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परिचय

काली जीभ होना मुंह संबंधी एक समस्या है, जो हानिकारक नहीं होती है और कुछ ही समय के लिए रहती है। इस स्थिति में जीभ रोएंदार बन जाती है और उसका रंग भी काला पड़ जाता है। यह स्थिति मुंह में किसी बैक्टीरिया या फंगी के संक्रमण के कारण होती है, जिससे जीभ पर छोटे-छोटे रोएं आ जाते हैं व उसका रंग काला पड़ जाता है। 

काली जीभ की स्थिति में शुरुआत में जीभ के पिछले हिस्से का रंग काला पड़ने लगता है और फिर धीरे-धीरे जीभ के अगले हिस्से की तरफ आने लगता है। इस स्थिति में जीभ में से काले रंग के धागे की तरह दिखने वाला एक पदार्थ ऊपर की तरफ निकलने लग जाता है। मुंह में से बदबू आना काली जीभ का सबसे आम लक्षण होता है। काली जीभ होना किसी प्रकार का संक्रमण नहीं होता है और ना ही यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।

जीभ का रंग काला होने के कारण का पता आपके डॉक्टर या डेंटिस्ट के द्वारा लगाया जाता है। इसके कारण का पता लगाने के लिए कोई विशेष टेस्ट करवाने की आवश्यकता नहीं होती है। आमतौर पर इसके लिए मरीज के स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारी लेना और जीभ का परीक्षण करना ही काफी होता है। काली जीभ होने से बचाव रखने के लिए मुंह की विशेष रूप से सफाई रखना बहुत जरूरी होता है। 

काली जीभ का इलाज करने के लिए डॉक्टर मरीज के आहार में कुछ बदलाव करते हैं और धूम्रपान आदि छोड़ने की सलाह देते हैं। इसके अलावा डॉक्टर नरम बालों वाले टूथब्रश का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। इस ब्रश के द्वारा रोजाना हल्के-हल्के से जीभ साफ करनी चाहिए। 

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  1. काली जीभ होना क्या है - What is Black tongue in Hindi
  2. काली जीभ के लक्षण - Black tongue Symptoms in Hindi
  3. काली जीभ के कारण व जोखिम कारक - Black tongue Causes & Risk Factors in Hindi
  4. काली जीभ होने से बचाव - Prevention of Black tongue in Hindi
  5. काली जीभ का परीक्षण - Diagnosis of Black tongue in Hindi
  6. काली जीभ का इलाज - Black tongue Treatment in Hindi
  7. काली जीभ की जटिलताएं - Black tongue Complications in Hindi
  8. जीभ पर जमी काली परत को मिनटों में साफ कर देंगे ये टिप्स
  9. काली जीभ के डॉक्टर

काली जीभ होना क्या है - What is Black tongue in Hindi

जीभ काली पड़ना क्या है?

जीभ काली होना एक ऐसी स्थिति है, जिसमें जीभ का रंग धीरे-धीरे काला पड़ने लग जाता है। जीभ का काला रंग मुंह में बहुत अधिक बैक्टीरिया या यीस्ट आदि होने के परिणामस्वरूप होता है। इस स्थिति में जीभ में पीले या ब्राउन रंग के धब्बे भी देखे जा सकते हैं। यह एक ऐसी स्थिति है, जो हानिकारक नहीं होती है और बिना इलाज की मदद के कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाती है। 

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काली जीभ के लक्षण - Black tongue Symptoms in Hindi

जीभ काली होने के क्या लक्षण हैं?

जीभ काली होने के साथ-साथ मुंह में बदबू हो जाती है, जो इसका सबसे आम लक्षण होता है। इसके अलावा जीभ का रंग काला पड़ जाने पर मुंह का स्वाद भी बिगड़ जाता है और मुंह में धातु जैसा स्वाद रहता है। कुछ लोगो में जीभ काली होने पर उनको ऐसा महसूस होने लगता है, जैसे उनकी उनके गले में कुछ फंस गया है।

(और पढ़ें - मुंह का स्वाद खराब होना)

जीभ काली होने पर निम्नलिखित लक्षण भी देखे जा सकते हैं, जैसे: 

  • जीभ का रंग बिगड़ जाना या काला रंग हो जाना।
  • ऐसा दिखाई पड़ना जैसे जीभ पर रोएं या बाल आ गए हैं।
  • स्वाद कलिकाओं (Taste buds) में बदलाव आना। 

जीभ का रंग काला पड़ने पर मुंह का सामान्य स्वाद बदल जाता है और धातु के जैसा स्वाद आने लगता है। इस स्थिति में सांस छोड़ने के दौरान मुंह से अप्रिय बदबू आती है। इसके अलावा जीभ का रंग काला पड़ जाने पर मरीज को गले में कुछ अटकने जैसा भी महसूस होने लगता है। जीभ पर पाए जाने वाले छोटे-छोटे दाने जिन्हे पैपेली (Papillae) कहा जाता है, उनका आकार अधिक बढ़ जाने के कारण गुदगुदी भी होने लग जाती है। 

डॉक्टर को कब दिखाएं?

