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वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी हृदय के खराब या क्षतिग्रस्त हो चुके वाल्व को रिप्लेस या प्रतिस्थापित करने के लिए की जाती है। यह ओपन हार्ट या मिनिमली इनवेसिव सर्जरी हो सकती है। वाल्व ऊतकों के बने हुए फ्लैप (लटकते हुए ऊतक जो पंख की तरह दिखाई देते हैं) होते हैं, जो कि रक्त को हृदय से वापस लौटने से बचाते हैं। वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी से क्षतिग्रस्त हुए वाल्व को ठीक करने में और लक्षणों से आराम दिलाकर आयु को लंबा करने में मदद मिलती है।

वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी से पहले डॉक्टर यह जांच करते हैं कि आप सर्जरी के लिए ठीक हैं या नहीं। ऑपरेशन के लिए जनरल एनेस्थीसिया की जरूरत होगी। सर्जरी के बाद मरीज से चीरा लगे हुए स्थान को साफ़ व सूखा रखने के लिए कहा जाएगा और उन्हें कुछ विशेष बातों का ध्यान रखने को कहा जाएगा। जैसे भारी सामान न उठाना या शरीर के ऊपरी हिस्से को अधिक न हिलाना। इसके साथ ही संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और लगातार दवाई लेने को कहा जाएगा, जिससे वह सर्जरी के बाद जल्दी ही ठीक हो पाएंगे।

  1. हृदय वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी क्या होता है? - Valve Replacement kya hai in hindi?
  2. हृदय वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी क्यों की जाती है? - Valve Replacement kab kiya jata hai?
  3. हृदय वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी होने से पहले की तैयारी - Valve Replacement ki taiyari
  4. हृदय वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी कैसे की जाती है - Valve Replacement kaise hota hai?
  5. हृदय वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद देखभाल - Valve Replacement hone ke baad dekhbhal
  6. हृदय वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद डॉक्टर के पास कब जाएं - Valve Replacement hone ke baad doctor ke paas kab jaein
  7. हृदय वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी की जटिलताएं - Heart Valve Replacement me jatiltaye

हृदय एक पंप है जो कि चार चैम्बर में विभाजित है (दो अट्रिया, ऊपरी चैम्बर, दो वेंट्रिकल और निचला चैम्बर)।

ये चैम्बर वाल्व से जुड़े हुए होते हैं, ताकि रक्त का प्रवाह एक ही दिशा में होता रहे। वाल्व दिल की प्रत्येक धड़कन के साथ खुलते और बंद होते हैं, ताकि रक्त पीछे की तरफ न जाए। वाल्व बड़ी रक्त वाहिकाओं (एओर्टा) में भी मौजूद होते हैं जो कि हृदय से पूरे शरीर में पहुंचने वाले रक्त के प्रवाह को नियंत्रित करती हैं।

हृदय में ऐसे चार वाल्व मौजूद होते हैं -

  • मिट्रल वाल्व - यह बायीं एट्रियम और बायीं वेंट्रिकल के बीच में होता है
  • ट्रीकस्पीड वाल्व - यह दायीं एट्रियम और दायीं वेंट्रिकल के बीच में होता है 
  • पल्मोनरी वाल्व - यह दायीं वेंट्रिकल और पल्मोनरी आर्टरी के बीच में होता है
  • एओर्टिक वाल्व - यह बायीं वेंट्रिकल और एओर्टा के बीच में होता है

हृदय की किसी भी वाल्व में क्षति से हृदय में रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है। यदि एक वाल्व पूरी तरह से नहीं खुलता है तो इससे रक्त का प्रवाह प्रभावित होगा (वाल्व स्टेनोसिस)। यदि वाल्व ठीक तरह से बंद नहीं होता है तो इससे रक्त पीछे की तरह लीक हो सकता है, जिसे वाल्व प्रत्यावहन (valve regurgitation) कहा जाता है।

वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी आमतौर पर एओर्टिक या मिट्रल वाल्व पर की जाती है। यह सर्जरी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए वाल्व या किसी रोग के कारण खराब हुए वाल्व को रिप्लेस करने के लिए की जाती है, जब एक या एक से अधिक वाल्व ख़राब हो जाते हैं। यह वाल्व के घातक रोगों को ठीक करने में मदद कर सकती है। रिप्लेसमेंट के लिए दो तरह के वाल्व का प्रयोग होता है -

  • मैकेनिकल वाल्व - ये वाल्व प्लास्टिक, कार्बन या धातु के बने हुए होते हैं। मैकेनिकल वाल्व बायोलॉजिकल वाल्व से अधिक स्थायी होते हैं और लंबे समय तक रहते हैं। हालांकि, वाल्व में रक्त चिपक सकता है और रक्त के थक्के जम सकते हैं इसीलिए जो लोग मैकेनिकल वाल्व लगवाते हैं उन्हें रक्त को पतला करने वाली दवाएं दी जाती हैं, ताकि रक्त के थक्के जमने से बचाया जा सके।
  • बायोलॉजिकल वाल्व - ये वाल्व जानवरों या उन मनुष्यों के ऊतकों से बने हुए होते हैं, जिन्होंने अपना हार्ट डोनेट किया है। कभी-कभी वाल्व को रिप्लेस करने के लिए व्यक्ति की अपनी बॉडी से ही ऊतक लिए जाते हैं। जिन लोगों के शरीर में बायोलॉजिकल वाल्व लगा हुआ होता है, उन्हें रक्त को पतला करने वाली दवाओं की जरूरत नहीं पड़ती है। बायोलॉजिकल वाल्व मैकेनिकल वाल्व की तुलना में सख्त होते हैं और इन्हें प्रत्येक दस वर्षों में बदलने की जरूरत होती है।

हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी दो तरह से की जाती है -

  • ओपन हार्ट सर्जरी - यह एक पारम्परिक तरीका है, जिसमें छाती में एक बड़ा चीरा लगाया जाता है और वाल्व को रिप्लेस करने के लिए हृदय की कार्य-प्रक्रिया को कुछ समय के लिए रोका जाता है।
  • मिनिमली इनवेसिव सर्जरी - इस सर्जरी में हार्ट वाल्व को रिप्लेस करने के लिए छोटे चीरे लगाए जाते हैं। मिनिमली इनवेसिव सर्जरी के बाद व्यक्ति को कम दर्द होता है और हॉस्पिटल में कम समय रहना होता है साथ ही ओपन हार्ट सर्जरी की तुलना में इसमें रिकवरी का समय भी कम होता है।

वॉल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी का उपयोग एक या अधिक रोगग्रस्त हृदय वॉल्व की समस्याओं को ठीक करने के लिए किया जाता है।
यदि आपकी एक या एक से अधिक वॉल्व खराब हो जाती हैं या किसी बीमारी से ग्रस्त हो जाती हैं, तो इसके निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं -

कई अन्य कारणों की वजह से भी डॉक्टर हार्ट वाल्व रिपेयर या रिप्लेसमेंट सर्जरी करने के लिए कह सकते हैं।

सर्जरी से पहले आपसे एक फॉर्म भरने को कहा जाएगा, जिसमें डॉक्टर आपसे सर्जरी करने की अनुमति लेंगे। डॉक्टर आपके पिछले स्वास्थ्य की पूरी जानकारी लेंगे और शारीरिक परीक्षण किया जाएगा। साथ ही डॉक्टर ब्लड टेस्ट या अन्य परीक्षणात्मक टेस्ट कर सकते हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आप सर्जरी करवाने के लिए ठीक हैं और इन टेस्टों की मदद से सर्जरी के बाद शरीर की प्रतिक्रिया जानने में भी मदद मिलती है।

यह ध्यान रहे कि यदि आपको निम्न में से कोई भी स्थिति है तो इसके बारे में डॉक्टर को बता दें -

