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लिवर कैंसर क्या है?

लिवर (यकृत या जिगर) एक फुटबॉल के आकार का अंग है, जो आपके पेट के ऊपरी दाएं भाग में स्थित होता है। इसकी सही स्थिति आपके डायाफ्राम के नीचे और आपके पेट के ऊपर होती है। लिवर कैंसर आपके लिवर की कोशिकाओं में शुरू होता है और उन्हें नष्ट करता है, साथ ही लिवर की गतिविधिओं के साथ भी हस्तक्षेप करता है।

लिवर कैंसर (Liver cancer) का सबसे आम रूप हेपैटोसेलुलर कार्सिनोमा (Hepatocellular carcinoma) है, जो मुख्य प्रकार की लिवर कोशिका, जिसे हेपोटोसाइट कहते हैं, में शुरू होता है। लिवर में अन्य प्रकार की कोशिकाएं में भी कैंसर की शुरुआत हो सकती है लेकिन ऐसा बहुत कम होता हैं।

लिवर को प्रभावित करने वाले सभी कैंसर लिवर कैंसर नहीं होते हैं। जो कैंसर शरीर के किसी दूसरे क्षेत्र में, जैसे कि बृहदान्त्र (colon), फेफड़े (lung) या स्तन (breast) में शुरू होने के बाद लिवर में फैलते हैं उन्हें लिवर कैंसर के बजाय मेटास्टाटिक कैंसर (Metastatic cancer) कहा जाता है। इस प्रकार के कैंसर का नाम उस अंग के नाम पर रखा जाता है, जिसमें इनकी शुरूआत होती है। जैसे - बृहदान्त्र (colon) में शुरू हुए कैंसर को मेटास्टाटिक कोलन कैंसर (Metastatic colon cancer) कहा जाता है।

  1. लिवर कैंसर के प्रकार - Types of Liver Cancer in Hindi
  2. लिवर कैंसर के चरण - Stages of Liver Cancer in Hindi
  3. लिवर कैंसर के लक्षण - Liver Cancer Symptoms in Hindi
  4. लिवर कैंसर के कारण और जोखिम कारक - Liver Cancer Causes & Risk Factors in Hindi
  5. लिवर कैंसर से बचाव - Prevention of Liver Cancer in Hindi
  6. लिवर कैंसर का परीक्षण - Diagnosis of Liver Cancer in Hindi
  7. लिवर कैंसर का इलाज - Liver Cancer Treatment in Hindi
  8. लिवर कैंसर की जटिलताएं - Liver Cancer Complications in Hindi
  9. लिवर कैंसर की दवा - Medicines for Liver Cancer in Hindi
  10. लिवर कैंसर की दवा - OTC Medicines for Liver Cancer in Hindi
  11. लिवर कैंसर के डॉक्टर

लिवर कैंसर के निम्नलिखित प्रकार होते हैं -

1. हेपैटोसेलुलर कार्सिनोमा (एचसीसी) (Hepatocellular carcinoma) - हेपैटोसेलुलर कार्सिनोमा को हेपेटोमा भी कहा जाता है, एचसीसी लिवर कैंसर का सबसे आम प्रकार है जो लगभग 75 प्रतिशत लिवर कैंसर के मामलों का कारण होता है। एचसीसी मुख्य प्रकार की लिवर कोशिकाओं में शुरू होता है, जिन्हें हेपेटोसेल्यूलर कोशिका कहा जाता है। एचसीसी के अधिकांश मामले, हेपेटाइटिस बी या सी या शराब के कारण हुए लिवर के सिरोसिस के संक्रमण के कारण होते हैं।

2. फाइब्रोलामेलर एचसीसी (Fibrolamellar HCC) - यह एक दुर्लभ प्रकार का एचसीसी है जो आमतौर पर अन्य प्रकार के लिवर कैंसर के मुकाबले इलाज के लिए अधिक संवेदनशील होता है।

3. पित्त वाहिका का कैंसर (Bile duct cancer) - यह कैंसर लिवर के भीतर छोटी, ट्यूब जैसी पित्त नलिकाओं में होता है जो पित्त को पित्ताशय की से जोड़ती हैं। यह सभी लिवर कैंसर के 10-20 प्रतिशत मामलों में होता है।

