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एलर्जी एक बहुत ही संवेदनशील प्रतिक्रिया होती है, यह प्रतिक्रिया प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा उन पदार्थों के खिलाफ की जाती है, जो शरीर के संपर्क में आते हैं या शरीर के अंदर घुस जाते हैं। एलर्जी टेस्टिंग में त्वचा की जांच व खून टेस्ट आदि शामिल होते हैं। जिनकी मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि किस पदार्थ या एलर्जन तत्व के कारण एलर्जिक प्रतिक्रिया शुरू हुई है। आमतौर पर पहले स्किन टेस्ट किया जाता है, क्योंकि यह तीव्र और भरोसेमंद होता है और खून टेस्ट की तुलना में कम खर्चे में हो जाता है। लेकिन इन दोनों परीक्षणों में से किसी एक या दोनों को भी चुना जा सकता है।

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  1. एलर्जी टेस्ट क्या होता है? - What is Allergy Test in Hindi?
  2. एलर्जी टेस्ट क्यों किया जाता है - What is the purpose of Allergy Test in Hindi
  3. एलर्जी टेस्ट से पहले - Before Allergy Test in Hindi
  4. एलर्जी टेस्ट के दौरान - During Allergy Test in Hindi
  5. एलर्जी टेस्ट के बाद - After Allergy Test in Hindi
  6. एलर्जी टेस्ट के क्या जोखिम होते हैं - What are the risks of Allergy Test in Hindi
  7. एलर्जी टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब होता है - What do the results of Allergy Test mean in Hindi
  8. एलर्जी टेस्ट कब करवाना चाहिए - When to get tested with Allergy Test in Hindi

एलर्जी टेस्ट क्या होता है?

एलर्जी टेस्ट द्वारा उन चीजों में एलर्जिक पदार्थ ढूंढने में मदद मिलती है, जिन्हें आप खाते, पीते, छूते या सांस द्वारा अंदर लेते हैं। एलर्जी टेस्ट में आमतौर पर स्किन टेस्ट व ब्लड टेस्ट शामिल होते है। हालांकि, अकेला एलर्जी टेस्ट आमतौर पर काफी नहीं होता। एलर्जी का परीक्षण करने के लिए सबसे पहले डॉक्टर द्वारा शारीरिक परीक्षण करना और पिछली मेडिकल जानकारियां जानना आवश्यक होता है। अगर शारीरिक परीक्षण और पिछली मेडिकल जानकारियां एलर्जी का संकेत देती हैं, तो एलर्जिक टेस्ट से यह पता लगा लिया जाता है कि आपको किस चीज से या किस प्रकार की एलर्जी है।

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त्वचा की जांच (स्किन टेस्ट):
स्किन टेस्ट के दौरान संदेहयुक्त एलर्जिक पदार्थ को एक छोटी सी मात्रा में मरीज की त्वचा के संपर्क में लाया जाता है, यह देखने के लिए कि प्रतिक्रिया होती है या नहीं। स्किन टेस्ट तीन प्रकार के होते हैं:

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  • स्किन प्रिक टेस्ट (Skin prick test): 
    इस टेस्ट में स्किन पर एक एलर्जिक पदार्थ युक्त घोल की बूंदे डाली जाती हैं, घोल को त्वचा के अंदर भेजने के लिए सुई आदि की मदद से त्वचा में छोटे छेद या स्क्रैच किए जा सकते हैं। अगर उस घोल के संपर्क में आने के बाद त्वचा में खुजली, लालिमा या सूजन आदि आती है तो इसका मतलब होता है कि मरीज इन पदार्थो से एलर्जी है। इसे पॉजिटिव रिएक्शन कहा जाता है। (और पढ़ें - खुजली के उपाय
     
  • इंट्राडर्मल टेस्ट (Intradermal test): 
    इस टेस्ट के दौरान एलर्जिक पदार्थ की एक छोटी सी मात्रा को इंजेक्शन से त्वचा के अंदर डाला जाता है। जब कोई पदार्थ स्किन प्रिक टेस्ट के दौरान प्रतिक्रिया ना कर पाए तो इंट्राडर्मल टेस्ट का उपयोग किया जाता है। 
     
  • स्किन पैच टेस्ट (Skin patch test): 
    इस टेस्ट में एलर्जिक पदार्थ को एक पैड पर लगाया जाता है और उस पैड को त्वचा पर 24 से 72 घंटों तक के लिए बांध दिया जाता है। इस टेस्ट का इस्तेमाल कॉन्टेक्ट डर्मेटाइटिस नाम एक स्किन एलर्जी का पता करने के लिए किया जाता है, कॉन्टेक्ट डर्मेटाइटिस एक सम्पर्क से होने वाला चर्मरोग होता है।

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ब्लड टेस्ट (Blood test):
एलर्जी ब्लड टेस्ट द्वारा खून में एंटीबॉडीज नामक पदार्थ की खोज की जाती है। ब्लड टेस्ट इतना संवेदनशील नहीं होता जितना स्किन टेस्ट होता है, लेकिन इसका इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया जाता है, जो किसी कारण से स्किन टेस्ट नहीं करवा सकते। ब्लड टेस्ट खून में एक ऐसे एंटीबॉडीज के स्तर को मापता है, जो उन लोगों में अक्सर उच्च होता है, जिनको एलर्जी या अस्थमा आदि की समस्या होती है।

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एलर्जी टेस्ट किसलिए किया जाता है?