  • यदि आप गर्भवती हैं या गर्भवती हो सकती हैं
  • यदि आपके हृदय में कोई उपकरण लगाया गया है
  • यदि आपको पहले कभी रक्त संबंधी विकार हुए हैं
  • यदि आप किसी भी तरह की दवा, विटामिन, हर्ब्स या सप्लीमेंट ले रहे हैं
  • यदि आपको किसी भी दवा से एलर्जी है जैसे एनेस्थीसिया, आयोडीन, टेप या लेटेक्स

सर्जरी से पहले डॉक्टर आपसे रक्त को पतला करने वाली दवाओं को लेने से मना कर सकते हैं। साथ ही आपसे एस्पिरिन लेने को भी मना किया जा सकता है।

सर्जरी से पहले ​धूम्रपान न करें। इससे सर्जरी के बाद जटिलताएं बढ़ सकती हैं।

हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी पारंपरिक तरीके से निम्न तरह से की जाती है -

  • सर्जरी शुरू करने से पहले आपसे निम्न चीजें करने को कहा जाएगा -
    • अस्पताल की गाउन पहनने के लिए
    • यदि मरीज किसी भी तरह का आभूषण पहनकर गए हैं तो इसे निकालने को कहा जाएगा
    • ब्लैडर खाली करने के लिए
  • मरीज से ऑपरेशन टेबल पर लेटने को कहा जाएगा और एक डॉक्टर मरीज को सामान्य एनेस्थीसिया देंगे। एनेस्थीसिया वह दवा होती है, जिसकी मदद से मरीज को नींद आ जाती है।
  • इसके बाद डॉक्टर मरीज के शरीर में भिन्न ट्यूब लगाएंगे -
    • एक इंट्रावेनस ट्यूब लगाई जाती है, उसे मरीज की बांह या हाथ की नस में लगाया जाएगा, ताकि मरीज को दवा और द्रव दिए जा सकें।
    • एक ट्यूब जिसे मरीज के गले और कलाई की रक्त वाहिकाओं में डाला जाएगा, ताकि मरीज के हृदय की दर और ब्लड प्रेशर को नापा जा सके।
    • मुंह के अंदर से एक ब्रीथिंग ट्यूब मरीज के फेफड़ों में लगाई जाएगी। ट्यूब को वेंटिलेटर से जोड़ा जाएगा। वेंटिलेटर वह मशीन होती है, जिसकी मदद से व्यक्ति सर्जरी के दौरान सांस ले पाता है।
    • मरीज की भोजन नली में ट्रांसएसोफेगल इकोकार्डियोग्राम प्रोब लगाया जाएगा, ताकि वाल्व की कार्य प्रक्रिया देखी जा सके। प्रोब को एक लचीली रोड से जोड़ा जाएगा, ताकि इसे आसानी से भोजन नली में लगाया जा सके।
    • मरीज के पेट और आंत में से द्रव और पेशाब निकालने के लिए भी एक ट्यूब लगाई जाएगी 
  • यदि मरीज की छाती पर बाल हैं तो डॉक्टर उन्हें साफ़ कर देंगे और छाती को एंटीसेप्टिक दवा से साफ किया जाएगा 
  • ओपन हार्ट सर्जरी के लिए मरीज की पूरी छाती के बीच में एक चीरा लगाया जाएगा। यह चीरा छाती की हड्डी जितना बड़ा होता है
  • मरीज का हृदय उसकी छाती की हड्डी द्वारा सुरक्षित होता है, जिसे ब्रैस्ट बोन कहते हैं। ब्रैस्ट बोन एक सपाट हड्डी होती है जो कि छाती के बिल्कुल दाएं भाग में होती है जो कि रिब केज (पंजर) का एक हिस्सा है। ऐसे में मरीज के हृदय तक पहुंचने के लिए डॉक्टर ब्रैस्ट बोन (स्ट्रेनम) को दो भागों में विभाजित करेंगे
  • सर्जरी करने के लिए डॉक्टर मरीज के हृदय में ठंडे सोल्यूशन का इंजेक्शन लगाएंगे ताकि हृदय कुछ समय तक कार्य न करे। यह ठंडा सोल्यूशन यह निश्चित करता है कि हृदय जिस दौरान कार्य नहीं कर रहा है उस समय क्षतिग्रस्त न हो
  • हृदय को रोकने से पहले मरीज को हार्ट-लंग बाईपास मशीन से कनेक्ट किया जाएगा। जिस दौरान हृदय कार्य नहीं कर रहा है उस समय यह मशीन शरीर के लिए सर्कुलेशन का काम करती है 
  • जब हार्ट लंग बाईपास मशीन ठीक तरह से काम करने लगेगी और मरीज का हृदय रुक जाएगा तब डॉक्टर वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी शुरू करेंगे
  • रिप्लेसमेंट हो जाने के बाद डॉक्टर मरीज के हृदय को शॉक देकर फिर से शुरू करेंगे। यह छोटे पैडल की मदद से किया जाता है। हार्ट लंग बाईपास मशीन से हटाकर रक्त का संचरण वापस हृदय से जोड़ दिया जाएगा। यह हो जाने के बाद ट्यूब को निकाल दिया जाएगा 
  • इसके बाद डॉक्टर किसी भी तरह की सर्जिकल लीकेज की जांच करेंगे 
  • मरीज के हृदय की कार्य प्रक्रिया की जांच करने के लिए डॉक्टर तारों की मदद से बाहरी पेसमेकर लगाएंगे। सर्जरी के बाद थोड़े समय के लिए पेसमेकर से हृदय की कार्य प्रक्रिया को नियंत्रित करने में मदद मिलती है
  • डॉक्टर मरीज की ब्रैस्ट बोन को तारों की मदद से बंद करेंगे और हृदय के आसपास जमे हुए खून के थक्के और द्रवों को निकाल देंगे। ऐसा छाती में ट्यूब लगाकर किया जाता है 
  • अंत में डॉक्टर ब्रैस्ट बोन को तारों की मदद से बंद कर देंगे और उस भाग पर पट्टी लगा दी जाएगी 

