एपिफिसिओडेसिस एक सर्जरी प्रोसीजर है, जिसकी मदद से किसी व्यक्ति की बांह या टांग की असामान्य लंबाई को ठीक किया जाता है। कई बार टांग संबंधी विकृति को ठीक करने के लिए भी एपिफिसिओडेसिस सर्जरी की जा सकती है।

घुटने के जोड़ के आसपास ग्रोथ प्लेट होती हैं, जो बच्चे की विकास की उम्र के दौरान टांग की लंबाई को बढ़ाने का काम करती है। हालांकि, कुछ स्थितियां हैं, जिसमें एक टांग दूसरी से लंबी हो जाती है या फिर कोई अन्य विकृति हो जाती है।

एपिफिसिओडेसिस सर्जरी की मदद से लंबी टांग को बढ़ने से रोक दिया जाता है, ताकि दूसरी टांग लंबी होकर उसके सामान आ जाए। यह सर्जरी आमतौर पर किशोरावस्था में ही की जाती है। इस सर्जरी को आमतौर पर जनरल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाकर किया जाता है, जिससे बच्चा सर्जरी के दौरान सोता रहता है और उसे कुछ महसूस नहीं होता है। एपिफिसिओडेसिस को कई अलग-अलग सर्जिकल प्रोसीजर के अनुसार किया जाता है, जिनमें से मुख्य रूप से “एट प्लेट मेथड” को किया जाता है। इस मेथड में सर्जन लंबी टांग में मौजूद ग्रोथ प्लेट के ऊपर या दोनों तरफ एक धातु की प्लेट लगा देते हैं, जिससे टांग के बढ़ने की गति रुक जाती है। सर्जरी वाले दिन ही बच्चे को अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है। हालांकि, अस्पताल से छुट्टी मिलने के दो हफ्तों बाद डॉक्टर आपको फिर से अस्पताल बुलाते हैं, जिसमें सर्जरी के बाद की आवश्यक जांच की जाती हैं।

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  1. एपिफिसिओडेसिस क्या है - What is Epiphysiodesis in Hindi
  2. एपिफिसिओडेसिस किसलिए की जाती है - Why is Epiphysiodesis in Hindi
  3. एपिफिसिओडेसिस से पहले - Before Epiphysiodesis in Hindi
  4. एपिफिसिओडेसिस के दौरान - During Epiphysiodesis in Hindi
  5. एपिफिसिओडेसिस के बाद - After Epiphysiodesis in Hindi
  6. एपिफिसिओडेसिस की जटिलताएं - Complications of Epiphysiodesis in Hindi

एपिफिसिओडेसिस किसे कहते हैं?

एपिफिसिओडेसिस एक सर्जरी प्रोसीजर है, जिसे टांग की असामान्य लंबाई या अन्य किसी विकृति को ठीक करने के लिए किया जाता है।

घुटने का जोड़ फीमर, फेब्युला और टिबिया नामक हड्डियों से मिलकर बना होता है। फीमर जांघ की हड्डी होती है और फेब्युला व टिबिया पिंडली की हड्डियां होती हैं। इन हड्डियों के ऊपर एक तिकोनी हड्डी होती है, जिसे नीकैप कहा जाता है। टिबिया व फीमर का जो हिस्सा घुटने के जोड़ के पास होता है, उसमें ग्रोथ प्लेट होती हैं, जो बच्चों के विकास के चरणों में टांग की लंबाई बढ़ाती है। हालांकि, कुछ समस्याएं जैसे टांग में चोट लगना, टांग संबंधी कोई रोग, ट्यूमर या नसों संबंधी रोगों के कारण ये ग्रोथ प्लेट प्रभावित हो जाती हैं। ग्रोथ प्लेट किसी कारण से प्रभावित होने के कारण एक टांग की लंबाई दूसरी से छोटी या बड़ी हो जाती है या टांग संबंधी कोई अन्य विकृति हो जाती है जैसे टांग का अंदर या बाहर की तरफ मुड़ना।

किशोरावस्था के दौरान जब बच्चे के अंग लगातार विकसित हो रहे होते हैं, तो ऐसी स्थितियों को ठीक करने के लिए एपिफिसिओडेसिस सर्जरी की जाती है। इस सर्जरी की मदद से लंबी टांग को बढ़ने से रोक दिया जाता है, ताकि छोटी वाली टांग लंबी होकर उसके बराबर आ जाए।

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एपिफिसिओडेसिस सर्जरी क्यों की जाती है?

