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  1. बवासीर का ऑपरेशन क्या होता है? - Haemorrhoidectomy kya hai in hindi?
  2. बवासीर का ऑपरेशन क्यों की जाती है? - Haemorrhoidectomy kab kiya jata hai?
  3. बवासीर का ऑपरेशन होने से पहले की तैयारी - Bawaseer ke operation ki taiyari
  4. बवासीर का ऑपरेशन कैसे किया जाता है? - piles ki surgery kaise hoti hai?
  5. बवासीर के ऑपरेशन के बाद देखभाल - Piles ke operation ke baad dekhbhal
  6. बवासीर के ऑपरेशन की जटिलताएं - Piles ke operation me jatiltaye

हेमोर्रोइडेक्टमी (Hemorrhoidectomy) हेमोर्रोइड (Hemorrhoid) को हटाने की सर्जिकल प्रक्रिया है। हेमोर्रोइड वाहिकीय ऊतकों का समूह है जो मांसपेशियों से जुड़ा होता है और मलाशय के निचले भाग या गुदे के आसपास स्थित होता है।

इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य हेमोर्रोइड के लक्षणों से निजात दिलाना है जिनपर दवाओं का कोई प्रभाव न पड़ रह हो। आम तौर पर यह लक्षण हैं- रक्तस्त्राव और दर्द। कुछ स्थितियों में यह मरीज़ के गुदे से बाहर निकल सकता है। कभी कभी, मरीज़ श्लेम (Mucus) स्त्रावित होता हुआ महसूस कर सकते हैं या उनको ऐसा लग सकता है कि पूर्ण रूप से मलत्याग नहीं हो पाया है।

हेमोर्रोइड इतने हानिकारक नहीं होते इसलिए इसे मेडिकल आपातकालीन स्थिति न मानते हुए पहले इलाज दवाओं या पथ्य-संबंधी उपायों की मदद से किया जाता है। कई मरीज़ों में हेमोर्रोइड के कोई लक्षण नहीं पाए जाते। 

सर्जरी की तैयारी के लिए आपको निम्न कुछ बातों का ध्यान रखना होगा और जैसा आपका डॉक्टर कहे उन सभी सलाहों का पालन करना होगा: 

  1. सर्जरी से पहले किये जाने वाले टेस्ट्स/ जांच (Tests Before Surgery)
  2. सर्जरी से पहले एनेस्थीसिया की जांच (Anesthesia Testing Before Surgery)
  3. सर्जरी की योजना (Surgery Planning)
  4. सर्जरी से पहले निर्धारित की गयी दवाइयाँ (Medication Before Surgery)
  5. सर्जरी से पहले फास्टिंग खाली पेट रहना (Fasting Before Surgery)
  6. सर्जरी का दिन (Day Of Surgery)
  7. सामान्य सलाह (General Advice Before Surgery)
  8. ध्यान देने योग्य अन्य बातें (Other Things To Be Kept In Mind Before Surgery)
    मलाशय के क्षेत्र और बड़ी आंत के निचले भाग को साफ़ करने के लिए मरीज़ों को कम मात्रा में सेलाइन एनिमा (Small-Volume Saline Enema) दिया जाता है। इससे सर्जन को सर्जरी की जगह साफ़ मिलेगी।

इन सभी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लिंक पर जाएँ - सर्जरी से पहले की तैयारी

हेमोर्रोइड को कम करने के लिए कई प्रकार की सर्जिकल प्रक्रियाओं का प्रयोग किया जा सकता है। ज़्यादातर प्रक्रियाएं आउट-पेशेंट (Out Patient; मरीज़ को सर्जरी के बाद अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती) आधार पर हो जाती हैं।

रबर-बैंड लिगेशन (Rubber-Band Ligation) एक प्रक्रिया है जो अंदरूनी हेमोर्रोइड, जो मल त्याग के ज़रिये बाहर निकलते हों, के लिए एक अच्छा उपचार है। हेमोर्रोइड पर एक छोटा रबर-बैंड लगाया जाता है जो रक्त की आपूर्ति को बंद करदेता है। हेमोर्रोइड और रबर-बैंड कुछ दिनों में निकल जायेंगे और घाव भी एक-दो हफ़्तों में भर जायेगा। इस प्रक्रिया में हलकी असुविधा और रक्तस्त्राव होता है। 

अन्य प्रक्रिया, जिसे स्क्लेरोथेरेपी (Sclerotherapy) कहा जाता है, में रक्त वाहिकाओं में एक रासायनिक सोल्युशन इंजेक्ट किया जाता है जिससे हेमोर्रोइड सुकड़ जाता है। तीसरा प्रभावशाली उपचार है अवरक्त स्‍कंदन (Infrared Coagulation), जिसमें हेमोर्रोइड के ऊतकों को ऊष्मा (Heating) से सिकोड़ा जाता है। दोनों प्रक्रियाओं, इंजेक्शन और स्कंदन, का प्रयोग हेमोर्रोइड, जिनसे रक्तस्त्राव हो और जो बाहर न निकल रहे हों, का प्रभावशाली रूप से उपचार करने एक लिए किया जा सकता है। कुछ सर्जन इन तीनों प्रक्रियाओं के संयोजन (Combination) का प्रयोग करते हैं और ये मेल 90.5% बार सफल भी हुआ है।

सर्जरी के बाद, मरीज़ को गुदे में गतिविधियों से दर्द हो सकता है। दर्द से निजात पाने हेतु डॉक्टर द्वारा आपको मादक दवाएं निर्धारित की जा सकती हैं। मलत्याग और मूत्रत्याग करते समय परेशानी न हो इसके लिए मरीज़ को स्टूल सॉफ्टनर (Stool Softener) लेनी चाहिए। गरम पानी से नहाने से थोड़ा आराम महसूस हो सकता है और लक्षणों से भी राहत मिल सकती है।

बवासीर के ऑपरेशन की सफलता दर काफी अच्छी रही है। इस प्रक्रिया के बाद लगभग दो हफ्ते में व्यक्ति रिकवर हो जाता है। अपने डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें। 

इस प्रक्रिया से जुड़े जोखिम निम्नलिखित हैं:

  1. संक्रमण
  2. रक्तस्त्राव
  3. एनेस्थीसिया के प्रति एलर्जिक रिएक्शन
  4. स्टेनोसिस (Stenosis; गुदा का संकुचन)
  5. हेमोर्रोइड की पुनरावृत्ति
  6. नालव्रण (Fistula) का गठन 
  7. घाव न भरना 
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