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पेनाइल इंप्लांट या पेनाइल प्रोस्थेसिस का इस्तेमाल स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिस्फंक्शन) का इलाज करने के लिए किया जाता है। स्तंभन दोष पुरुषों में होने वाला एक ऐसा विकार है, जिसमें यौन संबंध बनाते समय लिंग में तनाव नहीं आ पाता है या फिर तनाव बहुत ही कम समय के लिए रहता है। यह सर्जरी तब की जाती है, जब इस स्थिति का इलाज करने के लिए अन्य सभी उपचार प्रक्रियाएं काम न कर पाई हों। पेनाइल इंप्लांट दो अलग-अलग प्रकारों में उपलब्ध हैं, जिन्हें नॉन-इंफ्लेटेबल इंप्लांट और इंफ्लेटेबल इंप्लांट के नाम से जाना जाता है। नॉन इंफ्लेटेबल इंप्लांट में स्थायी रूप से तनाव रहता है और इंफ्लेटेबल इंप्लांट में सिलेंडर, रिजरवियर और पंप काम करता है।

इस सर्जरी को जनरल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाकर किया जाता है, जिसकी मदद से आप सर्जरी के दौरान गहरी नींद में सो जाते हैं और आपको कोई दर्द या तकलीफ महसूस नहीं होती है। इस प्रोसीजर को पूरा करने में एक से दो घंटे का समय लगता है। सर्जरी के बाद आपको एक दिन या उससे भी अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रखा जा सकता है। सर्जरी के लगभग दो हफ्ते बाद आपको अस्पताल बुलाया जाता है, जिस दौरान देखा जाता है कि सर्जरी ठीक से हो गई है या नहीं। इस दौरान आपको प्रोस्थेसिस के काम करने की प्रक्रिया आदि के बारे में समझाया जाता है। सर्जरी के बाद कम से कम छह हफ्तों तक आपको कोई भी यौन गतिविधि करने से मना किया जाता है। इस सर्जरी से अधिकतर लोग संतुष्ट हो जाते हैं।

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  1. पेनाइल इंप्लांट क्या है - What is Penile Implant in Hindi
  2. पेनाइल इंप्लांट किसलिए किया जाता है - Why is Penile Implant done in Hindi
  3. पेनाइल इंप्लांट से पहले - Before Penile Implant in Hindi
  4. पेनाइल इंप्लांट के दौरान - During Penile Implant in Hindi
  5. पेनाइल इंप्लांट के बाद - After Penile Implant in Hindi
  6. पेनाइल इंप्लांट की जटिलताएं - Complications Penile Implant in Hindi
पेनाइल इम्प्लांट सर्जरी के डॉक्टर

पेनाइल इंप्लांट किसे कहते हैं?

पेनाइल इंप्लांट एक विशेष डिवाइस है, जिसे स्तंभन दोष के ग्रस्त पुरुष के लिंग में लगाया जाता है। यह डिवाइस लिंग में तनाव लाने में मदद करती है और इसे सिर्फ तब ही किया जाता है जब अन्य कोई भी इलाज प्रक्रिया काम न कर पाए।

स्तंभन दोष पुरुषों में होने वाला एक विकार है, जिसमें वे यौन संबंध बनाने के लिए लिंग में पूरी तरह से तनाव नहीं ला पाते  हैं या फिर उनके लिंग में तनाव बहुत ही कम समय के लिए रहता है। यह 40 साल से ऊपर के पुरुषों में एक प्रचलित बीमारी है। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन कई स्थितियों के कारण हो सकता है जैसे चोट लगना, हार्मोन संबंधी समस्याएं, लिंग में रक्त वाहिकाएं संकुचित होना (डायबिटीज या हाई बीपी से संबंधित समस्या) और अन्य कई मानसिक व भावनात्मक समस्याएं आदि। इस समस्या को आमतौर पर दवाओं, इंजेक्शन और अन्य कई थेरेपी की मदद से ठीक किया जा सकता है। हालांकि, यदि ये उपचार प्रक्रियाएं काम न कर पाएं, तो फिर पेनाइल इंप्लांट प्रोसीजर की जाती है।

इस प्रोसीजर में पेनाइल इंप्लांट नामक एक विशेष उपकरण को कॉर्पोरा केवरनोसा की जगह पर डाला जाता है। ये इंप्लांट मुख्य रूप से दो प्रकारों में उपलब्ध हैं, जो कि निम्न हैं -