जीभ का रंग काला पड़ जाने से किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं होती है और यह स्थिति कुछ ही समय के लिए होती है। जीवनशैली में कुछ बदलाव लाकर आप इस स्थिति में जल्दी ही सुधार कर सकते हैं। यदि आपको एक या दो हफ्ते के बाद तक भी जीभ पर काला रंग दिखाई दे रहा है, तो डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए। आपको आपके द्वारा खाई जा रही दवाओं की खुराक में कुछ बदलाव करने पड़ सकते हैं और जीभ के दाने (Papillae) जो अधिक बड़े हो गए हैं उनका इलाज करवाना पड़ सकता है।

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काली जीभ के कारण व जोखिम कारक - Black tongue Causes & Risk Factors in Hindi

काली जीभ क्यों होती है?

जीभ काली होने के सटीक कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है, हालांकि निम्नलिखित कुछ कारक हैं जिनके कारण यह समस्या हो सकती है: 

  • मुंह की ठीक से सफाई ना हो पाना:
    यदि आप नियमित रूप से टूथब्रश व अच्छी तरह से कुल्ला नहीं करते हैं, तो ऐसी स्थिति में मुंह में डेड स्किन सेल्स (Dead skin cells) बनने जमा होने लग जाती हैं। (और पढ़ें - मुंह की बदबू का कारण)
     
  • अधिक तरल वाले या नरम भोजन खाना:
    यदि आप कठोर भोजन खाते हैं, तो इनसे जीभ पर डेड स्किन सेल्स जमा नहीं हो पाते हैं। जबकि सिर्फ नरम या अधिक तरल वाले भोजन खाने से ये डेड स्किन सेल्स जीभ पर जमा होते रहते हैं।
     
  • दवाओं से होने वाले साइड इफेक्ट:
    कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट के रूप में मुंह सूखने लग जाता है। ऐसी स्थिति में आसानी से डेड स्किन सेल्स जीभ पर जमा होने लग जाते हैं।
     
  • पर्याप्त लार ना बन पाना:
    मुंह में मौजूद लार की मदद से आप मुंह में जमा डेड स्किन सेल्स को निगल लेते हैं। यदि आप पर्याप्त मात्रा में लार नहीं बना पा रहे हैं, तो डेड स्किन सेल्स आपकी जीभ पर जमा होने लग जाते हैं।
     
  • एंटीबायोटिक दवाएं:
    एंटीबायोटिक दवाएं आपके शरीर में पाए जाने वाले अच्छे व हानिकारक दोनों प्रकार के बैक्टीरिया को मार देती हैं। ऐसी स्थिति में मुंह में मौजूद कुछ बैक्टीरिया का नाजुक संतुलन प्रभावित हो जाता है और कुछ प्रकार के यीस्ट व बैक्टीरिया जीवित रह जाते हैं। 
     
  • तंबाकू:
    यदि आप धूम्रपान करते हैं या तंबाकू चबाते हैं, तो जीभ काली होने का खतरा गंभीर रूप से बढ़ जाता है। तंबाकू आसानी से आपकी जीभ के दानों पर काले रंग के धब्बे छोड़ देती है।
     
  • चाय का कॉफी पीना:
    चाय या कॉफी पीने से भी जीभ की सतह पर पाए जाने वाले दानों का रंग बिगड़ने लग जाता है, ऐसा खासतौर पर तब होता है जब आप अत्यधिक बार चाय या कॉफी पीते हैं।
     
  • कुछ प्रकार के माउथवॉश:
    कुछ प्रकार के माउथवॉश अधिक शक्तिशाली होते हैं, जिनमें पेरोक्साइड जैसे ऑक्सिडाइजिंग एजेंट होते हैं। ये माउथवॉश मुंह में मौजूद बैक्टीरिया के संतुलन को प्रभावित कर देते हैं।
     
  • बिसमथ सबसेलीसिलेट (Bismuth subsalicylate):
    यह एक आम घटक होता है, जो एसिडिटी की कई ओटीसी (डॉक्टर की पर्ची के बिना मिल जाने वाली) दवाओं में पाया जाता है। जब यह मुंह मे मौजूद सल्फर से मिलता है, तो उससे प्रतिक्रिया के रूप में जीभ पर निशान छोड़ देता है। इस स्थिति में जीभ का रंग काला पड़ जाता है। 

जीभ काली होने का खतरा कब बढ़ता है?

