myUpchar प्लस+ के साथ पूरेे परिवार के हेल्थ खर्च पर भारी बचत

एल्डोलेज टेस्ट क्‍या है?

एल्डोलेज टेस्ट खून में एल्‍डोलेज एंजाइम की जांच के लिए किया जाता है। शरीर की हर कोशिका में एल्‍डोलेज मौजूद होता है। हालांकि, ये खासतौर पर स्‍केलेटल मसल्‍स, लिवर और मस्तिष्‍क में पाया जाता है।

ग्‍लाइकोजन के टूटने की प्रक्रिया के लिए महत्‍वपूर्ण एंजाइम्‍स में एल्‍डोलेज भी एक है। मांसपेशियों के ऊतकों को नुकसान पहुंचने पर खून में एल्‍डोलेज रिलीज़ होता है इसलिए मांसपेशियों को क्षति पहुंचने जैसे कि मायोकार्डियल इन्फार्कशन, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, अग्नाशयशोथ और लिवर रोगों की स्थिति में एल्‍डोलेज टेस्‍ट की सलाह दी जाती है।

  1. एल्डोलेज टेस्ट क्यों किया जाता है? - What is the purpose of Aldolase Test in Hindi?
  2. एल्डोलेज टेस्ट से पहले की तैयारी? - How to prepare for Aldolase Test in Hindi?
  3. एल्डोलेज टेस्ट कैसे किया जाता है? - How the Aldolase Test is done in Hindi?
  4. एल्डोलेज टेस्ट के परिणाम का क्या मतलब है? - What do the results of Aldolase Test mean in Hindi?

एल्डोलेज एक मसल एंजाइम है जो तीन रूपों में पाया जाता है – एल्‍डोलेज ए,बी और सी। एल्‍डोलेज ए मांसपेशियों की कोशिकाओं में पाया जाता है जबकि बी और सी मस्तिष्‍क, लिवर एवं अन्‍य अंगों में होता है। एल्‍डोलेज मांसपेशियों की कोशिकाओं के आकार को बनाए रखने, मांसपेशियों की गतिशीलता, एक्टिन फिलामेंट के गठन और एडीनोसिन ट्राइफॉस्फेट बायोसिंथेसिस के लिए जिम्‍मेदार होता है।

सीरम में एल्‍डोलेज एंजाइम के स्‍तर से बीमारी का पता लगाया जा सकता है। जिन लोगों के ब्लड सीरम में एल्‍डोलेज ए पाया गया उनके फेफड़ों और मलाशय में कैंसर की रिपोर्ट सामने आई। संक्रामक रोगों का खतरा पैदा करने वाली बीमारियां जैसे कि गैंग्रीन और ऑटोइम्‍यून स्थितियां (जैसे कि पॉलीमायोसिटिस) भी एल्‍डोलेज का स्‍तर बढ़ने के कारण होती हैं। स्‍केलेटल मसल्स इंजरी सिंड्रोम राब्‍डोमिओसिस एक खतरनाक बीमारी है। मरीज़ के उचित इलाज के लिए सीरम में एल्‍डोलेज के स्‍तर को मॉनिटर करने की सलाह दी जाती है। निम्‍न परिस्थितियों में एल्‍डोलेज टेस्‍ट की सलाह दी जा सकती है:

ये टेस्‍ट बहुत आसान होता है और इसके लिए किसी भी तरह की विशेष तैयारी करने की जरूरत नहीं है। सटीक परिणाम के लिए कभी-कभी मरीज़ को 6 घंटे तक व्रत रखने के लिए कहा जा सकता है। अगर आप कोई दवा ले रहे हैं तो उसका नाम और खुराक के बारे में डॉक्‍टर एवं पैथोलोजिस्‍ट को जरूर बताएं क्‍योंकि इसका असर टेस्‍ट के रिजल्‍ट पर पड़ सकता है।

(और पढ़ें - लैब टेस्ट कैसे होता है )

सुईं की मदद से टेक्‍नीशियन मरीज़ के हाथ की नस से लगभग 5 मि.ली खून निकालकर इसे साफ ट्यूब में सैंपल के तौर पर डाल देता है। इस सैंपल को टेस्‍ट के लिए भेजा जाता है। कुछ मरीज़ों को सुईं से खून निकालने के दौरान चुभन महसूस हो सकती है। सैंपल लेने के बाद टेक्‍नीशियन हाथ पर एंटीसेप्टिक दवा लगाता है जिससे इंफेक्‍शन का खतरा ना हो।

