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कोई इमारत या कोई और संरचना कई कारणों से ढह सकती है जैसे- उसकी बनावट या संरचना से जुड़ी कमजोरी के कारण, भूकंप, आग, मूसलाधार बारिश, चक्रवात, निर्माण से जुड़ी कोई समस्या और यहां तक ​​कि आतंकवादी हमले के कारण भी। कारण चाहे जो हो, सेहत की दृष्टि से, इस मामले में कुछ चीजों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए अगर ढह गई संरचना के अंदर कुछ लोग फंसे हुए हों: संरचना के अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने के बाद उन्हें आपातकालीन चिकित्सीय देखभाल के साथ ही दीर्घकालिक देखभाल की भी जरूरत होती है क्योंकि इस तरह का घटनाओं का उनकी सेहत पर कई तरह से प्रभाव पड़ता है। 

(और पढ़ें - चोट लगने पर प्राथमिक उपचार, क्या करना चाहिए)

इस आर्टिकल में हम आपको ढह गई इमारत या संरचना के मामले में राहत और चिकित्सा कार्य के स्वास्थ्य पक्ष के बारे में जानकारी दे रहे हैं। इसके अलावा हम आपको ध्वस्त इमारत में लंबे समय तक फंसे रहने का व्यक्ति की दीर्घकालिक सेहत पर कैसा असर होता है और किन जटिलताओं का सामना करना पड़ता है, इस बारे में भी बता रहे हैं।

  1. इमारत के ढहने पर सेहत से जुड़ी क्या-क्या समस्याएं हो सकती हैं?
  2. इमारत ढहने पर इलाज से जुड़े टिप्स
  3. इमारत के गिरने का सेहत पर कैसा असर होता है, जानें के डॉक्टर

शारीरिक चोट, खरोंच, कटने-छिलने, जलने और फ्रैक्चर से लेकर पिसे हुए कंक्रीट, कांच और निर्माण से जुड़ी अन्य धूल-मिट्टी को सांस के जरिए शरीर के अंदर लेना या इस तरह की धूल-मिट्टी का आंखों में जमना- ये सेहत से जुड़ी ऐसी कई समस्याएं हैं जिनका उन सभी लोगों को सामना करना पड़ सकता है जो किसी इमारत के ढह जाने के वक्त मलबे में फंसे हों। जापान में 1995 के हांशिन-आवाजी भूकंप पर एक सम्मेलन पत्र बनाया गया था जिसमें भूकंप के कारण जब संरचनाएं और इमारतें ढह जाती हैं तब मृत्यु के निम्नलिखित कारणों के बारे में बताया गया था:

  • दबाव या घुटन
  • चोट, आघात और हड्डियों का फ्रैक्चर होना
  • जलना (और पढ़ें- जलने पर करें ये घरेलू उपाय)
  • नाक में रुकावट और दबाव के साथ ही ऊपरी वायुमार्ग में बाधा उत्पन्न होना
  • सम्मेलन पत्र में यह भी बताया गया कि छाती या पेट में लगनी वाली चोटें (वक्षीय दबाव) घातक और जानलेवा साबित हो सकती हैं

निश्चित रूप से, यह सिर्फ एक आपदा थी जिसका विस्तार से अध्ययन किया गया था। संरचना को बनाने में किस प्रकार की निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया है और चोट लगने का तरीका क्या है- यह दोनों चीजें किसी संरचना के ढहने या गिरने में व्यापक रूप से भिन्न हो सकती हैं। लोगों को लगने वाली चोटें भी अलग-अलग हो सकती हैं और यह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति को चोट कहां और कैसे लगी है। किसी संरचना के ढहने के बाद उत्पन्न होने वाले स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े व्यापक विवरण यहां दिए गए हैं:

  1. इमारत गिरने पर बुरी तरह से कुचले जाने से जुड़ी चोटें (क्रश इंजूरी)
  2. इमारत ढहने की वजह से क्रश सिंड्रोम
  3. इमारत ढहने के कारण उसमें फंस जाना
  4. इमारत ढहने के कारण दम घुटने और सांस से जुड़ी समस्याएं
  5. इमारत ढहने के कारण जलने से जुड़ी चोट

इमारत गिरने पर बुरी तरह से कुचले जाने से जुड़ी चोटें (क्रश इंजूरी)

