अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं तो आपको सबसे पहले अपने खानपान में बदलाव करने की सलाह दी जाती है। आपका ब्लड शुगर लेवल अचानक न बढ़ जाए, इसके लिए आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आप रोजाना क्या खाते हैं।

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आप जो खा रहे हैं उस खाद्य पदार्थ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स यानी जीआई स्कोर क्या है और आप हर दिन कितने कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन करते हैं। अगर उसे कम कर लिया जाए तो डायबिटीज को कंट्रोल करना आसान हो जाता है। अगर आप अपनी डाइट पर कंट्रोल न रखें तो डायबिटीज की वजह से हृदय रोग, किडनी डैमेज और कई तरह की दूसरी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं।

दरअसल, डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर इंसुलिन हार्मोन का सही मात्रा में उत्पादन नहीं कर पाता जिस कारण शरीर में ग्लूकोज या ब्लड शुगर लेवल का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। आपने अक्सर लोगों को यह कहते सुना होगा कि डायबिटीज के मरीजों के लिए चीनी तो जहर है ही, साथ ही उन्हें चावल भी नहीं खाना चाहिए।

ऐसा इसलिए क्योंकि चावल में कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा अधिक होती है और इसका जीआई स्कोर भी काफी अधिक होता है। जीआई एक माप है जो यह बताता है कि कौन सा खाना, ब्लड शुगर लेवल को किस तरह से प्रभावित करता है। अधिक जीआई रैंक वाले खाद्य पदार्थों की वजह से ब्लड शुगर बढ़ता है और डायबिटीज का खतरा भी अधिक रहता है।

लेकिन क्या डायबिटीज के मरीजों को पूरी तरह से चावल खाना बंद कर देना चाहिए? इस बारे में क्या कहती है रिसर्च? क्या चावल की कोई और वैरायटी है, जिसका सेवन डायबिटीज के मरीज कर सकते हैं? इन सबके बारे में हम आपको इस आर्टिकल में बता रहे हैं।

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  1. डायबिटीज में ज्यादा चावल खाने के नुकसान
  2. शुगर में कौन सा चावल खाना चाहिए
  3. डायबिटीज के मरीजों के लिए क्यों फायदेमंद है ब्राउन राइस

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (बीएमजे) में प्रकाशित एक स्टडी की मानें तो वैसे लोग जो सफेद चावल का बहुत ज्यादा मात्रा में सेवन करते हैं, उन्हें टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा 10 प्रतिशत तक अधिक होता है। ऐसे में अगर आपको प्रीडायबिटीज है या फिर डायबिटीज डायग्नोज हो चुका है तब तो आपको चावल खाने में जरूर संयम बरतना चाहिए। इतना ही नहीं आप जो चावल खा रहे हैं उसका जीआई स्कोर क्या है और उसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कितनी है इसके बारे में भी आपको जानकारी होनी चाहिए।

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हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं का भी यही कहना है कि अगर आप चाहते हैं कि आपको भविष्य में डायबिटीज न हो तो आपको सफेद चावल कम मात्रा में खाने चाहिए। इस स्टडी में पहले हो चुकी 4 स्टडीज के नतीजों की जांच की गई, जिसमें चीन, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के 3 लाख 52 हजार से ज्यादा प्रतिभागियों को शामिल किया गया था। जिन लोगों ने सफेद चावल का सेवन ज्यादा किया, उन्हें डायबिटीज होने का खतरा 27 प्रतिशत अधिक था और यह खतरा एशिया महाद्वीप के लोगों में ज्यादा था। स्टडी की शुरुआत में सभी प्रतिभागी डायबिटीज फ्री थे।

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज के मुताबिक, डायबिटीज के मरीजों को अपने रोजाना के कार्बोहाइड्रेट्स की जरूरत को साबुत अनाज से पूरा करना चाहिए। साबुत अनाज में मुश्किल कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं जिसे तोड़ने में शरीर को अधिक समय लगता है और इस कारण ब्लड शुगर लेवल के अचानक बढ़ने का खतरा भी कम हो जाता है। 