एपिफिसिओडेसिस आमतौर पर उन बच्चों या किशोरों के लिए की जाती है, जिनकी दोनों टांगों की लंबाई एक समान नहीं है या फिर टांग संबंधी कोई अन्य विकृति है जैसे घुटने अंदर या बाहर की तरफ मुड़े हुए होना। टांग की लंबाई या अन्य कोई विकृति होने से निम्न लक्षण पैदा हो सकते हैं -

  • एक टांग दूसरी से लंबी होना
  • चलते समय पैर के अंगूठे पर जोर देना
  • लंगड़ाते हुए चलना या चलने संबंधी अन्य कोई दिक्कत होना
  • कंधा एक तरफ झुका होना या शरीर के पोस्चर संबंधी अन्य कोई असामान्यता
  • कमर, कूल्हे, घुटने और टखने के जोड़ में कोई दिक्कत होना

टांगों में कोणीय विकृति जैसे घुटने का अंदर या बाहर की तरफ मुड़ना आदि बच्चों में देखे जाने वाले मुख्य लक्षण हैं। यदि घुटने अंदर की तरफ मुड़ गए हैं, तो इस स्थिति को नॉक नी (Knock knees) कहा जाता है और यदि घुटने एक दूसरे से बाहर की तरफ मुड़ रहे हैं, तो इस स्थिति को बोअड लेग (Bowed leg) कहा जाता है।

सर्जरी के लिए उचित समय बहुत ही आवश्यक होता है, क्योंकि सर्जरी का उद्देश्य छोटी टांग को बड़ी टांग तक पहुंचाना है और ऐसा सिर्फ तभी संभव है यदि बच्चे का शरीर अभी विकसित हो रहा हो। उदाहरण के लिए यदि बच्चे का शरीर बढ़ना बंद हो गया है, तो इस सर्जरी से मदद संभव नहीं है।

इसके अलावा कुछ अन्य स्थितियां भी हैं, जिनमें एपिफिसिओडेसिस सर्जरी करने पर विचार किया जा सकता है जैसे बांह संबंधी विकृति होना और नी फ्लेक्शन डिफॉर्मिटी (घुटने को पूरी तरह से सीधा न कर पाना) आदि। यह सर्जरी उन लड़कों की भी की जा सकती है, जिनकी लंबाई साढ़े छह फीट से ज्यादा होने का अनुमान है।

एपिफिसिओडेसिस किसे नहीं करवानी चाहिए?

कुछ स्थितियों में बच्चों के लिए एपिफिसिओडेसिस सर्जरी नहीं की जा सकती है, जिनमें निम्न शामिल हैं -

  • दोनों टांगों का संरेखण असामान्य होना, जो समय के साथ अपने आप ठीक हो जाता है
  • यदि टांग ने सामान्य रूप से विकसित होना बंद कर दिया है
  • परिपक्वता के कारण हड्डियों का सामान्य विकार पूरा हो जाना

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एपिफिसिओडेसिस से पहले क्या तैयारी की जाती है?

एपिफिसिओडेसिस सर्जरी से पहले बच्चे का शारीरिक परीक्षण किया जाता है और कुछ विशेष टेस्ट किए जाते हैं, जिनकी मदद से बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति की जांच की जाती है और उसकी टांग की लंबाई को नापा जाता है। आपसे बच्चे के स्वास्थ्य संबंधी पिछली सभी जानकारियां ली जाएंगी और साथ ही बच्चा कोई दवा ले रहा है या नहीं आदि के बारे में पूछा जाएगा।

डॉक्टर बच्चे की टांग में असामान्यता का पता लगाने के लिए उसे नंगे पांव खड़ा करते हैं और छोटी टांग के नीचे लकड़ी का एक विशेष ब्लॉक रखते हैं। लकड़ी के ब्लॉक से दोनों टांगों के अंतर का अंदाजा लगाया जाता है। इसके अलावा डॉक्टर कुछ इमेजिंग टेस्ट करवाने की सलाह भी दे सकते हैं, जैसे एक्स रेसीटी स्कैन आदि। इन सभी इमेजिंग परीक्षणों की मदद से प्रभावित जोड़ की अंदरूनी संरचना संबंधी जानकारी मिलती है और अंदाजा लगाया जाता है कि स्थिति कितनी गंभीर है। बच्चे को हर महीने टेस्ट करवाने की सलाह भी दी जा सकती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंदरूनी हिस्से में कमी आ रही है या नहीं। साथ ही बच्चे के कुछ विशेष ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट भी कराने पड़ सकते हैं, ताकि यदि कोई अंदरूनी समस्या है, तो सर्जरी शुरू करने से पहले ही उसका इलाज किया जा सके।

बच्चे को सर्जरी के लिए तैयार करने के लिए सर्जन कुछ विशेष दिशानिर्देश देते हैं, जैसे -

