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आपने अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार एंटीबायोटिक दवा जरूर ली होगी। एक बच्चे के रूप में दर्दनाक स्ट्रेप थ्रोट (स्ट्रेप नामक बैक्टीरिया से होने वाला गले का इन्फेक्शन) या कान के संक्रमण के उपचार से लेकर, जवान होने पर जलन वाले मूत्र पथ के संक्रमण में या त्वचा में खुजली वाले संक्रमण के लिए, एंटीबायोटिक्स दवाएं हमारे लिए महत्वपूर्ण दवा वर्गों में से सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली दवाएं हैं।

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एंटीबायोटिक्स ने 1940 के दशक से उपयोग की शुरुआत के बाद दवाओं में क्रांतिकारी बदलाव किया और कई लोगों की जान बचाई, क्योंकि उन्होंने बैक्टीरिया के कारण गंभीर संक्रमण सहित कई बीमारियों और संक्रमणों का इलाज करने का साधन प्रदान किया।

एंटीबायोटिक प्रतिरोध की प्रगति को रोकने में मदद के लिए यह महत्वपूर्ण है कि एंटीबायोटिक दवाएं डॉक्टर द्वारा निर्धारित करने पर ही ली जाएं और सही ढंग से ली जाएं।

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इस लेख में विस्तार से बताया गया है कि एंटीबायोटिक क्या होते हैं, एंटीबायोटिक दवाओं के प्रकार कौन-कौन से हैं और एंटीबायोटिक कैसे और क्या कार्य करते हैं? इसके साथ ही एंटीबायोटिक दवा के फायदे और नुकसान के बारे में भी बताया गया है।

  1. एंटीबायोटिक क्या है - Antibiotics kya hai in hindi
  2. एंटीबायोटिक दवाओं के प्रकार - Antibiotics ke prakar in hindi
  3. एंटीबायोटिक के कार्य - Antibiotics ke upyog in hindi
  4. एंटीबायोटिक दवा के फायदे - Antibiotics ke fayde in hindi
  5. एंटीबायोटिक दवा के नुकसान - Antibiotics ke side effects in hindi
  6. एंटीबायोटिक दवाओं के प्रकार, लाभ, साइड इफेक्ट के डॉक्टर
  7. ज्यादा एंटीबायोटिक लेने से बढ़ सकता है कोलन कैंसर का खतरा
  8. एंटीबायोटिक के ज्यादा सेवन से हो सकता है संक्रमण का खतरा: अध्ययन
  9. वर्ल्ड एंटीबायोटिक अवेयरनेस सप्ताह : जानें क्यों खतरनाक हैं एंटीबायोटिक दवाएं

एंटीबायोटिक्स आधुनिक चिकित्सा में सबसे अधिक प्रिस्क्राइब की जाने वाली दवाओं में से एक हैं। एंटीबायोटिक्स बैक्टीरिया को मार कर या क्षति पहुंचा कर बीमारी का इलाज करते हैं। पहला एंटीबायोटिक पेनिसिलिन था, जो मोल्ड कल्चर (जीवाणु उगाने की प्रक्रिया के दौरान) में इत्तेफाक से खोजा गया था।

आज, 100 से अधिक विभिन्न एंटीबायोटिक दवाएं मामूली से लेकर जानलेवा संक्रमण तक को ठीक करने के लिए उपलब्ध हैं। हालांकि, क्योंकि उनका बहुत अधिक उपयोग किया गया है, इसलिए कई एंटीबायोटिक्स अब एक बार जिन जीवाणु को मारा था उन जीवाणुओं के खिलाफ प्रभावी नहीं होते हैं।

एंटीबायोटिक्स, जिन्हें एंटीबैक्टीरियल के रूप में भी जाना जाता है, वे दवाएं हैं जो बैक्टीरिया के विकास को रोकती या धीमा करती हैं। इनमें शक्तिशाली दवाओं की एक पूरी श्रृंखला शामिल है और ये बैक्टीरिया के कारण होने वाली बीमारियों के इलाज के लिए उपयोग की जाती है।

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हालाँकि, एंटीबायोटिक्स वायरस के कारण होने वाले संक्रमण के खिलाब प्रभावी नहीं हैं, जैसे कि