  • नॉन इंफ्लेटेबल इंप्लांट -
    इन इंप्लांट में दो सिलेंडर होते हैं, जिन्हें लिंग के अंदर लगा दिया जाता है। इस इंप्लांट के लगने के बाद लिंग में स्थायी रूप से तनाव आ जाता है। इसमें यौन गतिविधियां करने के दौरान लिंग को सीधा कर दिया जाता है और बाकी समय लिंग नीचे लटका रहता है।
     
  • इंफ्लेटेबल इंप्लांट -
    इस इंप्लांट डिवाइस में दो सिलेंडर, एक रिजरवियर और एक पंप होता है। रिजरवियर में नमक वाला पानी होता है। पंप इस नमक वाले पानी को सिलेंडर तक पहुंचा देता है, जिससे इन सिलेंडर में तनाव आ जाता है। इंफ्लेटेबल इंप्लांट दो प्रकार के होते हैं -
    • टू-चैंबर इंफ्लेटेबल इंप्लांट
    • थ्री-चैंबर इंफ्लेटेबल इंप्लांट

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पेनाइल इंप्लांट क्यों किया जाता है?

यह सर्जरी प्रोसीजर मुख्य रूप से स्तंभन दोष से ग्रस्त लोगों के लिए की जाती है। स्तंभन दोष विकसित होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें मुख्य रूप से डायबिटीज (जो रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करती है), पहले कभी पेल्विस की सर्जरी हुई होना, पेल्विस या जननांगों में चोट लगना आदि शामिल हैं। इसके अलावा पेरोनी रोग से ग्रस्त पुरुषों और जिनके लिंग में असाधारण रूप से टेढ़ापन है उनके लिए भी पेनाइल इंप्लांट सर्जरी की जा सकती है।

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पेनाइल इंप्लांट सर्जरी किसे नहीं करवानी चाहिए?

निम्न स्थितियों से ग्रस्त पुरुषों में यह सर्जरी नहीं की जाती है या फिर विशेष ध्यान रखते हुए की जाती है -

  • बार-बार मूत्र प्रणाली में संक्रमण होना
  • डायबिटीज ठीक से कंट्रोल न होना
  • रीढ़ की हड्डी में चोट लगना,
  • इम्यूनोसुप्रासिव थेरेपी
  • मानसिक समस्याओं के कारण स्तंभन की समस्या होना

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पेनाइल इंप्लांट सर्जरी से पहले क्या तैयारी की जाती है?

सर्जरी से कम से कम दो हफ्ते पहले आपको अस्पताल बुलाया जाता है, जहां पर कुछ विशेष टेस्ट किए जाते हैं। इन टेस्टों की मदद से यह सुनिश्चित किया जाता है कि आपका शरीर सर्जरी के लिए पूरी तरह से तैयार है या नहीं। इन टेस्टों में निम्न शामिल हैं -

  • ब्लड टेस्ट
  • शारीरिक परीक्षण
  • हृदय, छाती व पेट की जांच करना

इस दौरान डॉक्टर आपसे आपके स्वास्थ्य संबंधी पिछली सभी जानकारी लेंगे और आपको पूछा जाएगा कि आपको कोई रोग (जैसे ब्लड प्रेशर या डायबिटीज आदि) या एलर्जी तो नहीं है। साथ ही पेनाइल इंप्लांट सर्जरी से पहले आपको निम्न सलाह दी जाती हैं -

  • यदि आप किसी भी प्रकार की कोई दवा, हर्बल उत्पाद, विटामिन, मिनरल या अन्य कोई सप्लीमेंट ले रहे हैं, तो इस बारे में डॉक्टर को बता दें। डॉक्टर इनमें से कुछ दवाओं को थोड़े समय के लिए बंद करने की सलाह दे सकते हैं, जिनमें मुख्य रूप से रक्त पतला करने वाली दवाएं शामिल हैं जैसे वार्फेरिन, आइबुप्रोफेन और एस्पिरिन आदि।
  • यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो इसे भी सर्जरी से पहले और बाद में कुछ समय तक छोड़ने की सलाह दी जा सकती है।
  • ऑपरेशन वाले दिन आपको खाली पेट अस्पताल आने को कहा जाता है, जिसके लिए आपको सर्जरी से पहली आधी रात के बाद कुछ भी खाने या पीने से मना किया जाता है।
  • सर्जरी वाले दिन अस्पताल आने से पहले नहा लें व मेकअप न करें और यदि आपने कोई आभूषण या गैजेट (जैसे घड़ी या ब्लूटूथ) आदि पहना है तो उसे भी उतारकर घर पर ही रख दें।
  • सर्जरी वाले दिन आपको अपने साथ किसी करीबी रिश्तेदार या मित्र को लाने को कहा जाता है, ताकि सर्जरी से पहले और बाद के कार्यों में वे आपकी मदद कर सकें।
  • आपको एक सहमति पत्र दिया जाता है, जिस पर हस्ताक्षर करके आप सर्जन को सर्जरी करने की अनुमति दे देते हैं। हालांकि, सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले आपको एक बार उसे अच्छे से पढ़ने को कहा जाता है।

