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पेट में दूषित पानी के संचय या जमाव की स्थिति को जलोदर कहते हैं। आमतौर यह उन व्यक्तियों में ज्यादा देखा जाता है, जिनमें लिवर से जुड़ी कोई गंभीर समस्या होती है। सिरोसिस इस स्थिति के सबसे आम कारणों में से एक है। हालांकि, जलोदर लिवर इंफेक्शन के कारण भी हो सकता है जैसे क्रोनिक हेपेटाइटिस बी या हेपेटाइटिस सी, शराब की लत या अत्यधिक मात्रा में अल्कोहल का सेवन करना और फैटी लिवर रोग।

पोर्टल वीन्स (ऐसी नस, जो आंत में सभी अंगों से खून लेकर लिवर को भेजती है) में खून का थक्का बनना भी जलोदर का कारण हो सकता है। ये थक्के खून के प्रवाह को ब्लॉक कर देते हैं, जिसकी वजह से पोर्टल वीन्स और पोर्टल हाइपरटेंशन (हाई बीपी) में दबाव बढ़ जाता है, जिस कारण जलोदर की समस्या हो जाती है।

इसके अतिरिक्त, जब किडनी शरीर से सोडियम (नमक) को साफ करने में असमर्थ हो जाती है, तो ऐसे में जलोदर की समस्या हो सकती है। यह नमक शरीर में जमा होता है और पेट में तरल पदार्थ का निर्माण करता है।

कुछ अन्य स्थितियां भी हैं, जिसकी वजह से जलोदर की समस्या हो सकती है, जैसे किडनी डायलिसिस, अग्न्याशय की सूजन और पेरीकार्डियम को नुकसान पहुंचना। पेरीकार्डियम हृदय के चारों ओर मौजूद एक पतली थैली है, जो हृदय को सुरक्षित रखती है।

जलोदर के सामान्य लक्षणों में पेट में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, संक्रमण, मतली और फेफड़ों में तरल पदार्थ का जमा होना शामिल हैं।

यदि जलोदर​ किसी संक्रमण की वजह से होता है तो इसका इलाज प्रमाणित रूप से एंटीबायोटिक और ऐसी दवाओं के जरिए किया जाता है जो तरल पदार्थ के संचय की स्थिति को नियंत्रित कर सकती है। कई मामलों में सर्जरी की भी आवश्यकता हो सकती है।

जलोदर के उपचार और इससे जुड़े लक्षणों के लिए कई होम्योपैथिक उपचार मौजूद हैं। इनमें आर्सेनिकम एल्बम, एपोसिनम कैनाबिनम, एपिस मेलिफिका, डिजिटलिस परप्यूरिया, चिना ऑफिसिनैलिस, लाइकोपोडियम क्लैवैटम, हेलिबोरस नाइगर, सेनेको ऑरियस, प्रूनस स्पिनोसा, एडोनिस वर्नालिस और एसिटिकम एसिडम शामिल हैं।

होम्योपैथिक दवाएं रोग के अंतर्निहित कारण और रोग के लक्षणों पर काम करती हैं। यह दवाएं रोगी के नैदानिक (क्लिनिकल) और मेडिकल हिस्ट्री (मरीज व उसके परिवार के सदस्यों में विकारों एवं बीमारियों की जानकारी) के साथ-साथ उनके मानसिक और शारीरिक लक्षणों के आधार पर निर्धारित की जाती हैं। यही वजह है प्रत्येक उपाय प्रत्येक मरीज पर एक जैसा असर नहीं करता है।

  1. जलोदर के लिए होम्योपैथिक दवाएं - Pet me pani bharne ka homeopathic medicine
  2. होम्योपैथी के अनुसार जलोदर के लिए आहार और जीवन शैली में बदलाव - Pet me pani bharne ke homeopathic upchar ke samay aap ki Diet
  3. जलोदर के लिए होम्योपैथिक दवाएं और उपचार कितने प्रभावी हैं - Pet me pani bharne ki homeopathic medicine kitni effective hai
  4. जलोदर के लिए होम्योपैथिक दवा के नुकसान और जोखिम - Pet me pani bharne ki homeopathic medicine ke nuksan
  5. जलोदर के होम्योपैथिक उपचार से संबंधित टिप्स - Pet me pani bharne ki homeopathic treatment se jude tips