आमतौर पर सर्जरी में दो से चार घंटे का समय लगता है। हालांकि, सर्जरी के लिए लगने वाला समय रिप्लेस किए जाने वाले वाल्व पर निर्भर करता है। 

मिनिमली इनवेसिव सर्जरी 

मिनिमली इनवेसिव सर्जरी पारम्परिक सर्जरी से अलग होती है, जिसमें ओपन हार्ट सर्जरी की तरह काम नहीं किया जाता है। इस सर्जरी में ब्रैस्ट बोन को चीर कर हृदय तक नहीं पंहुचा जाता है बल्कि इसमें छाती के दाएं भाग में चीरे लगा कर सर्जरी की जाती है। अधिकतर मिनमली इनवेसिव सर्जरी तकनीक में हार्ट लंग मशीन का प्रयोग किया जाता है, ताकि जिस दौरान हृदय काम नहीं कर रहा है शरीर में रक्त का संचरण होता रहे।

यह सर्जरी अलग-अलग तरीकों से की जा सकती है। उदाहरण के तौर पर छाती में छोटे चीरे लगाकर, रोबोट अस्सीस्टेड सर्जरी या थोरास्कोपिक सर्जरी। छाती में चीरे ब्रैस्ट बोन की तरफ से, अस्थि पंजर के मध्य से या ब्रैस्ट बोन के दाएं भाग में छोटे छेद कर के किए जा सकते हैं, जिसमें छोटे छेद के अंदर एक कैमरा लगे हुए उपकरण को डाला जाएगा, ताकि आपके शरीर के अंदर देखा जा सके।

रोबोटिक अस्सिटेड सर्जरी में सर्जरी रोबोट से करवाई जाती है, जिसे एक सर्जन अस्सिट कर रहे होते हैं। सर्जन वीडियो मॉनिटर में हृदय को तीन तरफ से या थ्री डी में देख पाते हैं।

