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कफ एक चिपचिपा पदार्थ है, यह तब बनता है जब वायुमार्ग को प्रभावित करने वाले तत्व श्वसन प्रणाली में प्रवेश कर जाते हैं। जबकि बलगम पतला और चिकना द्रव होता है, जो अंगों की रक्षा और उन्हें नम रखता है और शरीर में बाहर से आने वाले हानिकारक पदार्थों के प्रवेश को रोकता है। कफ कम व अधिक मात्रा में उत्पन्न हो सकता है और खांसी के जरिए बाहर निकलता है।

दूसरे शब्दों में, बलगम और कफ एक समान हैं, लेकिन फिर भी इनमें थोड़ा अंतर हैं : बलगम आपकी नाक और साइनस से निकलने वाला पतला तरल है, जबकि कफ मोटा होता है और यह गले व फेफड़ों में बनता है।

अधिक मात्रा में कफ बनने के सामान्य कारणों में शामिल हैं :

अगर कफ असुविधा का कारण बनता है और थूक, नाक से खून बहना, सांस लेने में कठिनाई, रात को पसीना, बुखार, ठंड लगना और वजन घटने जैसी स्थिति के साथ आता है, तो ऐसे में यह चिंताजनक हो सकता है। अंतर्निहित स्थिति के आधार पर, कफ का रंग पीला या हरा और इसकी गंध असामान्य हो सकती है।

होम्योपैथी में कफ के इलाज के लिए कई उपचार मौजूद हैं। इन उपायों में से कुछ में हेपर सल्फर, अमोनियम कार्बोनिकम, आर्सेनिकम एल्बम, आईपेकाकुआन्हा, स्टैनम मेटालिकम, सेनेगा, डलकैमारा, कॉस्टिकम, सांगुईनैरिया कैनाडेंसिस, कैलियम बाइक्रोमाइकम, कार्बो वेजिटैबिलिस, सिलिसिका टेरा शामिल हैं।

एक होम्योपैथिक चिकित्सक मरीज के परीक्षण (लक्षणों, शारीरिक और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए) के बाद उपाए निर्धारित करता है। दूसरे शब्दों में कहें तो, प्रत्येक उपाय प्रत्येक मरीज पर एक जैसा असर नहीं करते हैं, क्योंकि हर मरीज की स्थिति अलग-अलग होती है और होम्योपैथी में स्थिति के अनुसार ही दवाइयां निर्धारित की जाती हैं। इसलिए इन दवाइयों का सही परिणाम प्राप्त करने के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही इनका सेवन करें।

  1. कफ के लिए होम्योपैथिक दवाएं - Homeopathic medicines for phlegm in Hindi
  2. होम्योपैथी के अनुसार कफ रोगी के लिए आहार और जीवन शैली में बदलाव - Dietary and lifestyle changes for a phlegm patient as per homeopathy in Hindi
  3. कफ के लिए होम्योपैथिक दवाएं और उपचार कितने प्रभावी हैं - How effective are homeopathic medicines and treatment for phlegm in Hindi
  4. साइड इफेक्ट और होम्योपैथिक दवा के जोखिम और कफ के लिए उपचार - Side effects and risks of homeopathic medicine and treatments for phlegm in Hindi
  5. टिप्स - Takeaway

सिलिकिया टेरा
सामान्य नाम :
सिलिका
लक्षण : यह शरीर में अतिरिक्त कफ के इलाज के लिए एक लाभदायक उपाय है और निम्नलिखित लक्षणों को प्रबंधित करने में मदद करता है :

  • एनोस्मिया (आंशिक या पूर्णरूप से गंध न पहचान पाना) के साथ नाक बंद हो जाना
  • गले में खराश
  • कुछ भी निगलने पर गले में तेज दर्द होना
  • लेटने के दौरान कफ की समस्या बढ़ जाना और पीले रंग का कफ निकलना
  • कफ में मवाद या खून आना
  • सुबह के समय छींक आना

यह लक्षण सुबह के समय लेटने और नम मौसम की स्थिति में खराब हो जाते हैं। लेकिन यह लक्षण गर्म वातावरण में ठीक हो जाते हैं।

