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हेमेरोइडेक्टोमी एक ऐसी सर्जरी है, जो कि बवासीर का ऑपरेशन करने के लिए की जाती है। ये सर्जरी तब की जाती है जब बवासीर में दर्द, खुजली और एनस के आसपास गांठें बन जाती हैं। हेमेरोइडेक्टोमी ओपन, क्लॉज्ड, स्टेपल्ड या रबर बैण्ड लिगेशन तकनीक द्वारा भी किया जा सकता है। इस सर्जरी में मरीज को सीडेटिव दिया जाता है और इसे पूरा होने में 45 मिनट से अधिक समय नहीं लगता है।

यह सर्जरी मुख्य रूप से बवासीर की सूजन व लालिमा से आराम पाने के लिए की जाती है। हालांकि, सर्जरी में सूजनरक्तस्त्राव का बहुत अधिक खतरा है जो कि कुछ हफ्तों तक रह सकता है। इस सर्जरी के बाद व्यक्ति को ठीक होने में दो से तीन हफ्ते का समय लगता है।

  1. डॉक्टर के पास कब जाएं - Bawaseer ke operation ke baad doctor ke pas kab jaein
  2. बवासीर का ऑपरेशन क्या होता है? - Piles surgery kya hai in hindi?
  3. पाइल्स का ऑपरेशन क्यों की जाता है? - Piles ki surgery kab kiya jata hai?
  4. बवासीर का ऑपरेशन कौन नहीं करा सकता है? - Piles ki surgery kise nahi karana chahiye?
  5. पाइल्स की सर्जरी से पहले की तैयारी - Piles ki surgery se pahle ki taiiyari
  6. बवासीर का ऑपरेशन कैसे किया जाती है? - Piles ka operation kaise kiya jata hai
  7. बवासीर के ऑपरेशन की जटिलताएं - Piles ke operation me jatiltaye
बवासीर का ऑपरेशन के डॉक्टर

आपको सर्जरी के दो से तीन हफ्ते बाद अस्पताल जाना होगा या फिर डिस्चार्ज के समय डॉक्टर के बताए अनुसार अस्पताल जाएं।

हेमेरोइडेक्टोमी गंभीर और बड़ी बवासीर को निकालने के लिए किया जाने वाला एक प्रभावी ऑपरेशन है।

बवासीर वे ऊतक होते हैं जो हमारी गुदा (जहां से आप मल त्यागते हैं) के अंदर या बाहर प्राकृतिक रूप से मौजूद होती हैं। ये ऊतक फिकल कॉन्टिनेंस के लिए बहुत लाभदायी होते हैं, फिकल कॉन्टिनेंस पेट की क्षमता होती है, जिसकी मदद से मल का रिसाव होने से रोका जाता है। हालांकि, जब इन नसों में दबाव बढ़ जाता है, वे बड़ी हो जाती हैं, चिपक जाती हैं और इनमें से खून आने लगता है इस स्थिति को आम भाषा में बवासीर या पाइल्स कहा जाता है।

पाइल्स या बवासीर का सबसे सामान्य कारण कब्ज है। अन्य कारणों में गर्भावस्था, शिशु का जन्म, मोटापा और शारीरिक तनाव हो सकता है। बवासीर के निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं -

  • गुदा के आसपास दर्द
  • पतला मल
  • लाल रंग का मल
  • गुदा में खुजली
  • एनस के आसपास गाँठ

बवासीर के मुख्य तीन प्रकार होते हैं - आंतरिक, प्रोलैप्सड और बाहरी। आंतरिक बवासीर एनस के अंदर मौजूद होती है। प्रोलैप्सड बवासीर एनस से बाहर फूल कर आ जाती है और बाहरी बवासीर एनस के बाहर मौजूद होती है। अत्यधिक बवासीर को बिना सर्जरी की ठीक किया जा सकता है, जिनमें इलाज में दवाएं, आहार और व्यायाम शामिल हैं। डॉक्टर इस सर्जरी की सलाह तब दे सकते हैं जब बवासीर पर दवाओं आदि का कोई प्रभाव न हो और वे बहुत बड़ी हो या फिर आपको दर्दनाक लक्षणों से आराम देने के लिए भी यह किया जा सकता है।

हालांकि बवासीर के ऑपरेशन में अत्यधिक जटिलताएं हो सकती हैं और यह स्थिति वापस से भी हो सकती है।

डॉक्टर इस सर्जरी की सलाह निम्न कारणों से देते हैं -

  • बवासीर के दर्द और बेचैनी से राहत देने के लिए
  • गुदा से ब्लीडिंग को रोकने के लिए