यदि आप किसी वायरस के कारण बीमार हैं, तो एंटीबायोटिक दवाएं लेने से ये आपको अच्छा करने से ज्यादा नुकसान कर सकती हैं।

एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग करते समय यदि आपको उनकी आवश्यकता नहीं होती है या उन्हें सही तरीके से उपयोग नहीं करते हैं, तो एंटीबायोटिक प्रतिरोध पैदा हो सकता है। इसका मतलब है कि जिस बैक्टीरिया के खिलाफ पहले यह प्रभावी थी उसके खिलाफ अब उसका कोई प्रभाव नहीं होता है क्योंकि बैक्टीरिया एंटीबायोटिक के प्रभावों का प्रतिरोध करने में सक्षम हो जाता है।

जब आप एंटीबायोटिक्स लेते हैं, तो अपने डॉक्टर द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों का ध्यानपूर्वक पालन करें। यदि आप बेहतर महसूस करते हैं तो भी अपनी दवा खत्म करना महत्वपूर्ण है। यदि आप बहुत जल्द इलाज बंद करते हैं, तो कुछ जीवाणु जीवित रह सकते हैं और आपको फिर से संक्रमित कर सकते हैं।

विभिन्न प्रकार के एंटीबायोटिक्स बाजार में उपलब्ध हैं और वे अलग-अलग ब्रांड नामों के साथ आते हैं। एंटीबायोटिक्स को आमतौर पर उनके काम के तरीके के आधार पर अलग-अलग समूहों में रखा जाता हैं।

प्रत्येक प्रकार का एंटीबायोटिक केवल कुछ प्रकार के बैक्टीरिया या परजीवी के खिलाफ काम करता है। यही कारण है कि अलग-अलग प्रकार के संक्रमण के इलाज के लिए अलग-अलग एंटीबायोटिक्स का उपयोग किया जाता है।

एंटीबायोटिक दवाओं के मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं -

  • पेनिसिलिन - उदाहरण के लिए, फेनोक्सिमैथिलपेनिसिलिन, फ्लक्क्लोक्सासिलिन और एमोक्सिसिलिन इत्यादि।
  • सेफालोस्पोरिंस - उदाहरण के लिए, सेफकलोर, सेफाड्रॉक्सील और सेफलेक्सीन इत्यादि।
  • टेट्रासाइक्लाइन्स - उदाहरण के लिए, टेट्रासाइक्लाइन, डॉक्सीसाइक्लाइन और लाइमसाइक्लाइन इत्यादि।
  • एमिनोग्लैक्सीड्स - उदाहरण के लिए, जेंटामाइसीन और टोब्रामाइसीन इत्यादि।
  • मैक्रोलिड्स - उदाहरण के लिए, एरिथ्रोमाइसिन, एजीथ्रोमाइसिन और क्लैरीथ्रोमाइसिन इत्यादि।
  • क्लिंडामाइसिन इत्यादि।
  • सल्फोनामाइड्स और ट्रिमेथोप्रिम - उदाहरण के लिए, को-ट्राइमॉक्सोजोल, मेट्रोनिडाज़ोल और टिनिडाज़ोल इत्यादि।
  • क्विनोलोन्स - उदाहरण के लिए, सिप्रोफ्लोक्सासिन, लेवोफ्लोक्सासिन और नॉरफ्लोक्सासिन इत्यादि।
  • नाइट्रोफुरेंटोइन - मूत्र संक्रमण के लिए उपयोग किया जाता है।

उपरोक्त मुख्य प्रकार के एंटीबायोटिक्स, के अलावा भी कई अन्य एंटीबायोटिक दवाएं हैं जो विशेषज्ञ डॉक्टर या अस्पताल के डॉक्टर अधिक असामान्य प्रकार के संक्रमण जैसे कि टीबी के इलाज के लिए उपयोग कर सकते हैं।

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अधिकांश एंटीबायोटिक्स अपने व्यक्तिगत एंटीबायोटिक वर्ग में आती हैं। एक एंटीबायोटिक वर्ग विभिन्न दवाओं का एक समूह है जिनमें एक समान रासायनिक और फार्माकोलॉजिकल गुण होते हैं। उनकी रासायनिक संरचना समान लग सकती हैं और एक ही वर्ग की दवाएं एक जैसे बैक्टीरिया को मार सकती हैं।