आईपेकाकुआन्हा
सामान्य नाम :
इपेक-रूट
लक्षण : आईपेकाकुआन्हा मुख्य रूप से लगातार मतली और उल्टी की स्थिति में उपयोग किया जाता है, लेकिन इसके बाद के उपचार के लिए भी नियोजित किया जा सकता है :

अगर उचित इलाज नहीं किया जाता है, तो समय के साथ यह लक्षण बिगड़ जाते हैं। इसके अलावा नम और गर्म मौसम में भी लक्षण खराब होते हैं।

आर्सेनिकम एल्बम
सामान्य नाम :
आर्सेनिक एसिड
लक्षण : यह दवा शरीर के हर अंग और ऊतक पर काम करती है और कमजोरी, थकावट व जलन से राहत दिलाने में मदद करती है। इसके अलावा यह निम्नलिखित प्रबंधन में भी मदद करती है :

  • बंद नाक
  • नाक से पानी आना, जो त्वचा को नुकसान पहुंचाता है
  • बुखार और नाक की श्लेष्मा झिल्ली में सूजन
  • नासिका में जलन
  • नकसीर
  • अत्यधिक छींक आना
  • वायुमार्ग सिकुड़ना
  • घरघराहट
  • बुखार
  • नींद से संबंधित परेशानियां
  • बेचैनी
  • नम या ठंडे मौसम में और ठंडे पेय पदार्थ लेने पर यह लक्षण बिगड़ जाते हैं, लेकिन गर्म पेय पदार्थ का सेवन करने व सिर ऊंचा रखकर सोने से लक्षण बेहतर होते हैं।

हेपर सल्फर
सामान्य नाम :
हैनिमैन कैल्शियम सल्फाइड
लक्षण : हेपर सल्फर एक प्रभावी दवा है जो सूजन (वायुमार्ग की सूजन) और अत्यधिक बलगम आने की स्थिति को ठीक करती है। यह कुछ अन्य लक्षणों के प्रबंधन में भी उपयोगी है, जिसमें शामिल हैं :

  • नथुने यानी नासिका छिद्र में दर्द
  • नाक बहना
  • नाक से मोटा तरल निकलना
  • बलगम वाली खांसी
  • गला बैठना, जिसमें व्यक्ति बोलने में असमर्थ हो जाता है
  • गला चोक हो जाना और रुक-रुककर खांसी आना
  • कुछ भी खाने के दौरान ऐसा महसूस होना जैसे गला अवरुद्ध (ब्लॉक) हो गया है

शुष्क और ठंडी हवाओं से, दर्दनाक हिस्से को छूने पर, शरीर को कवर न करने से और दर्द वाले हिस्से के बल लेटने से यह लक्षण बिगड़ जाते हैं। गर्म भोजन के बाद सिर को लपेटने या ढकने पर लक्षण बेहतर होते हैं।

अमोनियम कार्बोनिकम
सामान्य नाम :
कार्बोनेट ऑफ अमोनिया
लक्षण : कार्बोनेट ऑफ अमोनिया किसी भी अंग में भारीपन के इलाज में मुख्य रूप से उपयोगी है। यह उन स्थितियों का भी इलाज करता है, जो वायुमार्ग के श्लेष्म झिल्ली को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा निम्नलिखित कुछ अन्य लक्षण भी हैं, जिन्हें इस उपाय का उपयोग करके प्रबंधित किया जा सकता है :

  • नाक में जलन और पानी आना
  • गले में दर्द व साथ में जलन की भावना
  • नाक बंद होना और नाक के माध्यम से सांस लेने में कठिनाई
  • नाक से निकलने वाले तरल में खून आना
  • स्वर बैठना या गला बैठना
  • सीने में जलन
  • हर दिन 3 बजे खांसी आना

यह सभी शिकायतें ठंड और बरसात के मौसम में, शाम को और पीरियड्स के दौरान बिगड़ जाते हैं। शुष्क मौसम में और पेट के बल लेटने पर व्यक्ति बेहतर महसूस करता है।

