूर और अमरूद जैसे फलों का सेवन करना चाहिए। 

(और पढ़ें - गर्भावस्था के दौरान क्या क्या खाना चाहिए)

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