4. एंजियोसार्कोमा (Angiosarcoma) - एंजियोसार्कोमा को हेमांजिओकार्सिनोमा (hemangiocarcinoma) भी कहा जाता है जो लगभग 1 प्रतिशत लिवर कैंसर के मामलों में होता है। यह रक्त वाहिकाओं में शुरू होता है और जल्दी से बढ़ जाता है।

5. लिवर मेटास्टैसिस (Liver metastasis) - यह कैंसर तब विकसित होता है जब शरीर के दूसरे भाग से कैंसर लिवर में फैलता है। ज्यादातर लिवर मेटास्टेस, बृहदान्त्र (colon) से उत्पन्न होता है। बृहदान्त्र (colon) कैंसर से ग्रस्त आधे से ज़्यादा लोगों को लिवर मेटास्टैसिस भी विकसित हो जाता है।

लिवर कैंसर के निम्नलिखित चार चरण होते हैं -

1. पहला चरण
लिवर कैंसर के पहले चरण का मतलब होता है कि ट्यूमर रक्त वाहिकाओं में विकसित नहीं हुआ है और कैंसर पास के लिम्फ नोड्स या दूसरी जगहों में नहीं फैला है।

2. दूसरा चरण
दूसरे चरण का मतलब है कि ट्यूमर रक्त वाहिकाओं में विकसित हो गया है या कई छोटे ट्यूमर (सभी 2 इंच से छोटे) विकसित हुए हैं और कैंसर पास के लिम्फ नोड्स या दूसरी जगहों में नहीं फैला है।

3. तीसरा चरण
लिवर कैंसर के तीसरे चरण के निम्नलिखित तीन उप-प्रकार होते हैं -

  1. पहला - इसका मतलब है कि कई ट्यूमर मौजूद हैं और कम से कम एक 2 इंच (5 सेमी) से बड़ा है व कैंसर पास के लिम्फ नोड्स या दूसरी जगहों में फैला नहीं है।
  2. दूसरा - इसका मतलब है कि कई ट्यूमर मौजूद हैं और कम से कम एक ट्यूमर नाड़ी की एक शाखा में बढ़ रहा है व कैंसर पास के लिम्फ नोड्स या दूसरी जगहों में फैला नहीं है।
  3. तीसरा - इसका मतलब है कि ट्यूमर एक पास के अंग (पित्ताशय के अलावा) या लिवर के बाहरी आवरण में फ़ैल गया है और पास के लिम्फ नोड्स या दूसरी जगहों में नहीं फैला है।

4. चौथा चरण
चौथा चरण, लिवर कैंसर का सबसे उन्नत चरण होता है। इसमें, कैंसर पास के लिम्फ नोड्स में फैल जाता है और आस-पास की रक्त वाहिकाओं या अंगों में बढ़ सकता है। उन्नत लिवर कैंसर अक्सर दूर के अंगों में नहीं फैलता लेकिन जब ऐसा होता है, तो इसकी फेफड़ों और हड्डियों में फैलने की संभावना होती है।

ज्यादातर लोगों को प्राथमिक चरण में लिवर कैंसर के कुछ लक्षण नहीं होते हैं लेकिन जब होते हैं, तो इसमें निम्नलिखित लक्षण शामिल हो सकते हैं -

  1. वज़न कम होना
  2. भूख कम लगना
  3. पेट के ऊपरी भाग में दर्द (और पढ़ें - पेट दर्द का इलाज)
  4. मतली या उल्टी
  5. सामान्य कमज़ोरी और थकान
  6. पेट की सूजन
  7. त्वचा का पीलापन और आँखों में सफेदी (और पढ़ें - पीलिया का इलाज)
  8. मल में सफेदी आना

लिवर कैंसर क्यों होता है?

यह स्पष्ट नहीं है कि लिवर कैंसर के क्या कारण होते हैं लेकिन कुछ मामलों में, कारण ज्ञात होता है। उदाहरण के लिए, कुछ हेपेटाइटिस वायरस के क्रोनिक (यानी दीर्घकालिक) संक्रमण से लिवर का कैंसर हो सकता है।

लिवर कैंसर तब होता है जब लिवर कोशिकाओं के डीएनए में परिवर्तन होते हैं। डीएनए आपके शरीर में हर रासायनिक प्रक्रिया के लिए निर्देश प्रदान करते हैं। डीएनए में परिवर्तन से इन निर्देशों में परिवर्तन हो जाते हैं। इसका एक यह परिणाम भी हो सकता है कि कोशिकाएं नियंत्रण से बाहर बढ़ना शुरू कर दें और अंततः एक ट्यूमर बन जाएं।

 

लिवर कैंसर के जोखिम कारक क्या हैं ?