निम्नलिखित स्थितियों में जीभ का रंग काला होने के जोखिम बढ़ जाते हैं: 

  • मुंह से सांस लेना, इस स्थिति में मुंह से सांस लेने के दौरान मुंह में बैक्टीरिया चले जाते हैं और जीभ के दानों में जाकर विकसित होने लग जाते हैं। जिससे जीभ का रंग काला पड़ जाता है।
  • धूम्रपान करना
  • शराब पीना
  • वायरल इन्फेक्शन
  • प्रतिरक्षा प्रणाली अत्यधिक कमजोर हो जाना
  • तनाव बढ़ जाना
  • लंबे समय से एंटीबायोटिक दवाएं लेना

(और पढ़ें - एंटीसेप्टिक क्या है)

काली जीभ होने से बचाव - Prevention of Black tongue in Hindi

जीभ काली होने से कैसे बचाएं?

जीभ का रंग काला होने से बचाव रखने के लिए मुंह की स्वच्छता रखनी बहुत जरूरी होती है, जैसे:

  • जीभ को ब्रश करना:
    दांतों को ब्रश करने के दौरान अपनी जीभ को भी ब्रश के साथ धीरे-धीरे साफ करें, जिससे जीभ पर जमे डेड स्किन सेल्स, बैक्टीरिया व भोजन के टुकड़े साफ हो जाते हैं। जीभ को साफ करने के लिए आपको नरम बालों वाले टूथब्रश या फिर लचीले टंग स्क्रैपर (जीभ को साफ करने वाला) का इस्तेमाल करना चाहिए।
     
  • नियमित रूप से डेंटिस्ट के पास जाते रहें:
    आपको नियमित रूप से डेंटिस्ट से अपने दांतों की सफाई व अन्य जांच करवाते रहनी चाहिए। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर उसका समय रहते ही पता लगाया जा सके।
     
  • खाना खाने के बाद ब्रश करना:
    एक दिन में कम से कम दो बार ब्रश करना चाहिए और खासकर खाना खाने के बाद ब्रश जरूर करना चाहिए। ब्रश करने के लिए फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट का इस्तेमाल करना चाहिए।
     
  • फ्लॉसिंग करना:
    अपने दांतों को दिन में कम से कम एक बार धागे से साफ करना चाहिए। अच्छे से फ्लॉसिंग करने से आपके दांतों के बीच में फंसा हुआ मैल साफ हो जाता है।
     
  • अच्छा पोषण बनाए रखें:
    दिन में पर्याप्त मात्रा में पानी पिए और अच्छा व संतुलित आहार खाएं जिनमें पर्याप्त मात्रा में फल व सब्जियां शामिल हैं। 

(और पढ़ें - टूथपेस्ट के फायदे)

काली जीभ का परीक्षण - Diagnosis of Black tongue in Hindi

काली जीभ का परीक्षण कैसे किया जाता है?

काली जीभ का परीक्षण इस स्थिति के कारणों की जांच करके और जीभ कैसी दिखाई दे रही है आदि की जांच के आधार पर किया जाता है। परीक्षण के दौरान अन्य स्थितियों की जांच की जाती है, जिन के कारण जीभ पर काले रंग के धब्बे बन जाते हैं जैसे कुछ प्रकार की दवाएं, फंगल या वायरल इन्फेक्शन आदि।

काली जीभ का परीक्षण आमतौर पर डेंटिस्ट के द्वारा किया जाता है। डॉक्टर आपकी जीभ पर से काले रंग को हल्के से खुरच कर उतारने की कोशिश कर सकते हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं जीभ पर काले रंग की कोई परत तो नहीं जमी है। डॉक्टर परीक्षण के दौरान आपके इस बारे में भी पूछ सकते हैं कि आप किसी प्रकार की दवा तो नहीं ले रहे हैं या लंबे समय से एंटीबायोटिक दवा तो नहीं खा रहे हैं। 

(और पढ़ें - फंगल इन्फेक्शन के लक्षण)

काली जीभ का इलाज - Black tongue Treatment in Hindi

काली जीभ का इलाज कैसे करें?