हालांकि, यह ध्यान रखें कि किसी भी संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक का उपयोग तब तक न करें जबतक कि आपका डॉक्टर विशेष रूप से इसे निर्धारित नहीं करता है। भले ही आपके लिए पहले निर्धारित की गयी दवा और इसका वर्ग समान हो। एंटीबायोटिक्स जीवाणुओं के एक विशेष प्रकार के लिए होती हैं, जिसे वे मारती हैं।

इसके अलावा, आपको अपने संक्रमण को प्रभावी ढंग से ठीक करने के लिए एक पूर्ण उपचार की आवश्यकता होगी, इसलिए न तो पहले के बचे हुए एंटीबायोटिक्स का उपयोग करें और न ही उपचार के बीच एंटीबायोटिक्स बचा कर रखें, अपना कोर्स पूरा करें।

जीवाणु से होने वाले संक्रमण का इलाज करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग तब किया जा सकता है जब -

  • एंटीबायोटिक दवाओं के बिना इसे ठीक करने की संभावना नहीं है।
  • अगर इलाज नहीं किया गया तो दूसरों को प्रभावित कर सकता है।
  • बिना एंटीबायोटिक दवाओं से इलाज के बहुत लंबा समय लग सकता है।
  • यदि इलाज न किया जाए तो अधिक गंभीर जटिलताओं का खतरा हो सकता है।
  • जिन लोगों को संक्रमण का जोखिम अधिक हो उनको भी एक सावधानी के तौर पर जिसे एंटीबायोटिक प्रोफेलेक्सिस कहा जाता है, एंटीबायोटिक्स दिया जा सकता है।

एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग बैक्टीरिया के कारण होने वाले संक्रमणों के इलाज के लिए किया जाता है। हालाँकि, कभी-कभी यह निर्धारित करना मुश्किल होता है कि आपका संक्रमण बैक्टीरिया के कारण है या वायरस के कारण है क्योंकि इनके लक्षण अक्सर समान होते हैं।

एंटीबायोटिक्स से इलाज किए जाने वाले कुछ सामान्य प्रकार के संक्रमण निम्नलिखित हैं -

आपके डॉक्टर आपके लक्षणों का मूल्यांकन करेंगे और आपके संक्रमण का कारण निर्धारित करने के लिए शारीरिक परिक्षण कर सकते हैं। कुछ मामलों में, वे संक्रमण के कारण की पुष्टि करने के लिए ब्लड टेस्ट या मूत्र परीक्षण का अनुरोध कर सकते हैं।

एंटीबायोटिक दवाएं लेने के लिए अपने डॉक्टर के निर्देशों को ध्यान से सुने और उन्हीं के अनुसार दवा लें। अगर आपको कुछ आशंका हो तो प्रशिक्षित फार्मासिस्ट से भी दवा लेते समय पूछ सकते हैं।

एंटीबायोटिक दवाओं की खुराक कई तरीकों से प्रदान की जा सकती है -

  • मौखिक या ओरल एंटीबायोटिक्स - गोलियाँ, कैप्सूल या एक तरल जिसे आप पीते हैं, जिसका उपयोग शरीर में अधिकांश प्रकार के हल्के से मध्यम संक्रमण के इलाज के लिए किया जा सकता है।
  • सामयिक एंटीबायोटिक्स- क्रीम, लोशन, स्प्रे या ड्रॉप्स, जिसका प्रयोग अक्सर त्वचा के संक्रमण के इलाज के लिए किया जाता है।
  • एंटीबायोटिक्स के इंजेक्शन - इन्हें सीधे रक्त या मांसपेशियों में ड्रिप के माध्यम से इंजेक्शन या जलसेक के रूप में दिया जा सकता है और आम तौर पर अधिक गंभीर संक्रमण के लिए उपयोग होते हैं

एंटीबायोटिक्स के निर्धारित कोर्स को पूरा करना आवश्यक है, भले ही आप बेहतर महसूस करें, जब तक कि आपके डॉक्टर स्वयं आगे इन्हें लेने से आपको मना नहीं करते। यदि आप एक कोर्स के बीच में एंटीबायोटिक लेना बंद कर देते हैं, तो बैक्टीरिया एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बन सकता है।

