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अपने व्यस्त जीवन में हममें से ज्यादातर लोग आए दिन सिरदर्द, पेट दर्द, बुखार जैसी छोटी-मोटी समस्याओं का सामना करते रहते हैं और इसके लिए हम हर बार डॉक्टर के पास जाने की बजाए अपने मन से ही दवा लेकर खा लेते हैं और हमें फौरी तौर पर राहत भी मिल जाती है। इसके लिए या तो हम पिछली बार डॉक्टर द्वारा प्रिस्क्राइब की गई दवा का अपने मन से सेवन कर लेते हैं या फिर केमिस्ट से पूछकर कोई दवा लेकर उसका सेवन कर लेते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO का भी यही मानना है कि बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से दवा लेना यानी सेल्फ-मेडिकेशन करना कॉमन प्रैक्टिस बनता जा रहा है लेकिन यह लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा भी है।

शहरों में 37 प्रतिशत लोग करते हैं सेल्फ मेडिकेशन
सर्दी-जुकाम, बुखार, खांसी, सिरदर्द, पेट दर्द, एसिडिटी जैसी समस्याओं को सामान्य समझकर हम बिना डॉक्टर की सलाह के अपने मन से एंटीबायोटिक्स या पेनकिलर का सेवन कर लेते हैं जिससे बाद में समस्याएं होने लग जाती हैं। भारत में भी सेल्फ मेडिकेशन को लेकर कई तरह के अध्ययन सामने चुके हैं। भारत में साल 2015 में किए गए इसी तरह के अध्ययन से पता चला है कि शहरी क्षेत्रों में 37 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 17 प्रतिशत लोग सेल्फ-मेडिकेशन यानी खुद से दवा का सेवन करते हैं।

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खुद से दवा लेने से फायदा कम, नुकसान ज्यादा
ये सोचकर की सेहत से जुड़ी बेहद छोटी या साधारण समस्याओं के लिए डॉक्टर के पास जाने की क्या जरूरत है और खुद से दवा खा लेने से सेहत ठीक हो जाएगी तो इससे आपके स्वास्थ्य को फायदा बल्कि और ज्यादा नुकसान होगा। सिरदर्द या पेट दर्द जैसी समस्याओं के लिए इस्तेमाल होने वाली दर्दनिवारक दवाइयां, खांसी के लिए कफ सिरप, कब्ज के लिए लैक्सेटिव, बुखार के लिए एंटीबायोटिक, एसिडिटी दूर करने के लिए एन्टैसिड, एंटी-एलर्जी की दवाइयां आदि ये कुछ ऐसी दवाएं हैं जो बिना डॉक्टर के प्रिसक्रिप्शन के भी दवा की दुकान पर आसानी से मिल जाती हैं। लेकिन इन दवाओं का अपने मन से इस्तेमाल करने की वजह से न सिर्फ दवा पर हमारी निर्भरता बढ़ जाती है बल्कि एलर्जी और दवा की लत यानी अडिक्शन का भी खतरा रहता है।

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समस्या क्यों हो रही है, इसका कारण जानना जरूरी
दरअसल, सामान्य सी दिखने वाली बीमारी के पीछे ऐसे कई कारण हो सकते हैं जिनकी जानकारी सिर्फ डॉक्टर को ही हो सकती है। उदाहरण के लिए सिरदर्द थकान या तनाव की वजह से भी हो सकता है लेकिन यह ब्रेन से जुड़ी किसी समस्या का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है। पेट में दर्द कुछ गलत खाने पीने की वजह से भी हो सकता है या फिर किडनी की बीमारी या लिवर की किसी समस्या या फिर पथरी की वजह से भी हो सकता है। ऐसे में समस्या की वजह से जाने बिना अपने मन से दवा का सेवन करने से फायदा कम और नुकसान ज्यादा होने की आशंका बनी रहती है। परेशानी छोटी हो या बड़ी उसका कारण जाने बिना दवा का सेवन नहीं करना चाहिए।  

सेल्फ-मेडिकेशन करने के निम्नलिखित संभावित जोखिम हैं :

  • इन दवाइयों के सेवन से तुरंत राहत तो मिल जाती है लेकिन दीर्घकालिक दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं 
  • बीमारी को खुद से गलत तरीके से डायग्नोज करना
  • जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या चिकित्सीय सलाह लेने में देरी होना
  • दवा की असामान्य या गंभीर प्रतिकूल प्रतिक्रिया
  • दवाई का गंभीर परस्पर प्रभाव
  • दवा का गलत तरीके से इस्तेमाल करना
  • दवा की गलत खुराक का सेवन करना
  • गलत दवा के सेवन से कोई गंभीर बीमारी होने का खतरा
  • दवाइयों पर निर्भरता और दुरुपयोग का खतरा आदि

इसके अलावा हो सकता है कि कोई व्यक्ति किसी और बीमारी के लिए पहले से किसी प्रिसक्राइब दवा का सेवन कर रहा हो और ऐसे में सर्दी-खांसी या किसी और सामान्य समस्या के लिए खुद से दवा का सेवन करने पर दोनों दवाइयों के आपस में रिऐक्ट करने का भी खतरा हो सकता है। लिहाजा अगर आप पहले से कोई दवाई खा रहे हों तो डॉक्टर से पूछे बिना किसी और दवा का सेवन बिलकुल न करें।

खुद से दवा लेने से हो सकती हैं ये समस्याएं
बिना डॉक्टरी सलाह के अपने मन से गलत एंटीबायोटिक या बार-बार एंटीबायोटिक का सेवन करने से: 

  • इंफेक्शन जल्दी ठीक न होने की समस्या हो सकती है
  • एंटीबायोटिक प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) की दिक्कत भी विकसित हो जाती है
  • ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है
  • पेट में अल्सर का खतरा हो सकता है
  • आंखों की रोशनी पर भी इसका असर पड़ सकता है
  • कब्ज, पेट खराब होना या जी मिचलाने की दिक्कत हो सकती है
  • सिरदर्द या चक्कर आना
  • नींद न आना, घबराहट महसूस होना और बेचैनी की समस्या हो सकती है

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