अक्सर जीभ काली होने पर उसका कोई विशेष उपचार नहीं किया जाता है। ज्यादातर मामलों में नियमित रूप से टूथब्रश करने के दौरान ब्रश से जीभ को साफ करने से जीभ पर जमा हुए डेड स्किन सेल्स साफ हो जाते हैं और जीभ का काला रंग भी कुछ दिनों के भीतर चला जाता है।

यदि आपको लगता है कि दवाएं या डॉक्टर के द्वारा निर्धारित किये गए नरम आहार आदि खाने के कारण जीभ का रंग काला हो गया है, तो इस बारे में डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए। ऐसे में डॉक्टर आपको दी गई दवा की खुराक में कुछ बदलाव कर सकते हैं या कुछ एंटीफंगल या एंटी बैक्टीरियल दवाएं दे सकते हैं। ये दवाएं मुंह में बैक्टीरिया व यीस्ट आदि को बढ़ने से रोकती हैं। जीभ पर मौजूद दाने जिनका आकार बड़ा हो गया है और वे वापस सामान्य आकार में नहीं आ रहे हैं तो डॉक्टर सर्जरी की मदद से उन्हें हटा सकते हैं। हालांकि निम्नलिखित बातों का ध्यान रख के इस स्थिति से बचा जा सकता है:

  • जीभ पर ब्रश करना:
    दिन में कम से कम दो बार नरम बालों वाले टूथब्रश के साथ अपनी जीभ को हल्के-हल्के साफ करना चाहिए। ऐसा करने से ब्रश की मदद से जीभ पर जमे डेड स्किन सेल्स हट जाते हैं।
     
  • टंग स्क्रैपर का इस्तेमाल करें:
    जिस दौरान आप ब्रश करते हैं, उस दौरान टंग स्क्रैपर से अपनी जीभ को साफ करें। ऐसा करने से जीभ की सतह पर मौजूद बैक्टीरिया व भोजन के टुकड़े साफ हो जाते हैं।
     
  • खाने के बाद ब्रश करना:
    खाना खाने के बाद रोजाना अपनी जीभ व दांतों को साफ करने से जीभ की सतह के दानों में फंसा भोजन व बैक्टीरिया साफ हो जाते हैं।
     
  • पीने के बाद ब्रश करना:
    चाय या कॉफी आदि पीने के बाद भी जीभ को ब्रश से साफ कर लेना चाहिए, ऐसा करने से जीभ पर धब्बे नहीं पड़ पाते हैं।
     
  • नियमित रूप से सफाई करवाते रहें:
    नियमित रूप से अपने डेंटिस्ट से दांतों की सफाई करवाते रहें और मुंह की स्वच्छता को बनाए रखें।
     
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं:
    पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहने से मुंह का अंदरुनी हिस्सा नम रहता है, जिससे लार की मदद से डेड स्किन सेल्स निगल लिए जाते हैं।
     
  • धूम्रपान छोड़ दें:
    सिगरेट पीना व तंबाकू चबाना छोड़ देना जीभ के लिए बहुत लाभदायक सिद्ध हो सकता है। अगर तंबाकू का सेवन करना छोड़ नहीं सकते हैं, तो हर बार तंबाकू चबाने के लिए अपने दांतों व जीभ को ब्रश कर लेना चाहिए।
     
  • सोने से पहले फ्लॉस करें:
    सोने से पहले दांतों को धागे से साफ करन से दांतों के बीच फंसा हुआ भोजन व मैल साफ हो जाता है। (और पढ़ें - दांत मजबूत करने के उपाय)
     
  • चुइंगम चबाएं:
    शुगर फ्री चुइंगम या ऐसी चुइंगम चबाएं जो उन लोगों के लिए डिज़ाइन की गई हैं जिनका मुंह सूखा रहता है। इन चुइंगम की मदद से मुंह में अधिक लार बनने लग जाती है, जिससे मुंह में मौजूद डेड स्किन सेल्स साफ हो जाते हैं। चुइंगम को चबाने के दौरान फंसे हुऐ डेड स्किन सेल्स भी बाहर निकलने लगा जाते हैं। 

(और पढ़ें - च्युइंग गम के फायदे)

काली जीभ की जटिलताएं - Black tongue Complications in Hindi

जीभ काली होने से क्या जटिलताएं होती हैं?

काली जीभ आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाती है और कुछ साधारण उपायों की मदद से इसकी रोकथाम भी की जा सकती है। काली जीभ होने से स्वास्थ्य संबंधी किसी प्रकार की समस्या नहीं होती है। हालांकि मुंह की स्वच्छता ना बनाए रखने से कुछ गंभीर रोग हो सकते हैं, जैसे हृदय रोग, स्ट्रोक, डिमेंशिया, श्वसन प्रणाली में संक्रमण और डायबिटीज आदि। इसलिए जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करना बहुत जरूरी होता है। 

(और पढ़ें - ऊपरी श्वसन तंत्र के संक्रमण का इलाज)

Dr. Bramara Kalepu

Dr. Bramara Kalepu

Oral & Maxillofacial Surgeon

Dr. S . P  Singh

Dr. S . P Singh

Oral & Maxillofacial Surgeon

Dr. Abhishek Singh Payak

Dr. Abhishek Singh Payak

Oral & Maxillofacial Surgeon

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