लीवर कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाले कारक निम्नलिखित हैं -

  1. हेपेटाइटिस बी या सी का गंभीर संक्रमण - हेपेटाइटिस बी वायरस (एचबीवी) या हेपेटाइटिस सी वायरस (एचसीवी) लिवर कैंसर का खतरा बढ़ाते हैँ।
  2. सिरोसिस - यह प्रगतिशील और अपरिवर्तनीय बीमारी आपके जिगर में एक निशान ऊतक का कारण बनती है और लिवर कैंसर होने की संभावना बढ़ाती है।
  3. कुछ अनुवांशिक लिवर रोग - हेमोक्रोमैटोसिस (Hemochromatosis) और विल्सन रोग (Wilson's disease) जैसे कुछ अनुवांशिक रोग आपके लिवर कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं।
  4. मधुमेह - शुगर से ग्रस्त लोगों को लिवर कैंसर होने का ज़्यादा खतरा होता है।
  5. फैट - जिगर में फैट का संग्रह लिवर कैंसर का खतरा बढ़ाता है।
  6. अत्यधिक शराब पीना - कई सालों तक रोजाना शराब लेने से लिवर की क्षति और यकृत कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
  7. मोटापा - शरीर का अत्यधिक द्रव्यमान लिवर कैंसर का खतरा बढ़ाता है।

 

लिवर कैंसर से कैसे बचा जा सकता है ?

लिवर कैंसर से बचने के लिए आप निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं -

1. सिरोसिस (Cirrhosis) से बचें
सिरोसिस एक जिगर का घाव होता है और यह लिवर कैंसर का खतरा बढ़ाता है। आप सिरोसिस के अपने जोखिम को कम कर सकते हैं यदि आप -

  1. शराब कम मात्रा में पीएं या बिलकुल न पीएं।
  2. स्वस्थ वज़न बनाए रखें।
  3. रसायनों का उपयोग करते समय सावधानी बरतें।

2. हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाएं
हेपेटाइटिस बी टीका प्राप्त करके आप हेपेटाइटिस बी का खतरा कम कर सकते हैं, जो वयस्कों और बच्चों दोनों के लिए 90 प्रतिशत से ज्यादा सुरक्षा प्रदान करता है। यह टीका लगभग किसी को भी दिया जा सकता है।

3. हेपेटाइटिस सी को रोकने के लिए उपाय करें
हेपेटाइटिस सी के लिए कोई टीका मौजूद नहीं है लेकिन आप निम्नलिखित तरीकों से संक्रमण के अपने जोखिम को कम कर सकते हैं -

  1. किसी भी यौन साथी की स्वास्थ्य स्थिति को जाने बिना यौन सम्बन्ध न बनाएं और हर बार कंडोम का प्रयोग करें।
  2. अगर नसों द्वारा दवा प्राप्त करने की ज़रुरत हो तो सुई का उपयोग करने से पहले सुनिश्चित कर लें कि सुई दूषित न हो।
  3. कान या कोई अन्य भाग छिदवाने या टैटू करवाने से पहले सुई और औज़ारों को जाँच लें।

लिवर कैंसर का निदान कैसे किया जाता है?

लिवर कैंसर का निदान चिकित्सा इतिहास की जाँच और शारीरिक परीक्षा से शुरू होता है। यदि आपको लंबे समय तक शराब की लत्त या हैपेटाइटिस बी या सी संक्रमण रहा है तो अपने डॉक्टर को अवश्य बताएं।

लिवर कैंसर के निदान परीक्षण में निम्नलिखित प्रक्रियाएं शामिल हैं -

  1. लिवर के कार्य का परीक्षण
    इस परीक्षण से आपके डॉक्टर आपके रक्त में प्रोटीन के स्तर को मापकर आपके लिवर के स्वास्थ्य को निर्धारित करते हैं। रक्त में अल्फा-फेटोप्रोटीन (एफपी) की मौजूदगी लिवर कैंसर का संकेत हो सकती है।
     