निम्न तरह के लोग बवासीर का ऑपरेशन करवा सकते हैं -

  • जिन्हें आंतरिक बवासीर हो और उसका आकार बहुत बड़ा हो
  • आंतरिक बवासीर जो नॉन सर्जिकल ट्रीटमेंट से ठीक न हो पा रही हो 
  • बड़े बाहरी पाइल्स
  • बाहरी व आंतरिक बवासीर
  • स्ट्रेंग्युलेटेड हेमरॉइड - एक स्थिति जिसमें एनल स्फिंक्टर हेमरॉइड तक रक्त पहुंचाने में अवरोध उतपन्न करती है, जिसके कारण यह दब जाती है।

बवासीर का ऑपरेशन करवाने की सलाह निम्न स्थितियों से ग्रस्त लोगों को नहीं दी जाती है -

  • सामान्य एनेस्थीसिया से एलर्जी या फिर कुछ विशेष दवाओं के प्रति एलर्जी या हृदय, किडनी और फेफड़ों से जुड़ा कोई रोग
  • रेक्टोसिल - एक स्थिति जिसमें योनि और रेक्टम (बड़ी आंत का आखिरी हिस्सा) को अलग करने वाले ऊतक फूल जाते हैं।
  • अनियंत्रित रक्तस्त्राव संबंधी विकार (स्थितियां जैसे हीमोफीलिया ए, हेमोफिलिया बी और नॉन विल्लेब्रांड रोग जिसमें रक्त के थक्का जमने की स्थिति प्रभावित हो जाती है)
  • इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (वे रोग जिनमें पाचन तंत्र में सूजन आ जाती है) जैसे अल्सरेटिव कोलाइटिस या क्रोन रोग
  • रेक्टल वेरिसेस (एक स्थिति जिसमें रेक्टम की कुछ नसें फूल जाती हैं) के साथ पोर्टल हाइपरटेंशन का होना (धमनियों में रक्त प्रवाह का बढ़ना) पोर्टल वेन (वह नस जो पाचन अंगों से लिवर तक रक्त को ले जाती है)
  • बेस लाइन फिल इनकॉन्टिनेंस (मल पर नियंत्रण न रख पाना)

आपको बवासीर का ऑपरेशन करवाने से पहले निम्न चीज़ों का ध्यान रखना होगा -

  • अपने डॉक्टर को बताएं -
    • यदि आप गर्भवती हैं
    • आप जो भी दवा, सप्लीमेंट, हर्बल दवाएं, विटामिन, ड्रग्स आदि ले रहे हैं
    • यदि आप दिन में दो गिलास से ज्यादा शराब पीते हैं
    • यदि आपको फ्लू, जुकाम, बुखार या अन्य कोई बीमारी है

डॉक्टर आपको कुछ समय के लिए कुछ दवाएं लेने को मना कर सकते हैं जैसे आइबूप्रोफेन, एस्पिरिन, नेप्रोक्सेन, वार्फरिन, क्लोपिडोग्रेल आदि। आप सर्जरी के समय तक कौन सी दवा ले सकते हैं, इसके बारे में डॉक्टर से बातचीत कर लें।

डॉक्टर आपको सर्जरी से खाने-पीने के निर्देश देंगे कि आपको किस समय आपको खाना-पीना छोड़ना है। साथ ही यदि आपसे किसी भी तरह की दवा लेने को कहा जाए तो आपको उसे थोड़े से पानी के साथ लेना है क्योंकि पानी पीने से मना किया जाएगा। यदि आप धूम्रपान करते हैं तो यह छोड़ दें। धूम्रपान से आपका ठीक होने का समय बढ़ जाएगा।

सर्जरी अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर या फिर कन्सल्टिंग रूम में सर्जन द्वारा की जा सकती है। यह प्रक्रिया शुरु करने से पहले आपको जनरल एनेस्थीसिया दिया जाएगा ताकि आप प्रक्रिया के दौरान सो जाएं और आपको दर्द महसूस न हो।

बवासीर का ऑपरेशन निम्न में से किसी भी प्रक्रिया द्वारा किया जा सकता है -

  • क्लोज्ड हैमोरोइडेक्टोमी -
    यह सबसे सामान्य तौर पर प्रयोग किया जाने वाला एक तरीका है, जिसका प्रयोग आंतरिक बवासीर का इलाज करने के लिए किया जाता है। पाइल्स को किसी तेज धार उपकरण द्वारा निकाला जाएगा जैसे कैंची, स्केपल्स या फिर लेज़र। इसके बाद घाव को सिल कर बंद कर दिया जाएगा। ये टांकें आमतौर पर सात से दस दिनों में ठीक हो जाते हैं। इस प्रक्रिया की सफल होने के 95 प्रतिशत संभावना होती है।
     