यदि आप अपने एंटीबायोटिक दवाओं की खुराक लेना भूल जाते हैं, तो उस खुराक को जितनी जल्दी याद आएं उतनी जल्दी लें और फिर सामान्य रूप से एंटीबायोटिक्स का अपना कोर्स लेना जारी रखें।

लेकिन अगर आपको इसके बारे में अगली खुराक के लिए निर्धारित समय पर याद आता है, तो उस खुराक को छोड़ें और अपना नियमित खुराक शेड्यूल जारी रखें। छूट गयी खुराक की पूर्ति करने के लिए डबल खुराक न लें।

यदि 2 खुराक एक साथ लेते हैं तो दुष्प्रभावों का एक बड़ा जोखिम हो सकता है। हालाँकि, गलती से आपके एंटीबायोटिक की एक अतिरिक्त खुराक लेने से आपको कोई गंभीर नुकसान नहीं होता है। लेकिन इससे साइड इफेक्ट्स होने की आशंका जरूर बढ़ जाएगी, जैसे आपके पेट में दर्द, दस्त और बीमार महसूस करना या बीमार होना।

यदि आप गलती से अपने एंटीबायोटिक की एक से अधिक खुराक ले लेते हैं और इस बात को लेकर चिंतित हैं या किसी गंभीर साइड इफेक्ट्स का सामना कर रहे हैं, तो तुरंत अपने डॉक्टर से बात करें।

एंटीबायोटिक दवाएं हमारे स्वास्थ के लिए बहुत ही लाभदायक दवाएं हैं। बैक्टीरियल संक्रमण और बीमारी की गंभीर जटिलताओं को कम करने, जीवाणु से होने वाले संक्रमण के इलाज में पेनिसिलिन और अन्य एंटीबायोटिक्स के लाभों को नकारना मुश्किल होगा।

एंटीबायोटिक्स जीवाणुओं में महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को अवरुद्ध करके, बैक्टीरिया को मारकर या उनकी वृद्धि को रोक कर हमें संक्रमण फैलने से बचाती हैं।

ये बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मदद करते हैं।

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लेकिन कुछ दवाएं जो जीवाणु संक्रमण के इलाज के लिए काम करती थीं समय बीतने के साथ अब कम प्रभावी होती जा रही हैं या बिल्कुल काम नहीं करती हैं।

जब एंटीबायोटिक का बैक्टीरिया के एक निश्चित अवशेष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, तो उन बैक्टीरिया को एंटीबायोटिक प्रतिरोधी कहा जाता है। एंटीबायोटिक प्रतिरोध आज दुनिया की सबसे अधिक चिंताजनक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है।

सभी दवाओं की तरह, एंटीबायोटिक दवाओं में भी साइड इफेक्ट का कारण बनने की क्षमता होती है। जब एंटीबायोटिक्स आपके लिए आवश्यक होते हैं, तो लाभ इसके जोखिम से काफी अधिक होते हैं। लेकिन जब उनकी आवश्यकता नहीं होती है, तब भी यदि आप इनका उपयोग करते हैं तो आप एक अनावश्यक जोखिम ले रहे हैं।

एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग से होने वाले कुछ सामान्य नुकसान नीचे सूचीबद्ध किए गए हैं -

  • कुछ एंटीबायोटिक दवाओं या एंटीबायोटिक्स के वर्ग (उदाहरण के लिए, पेनिसिलिन से एलर्जी) से एलर्जी हो सकती है। (और पढ़े - एलर्जी के घरेलू उपाय)
  • कई एंटीबायोटिक दवाएं गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं (जैसे दस्त, उल्टी या मतली) का कारण बन सकती हैं।
  • एंटीबायोटिक्स न केवल अपने लक्ष्य को मारती हैं बल्कि अन्य उपयोगी सूक्ष्म जीव जो अन्य बीमारियों को रोकने के लिए हमारे शरीर (वनस्पति) में रहते हैं उन्हें भी मार देती है।
  • त्वचा पर कई प्रकार के चकत्ते हो सकते हैं, जो हल्के (उदाहरण के लिए, लाल-लाल चकत्ते) या विनाशकारी (उदाहरण के लिए, जहरीले एपिडर्मल नेक्रोलिसिस) भी हो सकते हैं। (और पढ़े - त्वचा पर चकत्तों के घरेलू उपाय)
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