  2. सीटी या एमआरआई स्कैन (CT or MRI scan)
    यह स्कैन पेट में लिवर और अन्य अंगों की विस्तृत छवियों का उत्पादन करते हैं। ये परीक्षण आपके चिकित्सक को यह तय करने में मदद कर सकते हैं कि ट्यूमर कहां विकसित हो रहा है, उसका आकार क्या है और यह अन्य अंगों में फैला है या नहीं।
     
  3. लीवर बायोप्सी (Liver biopsy)
    लीवर बायोप्सी लिवर कैंसर के लिए उपलब्ध एक अन्य नैदानिक परीक्षण है। इसमें लिवर टिशू का एक छोटा सा टुकड़ा जाँच के लिए निकाला जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान आपको कोई दर्द महसूस होने से रोकने के लिए हमेशा बेहोश किया जाता है।

लिवर कैंसर का इलाज कैसे होता है ?

लिवर कैंसर का उपचार निम्नलिखित तरीकों से किया जाता है -

1. हेपेटेक्टमी (Hepatectomy)
हेपेटेक्टमी में लिवर का एक हिस्सा या पूरा लिवर हटाया जाता है। यह सर्जरी आम तौर पर तब की जाती है जब कैंसर लिवर तक ही सीमित होता है। समय के साथ, निकाला गया भाग फिर से बढ़ जाता है।

2. लिवर ट्रांसप्लांट (Liver transplant)
लिवर ट्रांसप्लांट में एक रोगी के खराब लिवर को एक स्वस्थ लिवर से बदल दिया जाता है। यह केवल तब किया जा सकता है जब कैंसर अन्य अंगों तक न फैला हो। अस्वीकृति को रोकने के लिए प्रत्यारोपण के बाद दवाएं दी जाती हैं।

3. आबलेशन (Ablation)
आबलेशन में कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए गर्मी या इथेनॉल इंजेक्शन का उपयोग किया जाता है। इसमें बेहोशी का उपयोग किया जाता है ताकि आपको दर्द महसूस न हो। यह उन लोगों के लिए लाभदायक है जिनकी सर्जरी या प्रत्यारोपण नहीं किया जाता।

4. कीमोथेरेपी (Chemotherapy)
कीमोथेरेपी कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर देती है। इसमें दवाएं नसों के माध्यम से दी जाती हैं। लिवर कैंसर के उपचार में कीमोथेरेपी प्रभावी हो सकती है लेकिन कई लोगों को इलाज के दौरान उल्टी, भूख कम लगना और ठंड लगना सहित अन्य दुष्प्रभाव होते हैं। कीमोथेरेपी आपके संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकती है।

5. विकिरण थेरेपी (Radiation therapy)
विकिरण थेरेपी में कैंसर की कोशिकाओं को मारने के लिए उच्च-ऊर्जा विकिरण वाली किरणों का उपयोग किया जाता है। इसके दो तरीके होते हैं - बाहरी विकिरण या आंतरिक विकिरण

6. टार्गेटेड थेरेपी (Targeted therapy)
लक्षित थेरेपी में कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए ख़ास दवाओं का उपयोग किया है जब वे कमज़ोर होती हैं। वे ट्यूमर की वृद्धि को कम करते हैं और ट्यूमर को रक्त की आपूर्ति बंद करने में मदद करते हैं। यह उन लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है जिनकी हेपटेक्टोमी या लीवर प्रत्यारोपण नहीं होता। हालांकि, लक्षित चिकित्सा के महत्वपूर्ण दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

(और पढ़ें - लिवर कैंसर की सर्जरी)

लिवर कैंसर की जटिलताएं क्या हैं ?

  1. पीलिया
  2. लीवर फेलियर
  3. आंतरिक रक्तस्राव
  4. झटके
  5. मेटास्टैटिक लिवर कैंसर जैसे - फेफड़ों का कैंसर और हड्डी का कैंसर
Dr. Ashutosh Gawande

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ऑन्कोलॉजी

Dr. C. Arun Hensley

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ऑन्कोलॉजी

Dr. Sanket Shah

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लिवर कैंसर के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
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SorafenatSorafenat 200 Mg Tablet8800.0
SoranibSoranib 200 Mg Tablet1710.0

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