एलर्जी टेस्ट यह पता करने के लिए किया जाता है कि कौन से पदार्थ (एलर्जन) एलर्जिक प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं।

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स्किन प्रिक टेस्ट निम्न के लिए भी किया जा सकता है:

  • हवा के द्वारा अंदर जाने वाले एलर्जिक पदार्थों की पहचान करने के लिए जैसे पेड़, झाड़ी, और घास के पराग, फफूंदी, धूल और पंख आदि।
  • खाद्य पदार्थों में संभावित एलर्जिक पदार्थों की जांच करने के लिए जैसे कि अंडेदूधमूंगफली, नट्स, मछलीसोया, गेहूं या शेलफिश आदि। (और पढ़ें - गेहूं के फायदे)
  • यह पता करने के लिए की मरीज को किसी दवा से या किसी जहरीले कीट से एलर्जी तो नहीं।

स्किन प्रिक टेस्ट की बजाए ब्लड टेस्ट किया जा सकता है, अगर मरीज को निम्न समस्याएं हैं:

  • अगर मरीज को पित्ती (Hives) या अन्य त्वचा संबंधी समस्याएं हैं, जैसे एक्जिमा आदि। ये समस्याएं त्वचा के परीक्षण को देखने में कठिनाईयां पैदा कर सकती हैं। (और पढ़ें - शीतपित्त के उपचार)
  • अगर मरीज कुछ विशेष प्रकार की दवाएं लेना बंद नहीं कर सकता, जैसे एंटीहिस्टामिन (A ntihistamine) या ट्रीसाइक्लिक एंटीडिप्रैसेंट (Tricyclic antidepressant) आदि। ये दवाएं एलर्जिक पदार्थों की प्रतिक्रिया होने से रोक सकती है या उन्हें कम कर सकती है। भले ही अगर वह व्यक्ति उन पदार्थों के प्रति एलर्जिक हो।
  • अगर पहले कभी गंभीर एलर्जिक प्रतिक्रिया (एनाफिलेक्सिस) हुई हो।
  • अगर पहले कई खाद्य पदार्थों से प्रति पॉजिटिव स्किन टेस्ट रिजल्ट मिल चुका हो।

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एलर्जी टेस्ट से पहले क्या किया जाता है?

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ऐसी कई प्रकार की दवाएं हैं जो स्किन टेस्ट के रिजल्ट को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए अगर आप किसी प्रकार की दवाएं लेते हैं तो टेस्ट होने से 2 या 3 दिन पहले ही डॉक्टर को इनके बारे में बता दें। एलर्जी टेस्ट होने से कुछ निश्चित समय पहले आपको कुछ प्रकार की दवाएं छोड़नी पड़ सकती हैं, जैसे ट्रीसाइक्लिक एंटीडिप्रैसेंट और एंटीहिस्टामिन दवाएं (जैसे सेटीरीजिन, फेक्सोफेनाडिन, लोरैटैडाइन)।

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एलर्जी टेस्ट करने से पहले डॉक्टर आपको आपकी जीवनशैली, आपके परिवार की मेडिकल जानकारी व अन्य ऐसी बातें पूछ सकते हैं, जिनसे उन्हें आपकी मेडिकल जानकारी मिल सकती है। अगर आपको टेस्ट करने की आवश्यकता, जोखिम, यह कैसे किया जाता है और इसके रिजल्ट के बारे में किसी भी प्रकार का सवाल है, तो इन सब के बारे में रिजल्ट से पहले ही डॉक्टर से बात कर लें।

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एलर्जी टेस्ट के दौरान क्या किया जाता है?

स्किन प्रिक टेस्ट या इंट्राडर्मल टेस्ट के दौरान जब सेंपल त्वचा के अंदर जाता है या जब सुई द्वारा त्वचा में छेद किया जाता है तो उस समय आपको एक हल्की चुभन महसूस हो सकती है। अगर आपको इनमें से किसी भी स्किन टेस्ट से एलर्जिक प्रतिक्रिया होती है, तो जहां पर घोल डाला जाता है वहां पर आपको खुजली, सूजन या टेंडरनेस (छूने पर दर्द होना) जैसी समस्याएं हो सकती है।

जब घोल डालने के लिए त्वचा के अंदर सुई डाली जाती है, तो उस समय आपको हल्की चुभन या दर्द महसूस हो सकता है। जब सुई नस के अंदर जाती है, तब भी कुछ लोगों को चुभन सी महसूस होती है। 

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एलर्जी टेस्ट के बाद क्या किया जाता है?