आर्सेनिकम एल्बम
सामान्य नाम :
आर्सेनिक एसिड
लक्षण : आर्सेनिकम एलबम मुख्य रूप से संक्रमण, जलन वाला दर्द, कमजोरी जिसकी वजह से चिड़चिड़ा व्यवहार हो जाता है और बेचैनी के उपचार के लिए प्रयोग किया जाता है। यह उपाय निम्नलिखित लक्षणों को भी ठीक करने में प्रभावी है :

ठंडे वातावरण में, आधी रात के बाद, समुद्र के किनारे और ठंडे खाद्य व पेय पदार्थों के सेवन के बाद यह लक्षण बिगड़ जाते हैं। जबकि गर्म पेय का सेवन करने और सिर ऊंचा रखने पर लक्षण बेहतर हो जाते हैं।

एपोसिनम कैनाबिनम
सामान्य नाम :
इंडियन हेंप
लक्षण : यह उपाय एक्यूट एल्कोहोलिज्म (तेजी से और अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन करना), अत्यधिक प्यास और पेट में तरल पदा​र्थ के संचय की स्थिति के ​लिए उपयुक्त है। इस उपाय का उपयोग निम्नलिखित लक्षणों के लिए भी किया जाता है :

  • मतली और उल्टी
  • पेट फूलना
  • सांस फूलना
  • पेट भारी महसूस होना या किसी अन्य तरह की तकलीफ महसूस होना

ठंड के मौसम में व कोल्ड ड्रिंक्स के सेवन के बाद यह लक्षण बिगड़ जाते हैं।

एपिस मेलिफिका
सामान्य नाम :
दि हनी बी
लक्षण : एपिस मेलिफिका सूजन, खराश और दर्द के इलाज के लिए एक प्रभावी उपाय है। इसका उपयोग निम्नलिखित उपचार के लिए भी किया जा सकता है :

यह लक्षण प्रभावित हिस्से को छूने पर और गर्म वातावरण में रहने पर बिगड़ जाते हैं, लेकिन ठंडे पानी में नहाने या खुली हवा में जाने पर इन लक्षणों में सुधार होता है।

डिजिटलिस परप्यूरिया
सामान्य नाम :
फॉक्सग्लव
लक्षण : य​ह उपाय लिवर के बढ़ने और इसके आंतरिक व बाहरी भागों में सूजन की स्थिति में मदद करता है। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों का भी इलाज कर सकता है :
भोजन नली (यह ट्यूब है जो मुंह से पेट तक भोजन पहुंचाता है) में जलन

  • पेट में तेज दर्द
  • लिवर का बढ़ना व साथ में दर्द
  • पेट में कमजोरी
  • सांस लेने में दिक्कत
  • किसी तरह की गतिविधि करने पर बेहोशी महसूस करना

भोजन के बाद और सीधे बैठने पर सभी लक्षण बिगड़ जाते हैं, लेकिन खुली हवा में और खाली पेट होने पर लक्षणों में सुधार होता है।

चिना ऑफिसिनैलिस
सामान्य नाम :
पेरूविअन बार्क
लक्षण : इस उपाय का प्रयोग मुख्य रूप से तब किया जाता है जब शरीर में तरल पदार्थ की कमी के कारण कमजोरी हो जाती है। इसका उपयोग निम्नलिखित उपचार के लिए भी किया जा सकता है :

  • लिवर और प्लीहा का बढ़ना व सूजन
  • पेट फूलना
  • पेट में दर्द
  • पाचन शक्ति कमजोर होना
  • फेफड़ों में चुभन वाला दर्द और दम घुटना

यह सभी लक्षण हल्के से छूने, भोजन करने, झुकने और रात के समय में बिगड़ जाते हैं। लेकिन खुली हवा में इन लक्षणों में सुधार होता है।

