एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट एक तरह का ब्लड टेस्ट होता है। इस टेस्ट से शरीर में सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या को मापा जाता है। इन सफेद रक्त कोशिकाओं को इस्नोफिल्स कहते हैं। शरीर में किसी तरह की कोई बीमारी, संक्रमण और इसी तरह की अन्य समस्याएं होने पर एओसिनोफिल ऐक्टिव हो जाती हैं।
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- एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट क्या होता है? - What is AEC (Absolute Eosinophil Count) test in Hindi?
- एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट क्यों किया जाता है? - What is the purpose of AEC test in Hindi?
- एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट से पहले - Before AEC test in Hindi?
- एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट के दौरान - During AEC test in Hindi?
- एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं? - What are the risks of AEC test in Hindi?
- एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट के परिणाम और नॉर्मल रेंज - AEC Result and Normal Range in Hindi
एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट क्या होता है? - What is AEC (Absolute Eosinophil Count) test in Hindi?
एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट का इस्तेमाल एओसिनोफिल की संख्या पता करने के लिए किया जाता है। एओसिनोफिल खून में एक तरह की सफेद रक्त कोशिकाएं हैं। अगर आपको किसी तरह की कोई एलर्जी है तो आपमें एओसिनोफिल ऐक्टिवेट हो सकती हैं। इन एलर्जी रिएक्शन्स से आपके शरीर में कहीं सूजन, चकत्ते होना, सांस फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हमारे शरीर के लगभग सभी हिस्से एओसिनोफिल पर किसी न किसी तरह से निर्भर होते हैं। एओसिनोफिल हमारे शरीर में तरह-तरह के बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी आदि को नष्ट करने में मदद करते हैं।
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एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट क्यों किया जाता है? - What is the purpose of AEC test in Hindi?
अगर डॉक्टर को आपमें किसी तरह की एलर्जिक रिएक्शन, पैरासिटिक या पैरासाइटिक संक्रमण अथवा किसी ड्रग के रिएक्शन दिखते हैं तो वो आपको यह टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। डॉक्टर आपको यह टेस्ट नियमित जांच के तहत कंप्लीट ब्लड काउंट टेस्ट पैनल के साथ करवाने की सलाह दे सकते हैं।
डॉक्टर आपको यह जांच उस स्थिति में भी करवाने की सलाह दे सकते हैं:
- अगर सफेद रक्त कोशिकाओं की गिनती के समय आपमें असामान्य एओसिनोफिल लेवल पाया जाता है।
- सामान्यत: डॉक्टर इस टेस्ट को इन्फेक्शन या एलर्जी की जांच वाले टेस्ट के साथ करवाते हैं।
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एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट से पहले - Before AEC test in Hindi?
वैसे तो इस टेस्ट से पहले किसी खास तैयारी की जरूरत नहीं होती है लेकिन अगर आप किसी तरह की कोई दवा या ड्रग का सेवन करते हैं या फिर आपको कहीं पर किसी तरह की एलर्जी की शिकायत है या फिर इस जांच से पहले आपका कहीं पर इलाज चल रहा हो, तो इन सारी बातों को अपने डॉक्टर से शेयर कर दें। पूरी जानकारी से अवगत होने के बाद आपके डॉक्टर आपकी स्थिति के आधार पर सुझाव देंगे।
निम्नलिखित कुछ दवाइयां आपके एओसिनोफिल काउंट को बढ़ा सकती हैं:
- इंटरफेरॉन
- डाइट की कोई गोली
- एंटीबॉयोटिक
- ट्रैंक्विलाइजर (शामक) और लैक्सटिव (विरेचक)
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एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट के दौरान - During AEC test in Hindi?
टेस्ट के दौरान डॉक्टर सबसे पहले आपके खून का एक सैंपल लेंगे। इसके लिए निम्नलिखित स्टेप्स को फॉलो करते हैं:
- सबसे पहले तो जिस जगह से खून का सैंपल लेना होता है, उस जगह को डॉक्टर किसी एंटीसेप्टिक से साफ कर देते हैं।
- इसके बाद आपकी नस में सूई चुभोकर वहां से खून निकालकर उसे किसी छोटी सी शीशी में रख लेंगे।
- पर्याप्त खून निकाल लेने के बाद,सूई को निकाल लेंगे और उसके बाद उस जगह पर कोई बैंडेज बांध देंगे।
- इसके बाद वो आपके खून के सैंपल को जांच के लिए किसी लैब में भेज देंगे।
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एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं? - What are the risks of AEC test in Hindi?