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पेनाइल इंप्लांट कैसे किया जाता है?

जब आप सर्जरी के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं, तो हॉस्पिटल स्टाफ आपको एक विशेष ड्रेस पहनने को देते हैं, जिसे हॉस्पिटल गाउन कहा जाता है। आपकी बांह में इंट्रावेनस लाइन लगाई जाती है, जिससे आपको सर्जरी के दौरान दवाएं व अन्य आवश्यक द्रव दिए जाते हैं। पेनाइल इंप्लांट सर्जरी को निम्न के अनुसार किया जाता है -

  • आपको ऑपरेशन थिएटर ले जाकर जनरल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाया जाता है, जिससे आप गहरी नींद में सो जाते हैं। इसके अलावा स्पाइनल एनेस्थीसिया का इंजेक्शन भी लगाया जा सकता है, जिससे शरीर का निचला हिस्सा सुन्न पड़ जाता है।
  • आपके जननांगों से बालों को साफ कर दिया जाएगा और त्वचा को एंटिसेप्टिक से साफ किया जाता है।
  • अंडकोष की थैली के ऊपरी हिस्से में लिंग के ठीक नीचे चीरा लगाया जाता है और छिद्र में एक विशेष उपकरण डाला जाता है।
  • उपकरण की मदद से कॉर्पोरा केवर्नोसा को खोला जाता है, ताकि लिंग के अंदर उपयुक्त रिक्त स्थान बन सके।
  • इसके बाद एक विशेष एंटीबायोटिक द्रव से इस हिस्से को साफ किया जाता है, ताकि संक्रमण होने के खतरे को कम किया जा सके।
  • यदि नॉन इंफ्लेटेबल इंप्लांट लगाना है, तो लिंग के अंदर दो सिलेंडर लगाए जाते हैं और यदि इंफ्लेटेबल इंप्लांट लगाना है, तो अंडकोष की थैली में एक वाल्व और पंप भी लगा देते हैं। इसी छिद्र के माध्यम से रिजरवियर को भी डाला जा सकता है।
  • हालांकि, जिन पुरुषों की पहले हर्निया की सर्जरी हो चुकी है, उन्हें रिजरवियर लगाने के लिए उनके पेट के निचले हिस्से में एक अन्य चीरा लगाना पड़ता है।
  • जब प्रोस्थेसिस के सभी उपकरण लग जाते हैं और सही से काम कर रहे होते हैं, तो टांके लगाकर घाव को बंद कर दिया जाता है।
  • आपके लिंग को यूरेथ्रा से जोड़ दिया जाता है, जिससे तब तक पेशाब निकलता रहता है जब तक सर्जरी के घाव पूरी तरह से ठीक नहीं होते। घाव के अंदर एक अन्य ट्यूब भी लगा दी जाती है, जिससे सर्जरी के घाव में जमा होने वाला द्रव निकलता रहता है।
  • इसके बाद इंफ्लेटेबल इंप्लांट को भर दिया जाता है और ताकि अंदर रक्तस्राव न हो पाए और साथ ही लिंग के ऊपर भी पट्टी बांध दी जाती है।

इस सर्जरी प्रोसीजर को पूरा करने में लगभग दो घंटे का समय लगता है। सर्जरी के बाद आपको रिकवरी वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाता है जहां पर लगातर आपके शारीरिक संकेतों पर नजर रखी जाती है। जब आपका स्वास्थ्य स्थिर हो जाता है, तो आपको हॉस्पिटल रूम में शिफ्ट कर दिया जाता है। आपको एक या अधिक दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ सकता है, जो कि आपके स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। लिंग में डाली गई ड्रेनेज ट्यूब को सर्जरी से अगले दिन ही निकाल दिया जाता है। यदि इंफ्लेटेबल इंप्लांट लगाया गया है, तो आपके घर जाने से पहले इंप्लांट की खाली कर दिया जाता है।

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पेनाइल इंप्लांट के बाद क्या देखभाल की जाती है?