अगर आपका स्किन पैच टेस्ट किया गया है तो टेस्ट होने के 24 से 72 घंटे तक आपको वहां पैड बांध कर रखना पड़ सकता है। जब तक पैड बंधा होता है, नहाना नहीं चाहिऐ और ना ही कोई ऐसी गतिविधि करनी चाहिए जिससे अधिक पसीना आने की संभावना हो। ऐसा करने से पैड गीला हो सकता है या ढीला हो कर गिर भी सकता है। इस पैड को डॉक्टर द्वारा ही उतारा जाता है और इसके नीचे की त्वचा में एलर्जिक रिएक्शन की जांच की जाती है।

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अगर ब्लड टेस्ट किया जाता है तो:

  • सैम्पल के लिए पर्याप्त खून निकाल लेने के बाद बाजू से पट्टी हो हटा दिया जाता है।
  • जहां पर सुई लगी होती है, सुई निकलने के तुरंत बाद वहां पर बैंडेज या रूई का टुकड़ा रख दिया जाता है।
  • सुई निकालने के बाद उस जगह पर थोड़ा दबाव दिया जाता है, उसके बाद वहां बैंडेज लगा दी जाती है।

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एलर्जी टेस्ट के क्या जोखिम हो सकते हैं?

एलर्जी टेस्ट के कारण आपको हल्की खुजली, लालिमा और सूजन आदि समस्याएं हो सकती है। कई बार उस जगह पर त्वचा में एक छोटा सा उभार भी बन जाता है। ये लक्षण कुछ ही घंटों में ठीक हो जाते हैं और यह कुछ दिनों तक भी रह सकते हैं। कुछ सौम्य स्टेरॉयड क्रीम इसके लक्षणों को कम कर सकती हैं।

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बहुत ही दुर्लभ मामलों में, एलर्जी टेस्ट के कारण गंभीर एलर्जिक रिएक्शन होता है, जिसमें तुरंत मेडिकल जांच की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए एलर्जी टेस्ट को अस्पताल में ही किया जाना चाहिए, क्योंकि वहां पर ऐसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दवाएं व उपकरण होते हैं। जैसे एनाफिलेक्सिस का उपचार करने के लिए एपिनेफ्रीन (Epinephrine), एनाफिलेक्सिस संभावित रूप से जीवन के लिए एक खतरनाक और तीव्र एलर्जिक रिएक्शन होता है।

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एलर्जी टेस्ट के रिजल्ट का क्या मतलब होता है?

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सामान्य रिजल्ट -

नेगेटिव रिजल्ट का मतलब है कि एलर्जिक प्रतिक्रिया के रूप में किसी प्रकार का बदलाव नहीं मिल पाया है। ज्यादातर नेगेटिव रिजल्ट का मतलब यह होता है कि जिस पदार्थ पर टेस्ट किया गया, आप उसके प्रति एलर्जिक नहीं हैं।

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असामान्य रिजल्ट के लिए –

पॉजिटिव रिजल्ट का मतलब होता है कि आप उस पदार्थ के प्रति एलर्जिक हैं, इसमें डॉक्टर त्वचा में लाल उभार देखते हैं, जिसे व्हील (Wheal) कहा जाता है।

पॉजिटिव रिजल्ट का मतलब होता है कि जिस पदार्थ को आपकी त्वचा के संपर्क में लाया गया था, उसके प्रति त्वचा में लक्षण दिखाई दे रहे हैं। लक्षण जितने गंभीर होते हैं, उसका मतलब होता है कि आप उस पदार्थ के प्रति उतने ही अधिक एलर्जिक हैं।

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स्किन टेस्ट आमतौर पर सटीक होते है। लेकिन अगर घोल में एलर्जिक पदार्थ अधिक मिला दिया जाए तो जो लोग एलर्जिक नहीं होते उनमें भी पॉजिटिव रिजल्ट दिखाई दे सकते हैं।

डॉक्टर आपके लक्षणों को समझेंगे और आपके रिजल्ट को देखकर आपको जीवनशैली में कुछ बदलाव तथा एलर्जिक पदार्थों से बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव देंगे। 

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एलर्जी टेस्ट कब करवाना चाहिए?

अगर आपको एलर्जी से जुड़े लक्षण लगातार महसूस हो रहे हैं या ये लक्षण आपके रोजाना के जीवन में बदलाव डाल रहे हैं, तो आपको तुरंत टेस्ट करवा लेना चाहिए, जैसे:

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