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अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं तो आपको सिर्फ वैसा ही चावल खाना चाहिए जो पोषक तत्वों से भरपूर हो और वे 3 तरह के चावल जो मधुमेह के मरीजों के लिए सही माने जाते हैं वे हैं:

  • ब्राउन राइस
  • वाइल्ड राइस
  • लंबे दाने वाला बासमती चावल

छोटे दाने वाले सफेद चावल की तुलना में इन तीनों के तरह के चावल में फाइबर, न्यूट्रिएंट्स और विटामिन्स की मात्रा अधिक होती है। छाटे दाने वाले सफेद चावल का न सिर्फ जीआई स्कोर अधिक होता है बल्कि इसमें किसी तरह का कोई पोषक तत्व भी नहीं पाया जाता है। बासमती, ब्राउन और वाइल्ड राइस का जीआई स्कोर मध्यम होता है और इनका सीमित मात्रा में सेवन किया जा सकता है।

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पोर्शन को करें कंट्रोल : अगर डायबिटीज के मरीज चावल खाना ही चाहते हैं तो उन्हें उसे बेहद कम मात्रा में खाना चाहिए। आधा कप चावल में करीब 15 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है। साथ ही सिर्फ चावल खाने की बजाए उसे हेल्दी चीजों के साथ मिलाकर खाएं जैसे- चावल के साथ दाल, फलियां, बीन्स या हरी पत्तेदार सब्जियां। ऐसा करने से आपके शरीर को जरूरी पोषण भी मिल पाएगा। वैसे भी दाल-चावल को परफेक्ट संतुलित आहार के तौर पर देखा जाता है।

चावल को कैसे पकाएं : चावल को प्रेशर कुकर में पकाने की बजाए उसे किसी पैन या पतीले में अतिरिक्त पानी के साथ पकाएं और जब चावल पक जाए तो अतिरिक्त पानी या मार को फेंक दें। ऐसा करने से चावल में मौजूद स्टार्च कम हो जाएगा और चावल का कार्बोहाइड्रेट लेवल भी कुछ हद तक कम हो जाएगा।

अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं और चावल खाना चाहते हैं तो आपको सफेद वाले नॉर्मल चावल की जगह ब्राउन राइस का सेवन करना चाहिए। इसकी वजह ये है कि ब्राउन राइस में फाइबर, मैग्नीशियम, पोटैशियम, आयरन, फोलेट आदि मिनरल्स और पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा पायी जाती है। इस कारण अधिक वजन वाले लोग या टाइप 2 डायबिटीज के मरीज जिनके शरीर में भोजन करने के बाद ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है उसे कम करने में मददगार है ब्राउन राइस।

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टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों पर की गई एक स्टडी में यह बात सामने आयी कि 2 बार ब्राउन राइस का सेवन करने पर सफेद चावल खाने की तुलना में भोजन के बाद ब्लड शुगर लेवल और हीमोग्लोबिन ए1सी को भी कम करने में मदद मिली। साथ ही साथ वजन कम करने में भी मददगार है ब्राउन राइस और इस वजह से भी शरीर का ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करने में मदद मिलती है। डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद जरूरी है कि वे अपना वजन कम करें। डायबिटीज के मरीजों के लिए ही नहीं बल्कि वैसे लोग जिन्हें डायबिटीज नहीं है अगर वे भी नॉर्मल सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस का सेवन करें तो ब्राउन राइस में मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है जिस कारण उन्हें टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा कम हो सकता है।

कुल मिलाकर देखें तो डायबिटीज के मरीज फिर चाहे टाइप 1 डायबिटीज हो या टाइप 2, उन्हें चावल खाना पूरी तरह से बंद करने की जरूरत नहीं है। वे चाहें तो कम मात्रा में चावल का सेवन कर सकते हैं लेकिन बेहद जरूरी है कि आप चावल को कई दूसरे हेल्दी फूड जैसे- प्रोटीन से भरपूर दाल या हेल्दी फैट के साथ मिलाकर खाएं और साथ ही संतुलित आहार का सेवन करें। ऐसा करने से आपका ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहेगा।

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