  • नॉर्मल रिजल्‍ट
    वयस्‍क व्‍यक्‍ति के शरीर में सीरम में एल्‍डोलेज की नॉर्मल वैल्‍यू 0 से 7 इंटरनेशनल यूनिट(IU)/लीटर होती है। बच्‍चों में ये वैल्‍यू वयस्‍कों के दोगुनी हो जाती है जबकि नवजात शिशुओं में वयस्‍कों की तुलना में ये वैल्‍यू चार गुना ज्‍यादा होती है।
     
  • एब्नार्मल रिजल्‍ट
    सीरम एल्‍डोलेज का बढ़ना या घटना एब्नार्मल वैल्‍यू की ओर संकेत करता है। मायोपैथी से ग्रस्‍त मरीज़ में सीरम में एल्डोलेज का बढ़ना स्क्लेरोसिस बीमारी का संकेत देता है। ऐसे मरीज़ों में एल्‍डोलेज को नियमित मॉनिटर करने के साथ अन्‍य लैबोरेटरी जांच करवाने की जरूरत होती है। हृदय समस्‍या से ग्रस्‍त मरीज़ों में जीर्ण हाइपोक्सिया (ऑक्सीजन की कमी) के कारण कार्डिएक मिओसिट (ह्रदय की मांसपेशियों) को क्षति पहुंचती है। हालांकि, एनारोबिक ग्‍लाइकोलिसिस ह्रदय की मांसपेशियों को सुरक्षा देता है और एल्‍डोलेज इस प्रक्रिया में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। सीरम में एल्‍डोलेज के बढ़ने से निम्‍न बातों का पता चल सकता है:

सीरम में एल्‍डोलेज का स्‍तर कम होने का मतलब निम्‍न परिस्थितियों से हो सकता है:

  • मस्कुलर डिस्ट्रॉफी
  • हीमोलिटिक एनीमिया जो कि एक दुर्लभ बीमारी है (और पढ़ें - एनीमिया के घरेलू उपाय)
  • अनुवांशिक फ्रुक्टोज इंटोलरेंस, नवजात शिशु को फ्रुक्टोज युक्‍त कोई नया खाद्य पदार्थ खिलाने पर ऐसा होता है।

नोट: टेस्‍ट के रिजल्‍ट और व्‍यक्‍ति के लक्षणों के आधार पर ही उचित निदान किया जाना चाहिए। उपरोक्त जानकारी पूरी तरह से शैक्षिक दृष्टिकोण से दी गई है और यह किसी भी तरह से डॉक्‍टर की चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है।

और पढ़ें ...

References

  1. Wilson D ,Mc Graw Hills manual of laboratory and diagnostic tests, 2008. The Mc Graw Hills companies Inc., pp 16, 17.
  2. Marshall WJ, Lapsley M, Day AP, Ayling RM. Clinical Biochemistry: Metabolic and Clinical Aspects, third ed, 2014 Churchill Livingstone. Elsevier Ltd, pp 464, 471, 525, 528, 653.
  3. Ferri FF, Ferri’s Best Test: A practical guide to clinical laboratory medicine and diagnostic imaging 4th ed 2019, Elsevier, pp 144, 356, 357.
  4. Benioff Children's Hospital [internet]: University of California, San Francisco; Aldolase
  5. Tolédano C, Gain M, Kettaneh A, Baudin B, Johanet C, Cherin P, et al. Aldolase predicts subsequent myopathy occurrence in systemic sclerosis.. Arthritis Res Ther. 2012;14(3):R152. Published 2012 Jun 22. doi:10.1186/ar3888
  6. Yamamoto T, Kudo M, Peng WX, Takata H, Takakura H, Teduka K, et al. Identification of aldolase A as a potential diagnostic biomarker for colorectal cancer based on proteomic analysis using formalin-fixed paraffin-embedded tissue. Tumour Biol. 37(10):13595-13606. doi: 10.1007/s13277-016-5275-8.
  7. Hooda AK, Narula AS. Exertional rhabdomyolysis causing acute renal failure. Med J Armed Forces India. 2005;61(4):395-396. doi:10.1016/S0377-1237(05)80082-6
  8. Casciola-Rosen L, Hall JC, Mammen AL, Christopher-Stine L, Rosen A. Isolated elevation of aldolase in the serum of myositis patients: a potential biomarker of damaged early regenerating muscle cells. Clinical and experimental rheumatology 2012;30(4), 548-553.
  9. Aliparasti MR, Alipour MR, Almasi S, Feizi H. Effect of ghrelin on aldolase gene expression in the heart of chronic hypoxic rat. Int J Endocrinol Metab. 2012;10(3):553-557. doi:10.5812/ijem.3914