लाइकोपोडियम क्लैवैटम
सामान्य नाम :
क्लब मॉस
लक्षण : क्लब मॉस का उपयोग कमजोरी, कुपोषण और क्रोनिक डिजीज (लंबे समय तक प्रभावित करने वाली) के प्रबंधन के लिए किया जाता है। इसके अलावा यह कुछ अन्य लक्षणों में भी मदद कर सकता है :

  • हल्के खाने के बाद भी पेट फूलना
  • लिवर में सूजन
  • पेट पर भूरे धब्बे
  • पेट के निचले हिस्से में दर्द
  • पेट में दबाव और सिकुड़ने जैसी स्थिति
  • सीने में जलन वाला दर्द

यह लक्षण गर्म हवा और गर्म वातावरण में 4 से 8 बजे के बीच में खराब हो जाते हैं। गर्म खाने-पीने और गतिविधि करने से लक्षणों में सुधार होता है।

हेलिबोरस नाइजर
सामान्य नाम :
स्नो-रोज
लक्षण : यह उपाय एडिमा और मांसपेशियों की कमजोरी वाले व्यक्तियों के लिए सबसे उपयुक्त है। इसके अलावा यह निम्नलिखित लक्षणों के प्रबंधन में भी सहायक है :

  • पेट में सूजन और दर्द
  • सांस लेने में तकलीफ
  • पेट में ऐसा महसूस होना जैसे पानी भरा हो

यह लक्षण शाम से सुबह तक खराब हो जाते हैं।

सेनिकियो ऑरियस
सामान्य नाम :
गोल्डन रगॉर्ट
लक्षण : लिवर सिरोसिस वाले व्यक्तियों के लिए यह उपाय सबसे उपयुक्त है। यह निम्नलिखित लक्षणों को कम करने में मदद करता है :

  • खाने के बाद मतली और डकार के साथ में दर्द
  • पेट में दर्द
  • सीने में तेज और अचानक दर्द

प्रूनस स्पिनोसा
सामान्य नाम :
ब्लैक-थ्रोर्न
लक्षण : इसका उपयोग मुख्य रूप से तब किया जाता है जब शरीर के गुहाओं या ऊतकों में तरल पदार्थ की अधिकता हो जाती है। कुछ अन्य लक्षण जिन्हें इस उपाय के साथ प्रबंधित किया जा सकता है वे निम्न हैं :

  • घरघराहट
  • मूत्राशय वाले हिस्से में दर्द और ऐंठन
  • सांस लेने मे तकलीफ

चलते समय यह लक्षण बिगड़ जाते हैं।

एडोनिस वर्नेलिस
सामान्य नाम :
फीजेंट आई
लक्षण : यह दवा जलोदर की समस्या के लिए एक उत्कृष्ट उपाय है। यह निम्नलिखित लक्षणों को प्रबंधित करने में भी मदद कर सकता है :

  • छाती और पेट में भारीपन
  • बार-बार लंबी सांस लेने की जरूरत लगना

एसिटिकम एसिडम
सामान्य नाम :
ग्लेशियल एसिटिक एसिड
लक्षण : एसिटिकम एसिडम का उपयोग शरीर के गुहाओं या ऊतकों में तरल पदार्थ की अधिकता, कमजोरी और सांस लेने में कठिनाई के इलाज के लिए किया जाता है। इस दवा के साथ इलाज किए जा सकने वाले कुछ अन्य लक्षण हैं जैसे :

  • उल्टी
  • आंतों में ब्लीडिंग
  • पेट में सिकुड़न का अहसास
  • डाय​बिटीज के साथ तेज प्यास और कमजोरी
  • खट्टी डकार
  • पतला मल त्याग करना
  • गंभीर एनीमिया के साथ दुर्बलता और कमजोरी
  • ज्यादा मात्रा में पीले रंग की पेशाब होना
  • पेट और छाती में जलन वाला दर्द