  • ओपन हैमोरोइडेक्टोमी -
    यह प्रक्रिया क्लोज्ड हैमोरोइडेक्टोमी की ही तरह है। हालांकि इसमें पाइल्स को हटा कर घाव को खुला छोड़ा जाता है। यह तब किया जाता है जब पाइल्स की संख्या और स्थिति इस तरह से होती है कि घाव को बंद करने पर संक्रमणचोट लगने का खतरा बहुत अधिक होता है।
     
  • स्टेपल्ड हैमोरोइडेक्टोमी -
    इस प्रक्रिया में एक गोल स्टेपलिंग उपकरण का प्रयोग कर के पाइल्स के बड़े हिस्से को निकाला जाता है। यह प्रक्रिया उन लोगों में की जाती है जिन्हें बार-बार बवासीर होती है।
     
  • रबर बैंड लिगेशन -
    रबर बैंड लिगेशन आमतौर पर आंतरिक हेमोरोइड्स के लिए की जाती है। डॉक्टर आपके एनस में एक एनोस्कोप डालते हैं ताकि पाइल्स को देखा जा सके। एक विशेष उपकरण की मदद से पाइल्स के निचले हिस्से को रबर बैंड से बाँधा जाएगा जिससे ऊतक में रक्त का प्रवाह रुक जाएगा और कुछ ही दिनों में हेमोरोइड्स सूख जाएंगे।

इस प्रक्रिया को पूरा होने में जो भी समय लगेगा वो इस बात पर निर्भर करता है कि पाइल्स किस जगह पर है और कितनी संख्या में हैं। आमतौर पर इस प्रक्रिया में 15 से 45 मिनट तक का समय लगता है।

सर्जरी के बाद आपको दूसरे कमरे में भेज दिया जाएगा और आपको एनेस्थीसिया के कारण हुई सुस्ती से ठीक होने के लिए छोड़ दिया जाएगा। मेडिकल स्टाफ एक पतला कपड़ा आपके एनस में दाल देंगे। जब तक डॉक्टर आपको विशेष निर्देश न दें तब तक उस कपड़े को न निकाले हालांकि जब आपको मल त्यागने जाना होगा तो यह स्वयं ही बाहर आ जाएगा।

साथ ही यदि आपको अभी भी सुस्ती महसूस हो रही है तो आपको लोकल एनेस्थीसिया दिया जाएगा जिसके कारण आपको 6 से 12 घंटे तक दर्द महसूस नहीं होगा। सर्जरी के बाद आपको रात भर अस्पताल में रहने को कहा जा सकता है। जैसे ही आपके शरीर से जनरल एनेस्थिसिया का असर कम हो जाए तो आप एक बार पेशाब कर आएं। ताकि यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपको एनेस्थीसिया व सर्जरी के बाद कोई भी समस्या नहीं है।

आपको घर जाने के लिए किसी रिश्तेदार, मित्र या परिवारजन की जरूरत पड़ेगी।

इस सर्जरी से निम्न खतरे जुड़े हो सकते हैं -

  • चक्कर या कमजोरी - ये लक्षण सात से दस दिनों तक रह सकते हैं।
  • अनियमित अंतराल में ब्लीडिंग - यह चार हफ्ते तक रह सकती है।
  • सर्जरी के बाद दर्द - डॉक्टर आपको इस के लिए दवाएं देंगे।
  • कब्ज - आपको कब्ज से बचने के लिए फाइबर युक्त आहार लेने होंगे।
  • सर्जरी के स्थान पर संक्रमण - यह सर्जरी के बाद आमतौर पर नहीं होता है। यदि आपको सर्जरी के स्थान पर गर्माहट और लालिमा महसूस हो रही है तो डॉक्टर को तुरंत बताएं।
  • अत्यधिक रक्तस्त्राव - यदि आपको सर्जरी के चार हफ़्तों बाद भी ब्लीडिंग हो रही है, तो इसके बारे में डॉक्टर को बता दें।
  • मल त्याग करने की प्रक्रिया अनियंत्रित हो जाना -  यह होने का खतरा बहुत ही कम है लेकिन जिन महिलाओं के एनल स्फिंक्टर में क्षति हुई है या जिनकी एनल सर्जरी हुई है उन्हें इसका खतरा अधिक हो सकता है।
  • दोबारा बवासीर हो जाना
  • पेशाब करने में तकलीफ
  • एनल के हिस्से में संक्रमण

यदि आपको निम्न लक्षण दिखाई देते हैं तो डॉक्टर को तुरंत सूचित करें -

  • तेज बुखार
  • गंभीर रक्तस्त्राव
  • कब्ज जो कि दवा लेने के बाद भी तीन दिन से ज्यादा हो गई है 
  • पेशाब करने में समस्या
  • लालिमा और दर्द
  • अत्यधिक सूजन या स्त्राव आना
Dr Darwin P

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संदर्भ

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