स्टैनम मेटालिकम
सामान्य नाम :
टिन
लक्षण : स्टैनम मेटालिकम का इस्तेमाल मवाद और बलगम से जुड़ी क्रोनिक लंग्स कंडीशन (फेफड़े से जुड़ी पुरानी बीमारी) के इलाज के लिए किया जा सकता है। इस दवा के उपयोग से निम्नलिखित लक्षणों को भी ठीक किया जा सकता है :

  • गले और छाती में कमजोरी महसूस होना
  • हरे रंग का कफ आना, जिसका स्वाद मीठा हो सकता है
  • इन्फ्लूएंजा के कारण कफ या बलगम आना
  • छाती में दर्द का अहसास
  • छाती में अत्यधिक कमजोरी की भावना के कारण बात करने में दिक्कत
  • खांसी, जिसमें बलगम बाहर निकल आता है

हंसते, बोलते और गाते या दाईं ओर लेटते समय यह लक्षण बिगड़ जाते हैं, लेकिन व्यक्ति के खांसने पर उसे कुछ समय के लिए राहत महसूस होती है।

सेनेगा
सामान्य नाम :
स्नेकवॉर्ट
लक्षण : सेनेगा श्वसन पथ के श्लेष्म झिल्ली की सूजन के इलाज में मदद कर सकता है। इसका उपयोग निम्नलिखित लक्षणों के इलाज के लिए भी किया जा सकता है :

  • छींकना, जिसमें पतला बलगम बाहर आ जाता है
  • छाती में घरघराहट
  • खांसने के बाद छींक आना
  • कर्कश आवाज
  • गले की श्लेष्म झिल्ली में सूजन

यह लक्षण तब बढ़ जाते हैं जब व्यक्ति खुली हवा में आराम करता है या चलता है। लक्षणों में सुधार तब होता है जब व्यक्ति को पसीना आता है या जब वह अपने सिर को पीछे की ओर झुकाता है।

डलकैमारा
सामान्य नाम :
बिटर-स्वीट
लक्षण : इस उपाय का उपयोग अत्यधिक बलगम आने और सिरदर्द के इलाज के लिए किया जाता है। यह निम्नलिखित लक्षणों का भी इलाज कर सकता है जैसे :

  • मानसून के दौरान नाक भर जाना
  • नाक से मोटा व पीला बलगम निकलना
  • काली खांसी, जो कि वायुमार्ग में अत्यधिक मात्रा में बलगम निकलने से जुड़ी होती है 
  • उल्टी में चिपचिपा सफेद बलगम आना
  • दमा
  • पूरे शरीर में जलन
  • थकने पर व्यक्ति का खांसना

यह लक्षण रात में नमी बढ़ने के साथ बदतर हो जाते हैं। वॉर्म अप्लाई (जैसे गरम चीज से सिकाई) करने या गतिविधि करने से इन लक्षणों से राहत मिल सकती है।

कॉस्टिकम
सामान्य नाम :
हैनिमैन टिंक्चुरा एक्रिस साइन काली
लक्षण : कॉस्टिकम का इस्तेमाल निम्नलिखित लक्षणों के प्रबंधन के लिए किया जा सकता है :

  • खांसी
  • छाती में दर्द
  • इतनी कम मात्रा में कफ आना कि उसे बाहर निकालना मुश्किल हो जाता है, इसलिए लोग अक्सर इसे न चाहकर भी निगल लेते हैं।
  • नासिका में अल्सर
  • नाक की श्लेष्म झिल्ली में सूजन और स्वर बैठना

सर्द हवा के कारण लक्षण और बिगड़ जाते हैं, लेकिन गर्मी और नम मौसम में ये बेहतर हो जाते हैं।

सांगुईनैरिया कैनाडेंसिस
सामान्य नाम :
ब्लड रूट
लक्षण : यह उपाय श्वसन तंत्र के श्लेष्म झिल्ली की समस्याओं जैसे कि इन्फ्लूएंजा से होने वाली खांसी के लिए सबसे उपयुक्त है। सांगुईनैरिया कैनाडेंसिस कफ से जुड़े निम्नलिखित लक्षणों का इलाज करने में भी मदद करता है :