  • यदि बच्चा कोई रक्त को पतला करने वाली दवा ले रहा है, जैसे एस्पिरिन, वारफेरिन या विटामिन ई आदि, तो सर्जन सर्जरी से कुछ दिन पहले इनका सेवन न करने की सलाह दे सकते हैं।
  • ऑपरेशन के लिए अस्पताल आने से पहले बच्चे को नहलाने की सलाह दी जाती है। यदि बच्चे को कोई आभूषण या अन्य कोई गैजेट पहनाया है, तो उसे अस्पताल आने से पहले घर पर ही उतार दें।
  • सर्जरी के लिए बच्चे को खाली पेट रखना पड़ता है, इसलिए सर्जरी वाले दिन से पहली आधी रात के बाद उसे कुछ भी खाने या पीने को न दें। खाली पेट रहने से बच्चे के सर्जरी के दौरान उल्टी व मतली की समस्याएं नहीं होती हैं, जो कि एनेस्थीसिया का साइड इफेक्ट होता है।
  • यदि सर्जरी से दो चार दिन पहले बच्चे को बुखार, जुकाम या फ्लू जैसे लक्षण होने लगे हैं, तो डॉक्टर को इस बारे में सूचित कर दें। ऐसी स्थिति में सर्जरी को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है।
  • सर्जन सर्जरी से संबंधित सभी जानकारियों, फायदे व नुकसान आदि सभी को आपके साथ साझा करेंगे। यदि आपको सर्जरी से संबंधित कोई भी समस्या है, तो आपको इस बारे में डॉक्टर से पूछ लेना चाहिए।

अंत में आपको एक सहमति पत्र दिया जाता है, जिस पर हस्ताक्षर करके आप सर्जन को सर्जरी करने की अनुमति दे देते हैं। हालांकि सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले उस पर दिए गए सभी निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़-सुन लेना चाहिए।

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एपिफिसिओडेसिस सर्जरी कैसे की जाती है?

जब आप ऑपरेशन के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं, तो बच्चे को पहनाने के लिए एक विशेष ड्रेस दी जाती है, जिसे “हॉस्पिटल गाउन” कहा जाता है। ड्रेस पहनाकर ऑपरेशन थिएटर ले जाया जाता है, जहां पर बच्चे की बांह या हाथ की नस में सुई लगाकर इंट्रावेनस लाइन शुरू की जाती है। इंट्रावेनस ड्रिप की मदद से बच्चे को सर्जरी के दौरान दवाएं व अन्य आवश्यक द्रव दिए जाते हैं।

यह सर्जरी जनरल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाकर की जाती है, जिससे बच्चा सर्जरी के दौरान गहरी नींद में रहता है और उसे कुछ महसूस नहीं होता है। जिस टांग की सर्जरी की जानी है, उसे जांघ से पैर तक ढक दिया जाता है। इस सर्जरी को आमतौर पर किसी इमेजिंग तकनीक की मदद से किया जाता है, जैसे फ्लोरोस्कॉपी। एपिफिसिओडेसिस करने की कई अलग-अलग सर्जरी प्रोसीजर हैं, जिनमें 8 प्लेट मेथड सबसे मुख्य है।

एपिफिसिओडेसिस को 8 प्लेट मेथड प्रोसीजर से कुछ इस प्रकार किया जाता है -

  • इसमें सर्जन बच्चे के घुटने के एक तरफ 2 से 3 सेमी लंबा चीरा लगाते हैं, जिसके अंदर से एक विशेष धातु प्लेट डाली जाती है। इस प्लेट को इस प्रकार डाला जाता है कि यह ग्रोथ प्लेट के ठीक ऊपर आ जाए और फिर इसके पेच की मदद से प्लेट को वहीं पर स्थिर कर दिया जाता है। यदि घुटने अंदर या बाहर की तरफ मुड़े हुए हैं, तो उसे ठीक करने के लिए धातु के प्लेट को एक तरफ की ग्रोथ प्लेट पर रख दिया जाता है, जिससे घुटने का एक तरफ का हिस्सा बढ़ना बंद कर देता है। हालांकि, यदि टांग छोटी बड़ी है, तो मेटल प्लेट को घुटने के दोनों तरफ की ग्रोथ प्लेट पर रखा जाता है। एट प्लेट मेथड रिवर्सिबल है, जिसका मतलब है कि जब इस प्रोसीजर से टांग ठीक हो जाती है, तो इन प्लेट को निकाला जा सकता है।

इसके अलावा कुछ अन्य मेथड भी हैं, जिनकी मदद से एपिफिसिओडेसिस सर्जरी की जा सकती है। इनमें मुख्य रूप से स्टेपलिंग व परक्यूटीनियस एपिफिसिओडेसिस आदि शामिल हैं, जो इस प्रकार हैं -

