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एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट एक तरह का ब्लड टेस्ट होता है। इस टेस्ट से शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या को मापा जाता है। इन सफेद रक्त कोशिकाओं को इस्नोफिल्स कहते हैं। शरीर में किसी तरह की कोई बीमारी, संक्रमण और इसी तरह की अन्य समस्याएं होने पर एओसिनोफिल ऐक्टिव हो जाती हैं।

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  1. एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट क्या होता है? - What is AEC (Absolute Eosinophil Count) test in Hindi?
  2. एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट क्यों किया जाता है? - What is the purpose of AEC test in Hindi?
  3. एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट से पहले - Before AEC test in Hindi?
  4. एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट के दौरान - During AEC test in Hindi?
  5. एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं? - What are the risks of AEC test in Hindi?
  6. एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है? - What do the results of AEC mean in Hindi?

एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट का इस्तेमाल एओसिनोफिल की संख्या पता करने के लिए किया जाता है। एओसिनोफिल खून में एक तरह की सफेद रक्त कोशिकाएं हैं। अगर आपको किसी तरह की कोई एलर्जी है तो आपमें एओसिनोफिल ऐक्टिवेट हो सकती हैं। इन एलर्जी रिएक्शन्स से आपके शरीर में कहीं सूजन, चकत्ते होना, सांस फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हमारे शरीर के लगभग सभी हिस्से एओसिनोफिल पर किसी न किसी तरह से निर्भर होते हैं। एओसिनोफिल हमारे शरीर में तरह-तरह के बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी आदि को नष्ट करने में मदद करते हैं।

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अगर डॉक्टर को आपमें किसी तरह की एलर्जिक रिएक्शन, पैरासिटिक या पैरासाइटिक संक्रमण अथवा किसी ड्रग के रिएक्शन दिखते हैं तो वो आपको यह टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। डॉक्टर आपको यह टेस्ट नियमित जांच के तहत कंप्लीट ब्लड काउंट टेस्ट पैनल के साथ करवाने की सलाह दे सकते हैं।

डॉक्टर आपको यह जांच उस स्थिति में भी करवाने की सलाह दे सकते हैं:

  • अगर सफेद रक्त कोशिकाओं की गिनती के समय आपमें असामान्य एओसिनोफिल लेवल पाया जाता है।
  • सामान्यत: डॉक्टर इस टेस्ट को इन्फेक्शन या एलर्जी की जांच वाले टेस्ट के साथ करवाते हैं। 

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वैसे तो इस टेस्ट से पहले किसी खास तैयारी की जरूरत नहीं होती है लेकिन अगर आप किसी तरह की कोई दवा या ड्रग का सेवन करते हैं या फिर आपको कहीं पर किसी तरह की एलर्जी की शिकायत है या फिर इस जांच से पहले आपका कहीं पर इलाज चल रहा हो, तो इन सारी बातों को अपने डॉक्टर से शेयर कर दें। पूरी जानकारी से अवगत होने के बाद आपके डॉक्टर आपकी स्थिति के आधार पर सुझाव देंगे। 

निम्नलिखित कुछ दवाइयां आपके एओसिनोफिल काउंट को बढ़ा सकती हैं:

  • इंटरफेरॉन
  • डाइट की कोई गोली
  • एंटीबॉयोटिक
  • ट्रैंक्विलाइजर (शामक) और लैक्सटिव (विरेचक)

टेस्ट के दौरान डॉक्टर सबसे पहले आपके खून का एक सैंपल लेंगे। इसके लिए निम्नलिखित स्टेप्स को फॉलो करते हैं:

  • सबसे पहले तो जिस जगह से खून का सैंपल लेना होता है, उस जगह को डॉक्टर किसी एंटीसेप्टिक से साफ कर देते हैं।
  • इसके बाद आपकी नस में सूई चुभोकर वहां से खून निकालकर उसे किसी छोटी सी शीशी में रख लेंगे।
  • पर्याप्त खून निकाल लेने के बाद,सूई को निकाल लेंगे और उसके बाद उस जगह पर कोई बैंडेज बांध देंगे।
  • इसके बाद वो आपके खून के सैंपल को जांच के लिए किसी लैब में भेज देंगे।

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इस टेस्ट में वैसे तो कुछ खास खतरे नहीं हैं। खून निकालने के कारण जिन खतरों की थोड़ी सी संभवनाएं हैं, वे निम्नलिखित हैं: 

  • बहुत अधिक खून बहना। 
  • बेहोशी आना या फिर हल्कापन महसूस करना।
  • हेमाटोमा (स्किन के नीचे खून का जमा होना)
  • संक्रमण (स्किन के कटने के कारण संक्रमण का हल्का सा खतरा होता है)

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अगर जांच में पता चलता है कि आपके शरीर में 500 एओसिनोफिल सेल्स प्रति माइक्रोलीटर ब्लड हैं तो इसका मतलब है कि आपको इओसिनोफिलिया नाम की बीमारी है। इओसिनोफिलिया खून में 500-1500 प्रति माइक्रोलीटर एओसिनोफिल सेल्स होन पर हल्का, 1500 ले लेकर 5000 माइक्रोलीटर होने पर सामान्य और 5000 प्रति माइक्रोलीटर होने की स्थिति में गंभीर माना जाता है।

इसके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:

एओसिनोफिल की संख्या शराब से इनटॉक्सिकेशन के कारण भी कम हो सकती है।

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