इस टेस्ट में वैसे तो कुछ खास खतरे नहीं हैं। खून निकालने के कारण जिन खतरों की थोड़ी सी संभवनाएं हैं, वे निम्नलिखित हैं:
- बहुत अधिक खून बहना।
- बेहोशी आना या फिर हल्कापन महसूस करना।
- हेमाटोमा (स्किन के नीचे खून का जमा होना)
- संक्रमण (स्किन के कटने के कारण संक्रमण का हल्का सा खतरा होता है)
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एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट टेस्ट के परिणाम और नॉर्मल रेंज - AEC Result and Normal Range in Hindi
एब्सोल्यूट एओसिनोफिल काउंट (एसीई) टेस्ट का परिणाम और नॉर्मल रेंज
नॉर्मल रिजल्ट : एईसी का नॉर्मल रेंज 450 से 550 कोशिका प्रति माइक्रोलीटर (µL) माना जाता है। यह स्तर इंगित करता है कि व्यक्ति को कोई भी अंतर्निहित समस्या नहीं है।
असामान्य परिणाम
एबनॉर्मल रिजल्ट : सामान्य यानी 450 से 550 कोशिका प्रति माइक्रोलीटर से कम एईसी मात्रा को असामान्य माना जाता है। यह अल्कोहल के बहुत अधिक सेवन या शरीर में कुछ स्टेरॉयड के अतिरिक्त उत्पादन के कारण हो सकता है।
एईसी की मात्रा सामान्य से अधिक हो जाना भी असामान्य माना जाता है और यह विभिन्न प्रकार की स्थितियों से जुड़ा होता है। रक्त में इयोसिनोफिल्स की उच्च मात्रा को इयोस्नोफिलिया के नाम से जाना जाता है। आइए एसीई की वैल्यू और इससे संबंधित विकारों के बीच के संबंधों के बारे में जानते हैं।
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हल्के स्तर का इयोस्नोफिलिया |
550 से 1500 सेल/µL |
अस्थमा, एलर्जिक राइनाइटिस, इओसिनोफिलिक एसोफिजाइटिस, एटोपिक डर्मटाइटिस या ड्रग एलर्जी |
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मॉडरेट इयोस्नोफिलिया |
1500-5000 सेल/µLL |
एलर्जी ब्रोंकोपलमोनरी एस्परजिलोसिस, क्रोनिक साइनोसाइटिस
क्रोनिक इओसिनोफिलिक निमोनिया या कुछ दवाओं से एलर्जी |
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गंभीर इयोस्नोफिलिया |
5000 या उससे से अधिक मात्रा में सेल/µL |
इसके अलावा, हल्के से मध्यम स्तर के इयोस्नोफिलिया पेट के कीड़ों के संक्रमण का कारण हो सकता है।
- एस्करायसिस
- हुकवार्म इंफेक्शन
- फीताकृमि रोग
- ट्राइकिनेलोसिस
- स्ट्रांगिलोइडायसिस
- नाथोस्टोमायसिस
- सिस्टिसरकोसिस
- लोआयसिस
- फ्लूक इंफेक्शन
रक्त में इयोसिनोफिल्स के स्तर में वृद्धि कई अन्य ऑटोइम्यून बीमारियों और कैंसर से जुड़ी हो सकती है। ऐसी ही कुछ स्थितियां निम्नलिखित हैं।
- गंभीर प्रकार का रूमेटाइड आर्थराइटिस
- सिस्टमिक ल्यूपस रिथेमेटोसिस
- इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज
- प्रोग्रेसिव सिस्टमिक स्केलरोसिस
- चर्ग-स्ट्रॉस वस्कुलायटिस
- एक्यूट या क्रोनिक इओसिनोफिलिक ल्यूकेमिया
- लिंफोमा
- लंग कैंसर या थायराइड कैंसर
स्थिति को सटीक रूप से जानने के लिए डॉक्टर कुछ अन्य प्रकार के जांच कर सकते हैं।
(और पढ़ें - डेंगू टेस्ट क्या है)
संदर्भ
- N. Adkinson Jr. et.al. Middleton's Allergy 2-Volume Set. 8th Edition, ISBN: 9780323085939
- Leslie Silberstein ,John Anastasi. Hematology. 6th Edition; Churchill Livingstone, ISBN: 9781455740413.
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- Center for Disease Control and Prevention [internet], Atlanta (GA): US Department of Health and Human Services; Laboratory Procedure Manual
- Philip Lanzkowsky. Lanzkowsky's Manual Of Pediatric Hematology And Oncology. 6th edition, 2016. [internet].




