ब्रह्म कमल आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर एक फूल है. इसका वैज्ञानिक नाम सौसुरिया ओबवल्लाटा (Saussurea obvallata) है. भारत में इसे ब्रह्म देव का फूल माना जाता है. यह फूल सफेद रंग का होता है और आमतौर पर उत्तराखंड राज्य में ही पाया जाता है. इसे हिमालयन फूलों का राजा माना जाता है. इसका धार्मिक महत्व भी काफी है. यह वर्ष में केवल एक बार मॉनसून सीजन में ही खिलता है. इसे दुर्लभ फूलों की श्रेणी में शामिल किया गया है. यह फूल लिवर को ठीक करने के साथ-साथ यूटीआई जैसी कई समस्या से राहत दिलाने में सक्षम है.

आज इस लेख में आप ब्रह्म कमल के फायदे के बारे में विस्तार से जानेंगे -

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  1. ब्रह्म कमल से होने वाले फायदे
  2. सारांश
ब्रह्म कमल के लाभ के डॉक्टर

ब्रह्म कमल का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है. लिवर या बुखार जैसी समस्याओं में ब्रह्म कमल के प्रयोग के फायदे मिल सकते हैं. आइए, ब्रह्मकमल के फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं -

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन में फायदेमंद

ब्रह्म कमल में एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं, जो शरीर को बैक्टीरिया और फंगस से बचाने में सहायक होते हैं. यह ई. कोलाई और एस. ऑरियस जैसे बैक्टीरिया से भी शरीर को बचाता है. यह बैक्टीरिया जेनिटल यीस्ट इंफेक्शन का कारण बनते हैं. इसमें एंटी बायोटिक्स होते हैं, जो एसटीडी से बचाने में सहायक माने जाते हैं.

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बुखार ठीक करे

ब्रह्म कमल में एंटीपायरेटिक गुण होते हैं, जो बुखार उतारने और व्यक्ति की सेहत बढ़ाने में लाभदायक होते हैं. आयुर्वेद में इसका प्रयोग खासतौर से बुखार को ठीक करने के लिए किया जाता है.

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लिवर के लिए फायदेमंद

ब्रह्म कमल लिवर से हानिकारक रेडिकल्स का प्रभाव कम करता है और लिवर को डेमेज होने से बचाता है. ब्रह्म कमल ल्यूकोडर्मा जैसी समस्याओं में भी फायदेमंद हो सकता है.

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घाव को भरे

ब्रह्म कमल में एंटी सेप्टिक गुण होता है, जिस कारण यह घाव को भरने में लाभदायक है. ब्रह्म कमल पौधे की जड़ों का पेस्ट घाव या चोट पर लगाने से आराम मिल सकता है. ब्रह्म कमल के पत्तों से बने पेस्ट में थोड़ा-सा नमक मिलाकर घाव पर लगाने से आराम मिल सकता है. यदि ब्रह्म कमल की जड़ों से बने काढ़े में कुछ बूंदें देवदार तेल की मिलाकर लगाई जाएं, तो जल्द आराम मिल सकता है.

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मेंटल डिसऑर्डर में सहायक

इस फूल में फ्लेवोन होता है. यह नर्व सेल्स को ब्रेन में सामान्य करता है, जिससे दौरे पड़ने की आशंका काफी कम हो सकती है. अंगों के पैरालिसिस को ठीक करने में भी यह फूल लाभदायक माना जाता है, क्योंकि यह उन अंगों के नर्व फंक्शन और ब्लड सप्लाई में सुधार लाता है. इस फूल में अल्कालोइड, फ्लेवेनॉइड जैसे कई एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो एक अच्छे नर्वस सिस्टम को बनाए रखने में मदद करते हैं. ब्रह्म कमल के बीजों को रात भर पानी में भिगोकर सुबह के समय एक कप लेने से मेंटल डिसऑर्डर में फायदा हो सकता है.

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खांसी व कोल्ड करे ठीक

ब्रह्म कमल में एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं, जो खांसी और जुकाम को ठीक करने में सहायक होते हैं. यह रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट से सूजन को कम करने में भी सहायक है.

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हाइड्रोसील इलाज में फायदेमंद

हाइड्रोसील द्रव से भरी एक थैली होती है, जो पुरुषों के एक या दोनों अंडकोष में बन जाती है. ऐसा होने पर अंडकोष में दर्द व सूजन रहती है. ऐसे में ब्रह्म कमल के फूल के ऊपरी हिस्से को घी के साथ पकाकर लगातार 6 दिन तक दो छोटे चाय के चम्मच रोगी को देने से हाइड्रोसील की समस्या कम हो सकती है. 

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ब्रह्म कमल फूल को अपने धार्मिक व औषधीय गुणों की वजह से जाना जाता है. ब्रह्म कमल के सभी भाग यानी फूल, पत्ते, बीज और जड़ें बहुत से स्वास्थ्य लाभ दे सकते हैं. बुखार, ठंड, यूरिन इंफेक्शन व हाइड्रोसील जैसी शारीरिक स्थितियों में ब्रह्म कमल के बीज, पत्ते और फूल फायदेमंद हो सकते हैं. फिर भी कोई शारीरिक समस्या होने पर ब्रह्म कमल को इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

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