  • आंतों की समस्याओं से जुड़ी खांसी, जिसमें डकार आने पर राहत मिलती है
  • खांसी, जिसमें सीने में जलन और दर्द होता है
  • नाक से पीला डिस्चार्ज होना
  • नाक या साइनस के भीतर होने वाली अस्वाभाविक वृद्धि
  • नाक की श्लेष्म झिल्ली में सूजन
  • गले में सूजन

प्रभावित हिस्से को छूने व गतिविधि करने पर सभी लक्षण बिगड़ जाते हैं, लेकिन पर्याप्त व अच्छी नींद लेने के बाद इनमें सुधार होता है।

कैलियम बाइक्रोमाइकम
सामान्य नाम :
बाईक्रोमेट ऑफ पोटैश
लक्षण : कैलियम बाइक्रोमाइकम वॉन्डेरिंग पेन (शरीर के चारों ओर होने वाला दर्द) के इलाज के लिए सबसे उपयुक्त उपचारों में से एक है। इस उपाय का उपयोग करके कुछ अन्य लक्षण भी ठीक किए जा सकते हैं :

  • आंखों के बीच वाले हिस्से में दर्द
  • नाक से हरा-पीला डिस्चार्ज होना
  • तेज छींक आना
  • नाक से पतला बलगम निकलना
  • एनोस्मिया (आंशिक या पूर्णरूप से गंध न पहचान पाना)
  • खांसी के दौरान पीला बलगम निकलना
  • खांसते समय सीने में दर्द होना
  • खांसते समय मुंह में धातु जैसा स्वाद आना

यह लक्षण सुबह के समय में खराब होते हैं और गर्म वातावरण में ठीक हो जाते हैं।

कार्बो वेजीटैबिलिस
सामान्य नाम :
वेजीटेबल चारकोल
लक्षण : कार्बो वेजीटेबिलिस निमोनिया के इलाज में फायदेमंद है। यह निम्नलिखित लक्षणों के खिलाफ भी प्रभावी है :

  • कर्कश आवाज या आवाज बैठना, जो शाम के समय और बिगड़ जाती है
  • काली खांसी
  • बलगम थूकना
  • सीने में जलन
  • खांसी
  • नकसीर

सभी लक्षण ठंड या गर्म और नम मौसम में, शाम और रात में, खुली हवा में बाहर जाने पर और वसायुक्त भोजन के सेवन के बाद खराब हो जाते हैं। लेकिन डकार आने पर इन लक्षणों में सुधार होता है।

(और पढ़ें - गले में कफ का कारण)

होम्योपैथिक उपचार अधिक मात्रा में कफ आने की स्थिति में मदद कर सकता है। डॉक्टर इन उपचारों के प्रभावों को बढ़ावा देने के लिए उचित आहार और जीवन शैली में बदलाव की सलाह देते हैं। इसके अलावा कुछ खाद्य पदार्थों के सेवन से बचने की भी सिफारिश की जाती है, क्योंकि वे होम्योपैथिक दवाओं के चिकित्सीय गुणों को प्रभावित कर सकते हैं।

क्या करना चाहिए

  • अपने नियमित आहार में स्वस्थ और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करें।
  • अच्छी व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें और अपने आस-पास साफ-सफाई रखें।
  • रोजाना व्यायाम करें या अपनी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि शामिल करें।

क्या नहीं करना चाहिए

  • औषधीय गुणों वाले पौधों की जड़, तना या पत्तियों का सेवन न करें।
  • तेज गंध वाले कैफीन युक्त पेय न लें।
  • ऐसे इत्र का प्रयोग न करें, जिनमें तेज खुशबू हो।
  • नम वातावरण में रहने से बचें।
  • मसाले, चीनी और नमक की अधिकता से बचें।
  • ऐसी गतिविधियों में शामिल होने से बचें जो शारीरिक या मानसिक परिश्रम का कारण बन सकती हैं। इसके अलावा, क्रोध और दुःख जैसी भावनाओं से बचें।

