अनहेल्दी खानपान, काम का बोझ, तनाव और खराब लाइफस्टाइल के कारण लोग बढ़ते वजन का शिकार हो जाते हैं. शरीर पर अत्यधिक फैट का स्तर बीएमआई (BMI) के जरिए मापा जाता है, अगर यह फैट 30 प्रतिशत से अधिक हो तो इसे मोटापा कहा जाता है. हालांकि मोटापा ना सिर्फ आपकी पर्सनैलिटी को प्रभावित करता है बल्कि कई तरह की गंभीर और जानलेवा बीमारियों का कारण भी बनता है. आज हम इस लेख में बढ़ते वजन के कारण होने वाले नुकसान और बीमारियों पर चर्चा करेंगे.

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  1. वजन बढ़ने के कारण होने वाले नुकसान और बीमारियां
  2. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  3. सारांश
वजन ज्यादा बढ़ने से होने वाले नुकसान और बीमारियां के डॉक्टर

वजन अधिक होने के कारण निम्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं -

सांस लेने में तकलीफ

अधिक मोटापे के कारण लोगों को सांस लेने में काफी तकलीफ होती है. शरीर पर जमा अत्यधिक फैट फेफड़ों को पूरी तरह फैलने से रोकता है, जिसके कारण मांसपेशियां सही तरीके से अपना काम नहीं कर पातीं और सांस लेने में परेशानी होती है. अधिक मोटापे के कारण ना सिर्फ सांस लेने में दिक्कत होती है बल्कि दैनिक कार्यों को करने में भी सांस फूल जाता है. बढ़े हुए वजन के कारण अस्थमा औरक्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के लक्षण भी गंभीर होने लगते हैं.

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फैटी लिवर

मोटापे के कारण होने वाली समस्याओं में से फैटी लिवर भी एक है. जब लिवर पर अतिरिक्त फैट इकट्ठा हो जाता है तो इस स्थिति को फैटी लिवर कहा जाता है. फैटी लिवर न सिर्फ स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित करता है बल्कि इसके कारण लिवर सिरोसिस और कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है. एक्सपर्ट्स भी कहते हैं कि मोटापे से ग्रस्त लोगों को फैटी लिवर होने की अधिक संभावना होती है.

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पीठ में दर्द

मोटापे से ग्रस्त ज्यादातर लोग पीठ में गंभीर दर्द की परेशानी से जूझते हैं. अधिक फैट के कारण कमर पर अधिक दबाव पड़ता है, जिसके कारण पीठ दर्द की समस्या होती है.

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ऑस्टियोअर्थराइटिस

जो लोग मोटापे का शिकार होते हैं, उनमें ऑस्टियोआर्थराइटिस यानी गठिया की बीमारी होने का खतरा भी बढ़ जाता है. शरीर पर जमा अधिक फैट जोड़ों और हड्डियों की रक्षा करने वाले कार्टिलेज पर अधिक दबाव डालते हैं, जिससे जोड़ों में दर्द और अकड़न की समस्या हो सकती है.

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टाइप 2 डायबिटीज

अधिक वजन के कारण टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा भी बढ़ जाता है. एक शोध के मुताबिक मोटापे से ग्रस्त 10 में से करीब 8 लोग टाइप 2 डायबिटीज का शिकार हो जाते हैं. ऐसे में वजन कम करने से टाइप 2 डायबिटीज की लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है.

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हाई ब्लड प्रेशर

मोटापे की समस्या से जूझ रहे लोगों को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी हो सकती है. क्योंकि बढ़े हुए वजन के कारण हृदय खून को तेजी से पंप करता है, जिसके कारण धमनियों पर खून का दबाव बढ़ जाता है और यही हाई बीपी का कारण बनता है.

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दिल से जुड़ी बीमारियां

अत्यधिक फैट हृदय, फेफड़े और शरीर के अन्य अंगों पर दबाव डालता है, जिसके कारण दिल का दौरा पड़ने या स्ट्रोक की संभावना बढ़ जाती है.

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क्या सच में बढ़ता वजन सांस लेने में दिक्कत कर सकता है?

हाँ, कई लोग ये महसूस करते हैं कि वजन बढ़ते ही चलने-फिरने पर या सीढ़ियाँ चढ़ते समय सांस फूलने लगती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर पर जमा ज़्यादा फैट फेफड़ों और छाती की मांसपेशियों पर दबाव डालता है, जिससे फेफड़ों का फैलाव कम हो जाता है। इसी वजह से सांस छोटी-छोटी चलती है और अस्थमा या सीओपीडी के मरीजों में लक्षण और खराब हो जाते हैं।

फैटी लिवर और मोटापे का क्या कनेक्शन है?

फैटी लिवर सीधे-सीधे ज्यादा फैट वाले शरीर से जुड़ा हुआ है। जब लिवर के अंदर और उसके आसपास अतिरिक्त चर्बी जमा होने लगती है, तो यह धीरे-धीरे लिवर को सूजने, फाइब्रोसिस और आगे चलकर सिरोसिस जैसी गंभीर समस्याओं की तरफ ले जाता है। मोटापे वाले लोगों में यह खतरा कई गुना ज्यादा देखा गया है।

क्या वजन बढ़ने से पीठ दर्द भी शुरू हो सकता है?

जी हाँ। ज़्यादा वज़न कमर और रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त लोड डालता है। इससे कमर की मांसपेशियाँ जल्दी थकती हैं और डिस्क पर दबाव बढ़ जाता है। इसी वजह से मोटापे वाले लोगों में क्रॉनिक बैक-पेन काफी कॉमन माना जाता है।

ऑस्टियोआर्थराइटिस (गठिया) में मोटापा कैसे भूमिका निभाता है?

जब शरीर का वजन ज़रूरत से ज्यादा होता है, तो घुटनों, हिप्स और रीढ़ पर ज्यादा प्रेशर पड़ता है। जोड़ों को कुशन देने वाली कार्टिलेज पर लगातार दबाव पड़ता है और वह घिसने लगती है। इससे घुटनों में दर्द, सूजन और चलने-फिरने में जकड़न जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। इसी कारण मोटापे वाले लोगों में गठिया जल्दी और ज्यादा गंभीर रूप में देखा जाता है।

क्या मोटापा टाइप-2 डायबिटीज का बड़ा कारण है?

हाँ, दुनियाभर के आंकड़ों में पाया गया है कि टाइप-2 डायबिटीज के ज्यादातर मरीज पहले ओवरवेट या मोटापे से परेशान थे। शरीर में फैट की मात्रा बढ़ने से इंसुलिन की संवेदनशीलता कम हो जाती है और ब्लड शुगर बढ़ने लगता है। अच्छी बात यह है कि वजन कम करने से डायबिटीज का नियंत्रण काफी बेहतर हो जाता है।

मोटापे के कारण केवल यही बीमारियां नहीं बल्कि जोड़ों का दर्द, गुर्दे संबंधित समस्याएं, नींद ना आने की समस्या और गर्भधारण के दौरान होने वाली समस्याओं से जूझने जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं. मोटापे से निजात पाने और आपको फिट रहने के लिए नियमित एक्सरसाइज करनी चाहिए, साथ ही हेल्दी डाइट का सेवन करना चाहिए.

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