थोरास्कोपिक सर्जरी में, छाती में लगे हुए चीरे के अंदर थोरास्कोप नामक एक उपकरण डाला जाता है जो कि एक पतली लम्बी ट्यूब होती है, जिसके एक सिरे पर कैमरा लगा हुआ होता है। 

सर्जरी के बाद

सर्जरी के तुरंत बाद मरीज को इंटेंसिव केयर यूनिट या आईसीयू में ले जाया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि उसके हृदय और हृदय की कार्यशीलता को पास से देखा जा सके। वहां उसको एक से तीन दिन तक रखा जा सकता है या फिर जब तक डॉक्टर चाहे तब तक आईसीयू में रख सकते हैं।

मरीज के शरीर में अब भी कुछ ट्यूब जैसे आइवी ट्यूब लगी हुई होंगी।

आइवी ट्यूब का प्रयोग डॉक्टर ब्लड प्रेशर की दवाएं देने के लिए करेंगे। साथ ही इससे रक्त संबंधी समस्याओं के बारे में भी पता चल जाता है।

एक बार जब मरीज को होश आ जाता है तो इन्हें धीरे-धीरे निकाला जाता है। जब मरीज अपने आप सांस लेने लग जाए तो उसके गले में लगी ट्यूब को निकाल दिया जाएगा। हालांकि, उसको निमोनिया से बचाने के लिए उससे प्रत्येक कुछ घंटों में गहरी सांसें लेने को कहा जाएगा व खांसने को कहा जाएगा। खांसते हुए दर्द से बचने के लिए उस दौरान उसे मुंह पर तकिया रख लेना चाहिए।

एक बार थोड़ा ठीक हो जाने पर पेट की ट्यूब भी निकाल दी जाएगी। हालांकि, इसके बाद भी मरीज सीधे ही खाना नहीं खा सकता, उसको द्रव ही लेना होगा। पेसमेकर भी हटा दिया जाएगा। 

एक बार डॉक्टर को यह महसूस हो जाए कि मरीज थोड़ा ठीक है तो उसको सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा। जहां उसको बेड से उठकर दिन में एक दो बार चलने-फिरने को भी कहा जाएगा। अभी कुछ समय तक आइवी लगी रहेगी। यदि उसको बहुत दर्द है तो डॉक्टर पेन किलर दे सकते हैं।

एक बार डॉक्टर के मुताबिक ठीक हो जाने पर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा और बाद की मीटिंग के लिए मरीज को अपॉइंटमेंट दी जाएगी।

घाव की देखभाल - सर्जरी के घाव को पूरी तरह से ठीक होने में चार से छह हफ्ते का समय लग सकता है। सर्जरी के बाद शुरुआती छह हफ्तों तक बांह और शरीर के ऊपरी भाग की गतिशीलता को कम रखें।

संक्रमण से बचने के लिए घाव के स्थान को हल्के साबुन और पानी से धोएं इसके बाद घाव को पूरी तरह से सूखा लें। घाव को साफ़ करते समय -

  • अपने हाथों को साबुन व पानी से अच्छे से धोएं
  • त्वचा को धीरे से कपड़े से पोंछें
  • जब तक घाव पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाता है निम्न चीज़ें न करें  -
    • तैराकी, गर्म पानी के टब में नहाना
    • क्रीम, तेल या परफ्यूम वाले बॉडी वॉश का उपयोग
    • ऐसी कोई भी क्रिया जिसको करने में आपको अपनी बांह को अधिक हिलाना पड़े
    • दो या तीन किलो से भारी चीज़ को उठाना