(और पढ़ें - छाती में कफ जमने का कारण)

अतिरिक्त कफ बनने से जुड़ी स्थितियों के इलाज के लिए विभिन्न होम्योपैथिक उपचार उपलब्ध हैं। यह दवाइयां घुलनशील रूप में तैयारी की जाती हैं और मरीज की बीमारी, मानसिक व शारीरिक स्थिति के अनुसार उसे दी जाती हैं। इसीलिए यह दवाइयां अंतर्निहित कारण को खत्म करने में सहायक होती हैं।

सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन होम्योपैथी द्वारा किए गए एक नैदानिक ​​परीक्षण में पाया गया कि होम्योपैथिक दवाएं ट्रेकोब्रोनिटिस (श्वासनली की सूजन) का इलाज करने में प्रभावी हैं। अध्ययन में शामिल सभी प्रतिभागियों की आयु 15 वर्ष के अंदर थी और उनमें सूखी या प्रोडक्टिव खांसी (जिसमें बलगम या कफ बनता है) और सीने में जकड़न की समस्या थी। रिसर्च शुरू करने से पहले प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया गया था और इसके लिए ट्रेकोब्रोनिटिस के लक्षण के पैमाने को सेट किया गया था, जिसमें खांसी, सूखी खांसी, सीने में जकड़न, घरघराहट, श्वसन दर, निष्कासन, दर्दनाक खांसी और बुखार के साथ विभिन्न मापदंड शामिल हैं।

ट्रेकोब्रोनिटिस के सामान्य लक्षणों के आधार पर होम्योपैथिक दवाओं का चयन किया गया था। जैसे कि कफ, पीला कफ, अत्यधिक मात्रा में कफ, हल्की मात्रा में कफ, खांसी के दौरान दर्द, घरघराहट और थूकने पर खून आना।

उपचार के लिए फास्फोरस, आर्सेनिकम एल्बम, ब्रायोनिया अल्बा, पल्सेटिला नाइग्रीकन्स, लाइकोपोडियम क्लैवैटम, नक्स वोमिका, काली कार्बोनिकम, एकोनिटम नैपेलस, स्पांगिया टोस्टा, आइपेकुआन्हा, सिलिकिया और नैट्रम म्यूरिएटिकम का चयन किया गया था। रिसर्च के अंत में पता चला कि लगभग 91 प्रतिशत रोगियों के लक्षणों में महत्वपूर्ण सुधार हुआ।

(और पढ़ें - कफ का आयुर्वेदिक इलाज)

होम्योपैथिक दवाइयां हल्की और घुलनशील होती हैं। यह पूरी तरह से प्राकृतिक पदार्थों से तैयार की जाती हैं, इसीलिए इनका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है और इनके औषधीय गुण बने रहते हैं।

हालांकि, सही इलाज कराने के लिए किसी अनुभवी होम्योपैथिक चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। एक योग्य चिकित्सक व्यक्ति के लक्षण और नैदानिक स्थिति के आधार पर दवाइयां देते हैं। यदि कोई व्यक्ति चाहे तो इन दवाइयों को प्रमाणित दवाइयों के साथ भी ले सकता है।

होम्योपैथिक दवाओं का उपयोग शिशुओं, बच्चों, वयस्कों के साथ-साथ बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित रूप से किया जा सकता है।

वैसे तो बलगम ऊतकों की रक्षा और उन्हें नम रखता है, लेकिन अतिरिक्त मात्रा में कफ बनना किसी अंतर्निहित स्थिति से जुड़ा हो सकता है। कफ गले में खराश पैदा कर सकता है और गले व नाक को प्रभावित कर सकता है। शरीर में अतिरिक्त बलगम बनने और इसके संबंधित लक्षणों के प्रबंधन में होम्योपैथिक उपचार प्रभावी साबित हुए हैं। वे कफ को साफ करने और अंतर्निहित स्थिति का इलाज करके बलगम के अतिप्रवाह को रोकने में सहायक होते हैं।

और पढ़ें ...

References

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