शरीर के किसी एक हिस्से पर लगातार उच्च दबाव के कारण जो चोट लगती है उसे क्रश इंजूरी या बुरी तरह से कुचले जाने से जुड़ी चोट कहते हैं। इस तरह की क्रश इंजूरी वाली चोट इमारत के ढहने या सड़क दुर्घटना जैसी स्थितियों में तो कॉमन है लेकिन इसके बाहर नहीं। इस तरह की चोट के अलावा मलबा गिरने से निम्नलिखित समस्याएं भी हो सकती हैं:

  • चोट या मानसिक आघात : किसी कुंद धार वाली चीज से बहुत जोर से लगने वाली चोट या आघात के कारण कई समस्याएं हो सकती हैं जैसे - कंकशन (मस्तिष्क आघात) से लेकर फ्रैक्चर तक।
  • अंग-विच्छेद : इमारत का मलबा और संरचना से जुड़ी बाकी सामग्रियों के गिरने से गंभीर घाव और कट लगने के अलावा अंग-विच्छेदन तक की घटनाएं हो सकती हैं। (यह उन मामलों से अलग है जिसमें रोगी को बचाने के लिए शरीर के किसी अंग को काटकर अलग किया जाता है)
  • अंगों को होने वाला नुकसान : यदि किसी व्यक्ति पर इमारत या संरचना का मलबा या सामग्री गिरती है, तो चोट की जगह, किस तेजी और बल के साथ वह मलबा गिरा है और कितनी देर तक दबाव उस जगह पर बना रहा, इसके आधार पर शरीर के अंगों को लंबे समय तक नुकसान पहुंच सकता है।
  • अन्य समस्याएं : इमारत ढहने की जगह पर, धूल और एरोसोलाइज्ड कण हो सकते हैं जो आंखों और श्वसन पथ को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इमारत ढहने की स्थिति में वैसे तो चोट और खरोंच आम बात है। लेकिन इमारत ढहने पर तंत्रिका या नसों से जुड़ी चोटें भी हो सकती हैं- इन चोटों का लंबे समय तक, यहां तक ​​कि जीवन भर, सेहत पर बुरा असर देखने को मिल सकता है।

इमारत ढहने की वजह से क्रश सिंड्रोम

जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है कि क्रश या बुरी तरह से दबे रहने के कारण लगने वाली चोटें जिसमें शरीर के कंकाल की मांसपेशियों (स्केलेटल मसल्स) मलबे के नीचे बुरी तरह से दब जाती हैं और 15 मिनट से लेकर कई घंटों तक लगातार दबाव में रहती हैं, तो ऐसे में शॉक और किडनी फेलियर हो सकता है- ये दोनों जटिलताएं क्रश सिंड्रोम से जुड़ी हैं। (कंकाल की मांसपेशियां या स्केलेटल मसल्स आमतौर पर टेंडन या स्नायु के माध्यम से हमारी हड्डियों से जुड़ी होती हैं और स्वैच्छिक गतिविधियां जैसे वॉक करना में शामिल होती हैं।)

क्रश सिंड्रोम की समस्या तब होती है जब क्रश से जुड़ी चोटें दैहिक स्तर पर शारीरिक क्षति का कारण बनती हैं। क्रश सिंड्रोम होने पर क्या होता है यहां जानें:

1. स्केलेटल मसल्स जो बहुत ज्यादा दबाव में होती है वह ऑक्सीजन की कमी के कारण टूटने लगती है और मरना शुरू हो जाती हैं। यह तीव्र ट्यूबलर नेक्रोसिस (किडनी की नलिकाओं की परत में मौजूद कोशिकाओं की मृत्यु) और अंततः तीव्र किडनी फेलियर का कारण बन सकता है।

2. मांसपेशी, मायोलिसिस नाम के प्रोटीन में टूटने लगता है और पोटैशियम और फॉस्फोरस जैसे खनिजों के रूप में भी। अब, अगर शरीर को कुचलने वाली (क्रशिंग) चीज को अचानक हटा दिया जाता है, तो यह इन पदार्थों को खून में रिलीज कर सकता है क्योंकि खून और ऑक्सीजन फिर से सर्कुलेट होने लगता है और एक्यूट किडनी फेलियर की समस्या हो सकती है। 

3. अनुसंधान से पता चलता है कि क्रश सिंड्रोम से निम्न में से किसी एक तरीके से व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है:

  • अगर क्रश से जुड़ी चोट सिर पर लगी हो तो व्यक्ति सिर की गंभीर चोट के कारण दम तोड़ सकता है
  • हाइपरकैलेमिया या अतिरिक्त पोटैशियम जो बदले में अनियमित दिल की धड़कन और कार्डिएक अरेस्ट का कारण बन सकता है। क्रोनिक किडनी रोग के लिए हाइपरकैलेमिया भी एक जोखिम कारक है
  • खून की कम मात्रा के कारण हाइपोवोलेमिक शॉक भी हो सकता है
  • रीनल फेलियर
  • कॉग्यूलोपथी या खून से जुड़ी बीमारी जिसमें मरीज रक्तस्राव को कम करने के लिए खून के थक्के नहीं बना पाता है
  • हैमरेज या अत्यधिक आंतरिक या बाहरी रक्तस्राव
  • सेप्सिस या संक्रमण जिसकी वजह से कई अंगों को नुकसान पहुंचता है और मल्टीऑर्गन फेलियर हो सकता है
  • पेट या आसपास के हिस्से में लगी चोट अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है और दम घुटने का कारण बन सकती है। कुछ मामलों में, क्रश सिंड्रोम के कारण तीव्र श्वसन संकट सिंड्रोम (एआरडीएस) हो सकता है, यह एक जानलेवा स्थिति है जिसमें फेफड़ों के छोटी-छोटी वायु थैली (एल्वियोली) में द्रव भरने लगता है जिससे सांस लेने में कठिनाई होने लगती है।

इमारत ढहने के कारण उसमें फंस जाना

यदि भवन निर्माण सामग्री जैसे लोहे की सरिया (संरचनाओं को सुदृढ़ करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली छड़ें) या टूटी हुई खिड़की का शीशा शरीर के किसी हिस्से में घुस जाए तो यह शरीर में जाकर फंस सकता है और इसके कारण कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं:

  • बहुत ज्यादा खून बहना (और पढ़ें- खून बहना कैसे रोकें)
  • यदि भवन निर्माण से जुड़ी ये सामग्रियां फेफड़े या लिवर जैसे आंतरिक अंगों तक पहुंच जाएं तो आपातकालीन सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है

बचावकर्मी और फायर ब्रिगेड जैसे लोग जो इस तरह के हादसों में लोगों को बचाने के लिए प्रशिक्षित होते हैं उन्हें पता होता है कि किसी व्यक्ति को ध्वस्त हो रही इमारत से बाहर कैसे निकालना है। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति के शरीर में लोहे की सरिया घुस जाए तो उस सरिया को वहीं साइट पर नहीं हटाया जाता। इसके बजाय, मरीज को अस्पताल में ले जाया जाता है, जहां आपातकालीन वार्ड के डॉक्टर इस बात का विश्लेषण करते हैं कि लोहे की इस सरिया को व्यक्ति के शरीर से बाहर निकलना है या नहीं।

वैसे तो इमारतें आदर्श रूप से लंबे समय तक टिकने के लिए बनती हैं। आर्किटेक्ट और बिल्डर्स इस तरह से बिल्डिंग को डिजाइन करते हैं कि उसकी संरचनात्मक अखंडता बनी रहे। दुर्भाग्यवश अगर इमारत के एक हिस्से में कमजोरी आ जाए तो इमारत में आगे भी क्षति होने लग जाती है क्योंकि इसके आसपास अन्य संरचनाएं भी गिरने लगती हैं। इमारत ढहने के दौरान बचावकर्मियों और वहां से गुजर रहे लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि इससे उनकी सेहत और जीवन को भी नुकसान हो सकता है।

इमारत ढहने के कारण दम घुटने और सांस से जुड़ी समस्याएं

मलबे या धूल मिट्टी के कारण सांस लेने में बाधा उत्पन्न हो सकती है या दम घुटने लगता है। यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है क्योंकि इसके कारण पीड़ित व्यक्ति को कन्फ्यूजन, चेतना की हानि होने लगती है और कुछ ही मिनटों के भीतर मौत हो सकती है। यदि बचावकर्मी मौत से पहले किसी पीड़ित व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने में सक्षम होते हैं तो, वहां भी दम घुटने के कारण व्यक्ति को लंबे समय तक सेहत से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, जब मस्तिष्क लंबे समय तक ऑक्सीजन से वंचित रहता है, तो ऐसे मामलों में मस्तिष्क हाइपोक्सिया की समस्या हो सकती है जो बदले में मस्तिष्क की क्षति और मोटर फ़ंक्शन के नुकसान जैसी अन्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