भोजन और दवाएं

  • डॉक्टर द्वारा बताई गई डाइट का पालन करें
  • यदि डाइट प्लान नहीं दिया गया है तो संतुलित और पौष्टिक आहार खाएं ताकि जल्दी ही ठीक हो सकें
  • ऐसे भोज्य पदार्थ, जिनमें अत्यधिक चीनी, नमक और सेचुरेटेड वसा होता है उन्हें भोजन में शामिल न करें
  • बाहर से बना हुआ मीट न खाएं
  • कम वसा, कोलेस्ट्रॉल और अधिक फाइबर युक्त आहार लें
  • डेंटल समस्या या अन्य किसी भी कारण से दिए गए एंटीबायोटिक्स न लें, क्योंकि इनसे वाल्व में संक्रमण हो सकता है
  • पुरुष नंपुसकता के लिए ली जाने वाली दवा वियाग्रा आदि बिना डॉक्टर की सलाह के न लें
  • रक्त के थक्के जमने से बचाने के लिए ब्लड थिनर दवाएं दी जाएंगी

कार्य शीलता - जल्दी से जल्दी ठीक हो सकें, इसके लिए खुद को सक्रिय रखें

  • हृदय और फेफड़ों के लिए चलना सबसे अच्छा व्यायाम है
  • घर के हल्के काम कर सकते हैं, जैसे कपड़े तह लगाना आदि
  • यदि सांस लेने में तकलीफ है या चक्कर आए तो काम न करें
  • किसी भी भारी वास्तु को अपने छाती की ओर खींचने का प्रयास न करें (जैसे भारी वजन उठाना आदि)
  • चार से छह हफ़्तों तक गाड़ी न चलाएं
  • जब 800 मीटर आसानी से चल पाएं या फिर सर्जरी के चार हफ्तों बाद सेक्सुअल एक्टिविटी कर सकते हैं 

वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी से क्षतिग्रस्त वाल्व के कारण दिखाई दे रहे लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है, साथ ही यह आपको दीर्घायु भी बनाता है।

डॉक्टर के पास कब जाएं?

यदि निम्न में से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें -

  • सांस लेने में तकलीफ
  • आसानी से नील पड़ना
  • 100.4°F या अधिक बुखार
  • एरिथिमिया या तेज नब्ज
  • चक्कर आना या बेहोश होना
  • खांसी में खून आना या फिर खांसी में पीले/हरे रंग का बलगम आना
  • प्रत्येक दिन एक किलो वजन बढ़ना
  • चीरा लगे स्थान पर लालिमा, सूजन और रक्तस्त्राव
  • चीरे के स्थान पर अत्यधिक दर्द
  • पैरों और पेट में अत्यधिक सूजन
  • लगातार जी मिचलाना या उल्टी आना
  • पैरों या बांह में कमजोरी

जो लोग रक्त को पतला करने वाली दवाएं ले रहे हैं, उन्हें यदि निम्न लक्षण दिखाई देते हैं तो उनके बारे में डॉक्टर को तुरंत बताएं -

सर्जरी के चार से छह हफ्ते बाद मरीज को डॉक्टर के पास जाना होगा। यदि डिस्चार्ज के समय पट्टी और सर्जिकल स्टेपल नहीं निकले हैं, तो जल्दी ही अस्पताल जाना होगा। डॉक्टर आपको डिस्चार्ज के समय इस अपॉइंटमेंट का सही समय बता देंगे।

हार्ट वॉल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी से जुड़े संभावित जोखिम निम्नलिखित हैं -

  • सर्जरी के दौरान या बाद में रक्त स्राव
  • रक्त के थक्के जो दिल के दौरे, स्ट्रोक या फेफड़े की समस्याएं पैदा कर सकते हैं
  • संक्रमण
  • निमोनिया (और पढ़ें - निमोनिया का घरेलू उपचार)
  • सांस संबंधी परेशानी
  • एरिथिमिया (असामान्य हृदय दर)

आपकी किसी विशिष्ट मेडिकल स्थिति के आधार पर अन्य प्रकार के जोखिम हो सकते हैं प्रक्रिया से पहले अपने चिकित्सक से सब बातें कर लें।

और पढ़ें ...

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