होम्योपैथिक दवाइयों को अत्यंत घुलनशील रूप में तैयार किया जाता है, ऐसे में कुछ बाहरी कारकों की वजह से इन दवाइयों का असर प्रभावित हो सकता है। इसलिए, होम्योपैथिक डॉक्टर रोगियों को उनकी दिनचर्या में निम्नलिखित आहार और जीवनशैली में बदलाव शामिल करने की सलाह देते हैं :

क्या करना चाहिए

  • स्वस्थ और पौष्टिक भोजन खाएं।
  • खुली हवा में बाहर सैर के लिए जाएं।

क्या नहीं करना चाहिए

  • कॉफी जैसे तेज गंध वाले पेय पदार्थ का सेवन न करें।
  • औषधीय गुणों वाले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
  • मसालेदार भोजन न करें।
  • जरूरत से ज्यादा चीनी व नमक का सेवन न करें।
  • गर्म वातावरण में न रहें और साफ-सफाई वाली जगह पर रहें।
  • गुस्सा या दुखी रहने जैसी परिस्थितियों से बचें।

होम्योपैथिक दवाएं जलोदर रोगियों में सामान्य से ज्यादा मौजूद तरल को कम करने में मदद करती हैं। इसके अलावा यह दर्द, असहज, सांस लेने में दिक्कत और जलोदर के अंतर्निहित कारण जैसे कि लिवर व अन्य पाचन अंगों की सूजन से भी राहत दिलाने में मदद करता है।

अमेरिका के कैलिफोर्निया में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि होम्योपैथिक उपचार का उपयोग वायरल हेपेटाइटिस (जलोदर के संभावित कारणों में से एक) के इलाज के लिए किया जा सकता है।

अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथी में डॉ. कुशल बनर्जी और कल्याण बनर्जी द्वारा दिए गए एक प्रिजेंटेशन में विभिन्न स्थितियों में होम्योपैथिक उपचार की प्रभावशीलता के बारे में बताया गया है। प्रिजेंटेशन से पता चला कि ब्रायोनिया अल्बा और चिना ऑफिसिनैलिस जलोदर के तेजी से बढ़ने के उपचार में फायदेमंद है।

हालांकि, जलोदर के उपचार में होम्योपैथिक दवाओं के लाभों की पुष्टि करने के लिए अधिक अध्ययन की आवश्यकता है।

होम्योपैथिक दवाओं में जड़ी बूटियां, खनिज या एनिमल प्रोडक्ट होते हैं। इन दवाओं को घुलनशील रूप में तैयार किया जाता है, जिसकी वजह से इनका प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है और यह सभी आयु वर्ग के व्यक्तियों के लिए भी सुरक्षित है। इसके अलावा गर्भवती महिलाएं भी होम्योपैथिक दवाओं का इस्तेमाल कर सकती हैं। हालांकि, भले इन दवाओं का साइड इफेक्ट्स नहीं है, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह लिए होम्योपैथिक दवाओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

जलोदर की समस्या में असामान्य रूप से पेट में तरल पदार्थ बनने लगता है, जिसके कारण दर्द और परेशानी होती है। यह लिवर या किडनी​ डिसीज या दिल से संबंधित स्थितियों के कारण हो सकता है। जलोदर का इलाज प्रमाणित रूप से एंटीबायोटिक्स, दवाओं या सर्जरी से किया जाता है।

होम्योपैथी एक ऐसी चिकित्सा प्रणाली है, जिसमें रोगी को उनके लक्षणों, अंतर्निहित स्थितियों, मेडिकल ​हिस्ट्री, शारीरिक व मानसिक स्थिति के अनुसार दवाइयां दी जाती हैं।

इन उपचारों को प्राकृतिक पदार्थों से बनाया जाता है, जिन्हें उपयोग करने से पहले घुलनशील रूप दिया जाता है। इसी वजह से इनका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। होम्योपैथिक चिकित्सक द्वारा बताई गई निर्धारित दवा, आहार और जीवनशैली में बदलाव करके जलोदर और इससे जुड़े लक्षणों के इलाज में मदद मिल सकती है।

और पढ़ें ...

References

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