कंस्ट्रक्शन वाली निर्माणाधीन जगह पर आपने कई तरह की सामग्रियों को देखा होगा: रेत, बालू, कंक्रीट, कांच, ईंट, पीवीसी पाइप आदि। जब कोई संरचना या इमारत गिरती है फिर चाहे निर्माण के दौरान या बनने के बाद- तो इनमें से कई निर्माण सामग्रियां टूटकर बिखर जाती हैं। इस बात पर निर्भर करते हुए कि क्या वे सामग्रियां टुकड़ों में टूटी हैं या फिर धूल कण के रूप में, इस तरह के हानिकारक पदार्थ सांस के जरिए शरीर के अंदर पहुंच सकते हैं जिसमें धूल कण के अलावा कई तरह के केमिकल भी शामिल होते हैं। ये पदार्थ वायुमार्ग में प्रवेश करके श्वसन प्रणाली को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।

इमारत ढहने के कारण जलने से जुड़ी चोट

जब बिजली के शॉर्ट सर्किट या ज्वलनशील रसायनों के कारण घर या दफ्तर में आग लगती है तो इस दौरान जो इमारत ध्वस्त होती है उसमें वहां मौजूद लोगों के जलने से जुड़ी समस्याएं एक गंभीर चिंता का विषय होती हैं। ऐसे में एनडीआरएफ, पुलिस या फिर वहां से गुजर रहे लोग ही जो इमारत में फंसे लोगों की मदद के लिए आगे आते हैं उन्हें भी अंदर जाने से पहले काफी विचार कर लेना चाहिए। हालांकि बचावकर्मी आमतौर पर ढह चुकी इमारत में प्रवेश करने से पहले बिजली और गैस कनेक्शन को काट देते हैं, बावजूद इसके बिजली की खुली तारें और इमारत के अंदर गैस का रिसाव गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

इमारत या संरचना गिरने की घटना के तुरंत बाद का 24 से लेकर 48 घंटे का समय बेहद अहम होता है। शुरुआती 24 घंटों में जितनी भी मौतें होती हैं उनमें से ज्यादातर सदमे के कारण या वायुमार्ग में उत्पन्न बाधा के कारण और सांस लेने से जुड़ी समस्याओं के कारण होती हैं। इसके बाद जिन लोगों की मौतें होती हैं उसके पीछे अक्सर सेप्सिस और मल्टीऑर्गन फेलियर की समस्या जिम्मेदार होती है। 

किसी संरचना या इमारत के गिरने पर विशिष्ट तरह की चोटों में फ्रैक्चर, आघात, घाव जो किसी व्यक्ति को पंगु बना दे (खुला घाव), सिर की चोट, हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान बेहद कम), शरीर में पानी की कमी और क्रश चोट/क्रश सिंड्रोम शामिल है। साथ ही इस दौरान पीड़ित सांस के जरिए जहरीला धुआं या धूल मिट्टी को भी शरीर के अंदर ले लेते हैं जिससे आगे उन्हें कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं।

उपचार के विकल्प व्यक्ति की चोट की स्थिति के आधार पर व्यापक रूप से भिन्न हो सकते हैं, स्थिति चाहे जो हो (बचावकर्मियों और चिकित्सा कर्मचारियों के लिए गिर चुकी संरचना के अंदर जाना सुरक्षित हो या चिकित्सा सहायता की पेशकश करने से पहले ढह गई संरचना के अंदर मौजूद सभी लोगों को बाहर लाना बेहतर हो) उस वक्त उपलब्ध सहायता के आधार पर किया जाता है। यहां कुछ व्यापक चीजें बतायी जा रही हैं जो बचावकर्मी और चिकित्सक अक्सर संरचना के गिरने के मामले में जीवन बचाने के लिए करते हैं:

  • बचाव के प्रयास के दौरान, उन सभी चीजों को हटाना जरूरी होता है जो अंदर मौजूद लोगों की सांस लेने में बाधा उत्पन्न कर रहा हो। लोगों की सांस लेने की प्रक्रिया को फिर से  बहाल करने के लिए, एनडीआरएफ बचावकर्मी अपने पास नेबुलाइज़र, मैनुअल सक्शन यूनिट, ऑक्सीजन कॉन्सन्टेटर, बैग वॉल्व मास्क और पल्स ऑक्सीमीटर जैसे उपकरण भी रखते हैं।
  • मौजूदा स्थिति को समझना महत्वपूर्ण होता है कि क्या अगर निर्माण सामग्री के मलबे या टुकड़े को हटाने से वहां फंसे व्यक्ति का रक्तस्राव बढ़ सकता है- इन मामलों में, चिकित्सक या प्रशिक्षित बचावकर्मी को आदर्श रूप से रक्तस्राव को रोकने के लिए व्यक्ति के घाव को प्रेशर से दबाना होता है।
  • उन्हें टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने की भी आवश्यकता हो सकती है- और मरीज को सुरक्षित क्षेत्र में स्थानांतरित करने से पहले या बाद में यह किया जा सकता है।
  • मस्तिष्क आघात और सिर की चोटों के लिए तत्काल अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है। एक कठोर नेक कॉलर (सर्वाइकल कॉलर) का उपयोग किया जाता है ताकि सिर और गर्दन को स्थिर रखा जा सके और सिर, गर्दन और रीढ़ को आगे और अधिक नुकसान न हो।
  • कभी-कभी, इमारत की गिरने वाली साइट पर ही व्यक्ति का अंग-विच्छेदन करना जरूरी होता है ताकि व्यक्ति की जान बचाकर उसे वहां से बाहर निकाला जा सके। यह भी एक प्रशिक्षित चिकित्सीय कार्यकर्ता द्वारा ही किया जाना चाहिए।
  • अगर कोई व्यक्ति 15 मिनट से अधिक समय तक मलबे में दबा हुआ है तो इस मामले में अचानक भारी दबाव से छुटकारा पाना भी गलत हो सकता है- चिकित्सा कर्मचारी आदर्श रूप से धीरे-धीरे दबाव को कम करते हैं। यदि उन्हें क्रश सिंड्रोम का  संदेह हो तो मरीज फ्लूइड थेरेपी दी जाती है जिसमें सोडियम बाइकार्ब जैसे लवण होते हैं जिससे मरीज के यूरिन को अल्कलाइन या क्षारीय बनाया जा सकता है।

बचावकर्मियों को हमेशा प्रोटेक्टिव (सुरक्षा संबंधी) गियर पहनना चाहिए, जिसमें हेलमेट, डस्ट मास्क, इयरप्लग, सुरक्षा ग्लास, भारी-भरकम दस्ताने, स्टील के जूते और कवरऑल जैसी चीजें शामिल हैं।

बचाव कार्य और सीमित स्थान में चिकित्सीय देखभाल करने के लिए बहुत सारे प्रशिक्षण और कौशल की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, इमारत के ढहने से जुड़े पीड़ितों में वायुमार्ग प्रबंधन के लिए, रेस्क्यू एक्सपर्ट को "सक्शन, बैग वॉल्व मास्क, ओरल एयरवेज, लैरिंजोस्कोप, नेजोट्रैचियल ट्यूब और एंडोट्रैचियल ट्यूब (सामान्य श्वसन को बहाल करने के लिए) का उपयोग करना चाहिए .... यदि पीड़ित व्यक्ति द्वारा धूल मिट्टी को सांस के जरिए अंदर लेने की चिंता हो तो ऐसे मामले में एल्ब्यूटेरोल या इप्राट्रोपियम जैसी दवाइयां उपयोगी हो सकती हैं। (एल्ब्यूटेरोल वैसी दवाइयां हैं फेफड़ों में मौजूद मध्यम और बड़े वायुमार्ग को खोलती हैं) 

संदिग्ध क्रश सिंड्रोम के मामले में, डॉक्टरों या प्रशिक्षित बचाव कर्मचारियों को तुरंत इंट्राविनिस ड्रिप शुरू करने की आवश्यकता हो सकती है- या फिर जिस जगह ऐसा करना संभव न हो वहां पर व्यक्ति को उसकी आयु के अनुरूप उचित मात्रा में सलाइन देने के लिए इंट्रोओसियस (दवाइयों और तरल पदार्थों को सीधे बोन मैरो तक पहुंचाना) लाइन शुरू की जाती है। इसके लिए आजीवन प्रशिक्षण की जरूरत होती है ताकि जिसके लिए प्रतिबद्धता की जरूरत होती है और इस तरह का काम वास्तव में सराहनीय है।

(यह लेख उन संभावित चोटों का एक संक्षिप्त अवलोकन है- विशेष रूप से घातक चोटों का- जो तब हो सकती हैं जब कोई इमारत या संरचना ढह जाती है।)

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References

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