  • स्टेपलिंग मेथड -
    8 प्लेट मेथड की तरह ही यह भी एक रिवर्सिबल प्रोसीजर है, जिसमें ग्रोथ प्लेट के दोनों तरफ कहीं भी तीन स्टेपल लगा दिए जाते हैं, जिससे उस हिस्से का विकास रुक जाता है।
     
  • पेट्स -
    यह एपिफिसिओडेसिस की एक स्थायी तकनीक है, जिसमें ग्रोथ प्लेट में स्थायी रूप से पेच लगा दिए जाते हैं। इसमें ये पेच एक दूसरे के समानांतर या फिर आड़े-तिरछे लगाए जाते हैं, ताकि हड्डी की ग्रोथ रुक जाए। इसके लिए सर्जन घुटने के एक तरफ एक छोटा सा चीरा (1 सेमी लंबा) लगाते हैं और उसकी मदद से ग्रोथ प्लेट में छिद्र किया जाता है। इस छिद्र में पेच लगा दिया जाता है और फिर चीरे को बंद कर दिया जाता है।

इस सर्जरी प्रोसीजर में आमतौर पर ऐसे टांके लगाए जाते हैं, जो अपने आप त्वचा में अवशोषित हो जाते हैं। सर्जरी के बाद आपको मुंह में सूखापन, बेचैनी और गले में दर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं, जो कुछ घंटों में ठीक हो जाते हैं। अधिकतर बच्चों को सर्जरी वाले दिन ही अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है।

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एपिफिसिओडेसिस सर्जरी के बाद की देखभाल कैसे करें?

सर्जरी के बाद जब आपको अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है, तो डॉक्टर व फीजियोथेरेपिस्ट आपको निम्न बातों का ध्यान रखने की सलाह देते हैं -

  • अस्पताल से छुट्टी मिलने के दौरान सर्जरी वाले घाव पर पट्टी बंधी होती है। इस हिस्से को तीन से पांच दिनों तक सूखा व साफ रखा जाना चाहिए। यदि किसी कारण के पट्टी गीली हो गई है, तो उसे डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की मदद से बदल लेना चाहिए।
  • जब पट्टी उतर जाती है, तो बच्चे को नहाने व शॉवर लेने की अनुमति दी जाती है। हालांकि, स्विमिंग या पूल में नहाने से पहले डॉक्टर से अनुमति अवश्य लें।
  • सर्जरी के बाद कुछ समय तक दर्द रह सकता है, इसके लिए डॉक्टर दर्द निवारक दवाएं देते हैं। इन दवाओं को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेना चाहिए।
  • सर्जरी के बाद उस हिस्से पर कुछ समय के लिए सूजन होना भी आम बात है, जिसके लिए डॉक्टर समय-समय पर बर्फ की सिकाई करने की सलाह देते हैं। हालांकि, बर्फ को सीधे त्वचा पर नहीं लगाना चाहिए, उसे तौलिये या अन्य किसी कपड़े में लपेट कर ही इस्तेमाल करना चाहिए।
  • सोते समय सर्जरी वाले घुटने के नीचे कोई तकिया आदि न रखें, इससे टांग सीधी नहीं हो पाती है और घाव को ठीक होने में अधिक समय लगता है।
  • बच्चे के स्वस्थ होने के बाद उसे धीरे-धीरे शारीरिक गतिविधियां शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करें।
  • चलने, सीढ़ियां चढ़ने या अन्य कोई शारीरिक गतिविधियां करते समय डॉक्टर या फीजियोथेरेपिस्ट द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों का पालन करें।
  • डॉक्टर सर्जरी के बाद कुछ विशेष एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं, जिनसे सर्जरी के घाव को जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है। इन एक्सरसाइज को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
  • जब सर्जरी के बाद दर्द होना बंद हो गया है और बच्चा आराम से चल फिर पा रहा है, तो ऐसे में डॉक्टर बच्चे को स्कूल जाने की अनुमति दे सकते हैं।
  • बच्चे को सर्जरी के बाद छह हफ्तों तक किसी भी शारीरिक गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए, जिसमें अधिक शारीरिक मेहनत लगती हो जैसे दौड़ना, कूदना या फुटबॉल जैसे खेल खेलना आदि।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

यदि आपको सर्जरी के बाद निम्न में से कोई भी समस्या महसूस होती है, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए -

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एपिफिसिओडेसिस से क्या जोखिम हो सकते हैं?

एपिफिसिओडेसिस सर्जरी से कुछ जोखिम व जटिलताएं हो सकती हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -

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संदर्भ

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