पेनाइल इंप्लांट सर्जरी के बाद जब आपको घर के लिए छुट्टी मिल रही होती है, तो इस दौरान निम्न बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है -

  • घाव की देखभाल
    • सर्जरी वाले हिस्से को सूखा व साफ रखें
    • सर्जरी के अगले दिन आपको नहाने की सलाह दी जा सकती है। हालांकि, आपको एक निश्चित समय तक पूल या बाथटब में नहाने से मना किया जाता है।
    • यदि घाव गीला हो गया है, तो साफ व सूखे कपड़े के साथ उसे हल्के-हल्के सुखा लें।
    • सर्जरी वाले हिस्से पर डॉक्टर कि अनुमति के बगैर किसी भी प्रकार की साबुन, क्रीम, मलम या लोशन आदि न लगाएं।
       
  • दर्द का निवारण
    • सर्जरी के बाद कुछ दिनों तक आपको दर्द रह सकता है, जिसके लिए डॉक्टर आपको दर्द निवारक दवाएं देते हैं। इन दवाओं को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेना चाहिए।
    • सर्जरी के बाद आपको संक्रमण होने का खतरा भी हो सकता है, जिसके लिए आपको कुछ प्रकार की एंटिबायोटिक दवाएं दी जा सकती हैं।
    • दर्द को कम करने के लिए उस हिस्से की बर्फ से सिकाई की जा सकती है।
       
  • शारीरिक गतिविधि
    • सर्जरी के बाद पहले चार हफ्तों तक कोई भी भारी वस्तु न उठाएं और न ही कोई अधिक मेहनत वाली एक्सरसाइज करें।
    • ऑपरेशन के बाद आपको कम से कम छह हफ्तों तक कोई भी यौन गतिविधि न करने की सलाह दी जाती है।
    • यदि आप कोई भारी मेहनत का काम करते हैं, तो उसे शुरू करने से पहले आपको कम से कम छह हफ्ते आराम करने की सलाह दी जाती है। यदि कम मेहनत वाला काम है, तो ऑपरेशन के बाद दो हफ्ते आराम करने के बाद भी उसे शुरू किया जा सकता है।

जब सर्जरी के घाव पूरी तरह से भर जाते हैं, तो प्रोस्थेसिस स्थायी रूप से लग जाते हैं। एक अध्ययन के अनुसार जिन लोगों ने पेनाइल इंप्लांट सर्जरी करवाई है, उनमें से 80 से 90 प्रतिशत लोग इसके रिजल्ट से संतुष्ट होते हैं।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

सर्जरी के बाद यदि आपको निम्न में से कोई भी समस्या होती है, तो डॉक्टर से इस बारे में बात कर लेनी चाहिए -

  • 100 से ऊपर बुखार होना
  • घाव से लगातार द्रव या रक्तस्राव होना
  • दवाएं लेने के बाद भी दर्द रहना
  • सर्जरी वाले हिस्से में लगातार सूजन व लालिमा बनी रहना
  • इंप्लांट के सिलेंडर अपने आप भर जाना

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पेनाइल इंप्लांट से क्या जोखिम हो सकते हैं?

पेनाइल इंप्लांट प्रोसीजर से निम्न जोखिम व जटिलताएं हो सकती हैं -

  • इंप्लांट की जगह पर संक्रमण होना
  • प्रोस्थेसिस के आस-पास के ऊतक क्षतिग्रस्त होना
  • स्कार ऊतक बनना
  • पंप या रिजरवियर अपनी जगह से हिल जाना
  • सिलेंडर से रिसाव होना
  • इंप्लांट की पोजीशन सही न होना
  • इंप्लांट का ठीक से काम न कर पाना
  • प्रोस्थेसिस से त्वचा में छिद्र हो जाना
  • इंप्लांट खराब होना

इसके अलावा सर्जरी के दौरान इस्तेमाल की गई एनेस्थीसिया से भी कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं जैसे उलझन महसूस होना और लंग इन्फेक्शन आदि।

आजकल लगाए जाने वाले पेनाइल इंप्लांट डिवाइस 10 से 20 साल तक चलते हैं। जब प्रोस्थेसिस काम करना बंद कर देता है, तो आपको फिर से सर्जरी करवानी पड़ती है और इस डिवाइस को बदल दिया जाता है।

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संदर्भ

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